श्रावण माह : कावड़ यात्रा आरंभ, यात्रा में जा रहे हैं तो रखें इनका ध्यान...
करें कावड़ यात्रा के नियमों का पालन
- कांवड़ यात्रा का महत्व एवं हरिद्वार
- कावड़ यात्रा के नियम, कांवड़ आशय व प्रकार
- हर कावड़िया एक-एक पौधे उत्तराखंड में लगाकर जाएं :CM धामी
- दिल्ली में पहली बार रजिस्ट्रेशन की सुविधा
.धर्म नगरी / DN News
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-राजेश पाठक (राष्ट्रवादी पत्रकार, अवैतनिक संपादक 9752404020
सावन का माह प्रारंभ हो गया है। दो वर्ष पश्चात (कोरोना के कारण) पूरे सावन मास तक आपको भगवा कपड़े पहने, कंधे पर कांवड़ लिए दिख जाएंगे। देवाधिदेव महादेव के जयघोष करते, उनके मंत्रों को जपगे, हर-हर बम-बम बोलते कावड़ियों की टोली या झुण्ड या उनकी पंक्तियाँ आपके शहर के उन मुख्य मार्गों पर दिख सकती है, जहाँ कोई प्राचीन शिव मंदिर हो। वैसे इस सावन में सर्वाधिक चार करोड़ कावड़िये के केवल देवभूमि उत्तराखंड में पहुंचने या उनके द्वारा शिवालय में गंगाजल चढ़ाने की संभावना है। उत्तराखंड में सर्वाधिक हरिद्वार में कावड़ियों की सर्वत्र भीड़ दिखती है, जब ऐसा लगता है मानों "कावड़ियों का समुद्र" ही भोलेनाथ की भक्ति में निकल पड़ा हो।
कांवड़ यात्रा श्रावण मास (13 जुलाई को गुरु-पूर्णिमा के बाद) 14 जुलाई से अर्थ श्रावण मास के कृष्ण पक्ष प्रतिपदा (प्रथम दिन या प्रथमा) से आरंभ हो रही है। कांवड़-यात्रा पूरे एक माह तक, 12 अगस्त तक चलेगा। 14 जुलाई से अनेक जगहों पर कावड यात्रा प्रारंभ हो जाएगी, लेकिन विधिवत रूप से श्रावण के पहले सोमवार यानी 18 जुलाई से प्रारंभ होगी।
कांवड़ यात्रा एवं हरिद्वार-
कांवड़ यात्रा एवं हरिद्वार-
मान्यता है, पूरे श्रावण मास भगवान शिव अपनी ससुराल राजा दक्ष की नगरी कनखल, हरिद्वार में निवास करते हैं। भगवान विष्णु के शयन में जाने के कारण तीनों लोक की देखभाल भगवान शिव ही करते हैं। सावन में लाखों की संख्या में कांवड़िए अलग-अलग जगहों से हरिद्वार जाते हैं और गंगा जल अपने कांवड़ में भरकर पैदल यात्रा शुरू करते हैं। कांवड़िये अपने कांवड़ में जो जल एकत्रित करते हैं, उससे सावन की चतुर्दशी पर भगवान शिव का अभिषेक किया जाता है।
कहते है, समुद्र मंथन में समुद्र से जो विष निकला था, जगत कल्याण के लिए भगवान शंकर ने उसे पी लिया था। इसके बाद भगवान शिव नीलकंठ कहलाए। भगवान शिव के विष का सेवन करते ही दुनिया तो बच गई, लेकिन भगवान शिव का शरीर जलने लगा। ऐसे में देवताओं ने उन पर जल अर्पित करना शुरू कर दिया। इसी मान्यता के अंतर्गत कांवड़ यात्रा आरंभ हुई।
कावड़ यात्रा के नियम-
कांवड़ यात्रा में बोल बम एवं जय शिव-शंकर घोष का उच्चारण करना, कावड़ को सिर के ऊपर से लेने तथा जहां कावड़ रखी हो उसके आगे बिना कावड़ के नहीं जाने के नियम पालन करना होता है। बिना स्नान किए कावड़ यात्री कांवड़ को नहीं छूते। तेल, साबुन, कंघी करने व अन्य श्रृंगार सामग्री का उपयोग भी कावड़ यात्रा के दौरान नहीं किया जाता।
- कावड़ में हो नदी का ही जल : कावड़ में बहती हुई पवित्र नदी का जल ही भरा जाता है, कुएं या तालाब का नहीं।
- भक्तिवश ही करें यात्रा- यदि आप कावड़ यात्रा में सम्मिलित हो रहे हैं, तो आपको यह जाना चाहिए कि क्यों शामिल हो रहे हैं ? जिज्ञासावश, रोमांच के लिए या सच में ही आप शिवजी की भक्ति करना चाहते हैं, क्योंकि कावड़ यात्रा के कड़े नियम होते हैं। जिनका पालन करना आवश्यक है, अन्यथा यात्रा मान्य नहीं होती है। यात्रा में कई तरह की कठिनाइयों का भी सामना करना पड़ता है, अत: इसके लिए कावड़ियों को तैयार रहना चाहिए।- चारपाई पर बैठना मना- कांवड़ यात्रियों के लिए चारपाई पर बैठना मना है। चमड़े से बनी वस्तु का स्पर्श एवं रास्ते में किसी वृक्ष या पौधे के नीचे कावड़ रखने की भी मनाही है।
- कोई नशा न करें- कावड़ यात्रा के काल (दौरान) में किसी भी तरह का नशा करना वर्जित माना गया है। जैसे चरस, गांजा, तंबाकू, शराब आदि।
- मांसाहारी भोजन न करें- कांवड़ यात्रा की अवधि में तामसी भोजन यानी मांस, मदिरा आदि का सेवन भी नहीं किया जाता। अर्थात, कावड़ यात्रा के समय किसी भी तरह का मांसाहारी भोजन करने की भी मनाही है।
- भूमि पर न रखें कावड़ : कावड़ यात्रा अवधि में यदि कहीं पर रुकना हो, तो कावड़ को भूमि पर या किसी चबूतरे पर नहीं रखते हैं। उसे किसी स्टैंड या पेड़ की डाली पर लटका कर रखते हैं। लकड़ी के पाट पर भी रख सकते हैं। यदि भूलवश भूमि पर रख दिया, तो फिर से कांवड़ में जल भरना होता है।
- पैदल ही करें यात्रा : कावड़ यात्रा पैदल ही पूरी करना होती है। यात्रा प्रारंभ करने से पूर्ण होने तक का सफर पैदल ही तय किया जाता है। इसके पूर्व व पश्चात का सफर वाहन आदि से किया जा सकता है।- लंबी दूरी की यात्रा न करें : पहली बार यात्रा कर रहे हैं, तो पहले वर्ष छोटी दूरी की यात्रा करते हैं फिर क्षमता अनुसार लंबी दूरी की।
- जत्थे के साथ ही रहें : कांवड़ियों को एक दूसरे की सुरक्षा का ध्यान रखते हुए कतार बनाकर ही चलना चाहिए और जत्थे के साथ ही रहना चाहिए।
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संबंधित लेख (पढ़ें / देखें)-श्रावण या सावन : सावन में क्या करें क्या नहीं, किस वस्तु से अभिषेक का कैसा प्रभाव...
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http://www.dharmnagari.com/2022/07/Savan-me-Kya-kare-Kya-nahi-Kis-vastu-se-Kyo-kare-Abhishek.html
कांवड़ का आशय व प्रकार-
कांवड़ का मूल शब्द 'कावर' है। इसका अर्थ कंधे से है। कांवड़ का एक और अर्थ परात्पर शिव के साथ विहार भी है। अर्थात ब्रह्म यानी परात्पर शिव, जो उनमें रमन करे वह कांवरिया। शिव भक्त अपने कंधे पर पवित्र जल का कलश लेकर पैदल यात्रा करते हुए ईष्ट शिवलिंगों तक पहुंचते हैं। कांवड़ यात्रा के पीछे तथ्य यह भी है, कि गंगा भगवान शिव की जटाओं में विराजमान हैं। इसलिए भगवान शंकर को गंगा अत्यंत प्रिय हैं। गंगाजल के अभिषेक से वह अत्यंत प्रसन्न होते हैं। श्रावण मास भगवान शिव की साधना का सर्वश्रेष्ठ समय है, इसीलिए श्रद्धालु श्रावण मास में शिवभक्ति में लीन रहते हैं। कांवड़ शिव के उन सभी रूपों को नमन है। कंधे पर गंगा को धारण किए श्रद्धालु इसी आस्था और विश्वास को जीते हैं।
बैठी कांवड़- इस श्रेणी के कांवड़ियां अपने कंधे पर कांवड़ रखते हैं और पैदल यात्रा कर बाबा के दरबार पहुंचते हैं। ये कांवड़ को धरती पर रख सकते हैं।
डाक कांवड़- इस श्रेणी के कांवड़ियां कंधे पर कांवड़ रखते हैं, लेकिन ये पैदल यात्रा नहीं करते हैं, बल्कि दौड़कर बाबा के दरबार पहुंचते हैं।
खड़ी कांवड़- इस श्रेणी के कांवड़ियां कांवड़ को धरती पर नहीं रख सकते हैं और न ही कांवड़ को कहीं लटका सकते हैं, बल्कि इसे साथ में लेकर ही रहना होता है। अगर बम आराम करते हैं तो उस समय कोई और बम कांवड़ पकड़ता है।
झूला कांवड़- इस कांवड़ यात्रा में झूला बनाकर कांवड़ ले जाया जाता है। कांवड़ यात्रा के दौरान कांवड़ियां 'बोल बम' का उद्घोष करते हैं। जबकि कांवड़ियां एक दूसरे को नाम से नहीं, बल्कि बम कहकर पुकारते हैं।
डाक कांवड़- इस श्रेणी के कांवड़ियां कंधे पर कांवड़ रखते हैं, लेकिन ये पैदल यात्रा नहीं करते हैं, बल्कि दौड़कर बाबा के दरबार पहुंचते हैं।
खड़ी कांवड़- इस श्रेणी के कांवड़ियां कांवड़ को धरती पर नहीं रख सकते हैं और न ही कांवड़ को कहीं लटका सकते हैं, बल्कि इसे साथ में लेकर ही रहना होता है। अगर बम आराम करते हैं तो उस समय कोई और बम कांवड़ पकड़ता है।
झूला कांवड़- इस कांवड़ यात्रा में झूला बनाकर कांवड़ ले जाया जाता है। कांवड़ यात्रा के दौरान कांवड़ियां 'बोल बम' का उद्घोष करते हैं। जबकि कांवड़ियां एक दूसरे को नाम से नहीं, बल्कि बम कहकर पुकारते हैं।
प्रमुख कांवड़ यात्रा-
यात्रा के आरंभ से अपने शहर के निकट की किसी नदी से जल लेकर शहर या आसपास के प्रमुख शिव मंदिर तक की जाती है। इसके अलावा निम्नलिखित प्रमुख यात्राएं भी हैं-
नर्मदा से महाकाल तक
गंगाजी से नीलकंठ महादेव तक
गंगा से बैजनाथ धाम (बिहार) तक
गोदावरी से त्र्यम्बकेश्वर तक
गंगाजी से केदारेश्वर तक
उक्त स्थानों के अतिरिक्त सैकड़ों यात्राएं स्थानीय स्तर से की जाती रही हैं।
स्वास्थ्य का रखें ध्यान-
यात्रा के समय स्वास्थ्य का ध्यान सावधानीपूर्वक रखें, सजग रहें। अपनी क्षमता अनुसार ही यात्रा में सम्मिलित हों और खान-पान पर विशेष ध्यान रखें। पीने के लिए शुद्ध जल का ही उपयोग करें। उचित जगह रुक कर विश्राम भी करें।
कांवड़ यात्रा और भगवान परशुराम-
कांवड़ यात्रा को लेकर किवंदती है, कि भगवान परशुराम दिग्विजय (पृथ्वी जीत) के बाद जब मयराष्ट्र (वर्तमान मेरठ) से होकर निकले, तो उन्होंने पुरा नामक स्थान पर विश्राम किया। वह स्थल उनको अत्यंत मनमोहक लगा। उन्होंने वहां पर शिव मंदिर बनवाने का संकल्प लिया। इस मंदिर में शिवलिंग की स्थापना करने के लिए पत्थर लाने वह हरिद्वार गंगा तट पर पहुंचे। उन्होंने गंगा की आराधना की और मंतव्य बताते हुए उनसे एक पत्थर प्रदान करने का अनुरोध किया। यह अनुरोध सुनकर पत्थर रोने लगे। वह देवी गंगा से अलग नहीं होना चाहते थे। तब भगवान परशुराम ने उनसे कहा, कि जो पत्थर वह ले जाएंगे, उसका चिरकाल तक गंगा जल से अभिषेक किया जाएगा। हरिद्वार के गंगातट से भगवान परशुराम पत्थर लेकर आए और उसे शिवलिंग के रूप में पुरेश्वर महादेव मंदिर में स्थापित किया। जब से भगवान परशुराम ने हरिद्वार से पत्थर लाकर उसका शिवलिंग पुरेश्वर महादेव मंदिर में स्थापित किया, तब से कावड़ यात्रा का शुभारम्भ हुआ। लंबी कावड़ यात्रा से मन में संकल्प शक्ति और आत्मविश्वास भी बढ़ता है। सावन में श्रद्धालु कांवड़ में पवित्र जल लेकर एक स्थान से लेकर दूसरे स्थान जाकर शिवलिंगों का जलाभिषेक करते हैं।
CM धामी का कांवड़ यात्रियों से आग्रह-
सावन माह से पूर्व उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कांवड़ यात्रियों से अपील किया था, कि हर कांवड़ यात्री कम से कम एक पौधा लगाए। उनके अनुसार, अगर प्रत्येक कांवड़ यात्री एक-एक पौधा लगाकर जाएगा, तो उत्तराखंड में 4 करोड़ नए पौधे लगेंगे। इससे प्रदेश की इकोलॉजी में भी सुधार होगा। उल्लेखनीय है, इस साल उत्तराखंड में कांवड़ियों की सुरक्षा के लिए पुलिस ने विशेष व्यवस्था किए हैं। इस बार शिवभक्तों की सुरक्षा में सीसीटीवी और ड्रोन के साथ करीब 10 हजार पुलिसकर्मी तैनात किए जा रहे हैं। उत्तराखंड के डीजीपी अशोक कुमार भी कह चुके हैं, कि श्रावण के महीने में शिव भक्तों की भारी भीड़ को देखते हुए ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों का उपयोग किया जाएगा। इसके साथ सोशल मीडिया के माध्यम से कावड़ यात्रा की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था एवं निगरानी सुनिश्चित की जाएगी।
सावन माह से पूर्व उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कांवड़ यात्रियों से अपील किया था, कि हर कांवड़ यात्री कम से कम एक पौधा लगाए। उनके अनुसार, अगर प्रत्येक कांवड़ यात्री एक-एक पौधा लगाकर जाएगा, तो उत्तराखंड में 4 करोड़ नए पौधे लगेंगे। इससे प्रदेश की इकोलॉजी में भी सुधार होगा। उल्लेखनीय है, इस साल उत्तराखंड में कांवड़ियों की सुरक्षा के लिए पुलिस ने विशेष व्यवस्था किए हैं। इस बार शिवभक्तों की सुरक्षा में सीसीटीवी और ड्रोन के साथ करीब 10 हजार पुलिसकर्मी तैनात किए जा रहे हैं। उत्तराखंड के डीजीपी अशोक कुमार भी कह चुके हैं, कि श्रावण के महीने में शिव भक्तों की भारी भीड़ को देखते हुए ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों का उपयोग किया जाएगा। इसके साथ सोशल मीडिया के माध्यम से कावड़ यात्रा की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था एवं निगरानी सुनिश्चित की जाएगी।
उत्तर प्रदेश सरकार ने कांवड़ यात्रा को देखते हुए व्यापक व्यवस्था किए हैं। अपर पुलिस महानिदेशक (ADG) कानून व्यवस्था प्रशांत कुमार ने बताया, अन्य राज्यों के साथ समन्वय बैठक करने के अलावा पुलिस इस बात को भी सुनिश्चित कर रही है, कि कांवड़ियों को शुद्ध और कम दरों पर भोजन मिले और अन्य सुविधाएं जैसे कि स्वच्छ टॉयलेट की भी सुविधा मिले।
कावंड़ यात्रा को लेकर कांवडियों की सुविधा के लिए सभी व्यवस्थाएं की गई हैं। यह प्रयास किया जा रहा है और श्रद्धालुओं को इस अवधि में किसी तरह की कोई कठिनाई न हो। इसके लिए आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था तथा प्रशासनिक व्यवस्थाएं कराईं जा रही हैं। सामाजिक सद्भाव बनाए रखने के लिए पुलिस ने विभिन्न समुदायों के धर्मगुरु और नेताओं से भी बैठकें की। पहली बार आजादी के अमृत महोत्सव के क्रम में उत्तर प्रदेश पुलिस कावड़ यात्रा के दौरान कांवडि़यों को तिरंगे भी वितरित करेगी।
देवघर में विश्वप्रसिद्ध श्रावणी मेला-
द्वादश (12) ज्योतिर्लिंगों में एक देवघर में विश्वप्रसिद्ध श्रावणी मेला गुरुवार (14 जुलाई) से आरंभ हो रहा है। सावन माह में लाखों भक्त / कांवड़िए सुल्तानगंज (बिहार) में बह रही उत्तर वाहिनी गंगा से गंगाजल लेकर 108 किलोमीटर की पैदल यात्रा करते हुए देवघर पहुंचकर भगवान का जलाभिषेक करते हैं। इस लंबी दूरी में कांवड़ियों के लिए कई पड़ाव हैं। इन पड़ाव स्थलों पर कांवड़ियों के विश्राम के लिए विभिन्न सुविधाओं से युक्त सरकार व गैर-सरकारी संस्थाओं की ओर से विभिन्न सुविधाओं से युक्त धर्मशालाएं व पंडाल लगाए गए हैं। देवघर में जलाभिषेक के बाद अधिकांश श्रद्धालु दुमका स्थित बासुकीनाथ मंदिर भी जाते हैं। अनुमान है, एक महीने तक चलनेवाले श्रावणी मेले में इस बार 50 से 60 लाख लोग पहुंचेंगे। देवघर के बैद्यनाथ धाम में वर्ष भर शिवभक्तों की भीड़ लगी रहती है, परंतु सावन महीने में यह पूरा क्षेत्र केसरिया पहने शिवभक्तों से पट जाता है।
शिवभक्तों पर पुष्पवर्षा कर अभिनन्दन-
उत्तर प्रदेश में 2019 में योगी सरकार ने हैलीकॉप्टर से कांवड़ यात्रा में शामिल शिवभक्तों पर पुष्पवर्षा करवाकर उनका अभिनन्दन किया था। वहीं, बीते वर्ष 25 जुलाई से जब शिवभक्तों की कांवड़ यात्रा आरंभ हुई, तब योगी सरकार हर साल कांवड़ियों के लिए विशेष व्यवस्था किया। इसके लिए उन्हें जगह-जगह पानी, आराम आदि की सुविधा दी. इस वर्ष 14 जुलाई से आरंभ हो रहे सावन एवं कावड़ यात्रा के लिए सभी सुविधाओं एवं सुरक्षा आदि के निर्देश योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को दिए हैं।
दिल्ली में पहली बार रजिस्ट्रेशन की सुविधा-
देश की राजधानी दिल्ली में पहली बार दिल्ली पुलिस ने कांवड़ यात्रा को सुरक्षित एवं आसान बनाने के लिए यात्री रजिस्ट्रेशन सुविधा आरंभ की है। दिल्ली पुलिस के अनुसार, इस सिस्टम से कांवड यात्रियों की पूरी जानकारी होने से पुलिस को किसी भी परिस्थिति में उन तक तुरंत सहायता पहुंचाने में आसानी होगी। दिल्ली पुलिस के अनुसार, अगर कोई यात्री रजिस्ट्रेशन करना चाहता है तो वह वेबसाइट kavad.delhipolice.gov.in पर जाकर अपने मोबाइल नंबर को रजिस्टर करा सकता है।यद्यपि, यह रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य नहीं है।
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#सोशल_मीडिया में प्रतिक्रिया...
देवों के देव महादेव जी का अति प्रिय पावन 'श्रावण मास' आज से प्रारंभ हो रहा है।सभी प्रदेश वासियों व असंख्य श्रद्धालुओं को हार्दिक बधाई एवं अनंत शुभकामनाएं।
भगवान भोलेनाथ की असीम अनुकंपा हम सभी पर बनी रहे। सम्पूर्ण विश्व का कल्याण हो।
जय भोलेनाथ! -@myogiadityanath (CM, UP 5:27 AM · Jul 14, 2022)
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ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय
धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्!
आदिदेव महादेव की विशेष पूजा-अर्चना को समर्पित पवित्र श्रावण मास की सभी श्रद्धालुओं को हार्दिक शुभकामनाएँ। -@SadhviNiranjan (Union Minister of State & महामंडलेश्वर निरंजनी अखाडा)
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हे प्रलयंकर!हे विध्वंसक,गिरि प्रिय शंकर नमो नमो।
नीलकंठ शिव,पाशविमोचक,अतुल भयंकर नमो नमो॥
हे रूद्र सदाशिव!हे शशिशेखर,सोम अनीश्वर नमो नमो।
वीरभद्र शितिकष्ठ,शिवाप्रिय,सर्व अधीश्वर नमो नमो॥
#हर_हर_महादेव
बाबा भोलेनाथ का आशीर्वाद आपके ऊपर हमेशा बना रहे
हर हर महादेव
ॐ नमः शम्भवाय च मयोभवाय च नमः शन्कराय च मयस्कराय च नमः शिवाय च शिवतराय च।। ईशानः सर्वविध्यानामीश्वरः सर्वभूतानां ब्रम्हाधिपतिर्ब्रम्हणोधपतिर्ब्रम्हा शिवो मे अस्तु सदाशिवोम। -@Krishan42890313
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यह तो महादेव भोलेनाथ की ही तो असीम अनुकम्पा है सनातनियों पर जिसके कारण गद्दार जयचन्दों,विधर्मियों,आस्तीन के सांपों,औबेसी,अदनी,मदनी और पीएफआई निर्मित टूलकिटों से लगातार रक्षा होती आ रही है नहीं हामिद जैसे सर्पों के बल पर योगी जी व मोदीजी को मिटाने के प्रयास कम नहीं हुए हैं, जागो! -@Jaishriramyada8
हे भोलेनाथ हम सभी को इतना सामर्थ्य देना की अपने अंदर की नकरात्मकता क्रोध लोभ वासना अति मोह और भय को पराजित कर सकें और इस माया रूपी नश्वर जीवन के विष को पीकर आपकी भक्ति की शक्ति से जीवन यापन कर सकें हर हर महादेव जय भोले नाथ -@sanjiv809026
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