होलिका दहन : सकारात्मक ऊर्जा से पूर्ण की भस्म या राख आस्था व विश्वास का प्रतीक, समस्या से छुटकारा पाने और...


...मनोकामना पूर्ति हेतु होलिका दहन के समय करें उपाय 
धर्म नगरी / DN News

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राजेश पाठक*

होलिका दहन की अग्नि में नकारात्मक शक्तियां और बुरे प्रभाव भस्म हो जाते हैं। इसी कारण इस अग्नि से प्राप्त राख को शुद्ध और शक्तिशाली माना जाता है। जबकि, प्रायः लोग इसे साधारण राख मानकर अनदेखा कर देते हैं, लेकिन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह भस्म सकारात्मक ऊर्जा से पूर्ण होती है। 

होलिका दहन और भद्रा 
शास्त्रीय गणनानुसार, 2 मार्च की अर्द्धरात्रि के बाद भद्रा के पुच्छकाल में होलिका दहन करना उचित एवं शास्त्र सम्मत रहेगा। इस अवधि में परंपरागत विधि-विधान से होलिका पूजन कर सकते हैं। धर्म ग्रंथों के अनुसार होलिका दहन के लिए पूर्णिमा तिथि, भद्रा मुक्त समय और रात्रि काल का होना आवश्यक माना जाता है। इस बार भद्रा पूरी रात रहने के कारण उसके पुच्छ काल में ही दहन करना शास्त्र अनुसार शुभ बताया गया है।

फाल्गुन पूर्णिमा 2 मार्च शाम 5:55 बजे से प्रारंभ होकर 3 मार्च को शाम 5:07 बजे समाप्त होगी, लेकिन पूर्णिमा लगते ही भद्रा का प्रवेश होने से होलिका दहन के मुहूर्त में बदलाव रहेगा। शास्त्रों में भद्रा के मुख काल में होलिका दहन वर्जित बताया गया है, जबकि पुच्छ काल को अशुभ नहीं माना गया है। ऐसे में 2 मार्च की अर्धरात्रि के बाद 12:50 बजे से 2:02 बजे (3 मार्च की सुबह) के बीच होलिका दहन का श्रेष्ठ समय रहेगा। 

चंद्रग्रहण एवं सूतक काल 
तीन मार्च (मंगलवार) को चंद्रग्रहण लग रहा है। ग्रहण 3:20 बजे से शाम 6:46 बजे तक लगेगा। भारत में ग्रहण चन्द्रोदय के साथ शाम 6:14 बजे से शुरू होगा और 6:46 बजे पर समाप्त होगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, लगभग 9 घंटे पहले सूतक काल प्रारम्भ हो जाता है। अर्थात सूतक सुबह 9:20 बजे से लगेगा। चार मार्च को ही पूरे देश में रंगोत्सव के रूप में होली मनाई जाएगी। सूतक काल में किसी भी प्रकार का शुभ कार्य या उत्सव करना मना होता है। इसलिए रंगोत्सव करना शास्त्र सम्मत नहीं है। इस कारण 3 मार्च को होली नहीं खेली जाएगी।  

जब चैत्र कृष्ण प्रतिपदा तिथि में सूर्योदय हो, उस दिन वसंतोत्सव अथवा रंगोत्सव मनाया जाना चाहिए। इस वर्ष 4 मार्च को सूर्योदय के समय चैत्र कृष्ण प्रतिपदा तिथि विद्यमान रहेगी। इसलिए शास्त्रीय मर्यादा एवं लोक परंपरा के अनुसार तथा चंद्रग्रहण और सूतक के कारण 4 मार्च को पूरे देश में रंगोत्सव के रूप में होली मनाई जाएगी।  


होलिका की परिक्रमा
अग्नि को पवित्र और सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण माना जाता है। होलिका की अग्नि की परिक्रमा लगाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। होलिका की परिक्रमा 1, 3 या 7 बार करनी चाहिए।  बड़े-बुजुर्गों के अनुसार, अग्नि की परिक्रमा करना केवल एक परम्परा नहीं, अपितु ईश्वर के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने एवं अपनी गलतियों के लिए क्षमा मांगने का माध्यम भी है।

परिक्रमा का धार्मिक आधार
शास्त्रों में होलिका की 3 या 7 परिक्रमा को शुभ बताया है। तीन परिक्रमा त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु और महेश के सम्मान का प्रतीक मानी जाती है। वहीं, सात परिक्रमा जीवन के सात चक्रों और सात वचनों की शुद्धि का संकेत देती है। कुछ लोग एक परिक्रमा भी करते हैं, जिसे श्रद्धा का प्रतीक माना जाता है, लेकिन पारंपरिक रूप से 3 या 7 परिक्रमा अधिक प्रचलित हैं। संख्या से अधिक महत्वपूर्ण श्रद्धा और एकाग्रता मानी गई है।

वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक कारण 
होलिका दहन के समय अग्नि तेज जलती है, जिससे आसपास का वातावरण शुद्ध होता है। माना जाता है, अग्नि की गर्मी वातावरण में हानिकारक तत्वों को कम करने में सहायक होती है। वहीं, आध्यात्मिक दृष्टि से होलिका की परिक्रमा करने का अर्थ है- ईश्वर को जीवन का केंद्र मानना। अग्नि के चारों ओर घूमना प्रतीक है, कि हम अपने जीवन की नकारात्मकता को त्यागकर सकारात्मक ऊर्जा को अपनाना चाहते हैं। इससे मानसिक शांति और आत्मबल में वृद्धि होती है।

होलिका परिक्रमा लगाने की विधि
✔ परिक्रमा आरंभ करने से पूर्व हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर ईश्वर का ध्यान करें,
✔ सदैव क्लॉक वाइज (घड़ी की दिशा) में ही परिक्रमा करें, इसे शुभ माना जाता है,
✔ परिक्रमा करते समय सरल मंत्र का जाप करें और मन में कृतज्ञता का भाव रखें,
✔ अंत में अग्नि को प्रणाम कर परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की प्रार्थना करें 
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होलिका दहन : इसे भी कर सकते हैं  
होली से एक दिन पहले होलिका दहन के दिन कुछ उपाय करने से नकारात्मक शक्तियां (Negative Energy) दूर होती हैं। होलिका-दहन की पूजा के समय कुछ ऐसे कार्य करने से आपको जीवन में प्रगति होगी। यदि आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं, तो उसमे कमी होगी या मुक्ति मिलने लगेगी। अपनी एवं परिवार की प्रगति-समृद्धि, घर में सुख-शांति के लिए निम्न उपाय कर सकते हैं-

नारियल सुपारी पान का पत्ता
होलिका दहन से पहले पान के पत्ते लें। होलिका दहन के समय अग्नि की सात परिक्रमा करें। परिक्रमा पूरी होने के बाद एक पान का पत्ता माता लक्ष्मी का ध्यान करते हुए होलिका में अर्पित करें। मान्यतानुसार, ऐसा करने से आर्थिक समस्याएं दूर होंगी और जीवन में धन-वैभव की प्राप्ति होगी।

अपनी मनोकामना को पूर्ण करने के लिए आप पान के पत्ते को सुपारी और नारियल के साथ होलिका की अग्नि में अपनी मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना करते हुए अर्पित कर दें।  

भस्म या राख घर लाएं
होलिका दहन की राख को होली की सुबह अपने घर में लाएं। उसे साबुत नमक और राई में मिलाकर शुद्ध स्थान पर रख दें। इससे घर की नकारात्मक शक्तियां दूर होगी और आपको बुरे समय (यदि है) से छुटकारा पाने में मदद मिलेगी। ये उपाय हिन्दू घरों में बड़े-बूढ़े भी बताते आ रहे हैं।

होलिका में डालें इन वस्तुओं को 
- होलिका दहन के समय गेहूं, जौ और चने की हरी बालियों को लेकर पवित्र अग्नि में समर्पित करना चाहिए। ऐसा करने से घर में समृद्धि का आगमन होता है।

- विद्यार्थियों को होलिका दहन पर पान, नारियल और सुपारी को होलिका दहन की अग्नि में समर्पित करें। मान्यतानुसार, इस उपाय से विद्यार्थियों को विशेष कृपा प्राप्त होती है।

यदि आप व्यवसाय, नौकरी व अपने कैरियर को लेकर संतुष्ट नहीं है अथवा अच्छी नौकरी खोज रहें हैं, तो होलिका दहन के समय नारियल को अग्नि में डालें। इसके बाद सात बार होलिका की परिक्रमा करें।

काला तिल, नारियल व सरसों
अगर आपको किसी अज्ञात शक्ति से डर लग रहा हो, बुरे विचार आते हों तो होलिका-दहन की पूजा में सरसो, काला तिल और नारियल को सात बार अपने सिर के ऊपर से घुमाकर (फेर कर), होलिका की अग्नि में डाल दें।

मेवा और मिठाई का भोग
यदि आपको आर्थिक तंगी है, अनवरत आपको पैसों की कमी रहती है और इस समस्या से आप मुक्ति चाहते हैं, तो होलिका-दहन की पूजा के समय मेवा और मिठाई का भोग लगाएं। इससे धन की कमी दूर होने एवं सुख-शांति आने के द्वार खुलने लगेंगे।

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होलिका दहन की राख या भस्म के उपाय   
सनातन हिन्दू धर्म में होलिका दहन का विशेष महत्व माना जाता है। होलिका दहन के साथ होली उत्सव का शुभारंभ होता है। होलिका दहन की अग्नि को पवित्र माना जाता है। उस अग्नि से प्राप्त भस्म या राख को भी शुभ समझा जाता है। मान्यता है, सही विधि एवं श्रद्धापूर्वक इस भस्म का उपयोग करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि का आगमन होता है।  

कुछ लोग इस भस्म का तिलक भी लगाते हैं। माना जाता है, कि माथे पर हल्का सा तिलक लगाने से आत्मविश्वास बढ़ता है और मन में सकारात्मक विचार आते हैं। कई परिवार इसे खेतों या व्यवसाय स्थल पर भी रखते हैं, जिससे उन्नति और लाभ बना रहे। ज्योतिषीय दृष्टिकोण से भी 
होलिका की भस्म ग्रह दोष शांति के लिए उपयोगी होती है। हालांकि, यह पूरी तरह आस्था और विश्वास का विषय है।

परंपरानुसार, होलिका दहन के अगले दिन सुबह (यथासम्भव स्नान करने के बाद) थोड़ी सी राख या भस्म घर लानी चाहिए। इस भस्म को लाल कपड़े में बांधकर पूजा स्थान, तिजोरी या घर के मुख्य दरवाजे के पास रखा जाता है। ऐसा करने से नकारात्मकता दूर होती है, सकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ता है।

धन हेतु उपाय  
घर में लगातार क्लेश, आर्थिक परेशानी या मानसिक तनाव रहता हो तो, 
वास्तु मान्यताओं के अनुसार, होलिका दहन की भस्म को लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी में रखना शुभ माना जाता है। इससे धन हानि रुकने और आय में वृद्धि होने की मान्यता है। वहीं, मुख्य द्वार के पास इसे रखने से बुरी दृष्टि एवं नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षा मिलती है। धार्मिक ग्रंथों में अग्नि को शुद्धि का प्रतीक बताया गया है। होलिका दहन की अग्नि में लोग अपनी बुराइयों, ईर्ष्या और नकारात्मक भावनाओं को प्रतीकात्मक रूप से अर्पित करते हैं।

निर्धनों को दान
होलिका दहन के दिन निर्धन को दान करने से पुण्य तो मिलता है, साथ ही आपको मानसिक शांति मिलती है।

अन्य उपाय 
- धुलंडी (होलिका धन के दूसरे दिन) की प्रातःकाल एक पात्र में हल्दी घोलकर या फिर पीले रंग का गुलाल मुख्य द्वार के दोनों कोनों पर छिड़का जाए तो माता लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और कभी धन की कमी नहीं होती। इसके साथ, धुलंडी की सुबह सबसे पहले गोमाता के चरणों में गुलाल डालकर उनका आशीर्वाद लें सभी देवताओं का आशीर्वाद लें। उसके बाद गाय को हरा चारा, रोटी, गुड़ आदि खिलाएं, ऐसा करने से सुख-समृद्धि आएगी।

- होलिका दहन के अगले दिन सबसे पहेल उठकर स्नान कर स्वच्छ होकर अपने इष्टदेव का पूजन कर उनको गुलाल अर्पित करें। यह उपाय करने से ग्रह दोष, वास्तु दोष समाप्त हो जाता है और घर में शांति आती है।

लेखक- 
*राजेश पाठक 
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