क्या 33 Km का संकरा समुद्री रास्ता भारत सहित दुनिया के कई देशों में महंगाई बढ़ाएगा ? दुनिया को...


...तेल सप्लाई करने वाले होर्मुज की ईरान की नाकाबंदी !
धर्म नगरी
DN News desk 
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अमेरिकी-इजराइली के ईरान पर सैन्य हमलों में अब एक बड़ा मोड़ होर्मुज स्ट्रेट, होर्मुज जलडमरू मध्य  या होर्मुज खाड़ी (पैसेज) को लेकर आ गया है। मात्र इस 33 किलोमीटर के इस होर्मुज खाड़ी का संकरे समुद्री रास्ता ईरान, ओमान और यूनाइटेड अरब अमीरात (UAE) के मध्य है। 

होर्मुज के इस संकरे समुद्री रास्ते से- 
प्रतिदिन लगभग 17 मिलियन बैरल तेल की आपूर्ति होती है, जिसे 8 देशों- ईरान, इराक, कुवैत, बहरीन, कतर, यूएई, ओमान और सऊदी अरब से किया जाता है। वहीं, जबकि दुनिया भर में तेल की खपत का 20% और दुनिया के LNG ट्रेड का 25% हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट से जाता है। 

कुल 17 मिलियन बैरल तेल का 90% तेल तीन देशों- सऊदी अरब, कुवैत एवं कतर से प्रतिदिन होता है। इसमें सर्वाधिक भारत प्रभावित होगा, क्योंकि भारत 85% तेल आयात करता है, जिसमे से 60% तेल मध्य-पूर्वी (middle-east) इराक, सऊदी अरब, कुवैत एवं यूएई से आयात करता है। इससे तेल की कीमते अप्रत्याशित रूप से बढ़ सकती है, जिसका सीधा संबंध महंगाई के बढ़ने से है।   

अब ईरान ने अपना सबसे बड़ा रणनीतिक दांव चलते हुए होर्मुज स्ट्रेट या होर्मुज खाड़ी बंद करके संकेत दिया है, अगर उसका शासन गिरता है, तो वह अपने साथ वैश्विक आर्थिक व्यवस्था भी प्रभावित होगी। 

देखें / see- Courtesy- @Partisangirl Journalist

एक क्षेत्रीय संघर्ष के रूप में शुरु हुआ सैन्य टकराव दुनियाभर के लिए आर्थिक घेरेबंदी में बदलता दिख रहा है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के इस संकरे समुद्री रास्ते पर पेट्रोलिंग करने और बड़ी शिपिंग कंपनियों के रास्ता छोड़ने के साथ ही, आधुनिक इतिहास में पहली बार दुनिया फारस की खाड़ी से निकलने वाले के एनर्जी फ्लो में पूरी तरह रुकावट देख रही है।

IRGC की घोषणा
यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) और यूरोपियन यूनियन के नेवल मिशन- एस्पाइड्स ने (28 फरवरी की सुबह) समुद्री रास्ते के हालात में भारी बदलाव की रिपोर्ट दी थी- ओमान की खाड़ी में घुसने वाले जहाजों को IRGC से लगातार रेडियो ट्रांसमिशन मिल रहे हैं, जिसमें स्पष्ट कहा जा रहा है- "किसी भी जहाज को गुजरने की इजाजत नहीं है।"


यह धमकी अब केवल धमकी नहीं रह गई। समुद्री सुरक्षा रिपोर्ट भी इस बात की पुष्टि करती है, कि इस अवरोध को काइनेटिक एक्शन के माध्यम से लागू किया जा रहा है, जिसमें सटीक निशाने, समुद्र में मौत और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर शामिल है, जिसमें-
➯ हाल ही में ओमान के तट पर पलाऊ के झंडे वाले एक टैंकर में प्रोजेक्टाइल से आग लग गई। ➯ सीट्रेड मैरीटाइम के अनुसार, टैंकर एमकेडी व्योम के शिप मैनेजरों ने इंजन रूम में प्रोजेक्टाइल स्ट्राइक के बाद एक क्रू मेंबर की मौत की पुष्टि की। ➯ UKMTO ने "बड़ी मिलिट्री एक्टिविटी" और बढ़े हुए इलेक्ट्रॉनिक इंटरफेरेंस की चेतावनी दी है, जिससे सैकड़ों मर्चेंट शिप के ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम और नेविगेशनल एरे में रुकावट आ रही है।

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होर्मुज से ओपेक देशों के तेल का निर्यात
विशेषज्ञों के अनुसार, होर्मुज के समुद्री गलियारे से प्रतिदिन 1.5 करोड़ बैरल कच्चे तेल की आवाजाही होती है। कुछ समुद्री गलियारे में पाइपलाइन के माध्यम से भी आपूर्ति होती है, लेकिन होर्मुज गलियारा या जलडमरूमध्य बंद होने से प्रतिदिन कम से कम एक करोड़ बैरल तेल की आवाजाही बंद हो  जाएगी, जो कुल तेल व्यापार का लगभग 10% है। वर्ष 2024 में विश्व के कुल तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) व्यापार का भी करीब पांचवां हिस्सा होर्मुज से, मुख्य रूप से कतर से, होकर गुजरा। पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (OPEC) के सदस्य देश- सऊदी अरब, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत और इराक अपने ज्यादातर कच्चे तेल का निर्यात, विशेषकर एशिया को इसी रूट से करते हैं।  

खाड़ी देशों के अलावा अन्य देशों से आयात
भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का 85% से अधिक आयात में से करीब 50% तेल मिडिल ईस्ट के देशों से आता है, जो मुख्य रूप से होर्मुज जलडमरू मध्य के रास्ते भारत पहुंचता है। ईरान युद्ध के बाद इस मार्ग से सप्लाई प्रभावित हुई है। हालांकि, भारत ने अफ्रीका, रूस और अमेरिका से तेल आयात बढ़ाकर अपने स्रोतों में विविधता लाई है और रणनीतिक भंडार बनाकर ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत किया है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने खाड़ी देशों के अलावा अन्य देशों से भी तेल आयात बढ़ाया है, जिसके चलते अब बड़ी मात्रा में तेल की सप्लाई होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते नहीं आती।

कच्चे तेल पर खर्च और भंडार  
भारत ने 31 मार्च 2025 को समाप्त वित्त वर्ष में कच्चा तेल आयात करने में 137 अरब डॉलर खर्च किए थे। चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जनवरी में ही 20.63 करोड़ टन कच्चा तेल आयात पर 100.4 अरब डॉलर खर्च हुआ। फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाले होर्मुज का 33 किलोमीटर चौड़ा समुद्री मार्ग से होने वाले कच्चे तेल निर्यात का लगभग 33% और गैस आपूर्ति का करीब 20% यहीं से गुजरता है। 

भारत की रिफायनरियों के पास लगभग 25 दिनों का कच्चे तेल का भंडार और 25 दिनों के पेट्रोलियम उत्पादों का स्टॉक मौजूद है, जिसमें वह तेल भी शामिल है, जो जहाजों के जरिए भारत के बंदरगाहों की ओर आ रहा है। 
अतः अगर ईरान-इजरायल युद्ध से थोड़े समय तक आपूर्ति प्रभावित रहती है, तो भारत अपने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार से जरूरतें पूरी कर सकता है। वहीं होर्मुज के अलावा अमेरिका, पश्चिम अफ्रीका, वेनेजुएला जैसे लैटिन अमेरिकी देशों का रुख कर सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, रूस के तमाम जहाजों की हिन्द महासागर और अरब सागर क्षेत्र में उपस्थिति भी है। भारतीय रिफाइनरियों द्वारा रूसी क्रूड की मांग कम होने के बाद ये स्थिति बनी है।  

इस बीच, सरकारी सूत्रों के अनुसार, कच्चे तेल, एलपीजी और एलएनजी को लेकर भारत फिलहाल अपेक्षाकृत सुरक्षित स्थिति में है। भारत ने ईरान-इजरायल तनाव को देखते हुए तीन शहरों में भूमिगत भंडारों में लगभग 5 मिलियन मीट्रिक टन तेल जमा किया है। होर्मुज से भारत का लगभग 50 प्रतिशत कच्चा तेल और गैस का बड़ा हिस्सा आता है। अब होर्मुज मार्ग बंद होने पर भारत को प्रतिदिन लगभग 10% कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित होने का खतरा है। 

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