असम विधानसभा में UCC बिल पास, लिव-इन में रजिस्ट्रेशन अनिवार्य, बहुविवाह पर लगेगी रोक
"असम के इतिहास में यह एक निर्णायक क्षण है, क्योंकि हम UCC लागू करने वाला तीसरा भारतीय राज्य बन गए हैं - इस तरह हमने अपने राष्ट्र के संस्थापकों की इच्छा को पूरा किया है।
यह तीन महत्वपूर्ण मुद्दों को पूरा करता है-
संविधान का अनुच्छेद 44
@BJP4India के संस्थापक आदर्श
@BJP4Assam का चुनावी वादा" - हिमंत बिस्वा सरमा, CM असम
(न्यूज कवरेज, फ्री कॉपी मंगवाने या अपने नाम से बटवाने हेतु- 810 910 7075 -वा.एप.)
गुवाहाटी। आज बुधवार (27 मई) असम राज्य का एक विशेष और ऐतिहासिक दिन रहा, क्योंकि 'द यूनिफॉर्म सिविल कोड, असम, 2026 विधेयक' असम विधानसभा में पास हो गया है। शादी, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिश्तों को धर्म से परे एक ही कानूनी दायरे में लाने के उद्देश्य से असम विधानसभा ने समान नागरिक संहिता (UCC) बिल पास कर दिया। हलांकि, विपक्ष इस बिल को एक 'सेलेक्ट कमेटी' के पास भेजने की मांग कर रहा था। अब इस प्रस्तावित कानून के पास होने के साथ असम, उत्तराखंड और गुजरात के बाद तीसरा ऐसा राज्य बन गया है, जिसने 'यूनिफॉर्म सिविल कोड' (UCC) बिल पास किया है।
देखें- असम विधानसभा में बिल प्रस्तुत करते हुए...
सदन में विपक्ष ने किया विरोध
'यूनिफॉर्म सिविल कोड, असम, 2026 बिल' पर पूरे दिन चली चर्चा के बाद स्पीकर रंजीत कुमार दास ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से इसे पास कराने के लिए प्रस्तुत करने को कहा। स्पीकर दास ने विपक्ष की उस मांग को खारिज कर दिया, जिसमें बिल को और ज़्यादा चर्चा के लिए एक सेलेक्ट कमेटी के पास भेजने की बात कही थी।
सुनें- CM ने क्या कहा...
बिल के विरोध में विपक्षी सदस्य सदन के वेल में आ गए और बिल पास होने तक लगातार नारेबाजी करते रहे। वहीं दूसरी ओर, सत्ता पक्ष के सदस्यों द्वारा लगातार 'भारत माता की जय' और 'जय श्री राम' के नारे लगाए जाने के बीच स्पीकर ने बिल को ध्वनि मत से पास करने के लिए प्रस्तुत किया। सत्ता पक्ष के सदस्यों द्वारा बिल के पक्ष में वोट दिए जाने के बाद स्पीकर ने घोषणा की- "मैं घोषणा करता हूँ कि यह बिल पास हो गया है।" जैसे ही बिल पास हुआ, सदन में जोरदार तालियों के साथ उसका स्वागत किया गया।
उल्लेखनीय है, शादी, तलाक, उत्तराधिकार और 'लिव-इन रिलेशनशिप' जैसे व्यक्तिगत मामलों पर एक समान कानून लागू करने के उद्देश्य से असम सरकार ने सोमवार (25 मई) को समान नागरिक संहिता से संबंधित विधेयक प्रस्तुत किया था, जिसमें बहुविवाह पर प्रतिबंध लगाने और लिव-इन संबंधों के पंजीकरण को अनिवार्य बनाने का प्रस्ताव रखा गया था। हालांकि, विधेयक में कहा गया है, कि यह असम में रहने वाले अनुसूचित जनजाति समुदाय पर लागू नहीं होगा।
...तो हो सकती है जेल
UCC लागू होने के बाद असम में बहुविवाह या दो विवाह के लिए सात साल की जेल (कैद) और लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण न कराने पर तीन महीने की जेल शामिल है। 'द यूनिफॉर्म सिविल कोड, असम, 2026 विधेयक' पर चर्चा के दौरान विपक्षी विधायकों ने यह भी कहा, कि यह समाज के एक विशेष वर्ग के अधिकारों को नुकसान पहुंचा सकता है।
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