#MadhyaPradesh : भोजशाला मंदिर है, यहां पर गैर हिंदुओं का कोई स्थान नहीं है : हाईकोर्ट ASI की वैज्ञानिक सर्वे...


...रिपोर्ट के आधार पर High Court ने प्राचीन संस्कृत अध्ययन केंद्र और सरस्वती मंदिर माना 

- High Court has declared the Bhojshala complex in Dhar as a temple, marking a significant development in the long-standing dispute surrounding the historical site.


भोजशाला (जिला-धार, मप्र) में स्थापित माँ सरस्वती "वाग्देवी की मूर्ति" एवं भोजशाला के अंदर का दृश्य (नीचे) #Dharm_Nagari_

धर्म नगरी / DN News 
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 मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित स्थित भोजशाला को भारतीय इतिहास और शिक्षा परंपरा का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। भोजशाला परिसर में संस्कृत-प्राकृत-नागरी लिपी के अभिलेख मिले हैं, जिनमें ‘पारिजातमंजरी-नाटिका’ जैसी रचनाओं का उल्लेख भी पाया गया

 इतिहासकारों के अनुसार 11वीं शताब्दी में परमार शासक राजा ने इसकी स्थापना की थी। उस समय यह स्थान ‘सरस्वती सदन’ के रूप में प्रसिद्ध था, जहां वेद, संस्कृत व्याकरण, दर्शन और प्राकृत भाषाओं की शिक्षा दी जाती थी।

 कोर्ट के आदेश के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने 98 दिनों तक वैज्ञानिक सर्वे किया। रिपोर्ट में मंदिर शैली के स्तंभ, संस्कृत श्लोक, यज्ञकुंड और हिंदू धार्मिक प्रतीकों के प्रमाण स्पष्ट रूप से मिले। हाईकोर्ट ने भी अपने निर्णय में इन साक्ष्यों को महत्वपूर्ण माना है। इसी रिपोर्ट के आधार पर इंदौर हाईकोर्ट ने भोजशाला के हिन्दू मंदिर करार देते हुए पूजा-पाठ की अनुमति दी है। 

"...देश में मन्दिरों पर मामले कांग्रेस ने बनाए दो कानून- 1991 में प्लेस ऑफ़ वरशिप एक्ट और 1958 में एंशिएंट मोन्यूमेंट एक्ट के कारण चल रहे हैं... इन दो कानूनों के कारण काशी, मथुरा, भद्रकाली, अटाला आदि सारे विवाद लंबे चल रहे हैं। जबकि भारत का संविधान कहता है- एक भारतीय धरोहर संहिता बनानी चाहिए और एक पूरा कमीशन बनना चाहिए। ...देश में जितने भी विवादित स्थान (मन्दिर) है, उनका एक साथ सर्वे करा लिया जाए..." - अश्विनी उपाध्याय, वरिष्ठ अधिवक्ता, सुप्रीम कोर्ट   

भोजशाला को 'विद्या की काशी' भी कहा जाता था। एमपी हाईकोर्ट ने इसे प्राचीन संस्कृत अध्ययन केंद्र और सरस्वती मंदिर मानते हुए दिया हिन्दू पक्ष में निर्णय दिया है। निर्णय देते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने कहा-
...यह स्थान मूल रूप से मंदिर और संस्कृत अध्ययन केंद्र था। कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की रिपोर्ट के आधार पर इसे सरस्वती मंदिर और प्राचीन शिक्षण संस्थान के रूप में मान्यता देते हुए हिन्दुओं को पूजा-पाठ की अनुमति दे दी है, वहीं यहां नमाज पर रोक लगा दी गई है।

भोजशाला को लेकर दिया गया निर्णय भारतीय न्यायिक इतिहास के महत्वपूर्ण निर्णयों में गिना जा रहा है। 242 पन्नों के इस विस्तृत निर्णय में जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की डिवीजन बेंच ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की रिपोर्ट, ऐतिहासिक अभिलेखों, पुरातात्विक साक्ष्यों और कानूनी प्रावधानों के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला कि धार स्थित यह विवादित परिसर मूल रूप से देवी वाग्देवी (मां सरस्वती) का मंदिर और एक शिक्षण केंद्र था। न्यायालय ने माना, कि वर्तमान ढांचा मंदिर को तोड़कर और उसके अवशेषों का उपयोग करके बनाया गया।  ASI रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्षों को हाई कोर्ट ने निर्णायक माना गया, जिनसे यह साबित होता है कि इस स्थल का मूल स्वरूप एक मंदिर था। 

बता दें, एएसआई की रिपोर्ट में सिद्ध करती है कि यह मंदिर और शिक्षा का बड़ा केंद्र 11वीं सदी में राजाभोज के समय बनवाया गया था... भोजशाला केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा का बड़ा केंद्र माना जाता है। 11वीं शताब्दी में परमार राजा भोज द्वारा स्थापित इस स्थान को ‘विद्या की काशी’ और ‘सरस्वती सदन’ के नाम से भी जाना जाता था। यहां संस्कृत, वेद, व्याकरण और दर्शन की शिक्षा दी जाती थी। आज (15 मई)  मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने ASI की वैज्ञानिक सर्वे रिपोर्ट के आधार पर इसे प्राचीन संस्कृत अध्ययन केंद्र और सरस्वती मंदिर माना है।

उल्लेखनीय है, भजशाला परिसर में संस्कृत-प्राकृत-नागरी लिपी के अभिलेख
हैं। इसी कारण भोजशाला को ‘विद्या की काशी’ भी कहा जाता है। भोजशाला में पूर्व में हजारों छात्र और विद्वान अध्ययन करने आते थे। परिसर से संस्कृत, प्राकृत और स्थानीय भाषाओं में नागरी लिपि के कई अभिलेख मिले हैं, जिनमें ‘पारिजातमंजरी-नाटिका’ जैसी रचनाओं का उल्लेख भी पाया गया।

इतिहासकारों का दावा है, कि भोजशाला में माँ वाग्देवी अर्थात माता सरस्वती (ऊपर चित्र देखें) की प्रतिमा स्थापित थी, जिसे बाद में ब्रिटेन ले जाया गया और वर्तमान में वह ब्रिटिश म्यूजियम में रखी गई थी, जो अब भी वहीं है। लंबे समय से हिंदू पक्ष इसे माँ सरस्वती का मंदिर बताता रहा है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद मानता रहा। इसी विवाद को लेकर वर्षों से कानूनी लड़ाई चल रही थी। वर्तमान में अब यह स्थल (भोजशाला) ASI के संरक्षण में है।

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सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय कहते हैं- "...आज हिंदुओं के लिए बहुत विशेष दिन है। हाईकोर्ट का फैसला आया है। हाईकोर्ट ने कहा, भोजशाला यह मंदिर है। यहां पर गैर-हिंदुओं का कोई स्थान नहीं है। गैर-हिंदू यहां आकर इबादत नहीं कर सकते। अब केवल यहां हिंदू ही आकर पूजा करें। बहुत सालों से मुकदमा चल रहा था। डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में चल रहा था। कई बार सुप्रीम कोर्ट आया, हाई कोर्ट गया, फिर सुप्रीम कोर्ट आया। कई बार चक्कर लगाते-लगाते अंत में सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट से कहा था, कि आप इस पर एक बेंच बनाइए और डे-टू-डे हियरिंग करके इसको डिसाइड कर दीजिए। और आज वो फैसला आ गया है।" 

"...अब वहां पर नमाज नहीं पढ़ी जाएगी। जो वहां पे एक कमाल मौला करके संगठन बना रखा गया था और जो लोग आके फ्राइडे को नमाज पढ़ रहे थे। आज अंतिम फ्राइडे है। आज शुक्रवार है और अंतिम शुक्रवार है। अब आज के बाद जो नमाज हो गई हो गई। अब आज के बाद वहां नमाज नहीं पढ़ी जाएगी। लेकिन एक बात मेरा मानना है कि ये सब इतना लंबा इसलिए खींच रहा है, क्योंकि कांग्रेस ने दो कानून बनाए थे। 1991 में प्लेस ऑफ़ वरशिप एक्ट बनाया था और ये 1958 में एंशिएंट मोन्यूमेंट एक्ट बनाया था.... 

...इन दो कानूनों के कारण काशी, मथुरा, भद्रकाली, घौशाला, अटाला सारे विवाद इतने लंबे चल रहे हैं। जबकि भारत का संविधान कहता है- एक भारतीय धरोहर संहिता बनानी चाहिए और एक पूरा कमीशन बनना चाहिए। एक जुडिशियल कमीशन बने, एक्सपर्ट कमेटी बने। अब तो अब हमारे पास टेक्नोलॉजी भी बहुत है। हमारे पास मतलब सब कुछ सर्वे करने का हमारे पास अब टेक्नोलॉजी आ चुकी है। हमें विदेशों से कोई टेक्नोलॉजी लेने की जरूरत नहीं है। और आराम से सर्वे करके काशी का, मथुरा का, अटाला का, भद्रकाली का जो और भी विवादित स्थान है उनका सब पर सर्वे करके आराम से पता कर सकते हैं, कि यह मंदिर था या मस्जिद थी। 

सच्चाई है कि जहां-जहां अवैध कब्जा किया गया है, अवैध कब्जा करने वालों को भी पता है कि यह गलत कब्जा है, क्योंकि जिन लोगों ने मंदिरों को तुड़वाया उन्होंने खुद ही लिखवा दिया है किताबों में कि हां हमने मंदिर तुड़वाया जिन लोगों ने मंदिर तोड़ा जिन सेनापतियों ने मंदिर तोड़ा या सेनापतियों ने खड़े होकर मंदिर तुड़वाया उन्होंने भी किताबों में लिखा हुआ है। चाहे बाबरनामा हो चाहे बाकी और भी किताबें उनमें बहुत साफ-साफ लिखा हुआ है कि हां ये मंदिर इस दिन तोड़ा गया। ये मंदिर इस दिन तोड़ा गया। ये मंदिर इस दिन तोड़ा गया।"

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"...तो जब देश स्वतंत्र हो चुका है, अब मुगल चले गए हैं। बाबर हुमायूं, तुगलक, गजनी, गोरी, खिलजी, औरंगजेब सब चले गए हैं। यहां रहने वाले सारे हिंदू हैं। या तो हिंदू है या तो कन्वर्टेड हिंदू है या एक्स हिंदू है। मुझे लगता है, कि आपसी भाईचारे के लिए जरूरी है। जहां और भी काशी में, मथुरा में, भद्रकाली में, अटाला में जहां पे अवैध कब्जा करके लोग खड़े हुए हैं। अवैध कब्जा करके बैठे हुए हैं और जहां मुकदमे चल रहे हैं। हमारे एक्स हिंदू भाइयों को स्वेच्छा से इन मंदिरों को छोड़ देना चाहिए। उनको म हिंदुओं को एंडोर कर देना चाहिए। इससे आपस का भाईचारा भी बढ़ेगा। अपना सौहार्द भी बढ़ेगा और फिर ये तारीख पे तारीख का जो इतना लंबा टेंशन चलता रहता है वो नहीं होगा। मुझे नहीं पता कि अभी कमाल मोहल्ला वाले इधर आएंगे कि नहीं आएंगे। सुप्रीम कोर्ट आएंगे कि नहीं आएंगे।" 

अश्विनी उपाध्याय आगे कहते हैं- "...मुझे लगता है कि शायद हो सकता है आए भी क्योंकि वो हाई कोर्ट में हारने के बावजूद शायद बैठे निशांत नहीं बैठेंगे। लेकिन उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए। क्योंकि मुकदमा जितना लंबा चलेगा उतनी बहस होगी, उतना और परतें खुलेगी तो जो कुछ अभी ढक ढका हुआ है जो कुछ लोगों को नहीं पता वो भी पता चलेगा स्वाभाविक सी बात है जितनी ज्यादा दलीलोंगी उतनी बातें और पता चलेगी तो देश की एकता अखंडता के लिए आवश्यक है। संविधान के आर्टिकल-49 के अनुरूप भारत में भारतीय धरोहर संहिता बनाई जाए। जितने भी विवादित स्थान है उनका एक साथ सर्वे करा लिया जाए। एसआई सर्वे कर ले, कार्बन डेटिंग हो जाए और भी जो टेक्नोलॉजी यूज़ करना है वो टेक्नोलॉजी करके और दूध का दूध पानी का पानी कर दिया जाए। ये जो प्लेस ऑफ़ वरशिप एक्ट कांग्रेस ने बनाया या एंशिएंट मनुमेंट एक्ट कांग्रेस ने बनाया, इन दोनों को रिप्लेस करके उनके स्थान पर एक भारतीय धरोहर संहिता बना देना चाहिए। हमेशा हमेशा के लिए विवाद खत्म कर देना चाहिए। मैं एक्स हिंदू भाइयों से अपना निवेदन करता हूं जो हमारे कन्वर्टेड हिंदू भाई हैं। आप आपस के भाईचारा को ध्यान में रखते हुए जहांजहां अवैध कब्जा है आप लोग खुद आवाज उठाइए। नमाज पढ़ने के लिए बहुत स्थान है। स्थानों की कमी नहीं है, लेकिन एक बात याद रखिए जितने प्रमुख स्थान है वहां से कब्जा हट जाएगा। आपस का भाईचारा बढ़ेगा।"
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#सोशल_मीडिया में प्रतिक्रियाएं
अब जब भोजशाला वाग्देवी मंदिर पर भी वर्षों तक संघर्ष के बाद फैसला आया, तो फिर से कोर्ट ने वही तुष्टिकरण की नीति अपनाते हुए मुस्लिम पक्ष के लिए अलग से जमीन देने का विकल्प रख दिया। -@NikhilTiwarit18
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मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला को हाई कोर्ट ने मंदिर करार दिया है।
कोर्ट ने हिंदुओं को पूजा का अधिकार भी दिया।
फैसले के बाद इलाके में खुशी का माहौल देखने को मिला।

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