राम मंदिर दान मामले की जांच व्यवस्था पर सुप्रीम कोर्ट ने खड़े किए सवाल, कोर्ट ने...
...SIT जांच पर जवाब मांगते हुए नई SIT बनाने का सुझाव दिया और कहा- "राजनीति का मंच नहीं है अदालत"
- पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ याचिकाकर्ताओं ने किया डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग (W.app- 8109107075 -कवरेज कराने, फ्री कॉपी मंगवाने, शुभकामना देने हेतु)
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट को बताया, कि पहले बनाई गई SIT का काम केवल यह देखना था, कि मामले में कोई संज्ञेय अपराध बनता है या नहीं। SIT ने अपनी रिपोर्ट में कहा- मामला दर्ज करने लायक अपराध बनता है, जिसके बाद FIR दर्ज कर ली गई है। उन्होंने कहा, कि मौजूदा SIT खुद जांच नहीं कर रही है। मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- क्या जांच के लिए कोई अलग SIT बनाई गई है ? इस पर उत्तर मिला, ऐसा नहीं है। तब कोर्ट ने सुझाव दिया कि जांच के लिए नई SIT बनाई जाए। वहीं, अगले सोमवार को सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले की सुनवाई करेगा।
अयोध्या राम मंदिर दान-चढ़ावा में कथित हेराफेरी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राजनीतिक बयानबाजी से बचने का सुझाव देते हुए कहा कि अदालतें राजनीति का मंच नहीं हैं। कोर्ट ने SIT जांच पर राज्य सरकार से जवाब मांगा और मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई तय किया।
अयोध्या राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे में कथित हेराफेरी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अहम टिप्पणी करते हुए साफ कहा कि इस मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि अदालतें राजनीति का मंच नहीं हैं, बल्कि उनका उद्देश्य केवल यह सुनिश्चित करना है कि मामले की निष्पक्ष और प्रभावी जांच हो।
रिपोर्ट के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ, राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए फंड में कथित गड़बड़ी की CBI जांच की मांग वाली विभिन्न जनहित याचिकाओं (PIL) पर सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान CJI सूर्य कांत ने कहा- 'बस एक चेतावनी... इस मुद्दे का राजनीतिकरण न करें। अदालतें राजनीति की जगह नहीं हैं। यह अपराध का एक साधारण मामला है। हमें केवल यह सुनिश्चित करना है कि जांच सही तरीके से हो।'
क्या SIT को ही सौंपी जा सकती है जांच ?
सुप्रीम कोर्ट के पहले के निर्देशों के अनुपालन में जांच की मौजूदा स्थिति पर रिपोर्ट अदालत में पेश की गई। इस दौरान CJI ने पूछा कि फिलहाल जांच कौन कर रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि सच्चाई का पता लगाने के लिए पहले स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाई गई थी। SIT ने इसे संज्ञेय अपराध माना, जिसके बाद अब पुलिस इस मामले की जांच कर रही है।
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डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत ने अदालत से कहा, कि मंदिर निर्माण के लिए देशभर से जनता ने दान दिया था, इसलिए सभी दान रसीदों को सुरक्षित रखा जाए और उन्हें सार्वजनिक रूप से अपलोड किया जाए। अदालत ने इस सुझाव पर विचार करने का भरोसा दिया।
सुनवाई के दौरान अन्य वकीलों ने भी अदालत से आग्रह किया कि मामले से जुड़े सभी डिजिटल और वित्तीय रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के साथ-साथ दर्ज FIR को सार्वजनिक किया जाए, ताकि पारदर्शिता बनी रहे। इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को आश्वस्त किया कि सभी आवश्यक रिकॉर्ड सुरक्षित रखे गए हैं।
CBI जांच और कोर्ट की निगरानी की मांग
मामले में दाखिल याचिकाओं में वकील अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव ने आरोप लगाया, कि राम मंदिर निर्माण के लिए मिले सार्वजनिक चंदे का दुरुपयोग, गबन और धन के कथित गलत इस्तेमाल की स्वतंत्र एवं समयबद्ध जांच होनी चाहिए। मौजूदा SIT के पास जटिल वित्तीय जांच के लिए पर्याप्त फोरेंसिक और जांच संबंधी संसाधन नहीं हैं। इसके साथ उन्होंने यह भी आरोप लगाया, कि SIT ने FIR दर्ज किए बिना जांच शुरू कर दी, जिससे उसकी रिपोर्ट की कानूनी वैधता पर सवाल उठ सकते हैं।
तिरुपति मंदिर का उदाहरण
तिरुपति मंदिर में कथित मिलावटी घी मामले का उदाहरण देते हुए याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के अक्टूबर 2024 के उस आदेश का हवाला दिया, जिसमें राज्य की SIT के स्थान पर CBI की अगुवाई में स्वतंत्र बहु-अनुशासनात्मक SIT गठित की गई थी। उनका कहना है कि राम मंदिर फंड मामले में भी इसी तरह की स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए।
ऑडिट सार्वजनिक करने की मांग
याचिकाओं में यह भी मांग की गई है, कि दान (चंदा) रजिस्टर, लेजर, बैंक रिकॉर्ड, UPI लॉग, CCTV फुटेज, ईमेल, सर्वर डेटा और अन्य इलेक्ट्रॉनिक व वित्तीय रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएं, ताकि सबूतों से किसी प्रकार की छेड़छाड़ न हो सके। साथ ही श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को नियमित अंतराल पर ऑडिटेड वित्तीय विवरण, चंदे की जानकारी और फंड के उपयोग का ब्यौरा अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित करने का निर्देश देने की भी मांग की गई, जबकि दानदाताओं की निजी जानकारी गोपनीय रखने की बात कही गई है।
अगली सुनवाई 27 जुलाई को
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई स्थगित करते हुए अगली सुनवाई 27 जुलाई निर्धारिटी किया है। अदालत ने संकेत दिया, कि अगली सुनवाई में जांच की प्रक्रिया को लेकर आवश्यक निर्देश जारी किए जा सकते हैं। इससे पहले कोर्ट ने SIT से स्टेटस रिपोर्ट और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जवाब भी मांगा था।
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