#Social_Media : नेपाली मुस्लिम हवा में उड़ रहे थे... UGC नाम से 2-3 अलग बिल / प्रस्ताव आ चुके हैं

नई दिल्ली ब्यूरो (धर्म नगरी / DN News)
(न्यूज / कवरेज कराने, फ्री कॉपी मंगवाने या धर्म नगरी से जुड़ने हेतु- W.app- 810 910 7075)
नेपाली मुस्लिम हवा में उड़ रहे थे
औकात भुल गए थे
अतिउत्साह में कांवड़ लेकर बोल बम जा रहे हिंदुओं पर हमला करके 2-3 शिवभक्तों को जान से मार दिया...
फिर क्या था, शिवभक्तों का तांडव शुरू
अब नेपाली मुस्लिम देश छोड़कर भाग रहें हैं
मुसलमानो के घरों से इस्लामिक झंडा उतारा जा रहा है, उन्हें साफ साफ चेतावनी दिया गया है गि यदि नेपाल में रहना है तो सनातन संस्कृति का सम्मान करों
अब कट्टरपंथी मुस्लिम प्रेम की बातें कर रहें हैं
उन्हें भाईचारा याद आ रहा है।
(न्यूज / कवरेज कराने, फ्री कॉपी मंगवाने या धर्म नगरी से जुड़ने हेतु- W.app- 810 910 7075)
नेपाली मुस्लिम हवा में उड़ रहे थे
औकात भुल गए थे
अतिउत्साह में कांवड़ लेकर बोल बम जा रहे हिंदुओं पर हमला करके 2-3 शिवभक्तों को जान से मार दिया...
फिर क्या था, शिवभक्तों का तांडव शुरू
अब नेपाली मुस्लिम देश छोड़कर भाग रहें हैं
मुसलमानो के घरों से इस्लामिक झंडा उतारा जा रहा है, उन्हें साफ साफ चेतावनी दिया गया है गि यदि नेपाल में रहना है तो सनातन संस्कृति का सम्मान करों
अब कट्टरपंथी मुस्लिम प्रेम की बातें कर रहें हैं
उन्हें भाईचारा याद आ रहा है।
देखें-
कावड़ यात्रा / हिन्दुओं की हत्या के बाद क्या हुआ था ?
R.भारत की रिपोर्ट, पीड़ितों का दर्द एवं PM नेपाल का बयान
कभी हिंदू राष्ट्र के तौर पर अपनी पहचान रजिस्टर कराने वाले नेपाल में भी अब कट्टरपंथ की आग भड़क गई। नेपाल एक बार फिर से जलने लगा। जिहादियों की भीड़ ने कावड़ यात्रा को टारगेट किया, जिसके बाद नेपाल में भारी हिंसा भड़क उठी। जिस तरीके से वहां पर लगातार कट्टरपंथ बढ़ता जा रहा है, ऐसे ही हमने लगभग पिछले 8-9 महीने पहले वहां देखा था, कि पर किस तरीके से लगातार हिंदुओं को टारगेट किया जा रहा था। टारगेटेड अटैक किए जा रहे थे। मंदिरों को तोड़ा जा रहा था।
मैं फिलहाल आम तौर पर जो चर्चा में है उसके आधार पर बता रहा हूं-
सबसे अच्छी बातें जो लोग UGC बिल में देखते हैं-
1. एकरूपता और क्वालिटी
अलग-अलग राज्य/यूनिवर्सिटी में पढ़ाई का लेवल अलग है। UGC एक कॉमन स्टैंडर्ड लाना चाहता है ताकि UP का स्टूडेंट और तमिलनाडु का स्टूडेंट बराबर पढ़े। इससे "डिग्री की वैल्यू" बढ़ेगी।
2. राष्ट्रीय एकता
जैसा आपने कहा- अगर सिलेबस, नियम, भर्ती एक होगी तो "पहले मैं ब्राह्मण/दलित/राजपूत हूं" से पहले "मैं भारतीय हूं" वाली भावना आएगी। देश अंदर से मजबूत होगा।
3. भ्रष्टाचार कम करना
कई बार कुलपति / प्रोफेसर की नियुक्ति में राजनीति घुस जाती है। UGC सीधे दखल दे तो योग्य लोग आएं, चहेते नहीं।
4. विदेशी ताकतों का मुकाबला
जब एजुकेशन सिस्टम मजबूत और एकजुट होगा, तो रिसर्च, टेक्नोलॉजी में हम आगे बढ़ेंगे। तभी "विश्वगुरु" वाला सपना पास आएगा।
### सबसे बुरी बातें / चिंताएं जो लोग जताते हैं-
1. राज्यों के अधिकार कम होना
एजुकेशन समवर्ती सूची में है। राज्य कहते हैं "हमारी यूनिवर्सिटी, हमारे नियम"। अगर UGC सब तय करेगा तो राज्य की भाषा, संस्कृति, लोकल जरूरतें पीछे छूट जाएंगी।
2. विविधता vs एकरूपता
भारत एक जैसा नहीं है। केरल की जरूरत और बिहार की जरूरत अलग। एक ही सांचा सब पर थोपना "समानता" नहीं, "ठूंसना" लग सकता है। यहीं से जाति/क्षेत्र का डर आता है।
3. आरक्षण और प्रतिनिधित्व का सवाल
अगर नियुक्ति का अधिकार केंद्र/UGC के पास जाएगा तो SC/ST/OBC के प्रतिनिधित्व पर सवाल उठते हैं। लोगों को लगता है "समानता" के नाम पर उनके अधिकार खत्म होंगे।
4. स्वायत्तता खत्म
यूनिवर्सिटी अपनी रिसर्च, अपना सिलेबस खुद तय नहीं कर पाएंगी। इससे इनोवेशन रुक सकता है।
### मेरी सोच - बीच का रास्ता
कोई भी कानून तब काम करता है जब 2 चीजें हों-
1. नियत साफ हो- क्या मकसद वाकई "एक भारत" है या सिर्फ कंट्रोल?
2. भरोसा हो- जिन पर कानून लागू होगा वो उसे अपना समझें, थोपा हुआ न समझें।
आपने बिल्कुल सही कहा- "जाति का भूत" सबसे बड़ी दीवार है। जब तक कॉलेज में एडमिशन से लेकर शादी तक जाति देखी जाएगी, तब तक कोई भी बिल सिर्फ कागज रहेगा।
अब आपकी बारी
आपको इस बिल में सबसे ज्यादा क्या अच्छा लगा और सबसे ज्यादा डर किस बात का है ?
#साभार Fb- Vijay Chaurasia
अब पाकिस्तानी पत्रकार आरजू काज़मी और भारत के मौलाना रशीदी के बीच का संवाद अवश्य सुनें और सोचें कैसी-कैसी सोच के साथ वो अपने मजहब को बचाते और बढ़ाते रहते हैं और हम "सनातन" और राष्ट्र के लिए क्या करते हैं (सहमत हों तो पोस्ट शेयर अवश्य करें)-
नेपाल फिर बनेगा हिंदू राष्ट्र? पूर्व सांसद केदारनन्दन चौधरी का बड़ा बयान
#साभार News Watch India-
अब फिर से वैसे ही कुछ दृश्य नेपाल की सड़कों से लगातार सामने आए, जहां पर उपद्रव होता रहा है। जहां पर हिंसा भड़कती रही। कावड़ यात्रियों को निशाने पर लिया जाता रहा। उन पर हमला करके उनको घायल किया जाता रहा। इसके बाद कई जिलों में कर्फ्यू लगा दिया गया। शासन प्रशासन की तरफ से अपील की जाती रही, लेकिन फिर भी वहां पर स्थिति सामान्य नहीं हुई। आगजनी होती रही, गाड़ियों को तोड़ा-फोड़ा जा रहा था। हिंसा को भड़काने की पूरी कोशिश की गई। यह साजिश नहीं तो और क्या है ?
सड़क पर उपद्रव हुआ। सबसे बड़ी बात कि नेपाल में वर्तमान में वहां पर कैसे हैं हालात ? नेपाल में सांप्रदायिक हिंसा की आग आखिर क्यों भड़क गई ? नेपाल में आखिरकार क्यों सैकड़ों की संख्या में लोग सड़कों पर उतर गए ? नेपाल की सड़कों पर आग क्यों लगी ? यह किस तरीके के धमाकों की आवाज है ? ऐसे दृश्य क्यों दिखे, जिसमें नाबालिक प्रदर्शनकारी आखिर किसको बुला रहा है ?
चार दिनों से नेपाल में इसी तरह से हिंसा, आगजनी और कर्फ्यू वाला माहौल देखा गया। सुनसरी इलाके में सबसे पहले हिंसा भड़की, जिसने धीरे-धीरे छह से ज्यादा शहरों को अपनी जद में ले लिया। जगह-जगह आगजनी हुई। गाड़ियों में आग लगा दी गई। जिसके बाद प्रशासन ने कुछ इलाकों में कर्फ्यू भी लगाया है। वहीं नेपाल के जेन-जी पीएम लोगों से शांति बनाए रखने की अपील करते हुएबोले-
सभी आदरणीय लोगों को मेरा नमस्कार। मैं आज अत्यंत दुखद घड़ी के बीच आप सभी के समक्ष आया हूं। पिछले कई दिनों से सुनसरी समेत कई इलाकों में अशांति का माहौल बना हुआ है। नेपाल सरकार इस मामले पर गंभीर है। संवेदनशील है। इस घटना में जान गवाने वाले लोगों के प्रति हम संवेदनाएं रखते हैं। दरअसल यह पूरा मामला कावड़ यात्रा पर हुए सांप्रदायिक तनाव से जुड़ा हुआ है।
आरोप है, कि कावड़ निकालने के दौरान मुस्लिम पक्ष के लोगों ने शिव भक्तों पर हमला कर दिया। आपसी कहासनी से शुरू हुए विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। दोनों ओर से पत्थरबाजी शुरू हो गई। जिसके बाद सिक्योरिटी फोर्सेस ने बल का इस्तेमाल कर हालात को संभाला। मैं सभी को विश्वास दिलाना चाहता हूं। मामले की छानबीन पूरी तरह से निष्पक्ष और पारदर्शी रहेगी। घटना में शामिल लोगों को कारवाई के घेरे में लाया जाएगा। फेक न्यूज़ से जुड़े हैंडल्स पर हम लगातार एक्शन ले रहे हैं। जिस सुनसरी इलाके से बवाल की शुरुआत हुई, वहां पर अब हेलीकॉप्टर्स से निगरानी चल रही है। सड़क पर सेना को बुलाया गया है। बाजार खाली पड़े हैं और इस बीच पुलिस फ्लैग मार्च कर रही है। सभी लोग कृपया ध्यान दें। प्रशासन की सभी से गुजारिश है, आप कानून का पालन करें और व्यवस्था को बनाए रखने में अपनी जिम्मेदारी संभालें। अराजकता फैलाने वालों से सख्ती से निपटा जाएगा। नेपाल में माहौल अभी भी तनावपूर्ण बना हुआ है। हिंसा पर रोक तो लग गई है लेकिन कर्फ्यू अभी भी बरकरार है। कांवड़ यात्रा के शुभ अवसर पर सांप्रदायिक विवाद से जो हालात हुए उस नुकसान से निपटने की भी तैयारी चल रही है।
-
वामपंथी तर्क- "लोकतंत्र में असहमति को भी स्थान मिले" का जवाब
सारे वामपंथी तर्क दे रहे हैं कि लोकतंत्र में असहमति को भी स्थान मिलना चाहिए। नेहा बोरा पर इंक नहीं फेंका जाना चाहिए था।
नेहा बोरा चिल्लाती रही- इंक फेंकने वाला आर एस एस का गुण्डा था। जय श्रीराम बोल रहा था।
ठीक है तर्क तुम्हारा लेकिन लोकतंत्र के पालन की जिम्मेदारी सिर्फ एक पक्ष की है क्या ?
तुम खुद अराजकता फैलाओ और लोग लोकतंत्र का पालन करें, असहमति के नाम पर तुम्हारे एजेंडे का समर्थन करें। गजब है।
लोकतंत्र में असहमति का अधिकार मेन स्ट्रीम मीडिया के लोगों का नहीं है क्या जिन्हें किसान आंदोलन, पहलवान आंदोलन से लेकर तथाकथित जेन जी आंदोलन में घुसने तक नहीं दिया गया ? जो घुस गया उन्हें मारा गया, गालियाँ दी गयी, बेईज्जत किया गया।
तुम्हारे अंदर बड़ी तर्कशक्ति है तो उनका बहिष्कार करने के बजाय उनका डट कर सामना करती और अपने तर्कों से उन्हें निरुत्तर कर देती।
लोकतंत्र में असहमति का अधिकार क्या रुचि तिवारी को नहीं था, जिसको सरेआम तुमने कपड़े फाड़ कर नंगा कर दिया था ?
लोकतंत्र में किसी लड़की को नंंगा किया जा सकता है, लेकिन किसी लड़की पर स्याही नहीं फेंका जा सकता।
लोकतंत्र में जय श्रीराम बोलना गुंडागर्दी है, लेकिन देश के प्रधानमन्त्री और गृहमंत्री को गंदी से गंदी गालियाँ देना कूल है।
लोकतंत्र में प्रोटेस्ट करने का, गाली देने का, विरोध करने का अधिकार सिर्फ लेफ्टिस्टों को है, राइटविंगर्स को नहीं।
लोकतंत्र में जो चैनल, पत्रकार तुम्हारा समर्थन करें वे निष्पक्ष हैं और जो तुमसे इत्तफाक न रखें वे गोदी मीडिया।
अच्छा हुआ कि जंतर-मंतर के तुरन्त बाद ही झारखंड में प्रोटेस्ट हुआ और तुम लोगों की कलई खुल गयी। #साभार Fb राकेश मिश्र 'सरयूपारीण'
----
UGC नाम से 2-3 अलग बिल / प्रस्ताव आ चुके हैं
पहले एक बात साफ कर दूं- UGC नाम से 2-3 अलग बिल/प्रस्ताव आ चुके हैं। सबसे चर्चित 2024-2025 वाला "UGC Amendment Bill" था, जिसमें यूनिवर्सिटी में कुलपति की नियुक्ति और UGC के अधिकारों को लेकर बात थी। अगर आप किसी और UGC बिल की बात कर रहे हैं तो नाम बता दीजिएगा।
नेहा बोरा चिल्लाती रही- इंक फेंकने वाला आर एस एस का गुण्डा था। जय श्रीराम बोल रहा था।
ठीक है तर्क तुम्हारा लेकिन लोकतंत्र के पालन की जिम्मेदारी सिर्फ एक पक्ष की है क्या ?
तुम खुद अराजकता फैलाओ और लोग लोकतंत्र का पालन करें, असहमति के नाम पर तुम्हारे एजेंडे का समर्थन करें। गजब है।
लोकतंत्र में असहमति का अधिकार मेन स्ट्रीम मीडिया के लोगों का नहीं है क्या जिन्हें किसान आंदोलन, पहलवान आंदोलन से लेकर तथाकथित जेन जी आंदोलन में घुसने तक नहीं दिया गया ? जो घुस गया उन्हें मारा गया, गालियाँ दी गयी, बेईज्जत किया गया।
तुम्हारे अंदर बड़ी तर्कशक्ति है तो उनका बहिष्कार करने के बजाय उनका डट कर सामना करती और अपने तर्कों से उन्हें निरुत्तर कर देती।
लोकतंत्र में असहमति का अधिकार क्या रुचि तिवारी को नहीं था, जिसको सरेआम तुमने कपड़े फाड़ कर नंगा कर दिया था ?
लोकतंत्र में किसी लड़की को नंंगा किया जा सकता है, लेकिन किसी लड़की पर स्याही नहीं फेंका जा सकता।
लोकतंत्र में जय श्रीराम बोलना गुंडागर्दी है, लेकिन देश के प्रधानमन्त्री और गृहमंत्री को गंदी से गंदी गालियाँ देना कूल है।
लोकतंत्र में प्रोटेस्ट करने का, गाली देने का, विरोध करने का अधिकार सिर्फ लेफ्टिस्टों को है, राइटविंगर्स को नहीं।
लोकतंत्र में जो चैनल, पत्रकार तुम्हारा समर्थन करें वे निष्पक्ष हैं और जो तुमसे इत्तफाक न रखें वे गोदी मीडिया।
अच्छा हुआ कि जंतर-मंतर के तुरन्त बाद ही झारखंड में प्रोटेस्ट हुआ और तुम लोगों की कलई खुल गयी। #साभार Fb राकेश मिश्र 'सरयूपारीण'
----
UGC नाम से 2-3 अलग बिल / प्रस्ताव आ चुके हैं
पहले एक बात साफ कर दूं- UGC नाम से 2-3 अलग बिल/प्रस्ताव आ चुके हैं। सबसे चर्चित 2024-2025 वाला "UGC Amendment Bill" था, जिसमें यूनिवर्सिटी में कुलपति की नियुक्ति और UGC के अधिकारों को लेकर बात थी। अगर आप किसी और UGC बिल की बात कर रहे हैं तो नाम बता दीजिएगा।
मैं फिलहाल आम तौर पर जो चर्चा में है उसके आधार पर बता रहा हूं-
सबसे अच्छी बातें जो लोग UGC बिल में देखते हैं-
1. एकरूपता और क्वालिटी
अलग-अलग राज्य/यूनिवर्सिटी में पढ़ाई का लेवल अलग है। UGC एक कॉमन स्टैंडर्ड लाना चाहता है ताकि UP का स्टूडेंट और तमिलनाडु का स्टूडेंट बराबर पढ़े। इससे "डिग्री की वैल्यू" बढ़ेगी।
2. राष्ट्रीय एकता
जैसा आपने कहा- अगर सिलेबस, नियम, भर्ती एक होगी तो "पहले मैं ब्राह्मण/दलित/राजपूत हूं" से पहले "मैं भारतीय हूं" वाली भावना आएगी। देश अंदर से मजबूत होगा।
3. भ्रष्टाचार कम करना
कई बार कुलपति / प्रोफेसर की नियुक्ति में राजनीति घुस जाती है। UGC सीधे दखल दे तो योग्य लोग आएं, चहेते नहीं।
4. विदेशी ताकतों का मुकाबला
जब एजुकेशन सिस्टम मजबूत और एकजुट होगा, तो रिसर्च, टेक्नोलॉजी में हम आगे बढ़ेंगे। तभी "विश्वगुरु" वाला सपना पास आएगा।
### सबसे बुरी बातें / चिंताएं जो लोग जताते हैं-
1. राज्यों के अधिकार कम होना
एजुकेशन समवर्ती सूची में है। राज्य कहते हैं "हमारी यूनिवर्सिटी, हमारे नियम"। अगर UGC सब तय करेगा तो राज्य की भाषा, संस्कृति, लोकल जरूरतें पीछे छूट जाएंगी।
2. विविधता vs एकरूपता
भारत एक जैसा नहीं है। केरल की जरूरत और बिहार की जरूरत अलग। एक ही सांचा सब पर थोपना "समानता" नहीं, "ठूंसना" लग सकता है। यहीं से जाति/क्षेत्र का डर आता है।
3. आरक्षण और प्रतिनिधित्व का सवाल
अगर नियुक्ति का अधिकार केंद्र/UGC के पास जाएगा तो SC/ST/OBC के प्रतिनिधित्व पर सवाल उठते हैं। लोगों को लगता है "समानता" के नाम पर उनके अधिकार खत्म होंगे।
4. स्वायत्तता खत्म
यूनिवर्सिटी अपनी रिसर्च, अपना सिलेबस खुद तय नहीं कर पाएंगी। इससे इनोवेशन रुक सकता है।
### मेरी सोच - बीच का रास्ता
कोई भी कानून तब काम करता है जब 2 चीजें हों-
1. नियत साफ हो- क्या मकसद वाकई "एक भारत" है या सिर्फ कंट्रोल?
2. भरोसा हो- जिन पर कानून लागू होगा वो उसे अपना समझें, थोपा हुआ न समझें।
आपने बिल्कुल सही कहा- "जाति का भूत" सबसे बड़ी दीवार है। जब तक कॉलेज में एडमिशन से लेकर शादी तक जाति देखी जाएगी, तब तक कोई भी बिल सिर्फ कागज रहेगा।
अब आपकी बारी
आपको इस बिल में सबसे ज्यादा क्या अच्छा लगा और सबसे ज्यादा डर किस बात का है ?
आज की हिन्दू पीढ़ी और आने वाली पीढ़ी का भविष्य
आज हमारे देश में चिंता इस बात की है-
#हिंदू comfort zone (सुख-सुविधाभोगी बन गया) है
इसलिए हिन्दू जितनी देर में जागेगा
दोगले, सेखुलर #हिंदुओं की संख्या भी बढ़ गई है
दुर्भाग्य से आज देशव्यापी कोई भी सक्रिय हिंदूवादी संगठन नहीं बचा है
दुर्भाग्य से आज देशव्यापी कोई भी सक्रिय हिंदूवादी संगठन नहीं है न होने दिया / देगी भाजपा, इस डर से कहीं उनको आइना न दिखाने लगे
कोई भी अच्छा नेता, चाहे वह #Congress का ही क्यों न हो, अगर हिंदूवादी है और BJP की करनी-कथनी को आइना दिखा रहा है, तो उनमें से अधिकांश को या तो उलझा देंगे या भाजपा में शामिल कर लेंगे। ये बात बहुत गंभीरता, सत्य घटनाओं एवं चिंतन के बाद लिख रहा हूँ #राष्ट्रवाद दी पत्रकार
ध्यान रहे-
भारत गैर-मुसलमानों का देश है, क्योंकि मुसलमानों ने अपने लिए पूरा पाकिस्तान ले लिया, ये कहते हुए कि हम मुसलमान हिन्दुओं के साथ नहीं रह सकते। दोगने और मुस्लिमपरस्त फर्जी नेहरू-गाँधी और उनके वंशजों ने हमेशा इस्लाम का समर्थन और हिन्दुओ का घोर विरोध किया है। पाकिस्तान 1991 इस्लामिक एस्टेट हो गया, 27% हिन्दू 0.5 से भी कम हो गए।
आज भारत में जमीन के ऊपर (चौराहे तिराहे रोड-साइड मोड़ नुक्कड़ आदि पर) और जमीन के नीचे (कब्र में) मुसलमान कब्जा करते ही चले जा रहे हैं, बढ़ते ही जा रहे हैं, लगभग सभी हुनर वाले काम, देशभर के 95%सब्जी -पहल मंडी, केंद्र व राज्यों में भाजपा के सारे योजनओं, सब्सिडी ला भरपूर लाभ ले लिया और ले रहे हैं, फूटी कौड़ी tax और भाजपा को वोट न देने ((शायद 0.5 से 1-2% देते भी हों, क्योंकि भारत में रहने वाले 99.9% आज के मुसलमान 3-4 या 5-7 पीढ़ी पहले हिन्दू ही थे, जो अपने बहन-बेटियों की इज्जत लूटने या बच्चों की गर्दन काटे जाने के डर से मुसलमान हो गए)) के बावजूद उनके बैंक खाते में भाजपा कैश डाल रही है।
कब तक कोई जीवित रहता है, 2-4 शीर्ष पद पर बैठे सच्चे हिन्दू नेता के ही भरोसे रहोगे क्या हिन्दुओं, स्वयं कुछ नहीं करोगो ? अपने लिया नहीं, अपनी आने वाली पीढ़ी या अपने भांजे-भतीजे, नाती-पोते आदि को "खून के आंसू रोने के लिए" असुरक्षित समाज / राज्य या देश छोड़कर जाओगे क्या ? helphindu@gmail.com ईश्वर आलसी निकम्मे स्वार्थी सेखुलर हिन्दुओं को सद्बुद्धि दें... अपने इतिहास से कुछ तो सीखें, इतना विवेक दें। ये मन की बात नहीं, हमारे हृदय की बात और चिंता है।
#साभार वीडियो एवं प्रतिक्रिया सोशल मीडिया से
अब पाकिस्तानी पत्रकार आरजू काज़मी और भारत के मौलाना रशीदी के बीच का संवाद अवश्य सुनें और सोचें कैसी-कैसी सोच के साथ वो अपने मजहब को बचाते और बढ़ाते रहते हैं और हम "सनातन" और राष्ट्र के लिए क्या करते हैं (सहमत हों तो पोस्ट शेयर अवश्य करें)-
-
Coloum tobe updated shortly
----------------------------------------------
इसे भी पढ़ें-
कॉलेजियम प्रणाली योग्य जजों के साथ अन्याय जनहित के खिलाफ, वजह बताए बिना जज नियुक्त करने से आते हैं अयोग्य लोग : जस्टिस भुइयां
☟
https://www.dharmnagari.com/2026/08/Collegium-Injustice-to-deserving-Judges-says-Justice-Ujjawal-Bhuyan.html
देवाधिदेव महादेव को प्रसन्न करने भगवान श्रीराम द्वारा स्तुति की गई "शम्भु स्तुतिः"...सुने व पढ़ें
☟
http://www.dharmnagari.com/2021/06/Shambhu-Stuti-recited-by-Sriram-to-please-Shiv-ji-Bhagwan-Ram-ne-Shankarji-ko-Prasanna-karane-Stuti-Gai.html
दो दर्जन लाइफस्टाइल बीमारियां नहीं फटकती डांस करने से, जाने भारत की...
☟
https://www.dharmnagari.com/2026/07/Dancing-cures-two-dozen-lifestyle-diseases-know-the-main-dancing-style--arts.html
धर्म नगरी फ्री या "सौजन्य से. .." पाने हेतु केवल अपना पूरा पता पोस्टल पिनकोड सहित भेजें। आश्रम, मठ-मन्दिर आदि की न्यूज छपवाने या विशेष कवरेज हेतु संपर्क करें- 810 910 7075 (O)
----------------------------------------------
--
---
----------------------------------------------

Post a Comment