संसद में पहली बार गूंजा राष्ट्रगीत वंदे मातरम, मानसून सत्र के अंतिम दिन वंदे मातरम् की छह पंक्तियों के साथ...


...लोकसभा की कार्यवाही आरंभ शुरू हुई 
राज्यसभा की कार्यवाही भी राष्ट्रगीत के साथ समाप्त हुई
संसद परिसर में भाजपा व विपक्ष ने अलग-अलग मुद्दों को लेकर किया विरोध प्रदर्शन  
पूरे सत्र में दिखा सत्ता पक्ष और विपक्ष में कई मुद्दों पर तीखा टकराव, हंगामा  
- सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित

नई दिल्ली ब्यूरो (धर्म नगरी / DN News)

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संसद का मानसून सत्र के अंतिम दिन (13 अगस्त) को लोकसभा की कार्यवाही वंदे मातरम् के आरंभ हुई। इसे संसद के इतिहास में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। राष्ट्रगीत की छह पंक्तियां बजाए / गाये गए। इसके तुरंत बाद विपक्ष के नारेबाजी के बीच स्पीकर ओम बिरला ने लोकसभा को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया। इसके बाद राज्यसभा की कार्यवाही भी राष्ट्रगीत के साथ समाप्त हो गई। इस तरह संसद के दोनों सदनों में राष्ट्रगीत के साथ राजनीतिक खींचतान और हंगामे के बीच 
मानसून सत्र का समापन हो गया। लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने के समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, गृहमंत्री राजनाथ सिंह, राहुल गांधी सहित सदन के कई सदस्य उपस्थित रहे। 

मकर द्वार सत्ता व विपक्ष का अलग-अलग प्रदर्शन
मानसून सत्र के अंतिम दिन आज संसद शुरु होते ही मकर द्वार पर दोनों पक्षों ने अलग-अलग प्रदर्शन किए। विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी की और प्लेकार्ड लेकर गृह मंत्री अमित शाह से माफी और जवाबदेही की मांग की। यहां तक, विपक्ष के सांसद संसद परिसर में बंदर की रेप्लिका वाले खिलौने लेकर आए और सत्तापक्ष और गृह मंत्री के खिलाफ नारेबाजी करने लगे।उसी समय भाजपा सांसदों ने झारखंड में चल रहे प्रदर्शनों पर विपक्ष की चुप्पी को लेकर भी धरना प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान विपक्ष ने चोर-चोर के नारे भी लगाए।  

वंदे मातरम् सहित कई मुद्दों पर तीखी बहस व टकराव 
मानसून सत्र के अंतिम दिन वंदे मातरम् के कारण ही नहीं, बल्कि पूरे सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच कई मुद्दों को लेकर तीखी बहस और टकराव देखने को मिला। NEET पेपर लीक आंदोलन के दौरान छात्र प्रदर्शनकारियों पर कथित पुलिस कार्रवाई और राम मंदिर दान-चढ़ावा चोरी मामले जैसे मुद्दों को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरने का प्रयास किया। अनेक अवसरों पर विपक्ष के विरोध और नारेबाजी के कारण सदन की कार्यवाही बाधित हुई। सरकार की ओर से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष के सवालों पर चर्चा के लिए तैयार होने की बात कही। छात्रों से जुड़े मुद्दे पर चर्चा के लिए समय तय करने को लेकर अध्यक्ष से विपक्ष के साथ विचार-विमर्श करने की अपील भी किया।

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कई दृष्टि से सत्र का समापन महत्वपूर्ण 
मानसून सत्र का समापन कई दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा। एक ओर लोकसभा की कार्यवाही पहली बार वंदे मातरम् के साथ शुरू हुई, वहीं दूसरी तरफ पूरा सत्र राजनीतिक विरोध और हंगामे से प्रभावित रहा। राष्ट्रगीत को लेकर नए कानूनी प्रावधानों के बीच संसद में इसके औपचारिक इस्तेमाल को लेकर आने वाले समय में भी राजनीतिक और संवैधानिक बहस हो सकती है। सरकार और विपक्ष के बीच मुद्दों को लेकर जारी टकराव से लगता है, कि अगले संसदीय सत्र में भी कई मुद्दों पर राजनीतिक गर्मी बनी रह सकती है।

अंतिम दिन भी नारेबाजी, राजनीतिक विरोध
विपक्षी सांसदों ने मानसून सत्र के अंतिम दिन भी सरकार के विरुद्ध नारेबाजी की। संसद परिसर के मकर-द्वार पर भाजपा और विपक्ष की ओर से अलग-अलग विरोध प्रदर्शन हुए। भाजपा ने राहुल गांधी को निशाना बनाते हुए कांग्रेस पर झारखंड में चल रहे विरोध प्रदर्शनों को लेकर सवाल उठाए। वहीं, विपक्षी दल अपने अलग-अलग मुद्दों को लेकर सरकार पर दबाव बनाते रहे। इस राजनीतिक टकराव का प्रभाव लोकसभा की विदाई प्रक्रिया पर भी दिखा। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सत्र के अंत में दिया जाने वाला सामान्य विदाई संबोधन भी नहीं पढ़ा। इस संबोधन में प्रायः पर सदन के कामकाज, उत्पादकता और सत्र की उपलब्धियों का उल्लेख किया जाता है।

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केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा- संसद के सत्र के दौरान कुल 12 विधेयक पारित हुए, लेकिन विपक्ष के लगातार विरोध और व्यवधान के कारण इन पर चर्चा की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं रही। सरकार चर्चा के लिए तैयार थी और विपक्ष के सवालों का जवाब देना चाहती थी, लेकिन विपक्ष ने चर्चा से बचने का रास्ता अपनाया। संसद में केवल नारेबाजी और प्लेकार्ड लेकर विरोध करना संसदीय लोकतंत्र के लिए उचित नहीं है। 

उन्होंने विशेष रूप से नए सांसदों को सार्थक बहस और चर्चा का अवसर नहीं मिलने पर चिंता जताई। उन्होंने उम्मीद जताई कि शीतकालीन सत्र में सभी दल आत्मचिंतन के साथ बेहतर सहयोग करेंगे और संसद में अधिक सार्थक एवं रचनात्मक चर्चा देखने को मिलेगी।

उल्लेखनीय है, वंदे मातरम् को कानूनी सुरक्षा देने वाले प्रावधान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा स्वीकृति देने के बाद लागू किए गए। प्रावधान लागू होने के कुछ दिनों बाद संसद में राष्ट्रगीत को गाया गया। कानून के प्रावधान के अनुसार, राष्ट्रगीत वन्दे मातरम को राष्ट्रगान के समान ही कानूनी दर्जा देता है। वन्दे मातरम के गायन में जानबूझकर बाधा डालने या उसे रोकने को दंडनीय अपराध होगा। सरकार की ओर से आधिकारिक कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के गायन को लेकर भी नियम तय किए गए हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जनवरी में निर्देश दिया था, कि राष्ट्रपति के आगमन पर, तिरंगा फहराने और राज्यपालों के संबोधन जैसे अवसरों पर वंदे मातरम् के छह पद के गायन से जुड़े नियम बताए गए। 

सत्र 20 जुलाई से शुरु हुआ और 13 अगस्त को अंतिन दिन भी संसद परिसर में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखा टकराव देखने को मिला। हालांकि पहले सरकार ने कहा था, यदि विपक्ष सदन को ऑर्डर में आने देगा तो गृह मंत्री सदन में जवाब देने को तैयार हैं। 

देश 15 अगस्त 2026 को अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाएगा। PM नरेंद्र मोदी दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले से राष्ट्रीय ध्वज फहएंगे और देश को संबोधित करेंगे। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने बताया कि वर्ष 2026 में ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे हो रहे हैं। इस ऐतिहासिक अवसर को चिह्नित करते हुए पहली बार लाल किले की प्राचीर से (प्रधानमंत्री के लाल किले पहुंचने पर) राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ का सामूहिक गायन होगा।
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