शारदीय नवरात्रि : माता के नौ स्वरूपों से 9 ग्रह होते हैं नियंत्रित, अतः ग्रहों की...


...शांति के लिए नियमित करें आराधना
- नवरात्रि के दिनों माँ दुर्गा स्वर्गलोक से पृथ्वी पर आती हैं...
- शारदीय नवरात्रि राशि के अनुसार मंत्र जाप

नवरात्रि में-
✔ नवरात्रि में ग्रहों की स्थिति अनुकूल होती है
✔ नवरात्रि में भक्ति के अनुरूप प्रतिफल अवश्य प्राप्त होता है
✔ जप-पाठ, हवन-पूजन, कन्या पूजन का विशेष महत्व है
✔ श्रद्धालु भक्त अपने मन के अनुकूल पूजा करें, मंत्र नहीं आता तो मन से जुड़े
✔ नौ-दिन में हर प्रकार के शुभ कार्य किए जाते हैं
✔ नवरात्रि में आम भक्तों हेतु सबसे छोटा मंत्र- ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै (महालक्ष्मी, महाकाली, महासरस्वती) का प्रतिदिन न्यूनतम 108 बार जाप करें।

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-राजेशपाठक (अवैतनिक संपादक)

शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर 2026 (रविवार) से आरंभ होकर 19 अक्टूबर (सोमवार) तक रहेगा। इस बार नवरात्रि पूरे नौ दिन का है। अश्विन मास की अमावस्या (10 अक्टूबर) को पितरों की विदाई के साथ पितृपक्ष का समापन हो जाएगा। उदयातिथि के अनुसार, नवरात्रि का शुभारम्भ 11 अक्टूबर को होगा। प्रतिपदा तिथि को कलश स्थापना के साथ मां दुर्गा के पहले स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा अर्चना की जाएगी। पूरे नौ दिन के नवरात्रि पड़ने के साथ ही शुभ संयोग भी बन रहा है।

नवरात्रि के नौ दिन को धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ माने जाते हैं। इस अवधि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। पूर्ण श्रद्धा-भक्ति से आदिशक्ति मां दुर्गा की आराधना करने से जीवन और परिवार में सुख-शांति का वास होता है। शारदीय नवरात्रि में कोई उपाय, अनुष्ठान या मंत्र जाप किया जाए, तो वह अवश्य फलित होता है। वहीं, कुछ कार्य ऐसे भी हैं जिनको नवरात्रि में वर्जित माना जाता है। 

 नवरात्रि के दिनों में दुर्गा जी को प्रसन्न करने व्रत, उपवास और पूजा का विधान है। कहते हैं, माता की भक्ति में भूल-चूक होने से वे रुष्ट हो जाती हैं। इसलिए किसी भी गलती करने से बचें। देवी जी की आराधना कर उन्हें प्रसन्न करें।

नवरात्रि में यदि आपने अपने घर में कलश स्थापना किया है, माता की चौकी या अखंड ज्योति लगा रखी है, तो घर खाली न छोड़ें। घर में किसी न किसी व्यक्ति का होना बहुत आवश्यक है।

नवरात्रि पर्व पर मन को शांत और एकाग्र करने यदि संभव हो, नौ दिनों तक व्रत रखें। अन्यथा प्रतिपदा, अष्टमी रखते हुए देवी की साधना करनी चाहिए। व्रत रखने से मन की शुद्धि के साथ तन की साफ-सफाई भी हो जाती है। व्रत रखने से मन में हमेशा अच्छे विचार आते हैं।

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देवीजी की विशेष पूजा श्रृंगार- 
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि के दिनों माँ दुर्गा स्वर्गलोक से उतरकर 9 दिनों तक पृथ्वी पर आती हैं। इस कारण से नवरात्रि के नौ दिन तक देवी के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा करने का विधान होता है। नवरात्रि पर व्यक्ति को नौ दिनों तक मां का विशेष श्रृंगार, भोग और पूजा सामग्री अर्पित करना चाहिए।

नवरात्रि से पहले अपने घर की और पूजा स्थल की साफ-सफाई कर लें, माता उसी स्थान पर वास करती हैं एवं प्रसन्न होती हैं, जहां साफ-सफाई और सात्विकता पूरा ध्यान रखा जाता है। मान्यता है,  ऐसा करने से माँ दुर्गा प्रसन्न होती हैं और भक्तों पर अपनी कृपा दृष्टि बनाए रखती हैं। घर, कार्यालय, दुकान, प्रतिष्ठान, फैक्ट्री के मुख्य द्वार पर स्वास्तिक बनाएं। सनातन धर्म में स्वास्तिक का बहुत अधिक महत्व है, जो मंगलकारी और शुभता प्रदान करता है।


देवी माँ कृपा प्राप्त करने के लिए नवरात्रि के प्रतिदिन मंदिर जाकर देवी की उपासना और दर्शन करना चाहिए, यथा संभव दान भी करना चाहिए। इसके साथ इन चीजों का भी ध्यान रखें-
- कभी
 किसी कन्या का अपमान नहीं करना चाहिए, क्योंकि कन्याओं को मां दुर्गा का स्वरूप माना गया है। (वैसे तो वर्षभर किसी कन्या का अपमान नहीं करना चाहिए।) यही कारण है, कि नवरात्रि में कन्या-पूजन कर लोग पुण्य की प्राप्ति करते हैं। ऐसे में नवरात्रि पर्यन्त किसी भी कन्या या महिला के प्रति असम्मान का भाव न आने दें। नवरात्रि में किसी भी कन्या का अपमान होने से मां दुर्गा रुष्ट हो सकती हैं।
- नवरात्रि में सात्विक भोजन का विशेष ध्यान रखना चाहिए। धर्म शास्त्रों के अनुसार, नवरात्रि के दिनों प्याज, लहसुन और मांस मदिरा का सेवन न करें। नौ दिनों तक पूर्ण सात्विक आहार लेना चाहिए। 
- व्रत करने वाले को नवरात्रि के पवित्र दिनों में अपना समय व्यर्थ की बातों में न लगाकर, धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन करना चाहिए। इन दिनों श्रीदुर्गा चालीसा या श्रीदुर्गा सप्तशती का पाठ करना अत्यंत शुभफलदायी होता है। पाठ करते समय मंत्रों के शुद्ध उच्चारण का ध्यान रखना आवश्यक है, अतः यदि संस्कृत में पाठ करने में कठिनाई हो, तो हिंदी में भी पाठ किया जा सकता है। 
- नवरात्रि पर यथासंभव दाढ़ी, नाखून और बाल कटवाने से बचना चाहिए / नहीं कटवाना चाहिए। नवरात्रि के इन नौ दिनों तक दिन में सोने से बचें।


प्रतिपदा मुहूर्त व घटस्थापना
शारदीय नवरात्रि पर 11 अक्टूबर (रविवार) को घटस्थापना की जाएगी।  घटस्थापना प्रातः 6:19 बजे से 10:12 बजे तक कर सकते हैं। घटस्थापना के लिए समय 3 घंटे 52 मिनट का समय रहेगा। श्रद्धालु-भक्त प्रातः घटस्थापना नहीं कर पाते हैं, तो अभिजित मुहूर्त में घटस्थापना कर सकते हैं, जो सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक रहेगा। 


नवरात्रि : नौ स्वरुप-
प्रतिपदा तिथि पर कलश या घट स्थापना के साथ देवी के प्रथम स्वरूप- 
माँ शैलपुत्री की पूजा होती है। माँ शैलपुत्री की पूजा से शक्ति की प्राप्ति होती है। 
देवी के द्वितीय स्वरूप- माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा से मान-सम्मान, 
तृतीय स्वरुप माँ चंद्रघंटा की पूजा से एकाग्रता, 
चतुर्थ माँ कूष्मांडा से मन में दया का भाव आता है, 
पंचम माँ स्कंदमाता की आराधना से सफलता, 
सप्तम माँ कात्यायनी की आराधना से बाधाएं दूर होती हैं, 
सप्तममाँ कालरात्रि की पूजा से शत्रुओं पर विजय प्राप्ति होती है,  
अष्टम माँ महागौरी की पूजा से सुख-समृद्धि और 
नवम माँ सिद्धिदात्री की पूजा करने पर मनोकामना पूरी होती है।


प्रतिपदा 11 अक्टूबर 2026, माँ शैलपुत्री, घटस्थापना

द्वितीया, 12 अक्टूबर 2026, माँ ब्रह्मचारिणी

तृतीया, 13 अक्टूबर 2026, माँ चंद्रघंटा

चतुर्थी, 14 अक्टूबर 2026, माँ कूष्मांडा

पंचमी, 15 अक्टूबर 2026, माँ स्कंदमाता

षष्ठी, 16 अक्टूबर 2026, माँ कात्यायनी

सप्तमी,17 अक्टूबर 2026, माँ कालरात्रि

अष्टमी, 18 अक्टूबर 2026, 
माँ कालरात्रि

नवमी, 19 अक्टूबर 2026, मां महागौरी, माँ सिद्धिदात्री  
दशमी, 20 अक्टूबर 2026, नवरात्रि पारण, विजयादशमी, दुर्गा विसर्जन 
और विजयादशमी एवं दशहरा

नौ दिनों में देवी दुर्गा के स्वरूपों की पूजा की जाती है। माता के नौ स्वरूपों का अलग-अलग महत्व, श्रृंगार, विशेषताएं होती हैं। ज्योतिषाचार्य के अनुसार, माता के प्रत्येक स्वरूप में ग्रह का नियंत्रण होता है. अतः उनके अलग-अलग स्वरूपों की पूजा से संबंधित ग्रह के दोष दूर होते हैं-
मां शैलपुत्री-
माँ शैलपुत्री दुर्गा जी के नौ स्वरूपों का पहला स्वरूप है। शैलपुत्री का स्वरुप चंद्रमा को दर्शाता है। इसलिए इनकी पूजा से जातक के चंद्रमा से संबंधित दोष दूर हो जाते हैं।
माँ ब्रह्मचारिणी-
माता दुर्गा के द्वितीय स्वरूप- मां ब्रह्मचारिणी को मंगल ग्रह को नियंत्रित करने वाला माना जाता है। अतः इस स्वरूप की पूजा करने से व्यक्ति के मंगल ग्रह के बुरे प्रभाव कम हो जाते हैं।
माँ चंद्रघंटा-
आदिशक्ति दुर्गा जी के तीसरे स्वरूप माँ चंद्रघंटा शुक्र ग्रह को नियंत्रित करती हैं। शुक्र से पीड़ित जातकों को देवी के इस स्वरूप की पूजा करना शुभ होता है।
माँ कूष्माण्डा
चौथा स्वरूप देवी कुष्मांडा सूर्य से संबंधित होता है। किसी जातक को सूर्य से संबंधित परेशानियां या सूर्य दोषों से मुक्त होना है तो मां कुष्मांडा की पूजा फलदायी होती है।
माँ स्कंदमाता
नवरात्रि के पांचवें दिन का स्वरूप देवी स्कंदमाता बुध ग्रह को नियंत्रित करती हैं। इसलिए इस दिन पूजा करने से व्यक्ति के बुध ग्रह के बुरे प्रभावों से मुक्ति मिलती है।
माँ कात्यायनी
छठे दिन देवी दुर्गा के माँ कात्यायनी स्वरुप वृहस्पति से संबंधित है, अतः उनको पूजने से वृहस्पति के बुरे प्रभावों से मुक्ति मिलती है।
माँ कालरात्रि
सातवें दिन माँ कालरात्रि के स्वरूप की पूजा करने से शनि के दुष्प्रभावों से मुक्ति मिलती है।
माँ महागौरी
आठवें स्वरूप माता महागौरी की पूजा से राहु से संबंधित बुरे प्रभावों को कम करते हैं, क्योंकि माँ का यह स्वरूप राहु को नियंत्रित करता है।
माँ सिद्धिदात्री
माता का नौवा स्वरूप देवी सिद्धिदात्री का है, जो केतु को नियंत्रित करती हैं। देवी सिद्धिदात्री की पूजा से केतु के बुरे प्रभावों से मुक्ति मिलती है।
(Disclaimer: उक्त जानकारियां ज्योतिर्विदों, कर्मकांडी विद्वानों, धार्मिक आस्था एवं लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। )
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