गुरु पूर्णिमा : शुभ मुहूर्त, विशेष योग, पूजन सामग्री, पूजा-विधि, समस्याओं से मुक्ति के उपाय


गुरु-पूर्णिमा पर क्या करें, क्या नहीं ! 

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महर्षि वेद व्यास का जन्म आषाढ़ माह पूर्णिमा तिथि को हुआ। ऋषि पाराशर और देवी सत्यवती के पुत्र वेद व्यास जी ने ही महाभारत महाकाव्य की रचना की। गुरु-पूर्णिमा के दिन महाभारत और चारों वेदों की रचना करने वाले वेद व्यास की पूजा करने की परंपरा है। पौराणिक उल्लेख के अनुसार, भगवान गणेश ने इसे सुनाया, जिसे वेद व्यास ने लिखा। वेद व्यास जी ने वेदों को चार वर्ग में वर्गीकृत किया- ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद। उनकी विरासत को उनके शिष्यों पैला, वैशम्पायन, जैमिनी और सुमंतु ने आगे बढ़ाया। आषाढ़ पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के रूप में वेद व्यास की जयंती मनाई जाती है।

नारद पुराण के अनुसार गुरु पूर्णिमा पर ज्ञान और जीवन की सही दिशा बताने वाले गुरु के प्रति अपनी आस्था प्रगट की जाती है। गुरु पूर्णिमा के पर्व को व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है।  यह पर्व अपने आराध्य गुरु को श्रद्धा अर्पित करने का महापर्व है। 
गुरुब्रह्मा  गुरुर्विष्णु: गुरुदेव  महेश्वर:, 
गुरु साक्षात्परब्रह्म तस्मैश्री गुरुवे नम: 
अर्थात, गुरु ही ब्रह्मा है, गुरु ही विष्णु है और गुरु ही भगवान शंकर है। गुरु ही साक्षात परब्रह्म है। ऐसे गुरु को मैं प्रणाम करता हूं।

गुरु-पूर्णिमा बुधवार (13 जुलाई, 2022) को मनाई जाएगी, जो प्रातः 4 बजे आरंभ होकर 14 जुलाई रात 12:6 बजे समाप्त होगी। इस पावन दिन भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना का विशेष महत्व होता है। अतः, इस दिन विष्णु भगवान के साथ माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना भी करें।

गुरु-पूर्णिमा पर बन रहा राजयोग-
इस गुरु पूर्णिमा पर ग्रह नक्षत्रों की युति के कारण चार राजयोग निर्मित हो रहे हैं, जो अति विशेष हैं
।वैदिक पंचांग के अनुसार, गुरु पूर्णिमा के दिन मंगल, बुध, गुरु और शनि की स्थिति राजयोग बना रही है। इन ग्रहों के कारण इस दिन रुचक, भद्र, हंस और शश नामक 4 राजयोग बन रहें हैं। इसके अतिरिक्त अनेक वर्षों के पश्चात गुरु पूर्णिमा के दिन सूर्य-बुध की युति से बुधादित्य योग का निर्माण हो रहा है।

बुधादित्य-योग का प्रभाव-
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार, जब सूर्य और बुध किसी राशि में एक साथ होते हैं, तो बुधादित्य-योग बनता है। इस बार गुरु-पूर्णिमा के दिन बुध और सूर्य मिथुन राशि में साथ-साथ रहेंगे। इस कारण से ज्ञान बुद्धि, सम्मान और समृद्धि प्रदान करने वाला बुधादित्य योग भी गुरु पूजन करने वालों के लिए कल्याणकारी रहेगा।

गजकेसरी और रवियोग- 
गुरु पूजा के दिन यानी गुरु पूर्णिमा के दिन तमाम शुभ योगों के साथ गुरु ग्रह एक और शुभ योग बना रहे हैं जिसे गजकेसरी-योग के नाम से जाना जाता है। इस शुभ योग में गुरु के साथ चंद्रमा का भी योगदान रहेगा, क्योंकि गुरु और चंद्रमा मिलकर इस योग को बनाते हैं। इस दिन चंद्रमा और गुरु एक दूसरे से केंद्र स्थान में होंगे जिसकी वजह से गजकेसरी योग भी गुरु पूर्णिमा के अवसर पर गुरु की पूजा करने वालों के लिए शुभ मंगलकारी आशीर्वाद देने के लिए उपस्थित रहेंगे। इन शुभ योगों के साथ गुरु पूणिमा पर तमाम दोषों को दूर करने वाला रवि योग भी वर्तमान में रहेगा।

गुरु-पूर्णिमा पर लक्ष्मी नारायण योग का आशीर्वाद- 
गुरु -पूर्णिमा के दिन शुक्र मिथुन राशि में 10:50 बजे प्रवेश करेंगे। शुक्र के मिथुन राशि में आने से अत्यंत शुभ फलदायी लक्ष्मीनारायण-योग निर्मित होगा। इस योग में कोई भी नया काम करना और व्यापार आरंभ करना भी बहुत शुभ रहेगा। जो लोग गुरु मंत्र लेना चाहते हैं या बच्चों की शिक्षा आरंभ करवाना चाहते हैं, उनके लिए यह योग बहुत ही शुभ रहेगा।

गुरु-पूर्णिमा शुभ मुहूर्त (Guru Purnima Auspicious occasion)  
गुरु-पूर्णिमा बुधवार (13 जुलाई, 2022) 
पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ- 13 जुलाई प्रातः 4:00 बजे  
पूर्णिमा तिथि समाप्त- 14 जुलाई दोपहर 12:06 बजे  
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संबंधित लेख (पढ़ें / देखें)- 
...प्रकाश की ओर ले जाए, वही है गुरु
http://www.dharmnagari.com/2020/07/GuruPurnima2020.html
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गुरु-पूर्णिमा पूजन सामग्री-
गुरु पूर्णिमा वाले दिन गुरु की पूजा की जानी चाहिए। इस दिन गुरु पूजा में इन पूजा सामग्रियों का अवश्य ही शामिल करना चाहिए. मान्यताओं के अनुसार, इस दिन पूजन में पान का पत्ता, पीला कपड़ा, पीला मिष्ठान, नारियल, पुष्प, इलायची, कर्पूर, लौंग व अन्य सामग्री शामिल करना चाहिए।

विधि-
गुरु-पूर्णिमा के पावन दिन प्रातः शीघ्र उठकर स्नान करें। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने का बहुत अधिक महत्व होता है। जिनके लिए पवित्र नदियों में स्नान करना संभव नहीं, वे नहाने के पानी में गंगा-जल डालकर स्नान करें। नहाते समय सभी पावन नदियों का ध्यान कर लें। नहाने के पश्चात घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करें। संभव हो तो इस दिन व्रत भी रखें। सभी देवी-देवताओं का गंगा जल से अभिषेक करें।


गुरु-पूर्णिमा पर क्या न करें
- किसी को भी बिना अच्छी तरह से जानें अपना गुरु न बनाएं.
- बुद्धिमान, विवेकवान और शास्त्रज्ञ को ही अपना गुरु बनायें ना कि किसी चमत्कारिक व्यक्ति को.
- इन गुरु मंत्रों का करें जाप (Guru Purnima Mantra)-
ॐ गुं गुरवे नम:
ॐ ऐं श्रीं बृहस्पतये नम:

ॐ बृं बृहस्पतये नम:

ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरवे नम:

ॐ क्लीं बृहस्पतये नम:

गुरु ग्रह प्रबल करने के लिए-
गुरु-पूर्णिमा के दिन कुंडली में गुरु ग्रह को प्रबल (मजबूत) करने के लिए गुरु पूजन करना चाहिए। इससे हर तरह के दोषों में कमी या मुक्ति मिल जाएगी। इसके लिए बृहस्पति मंत्र 'ॐ बृं बृहस्पतये नमः' का जाप 11, 21 या अपनी योग्यता के अनुसार कर लें।

गुरु-पूर्णिमा पर क्या करें-
अपने गुरु का ध्यान करें और गुरु मंत्र का जाप करें। जिन्होंने अभी तक अपना गुरु नहीं बनाया है,
 वे भगवन शिव को गुरु मानते हुए उनका ध्यान कर पंचाक्षर मंत्र का जप करें जिन साधनों से ज्ञान मिलता है उनकी पूजा करनी चाहिए गुरु के उपदेश का पालन करना चाहिए। वैसे गुरु बनाने को लेकर एक प्रसिद्ध कहावत है- गुण मिले तो गुरु बनाओ, चित्त मिले तो चेला। मन मिले तो मित्र बनाओ, वरना रहो अकेला।। 

गुरु-पूर्णिमा पर करें ये उपाय-
सफलता प्राप्ति हेतु-
गुरु-पूर्णिमा के दिन मां लक्ष्मी- नारायण मंदिर में कटा हुआ गोल नारियल जरूर अर्पित करें। ऐसा करने से बिगड़े हुए कार्य बनने की मान्यता है। अगर आपके कुंडली में गुरु दोष है, तो भगवान विष्णु की श्रद्धापूर्वक पूजा करें। इस दिन अभावग्रस्त लोगों को दान अवश्य करें। आर्थिक समस्या चल रही है, तो आप इस दिन अभावग्रस्त / दरिद्र लोगों को पीली मिठाई, पीले वस्त्र आदि दान में दें। अपने से बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद जरूर लें।

विवाह में आ रही समस्या से मुक्ति हेतु- 
जिन जातकों के विवाह संबंधी मामलों में समस्या आ रही है, ऐसे जातकों को गुरु-पूर्णिमा के दिन गुरु यंत्र को स्थापित कर उसकी विधिवत पूजा करनी चाहिए. इस उपाय से वैवाहिक जीवन से जुड़ी सभी परेशानियां खत्म हो जाएगी।

पढ़ाई में आ रही समस्याओं को लेकर- 
जिन विद्यार्थियों को पढ़ाई में किसी भी प्रकार की बाधा आ रही है, उनका पढ‍़ाई में मन नहीं लग रहा। ऐसे जातकों को गुरु पूर्णिमा के दिन गीता पाठ करना चाहिए. इस उपाय से पढ़ाई में हो रही समस्याएं दूर हो सकती है।

इसे भी करें (उपाय का प्रभाव हमें बताएं)- 
- बिगड़े या रुके हुए कार्य को बनाने के लिए गुरु पूर्णिमा के दिन भगवान श्री कृष्ण के सामने घी का दीपक जलाएं। इसके साथ ही गीता का पाठ करें। इससे लाभ मिलेगा।
- प्रगति के लिए गुरु-पूर्णिमा के दिन  किसी गरीब या जरूरतमंद को पीली वस्तुएं जैसे चने की दाल, बेसन, पीले वस्त्र, पीले रंग की मिठाई, गुड़ आदि का दान करना शुभ होगा।
- पैसों की तंगी से छुटकारा पाने के लिए गुरु-पूर्णिमा के दिन पीपल के पेड़ की जड़ों में तांबे के लोटे में जल लेकर उसमे थोड़ी सी शक्कर मिलाकर चढ़ा दें। ऐसा करने से मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।

गुरु कृपा (दीक्षा) के चार प्रकार-
स्मरण, दृष्टि, शब्द एवं स्पर्श से
1- जैसे कछुवी रेत के भीतर अंडा देती है पर स्वयं पानी के भीतर रहती हुई उस अंडे का स्मरण करती रहती है, तो उसके स्मरण से अंडा पक जाता है। ऐसे ही गुरु की याद करने मात्र से शिष्य को ज्ञान हो जाता है, यह है स्मरण दीक्षा।
2- दूसरा जैसे मछली जल में अपने अंडे को थोड़ी थोड़ी देर में देखती रहती है तो देखने मात्र से अंडा पक जाता है ऐसे ही गुरु की कृपा दृष्टि से शिष्य को ज्ञान हो जाता है, यह दृष्टि दीक्षा है।
3- तीसरा जैसे कुररी पृथ्वी पर अंडा देती है और आकाश में शब्द करती हुई घूमती है तो उसके शब्द से अंडा पक जाता है। ऐसे ही गुरु अपने शब्दों से शिष्य को ज्ञान करा देता है। यह शब्द दीक्षा है।
4- चौथा जैसे मयूरी अपने अंडे पर बैठी रहती है, तो उसके स्पर्श से अंडा पक जाता है। ऐसे ही गुरु के हाथ के स्पर्श से शिष्य को ज्ञान हो जाता है। यह स्पर्श दीक्षा है।

Gurudev is Inspiration
Gurudev is Aspiration
Gurucharan is The Aim
and
Gurusevak is The only Way
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गुरु महाराज की आरती...
जय गुरुदेव अमल अविनाशी, ज्ञानरूप अन्तर के वासी,
पग पग पर देते प्रकाश, जैसे किरणें दिनकर कीं।
आरती करूं गुरुवर की॥

जब से शरण तुम्हारी आए, अमृत से मीठे फल पाए,
शरण तुम्हारी क्या है छाया, कल्पवृक्ष तरुवर की।
आरती करूं गुरुवर की॥

ब्रह्मज्ञान के पूर्ण प्रकाशक, योगज्ञान के अटल प्रवर्तक।
जय गुरु चरण-सरोज मिटा दी, व्यथा हमारे उर की।
आरती करूं गुरुवर की।

अंधकार से हमें निकाला, दिखलाया है अमर उजाला,
कब से जाने छान रहे थे, खाक सुनो दर-दर की।
आरती करूं गुरुवर की॥

संशय मिटा विवेक कराया, भवसागर से पार लंघाया,
अमर प्रदीप जलाकर कर दी, निशा दूर इस तन की।
आरती करूं गुरुवर की॥

भेदों बीच अभेद बताया, आवागमन विमुक्त कराया,
धन्य हुए हम पाकर धारा, ब्रह्मज्ञान निर्झर की।
आरती करूं गुरुवर की॥

करो कृपा सद्गुरु जग-तारन, सत्पथ-दर्शक भ्रांति-निवारण,
जय हो नित्य ज्योति दिखलाने वाले लीलाधर की।
आरती करूं गुरुवर की॥

आरती करूं सद्गुरु की
प्यारे गुरुवर की आरती, आरती करूं गुरुवर की।
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Disclaimer : उक्त लेख के तथ्य, सामग्री वैदिक विद्वानों, ज्योतिषियों, मान्यताओं, धर्मग्रंथों से संग्रहित हैं। हमारा उद्देश्य आप तक इसे पहुंचाना मात्र है।  

ऐसे भी पढ़ें-  
पढ़ें देवशयनी से देवउठनी एकादशी तक, महत्व, क्या करें क्या नहीं, किसकी पूजा करें
http://www.dharmnagari.com/2022/07/Chaturmas-2022-starting-and-ending-date-importance-Kya-kare-Kya-nahi.html
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जीवन में गुरु का महत्त्व-
(
कविता)-
गुरु होना आसान नहीं
गुरु जैसा कोई महान नहीं,

गुरु के बिना यह जीवन है अधूरा
गुरु मिल जाए तो हो जाए हर उद्देश्य पूरा।

गुरु ने अपना जीवन विद्या को सौंपा है
गुरु भगवान का दिया एक अमूल्य तोहफा है।

गुरु से ही सीखा है दुनिया का चक्रव्यूह
गुरु की वजह से ही पास किए है सारे इंटरव्यू।

गुरु से ही जीवन का अर्थ है
गुरु की शिक्षा बिना ये जीवन अधूरा है।

गुरु ही शिष्य का हुनर उभारते है
गुरु ही हमारी गलतियों को सुधारते है।

गुरु ही हमारे सच्चे मित्र है
गुरु बिना ये ज़िन्दगी बिना रंग के चित्र है।

गुरु के पास है सारी उलझनों का हाल
गुरु ने खिलाए है कीचड़ में भी कमल।

गुरु बिना कोई धर्म नहीं 
गुरु से अच्छा कोई कर्म नहीं,

गुरु से ही समाज की एकता है
गुरु सभी शिष्यों को एक ही दृष्टि से देखता है।

गुरु है इस दुनिया के समंदर में हमारी नाव
जिन्होंने मदद की हमें पार करने में जीवन के हर पड़ाव।

यूं ही अपना आशीर्वाद बनाए रखना
ताकि जीवन के किसी पड़ाव पे ना पड़े हमें भटकना।
  
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गुरु का जीवन में महात्म्य
सभी गुरु को करो प्रणाम,
बढ़ता जाए रुके का ज्ञान।

अर्जुन को दिया गीता ज्ञान,
कान्हा केशव उनका नाम।

चंद्रगुप्त था बहुत बलवान,
उसकी नींव था गुरु का ज्ञान।

एकलव्य था शिष्य महान,
प्रतिमा से लिया उसने ज्ञान।

देवव्रत का अथाह था ज्ञान,
गुरु आशीष से बने महान।

रामकृष्ण दोनों भगवान,
फिर भी गुरु से लिया था ज्ञान।

जो गुरु का करें सम्मान,
उसका जीवन बने महान।

गुरु बिन ज्ञान नहीं,
ज्ञान बिन आत्मा नहीं,
ध्यान, ज्ञान, धैर्य और कर्म,
सब गुरु की ही देन हैं !!
शुभ गुरु पूर्णिमा

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