श्रावण या सावन : सावन में क्या करें क्या नहीं, किस वस्तु से अभिषेक का कैसा प्रभाव...
![]() |
| दक्षिणमुखी स्वयंभू ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर, उज्जैन (भस्मार्ती श्रृंगार) |
- यथा संभव ऊं नम: शिवाय का जाप करते रहना चाहिए
- महादेव को कभी भी तुलसी, हल्दी और केतकी के फूल न चढ़ाएं
- सावन मास में कांवड़ यात्रा व शिवजी की अन्य यात्राएं
- सावन में इन तीन राशि को महादेव की होगी विशेष कृपा
.धर्म नगरी / DN News
(W.app- 8109107075 -न्यूज़, कवरेज, विज्ञापन व सदस्यों हेतु)
-राजेश पाठक (अवैतनिक संपादक 9752404020)
सनातन धर्म शास्त्रों में श्रावण मास या सावन का महीना देवाधिदेव महादेव को अत्यंत प्रिय है।भगवान शिव को समर्पित यह मास भगवान शिव की पूजा-आराधना के लिए सर्वोत्तम होता है।
सावन मास से पहले भगवान विष्णु योगनिद्रा में लीन हो जाते हैं और भगवान शिव पृथ्वी का संचालन करते हैं। शिव-भक्त पवित्र नदियों के जल से भगवान का अभिषेक करते हैं। सावन सोमवार का व्रत करते हैं। सावन में महादेव को प्रसन्न करने विशेष-पूजा, अभिषेक आदि करते हैं। अर्थात इस माह श्रद्धालु-भक्त महादेव की कृपा पाने के लिए तरह-तरह के प्रयास करते हैं।
द्वादशस्वपि मासेषु श्रावणो मेऽतिवल्लभ:।
श्रवणार्हं यन्माहात्म्यं तेनासौ श्रवणो मत:।
श्रवणर्क्षं पौर्णिमास्यां ततोऽपि श्रावण: स्मृत:।
यस्य श्रवणमात्रेण सिद्धिद: श्रावणोऽप्यत:।।
अर्थात, भगवान शिव का कहते हैं, कि मुझे सभी मास में श्रावण ार्वधिक प्रिय है। इस की महिमा सुनने योग्य है इसलिए भी इसे श्रावण मास कहा जाता है। मास में पूर्णिमा का पावन श्रावण नक्षत्र होता है, इसलिए इसे श्रावण मास कहा जाता है। सावन मास की महिमा सुनने से सिद्धि प्राप्त होती है, इसलिए इसको श्रावण मास कहा जाता हैं।
शिव पुराण के अनुसार, श्रावण मास में सोमवार व्रत करने से मनवांछित फल की प्राप्ति होती है। मान्यतानुसार, ज्योतिर्लिंग के दर्शन से जो फल प्राप्त होता है, वही पहल श्रावण मास में व्रत करने से प्राप्त होता है। इसलिए श्रावण मास में अविवाहित लड़कियां मनवांछित वर की प्राप्ति हेतु और सुहागन स्त्रियाँ सुखी वैवाहिक जीवन के लिए, पुत्र-प्राप्ति के लिए करती है। अपनी श्रद्धा और सामार्थ्य के अनुसार सावन में हर कोई पूजा-पाठ करता है।
- भगवान शिव या शिलवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने से महादेव शीघ्र प्रसन्न होते हैं।
- महादेव को शमी, बेला और अलसी के फूल अत्यंत हैं। कनेर के फूल, चमेली के फूल, जूही के फूल और सेफद फूल से भी सोमवार को भगवान शिव की पूजा कर सकते हैं।
- महादेव को भांग धतूरा अत्यंत प्रिय है। इसलिए यथासम्भव पूजा-सामग्री में धतूरे का फूल भी अवश्य चढ़ाएं और भांग अर्पित करें,
- पूजा में शिवजी की प्रिय वस्तुएं- इत्र, चंदन, केसर, अक्षत, शक्कर, गंगाजल, शहद, दही, घी और गन्ना चढ़ाएं। इस चीजों को चढ़ाने से महादेव की कृपा प्राप्त होती है।
- घर में अंगूठे के पोर के बराबर मिट्टी के शिवलिंग को बनाएं और उनकी पूजा करें,
- सावन में दूध और दूध से बनी चीजों का दान करें,
- भगवान शिव के साथ देवी पार्वती की पूजा भी करें और सायंकाल आरती अवश्य करें,
- सावन भर जब समय मिले ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का उच्चारण करते रहें। (ॐ नमः शिवाय भगवन शिव का मूल मंत्र हैं, जिसका अर्थ है- ‘हे शिव, मैं आपको बार-बार नमन करता हूँ’। इस मंत्र का जाप करने से हर प्रकार की समस्या से छुटकारा मिलता है। शिव महापुराण में इस मंत्र का वर्णन है, जिसके अनुसार, इस मंत्र की महिमा का विस्तार 100 करोड़ सालों में भी नहीं किया जा सकता है।)
सावन में क्या न करें (Things not to do in Sawan)-
- भगवान शिव के साथ देवी पार्वती की पूजा भी करें और सायंकाल आरती अवश्य करें,
- सावन भर जब समय मिले ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का उच्चारण करते रहें। (ॐ नमः शिवाय भगवन शिव का मूल मंत्र हैं, जिसका अर्थ है- ‘हे शिव, मैं आपको बार-बार नमन करता हूँ’। इस मंत्र का जाप करने से हर प्रकार की समस्या से छुटकारा मिलता है। शिव महापुराण में इस मंत्र का वर्णन है, जिसके अनुसार, इस मंत्र की महिमा का विस्तार 100 करोड़ सालों में भी नहीं किया जा सकता है।)
सावन में क्या न करें (Things not to do in Sawan)-
- सावन में प्रत्येक व्यक्ति को सात्विक भोजन का सेवन करना चाहिए और मांस मदिरा से दूरी बना लेनी चाहिए। इसलिए मांस-मदिरा व प्याज और लहसुन का त्याग कर दें,
- पुरुषों को दाढ़ी-मूंछ और बाल नहीं कटवाना चाहिए,
- शरीर पर तेल लाने से बचें या तेल नहीं लगाना चाहिए,
- पुरुषों को दाढ़ी-मूंछ और बाल नहीं कटवाना चाहिए,
- शरीर पर तेल लाने से बचें या तेल नहीं लगाना चाहिए,
- कांसे के बर्तन में भोजन करने से बचना चाहिए,
- शिव-पूजा में हल्दी, केतकी का फूल और तुलसी अर्पित नहीं करना चाहिए,
- सावन माह में दिन में नहीं सोना चाहिए, बिस्तर का त्याग करना चाहिए। सावन में इन बातों का ध्यान रख कर आप महादेव की कृपा पा सकते हैं।
श्रावण मास से जुड़ी पौराणिक कथाएं-
👉 माता पार्वती पूर्व जन्म में सती के रूप में प्रजापति दक्ष के यज्ञ में भगवान शिव का अपमान ना सह सकीं और यज्ञ की अग्नि में देह त्याग कर दिया। देह त्याग करते समय उन्होंने भगवान विष्णु से वर मांगा, कि उनकी प्रीति हर जन्म में भगवान शिव के प्रति बनी रहे।
👉 माता सती ने हिमाचल राज के घर पर पुत्री रूप में जन्म लिया। माता पार्वती ने नारदजी के कहने अनुसार, भगवान शिव की घोर तपस्या की। भगवान शिव ने श्रावण मास में ही माता पार्वती की भक्ति से प्रसन्न होकर दर्शन दिए थे। भगवान शिव और माता पार्वती का पुनः मिलन हुआ भगवान शिव और मां पार्वती का विवाह हुआ। इसलिए भगवान शिव को यह मास बहुत प्रिय है।
👉 मान्यता ये भी है, श्रावण मास में ही महादेव ने पृथ्वी पर अपने ससुराल आकर विचरण किया था, तो उनका अभिषेक कर स्वागत किया गया था, इसलिए श्रावण मास में अभिषेक का महत्व है।
इसलिए कुंवारी कन्याएं श्रावण मास में भगवान शिव और मां पार्वती का पूजन करती है, ताकि उनको मनवांछित वर प्राप्त हो सके। श्रावण मास में माता पार्वती की भी विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।
- शिव-पूजा में हल्दी, केतकी का फूल और तुलसी अर्पित नहीं करना चाहिए,
- सावन माह में दिन में नहीं सोना चाहिए, बिस्तर का त्याग करना चाहिए। सावन में इन बातों का ध्यान रख कर आप महादेव की कृपा पा सकते हैं।
----------------------------------------------------
अब "धर्म नगरी" की सदस्यता राशि, अपना शुभकामना संदेश या विज्ञापन प्रकाशित करवाकर अपनों को (अपने नाम से) प्रति भेजने के लिए Dharm Nagari के QR कोड को स्कैन कर सहयोग राशि भेजें और इसकी सूचना (स्क्रीन शॉट) हमे वाट्सएप 8109107075 पर हमें भेजें-
----------------------------------------------------
सावन मास में भगवान शिव का अभिषेक अत्यंत शुभ-फलदायी होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रुद्राभिषेक करने से विभिन्न प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलती है। रुद्राभिषेक का अर्थ है- भगवान रुद्र का अभिषेक करना यानी शिवलिंग पर रुद्र मित्रों के साथ अभिषेक करना। इसलिए, विशेष रूप से सावन के सोमवार को अभिषेक किया जा सकता है। शिवलिंग में अभिषेक जल, दूध के अलावा कई चीजों से किया जाता है, जिसका फल अलग-अलग होता है। सावन में भगवान शिव का इन वास्तु से करें अभिषेक-
जल से अभिषेक-
भगवान शिव के बाल स्वरूप का ध्यान करते हुए शिवलिंग में चढ़ा चला सकते हैं। ऐसा करने से व्यक्ति को विभिन्न प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलती है।
दूध से अभिषेक-
शिवलिंग का दूध का अभिषेक करना शुभ माना जाता है। इससे शारीरिक और मानसिक संतुष्टि मिलती है। इसके साथ कुंडली में चंद्रमा की स्थिति मजबूत होती है।
फलों के रस से अभिषेक-
भगवान शिव को शुद्ध फलों के रस से भी अभिषेक करना शुभ माना जाता है। स्तुति करते हुए फलों के रस से अभिषेक करने से अखंड धन की प्राप्ति होती है।
सरसों के तेल से अभिषेक-
ग्रह बाधा का नाश करने के लिए शिवलिंग में सरसों के तेल से अभिषेक करना शुभ होगा। सरसों का तेल चढ़ाते समय ॐ नमः शिवाय का जाप करना चाहिए। सरसों का तेल चढ़ाने से व्यक्ति को हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त होती है।
चने की दाल का अभिषेक-
भगवान शिव का ध्यान करते हुए चने की दाल का अभिषेक करने से हर तरह के कर्ज से छुटकारा मिल जाता है। इसके साथ ही सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
काले तिल से अभिषेक-
भगवान शिव को काले तिल से अभिषेक करना भी शुभ माना जाता है। मान्यता है कि मुट्ठी भर तिल भगवान शिव को चढ़ाने से हर कामना पूर्ण हो जाती है और कष्टों का निवारण हो जाता है।
शहद मिश्रित गंगा जल से रुद्राभिषेक-
शहद मिश्रित गंगा जल से रुद्राभिषेक थोड़े से गंगाजल में शहद मिलाकर भगवान शिव का अभिषेक करने से वह जल्द प्रसन्न हो जाते हैं जिससे परिवारिक सुख शांति के साथ संतान की प्राप्ति होती है।
👉 माता पार्वती पूर्व जन्म में सती के रूप में प्रजापति दक्ष के यज्ञ में भगवान शिव का अपमान ना सह सकीं और यज्ञ की अग्नि में देह त्याग कर दिया। देह त्याग करते समय उन्होंने भगवान विष्णु से वर मांगा, कि उनकी प्रीति हर जन्म में भगवान शिव के प्रति बनी रहे।
👉 माता सती ने हिमाचल राज के घर पर पुत्री रूप में जन्म लिया। माता पार्वती ने नारदजी के कहने अनुसार, भगवान शिव की घोर तपस्या की। भगवान शिव ने श्रावण मास में ही माता पार्वती की भक्ति से प्रसन्न होकर दर्शन दिए थे। भगवान शिव और माता पार्वती का पुनः मिलन हुआ भगवान शिव और मां पार्वती का विवाह हुआ। इसलिए भगवान शिव को यह मास बहुत प्रिय है।
👉 मान्यता ये भी है, श्रावण मास में ही महादेव ने पृथ्वी पर अपने ससुराल आकर विचरण किया था, तो उनका अभिषेक कर स्वागत किया गया था, इसलिए श्रावण मास में अभिषेक का महत्व है।
इसलिए कुंवारी कन्याएं श्रावण मास में भगवान शिव और मां पार्वती का पूजन करती है, ताकि उनको मनवांछित वर प्राप्त हो सके। श्रावण मास में माता पार्वती की भी विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।
----------------------------------------------------
संबंधित लेख भी (पढ़ें / देखें)-
अमरनाथजी गुफा के निकट बादल फटने के बाद बचाव अभियान जारी,
पहली बार हेलीकॉप्टर से डॉक्टरों को पहुंचाया, ये हैं हेल्पलाइन नंबर
☟
http://www.dharmnagari.com/2022/07/Amarnath-Cave-cloud-bust-Rescue-Operation-continue-see-Help-Line-No.html
देवाधिदेव महादेव को प्रसन्न करने भगवान श्रीराम द्वारा स्तुति की गई "शम्भु स्तुतिः"...सुने व पढ़ें
☟
http://www.dharmnagari.com/2021/06/Shambhu-Stuti-recited-by-Sriram-to-please-Shiv-ji-Bhagwan-Ram-ne-Shankarji-ko-Prasanna-karane-Stuti-Gai.html
भगवान शिव के रहस्य, शिव के अस्त्र-शस्त्र, गण, शिष्य, द्वारपाल, पार्षद, पुत्र, शिष्य, चिन्ह, श्रीपद, अवतार ...
☟
http://www.dharmnagari.com/2022/02/Shivji-ke-Rahasya-Secretes-of-Devadhidev-Mahadev.html
----------------------------------------------------
देवाधिदेव महादेव भगवान शिव देव-दानव, मानव आदि सब पर कृपा बरसाते हैं, इसलिए उन्हें औघड़दानी भी कहते हैं।उनकी पूजा, उनका मंत्र (पंचाक्षरी- ॐ नमः शिवाय) सबसे सरल होता है।श्रावण मास में ग्रहों की स्थिति विशेष के कारण, ज्योतिर्विदों / ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस सावन में इन तीन राशि के जातकों के लिए सर्वाधिक अनुकूल एवं फलदायी रहेगा-
मेष-
सावन मास यह समय बहुत ही शुभ रहने वाला है। इस राशि के जातकों को शिवजी की अनेक कृपा होगी। नौकरी और व्यापार में तरक्की होगी। सकारात्मक लाभ होगा। साथ ही मान प्रतिष्ठा भी मिलेगी। श्रावण मास के सोमवार के दिन शिवलिंग पर जल चढ़ाने से शुभ फल मिल सकते हैं।
मिथुन-
मिथुन-
श्रावण माह अत्यंत लाभप्रात हो सकता है। नई नौकरी खोज रहे मिथुन राशि के जातकों को महादेव की कृपा से नई नौकरी मिल सकती है। वहीं, नौकरी कर रहे जातकों की पदोन्नति की मनोकामना इस शिव-कृपा से भी पूरी हो सकती है। व्यापारियों के लिए भी यह समय बहुत अच्छा है। श्रावण मास में जितना हो सके शिवाजी की पूजा करें।
मकर-
मकर राशि के जातकों पर श्रावण मास में महादेव की कृपा मिलेगी। नौकरी-व्यवसाय में अच्छा वित्तीय लाभ कमा सकते हैं। कुछ जातकों को नई नौकरी मिल सकती है। जीवनसाथी के साथ यह माह अच्छा रहेगा। श्रावण मास में महादेव का जल से अभिषेक करें।
मकर-
मकर राशि के जातकों पर श्रावण मास में महादेव की कृपा मिलेगी। नौकरी-व्यवसाय में अच्छा वित्तीय लाभ कमा सकते हैं। कुछ जातकों को नई नौकरी मिल सकती है। जीवनसाथी के साथ यह माह अच्छा रहेगा। श्रावण मास में महादेव का जल से अभिषेक करें।
सावन मास में कांवड़ यात्रा
सावन मास में कांवड़ यात्रा का अत्यंत महत्व है, जिसमें श्रद्धालु, शिव-भक्त बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। देश के हर राज्य के शहरों में निकट के ज्योतिर्लिंगों / प्राचीन शिवालय की ओर पवित्र नदियों का जल कांवड़ में लेकर अभिषेक करने पैदल हर हर-बम बम, शिव-शिव आदि बोलते हुए निकलते हैं। भगवान शिव के प्रिय सावन माह में कांवड़-यात्रा के अतिरिक्त अन्य यात्राएं भी हैं, जो पूरे साल के चुनिंदा महीनों में शुरू होती है। अमरनाथ यात्रा
सनातन हिन्दू धर्म में माना जाता है, कि मोक्ष की प्राप्ति के लिए श्री अमरनाथ यात्रा यथासंभव एक बार करनी चाहिए। अमरनाथजी की यात्रा सबसे कठिन धार्मिक यात्राओं में से एक मानी जाती है। यात्रा का शुभारम्भ पहलगाम से होती है। (To read- Link- http://www.dharmnagari.com/2022/06/43-days-Amarnath-Yatra-from-tomorrow-1st-batch-of-pilgrims-left-the-base-camp-for-Kashmir-Valley.html ) हर साल प्राकृतिक रूप से बर्फ का शिवलिंग बनता है। इस पवित्र गुफा की लंबाई 19 मीटर, चौड़ाई 16 मीटर और ऊंचाई 11 मीटर है। यह शिवलिंग चंद्रमा के प्रकाश (moon light) के साथ बढ़ता और घटता रहता है। इसी कारण यात्रा के अंतिम दिन- श्रावण शुक्ल पूर्णिमा अर्थात रक्षाबंधन पर शिवलिंग पूर्ण आकार में होता है और उसके बाद आने वाली अमावस्या तक इसका आकार लगातार घटता जाता है। इस साल 30 जून से आरंभ होने वाली अमरनाथजी (बाबा बर्फानी) की यह यात्रा 11 अगस्त 2022 को सम्पन्न हो जाएगी। करीब 43 दिनों की यह यात्रा काफी कठिन मानी जाती है।
श्रीखंड महादेव यात्रा
भगवान शिव के सभी धार्मिक स्थलों में से इसे सबसे ऊंचा स्थल श्रीखंड महादेव का मंदिर माना जाता है। यह मंदिर हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में स्थित है। समुद्र तल से 18, 300 फीट की ऊंचाई में स्थित इस मंदिर में भगवान के दर्शन करने के लिए व्यक्ति को लगभग 35 किमी खड़ी सीधी चढ़ाई करनी पड़ती है, जो हर एक व्यक्ति के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है।
सनातन हिन्दू धर्म में माना जाता है, कि मोक्ष की प्राप्ति के लिए श्री अमरनाथ यात्रा यथासंभव एक बार करनी चाहिए। अमरनाथजी की यात्रा सबसे कठिन धार्मिक यात्राओं में से एक मानी जाती है। यात्रा का शुभारम्भ पहलगाम से होती है। (To read- Link- http://www.dharmnagari.com/2022/06/43-days-Amarnath-Yatra-from-tomorrow-1st-batch-of-pilgrims-left-the-base-camp-for-Kashmir-Valley.html ) हर साल प्राकृतिक रूप से बर्फ का शिवलिंग बनता है। इस पवित्र गुफा की लंबाई 19 मीटर, चौड़ाई 16 मीटर और ऊंचाई 11 मीटर है। यह शिवलिंग चंद्रमा के प्रकाश (moon light) के साथ बढ़ता और घटता रहता है। इसी कारण यात्रा के अंतिम दिन- श्रावण शुक्ल पूर्णिमा अर्थात रक्षाबंधन पर शिवलिंग पूर्ण आकार में होता है और उसके बाद आने वाली अमावस्या तक इसका आकार लगातार घटता जाता है। इस साल 30 जून से आरंभ होने वाली अमरनाथजी (बाबा बर्फानी) की यह यात्रा 11 अगस्त 2022 को सम्पन्न हो जाएगी। करीब 43 दिनों की यह यात्रा काफी कठिन मानी जाती है।
श्रीखंड महादेव यात्रा
भगवान शिव के सभी धार्मिक स्थलों में से इसे सबसे ऊंचा स्थल श्रीखंड महादेव का मंदिर माना जाता है। यह मंदिर हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में स्थित है। समुद्र तल से 18, 300 फीट की ऊंचाई में स्थित इस मंदिर में भगवान के दर्शन करने के लिए व्यक्ति को लगभग 35 किमी खड़ी सीधी चढ़ाई करनी पड़ती है, जो हर एक व्यक्ति के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है।
श्रीखंड महादेव मंदिर के रास्ते में अनेक धार्मिक स्थल भी है, जिसमें प्राकृतिक शिव गुफा, निरमंड में सात मंदिर, जावों में माता पार्वती सहित नौ-देवियां, परशुराम मंदिर, हनुमान मंदिर अरसु आदि हैं। श्रीखंड यात्रा इस साल 11 जुलाई से आरंभ होकर 24 जुलाई 2022 तक चलेगी। इस यात्रा में जाने के लिए भक्त को शिमला जाना होता है। इसके बाद रामपुर बुशहर जाते हैं, जहां से जाओं गांव के लिए बस मिलती है। यहीं से श्रीखंड यात्रा का ट्रैक शुरू है।
मणिमहेश यात्रा
हिमाचल की पीर पंजाल की पहाडिय़ों के पूर्वी हिस्से में तहसील भरमौर में प्रसिद्ध मणिमहेश तीर्थ स्थित है। यहां पर भगवान शिव के दर्शन मणि रूप में होंगे। इसी कारण इसे मणिमहेश कहा जाता है। इसके साथ ही धौलाधार, पांगी और जांस्कर पर्वत श्रृंखलाओं से घिरा कैलाश पर्वत को मणिमहेश कैलाश के नाम से जाना जाता है। समुद्र तल से लगभग 13,500 फीट की ऊंचाई में मणिमहेश नाम की पवित्र सरोवर स्थित है।
मणिमहेश यात्रा
हिमाचल की पीर पंजाल की पहाडिय़ों के पूर्वी हिस्से में तहसील भरमौर में प्रसिद्ध मणिमहेश तीर्थ स्थित है। यहां पर भगवान शिव के दर्शन मणि रूप में होंगे। इसी कारण इसे मणिमहेश कहा जाता है। इसके साथ ही धौलाधार, पांगी और जांस्कर पर्वत श्रृंखलाओं से घिरा कैलाश पर्वत को मणिमहेश कैलाश के नाम से जाना जाता है। समुद्र तल से लगभग 13,500 फीट की ऊंचाई में मणिमहेश नाम की पवित्र सरोवर स्थित है।
मणि महेश की यात्रा श्रीकृष्ण जन्माष्टमी से आरंभ होकर राधाष्टमी तक होती है। यह पर पवित्र मणि महेश झील में स्नान के पश्चात कैलाश पर्वत के दर्शन करने हर वर्ष लाखों भक्त पहुंचते हैं। मणि महेश तक पहुंचने के लिए भक्त हड़सर नामक स्थान तक अपने वाहन आदि से आ सकते हैं। इसके बाद करीब 13 किलोमीटर पैदल यात्रा शुरू होती है।
कैलाश मानसरोवर यात्रा
कैलाश मानसरोवर की यात्रा के लिए हर व्यक्ति जाना चाहता है। क्योंकि यह जगह भगवान शिव का निवास स्थान है। इसके अलावा बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए भी यह पवित्र जगह है। कैलाश मानसरोवर पहुंचने के लिए तीन अलग-अलग राजमार्ग-लिपुलेख दर्रा (उत्तराखंड), नाथू ला दर्रा (सिक्किम) और काठमांडू का इस्तेमाल किया जाता है। इन तीनों ही रास्तों को काफी जोखिम भरा माना जाता है। इसमें करीब 25 दिन का समय लगता है। इस यात्रा की शुरुआत मई और सितंबर के महीनों के बीच की जाती है। कैलाश पर्वत तिब्बत में स्थित एक पर्वत श्रेणी है। इसके पश्चिम दिशा में मानसरोवर है।
कैलाश मानसरोवर यात्रा
कैलाश मानसरोवर की यात्रा के लिए हर व्यक्ति जाना चाहता है। क्योंकि यह जगह भगवान शिव का निवास स्थान है। इसके अलावा बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए भी यह पवित्र जगह है। कैलाश मानसरोवर पहुंचने के लिए तीन अलग-अलग राजमार्ग-लिपुलेख दर्रा (उत्तराखंड), नाथू ला दर्रा (सिक्किम) और काठमांडू का इस्तेमाल किया जाता है। इन तीनों ही रास्तों को काफी जोखिम भरा माना जाता है। इसमें करीब 25 दिन का समय लगता है। इस यात्रा की शुरुआत मई और सितंबर के महीनों के बीच की जाती है। कैलाश पर्वत तिब्बत में स्थित एक पर्वत श्रेणी है। इसके पश्चिम दिशा में मानसरोवर है।
![]() |
| राजेश पाठक अवैतनिक संपादक- "धर्म नगरी" / DN News |
👉 Pls call on 6261868110 to associate with "धर्म नगरी" / DN News as Part-Times Local Representative (Reporter) & earn working few hours per week.
सावन के महीने में क्या खाएं...
- सावन के इन महीने में लौकी, तुरई और टमाटर जैसी जल्दी पचने वाली एवं बैल पर उगने वाली सब्जियां ही खानी चाहिए।
- आयुर्वेद के अनुसार, सावन माह में सेब, केला, अनार,नाशपाती, जामुन और आम जैसे मौसमी फल खाना चाहिए।
- सावन में पुराना चावल, गेहू, मक्का, सरसों, मूंग और अरहर की दाल जैसे अनाज खाने चाहिए।
आयुर्वेद के अनुसार, श्रावण के मौसम में हरड़ खाने से पेट की सारी बीमारियों से बचाव होता हैं
- इस मौसम में गर्म और ताज़ा फूड, हॉट ड्रिंक्स ज्यादा लेना चाहिए।
-- सावन के महीने में अधिक तला भूना खाना नहीं खाना चाहिए।
- सावन के इन महीने में लौकी, तुरई और टमाटर जैसी जल्दी पचने वाली एवं बैल पर उगने वाली सब्जियां ही खानी चाहिए।
- आयुर्वेद के अनुसार, सावन माह में सेब, केला, अनार,नाशपाती, जामुन और आम जैसे मौसमी फल खाना चाहिए।
- सावन में पुराना चावल, गेहू, मक्का, सरसों, मूंग और अरहर की दाल जैसे अनाज खाने चाहिए।
आयुर्वेद के अनुसार, श्रावण के मौसम में हरड़ खाने से पेट की सारी बीमारियों से बचाव होता हैं
- इस मौसम में गर्म और ताज़ा फूड, हॉट ड्रिंक्स ज्यादा लेना चाहिए।
-- सावन के महीने में अधिक तला भूना खाना नहीं खाना चाहिए।
----------------------------------------------------
इसे भी (पढ़ें / देखें)-
हनुमानजी की कृपा, शनि देव का आशीर्वाद हेतु करें श्रीराम रक्षा स्रोत्र का पाठ
सुख-समृद्धि, निर्भीकता हेतु प्रतिदिन करें श्रीराम रक्षा स्त्रोत
☟
http://www.dharmnagari.com/2022/04/Sri-Ram-Raksha-Srotra-Sukh-Samriddhi-Nirbhikta-pane-pratidin-karen-path.html
अपने शिशु की रक्षा हेतु करें पढ़ें ये "रक्षा स्तोत्र", श्रीकृष्ण द्वारा पूतना को मारने के पश्चात ...सुने व पढ़ें
☟
http://www.dharmnagari.com/2022/07/Apane-Bacche-ki-Raksha-hetu-kare-ye-Stuti-Stuti-for-safety-of-your-Child.html
अपना अमूल्य मत / प्रतिक्रिया नीचे कमेंट बॉक्स [POST A COMMENT] में अवश्य दें... क्योंकि हम "ज्योतिष है तो समस्या का समाधान है" कॉलम में आपके प्रश्न का उत्तर विद्वान-अनुभवी ज्योतिषाचार्य द्वारा दिया जाएगा।
----------------------------------------------------
- "धर्म नगरी" व DN News का विस्तार प्रत्येक जिले के ग्रामीण व शहरी क्षेत्र में हो रहा है। प्रतियों को नि:शुल्क देशभर में धर्मनिष्ठ संतो आश्रम को भेजने हेतु हमें दानदाताओं की आवश्यकता है। साथ ही "धर्म नगरी" के विस्तार हेतु बिजनेस पार्टनर / प्रसार प्रबंधक की आवश्यकता है। -प्रबंध संपादक email- dharm.nagari@gmail.com Twitter- @DharmNagari W.app- 8109107075
| "धर्म नगरी" की सदस्यता, शुभकामना, विज्ञापन या दान देने, अपने नाम (की सील) के साथ लेख / कॉलम / इंटरव्यू सहित "धर्म नगरी" की प्रतियां अपनों को देशभर में भिजवाने हेतु है। ध्यान रखें, आपके सहयोग से हम आपके ही नाम से "धर्म नगरी" की प्रति आप जहाँ चाहते हैं, भिजवाते / बटवाते हैं। सहयोग हेतु हम किसी झूठ या फर्जी बातों का सहारा नहीं लेते, क्योंकि हम "धर्म नगरी" को अव्यावसायिक रूप से जनवरी 2012 से प्रकाशित कर रहें है, हमें विपरीत परिस्थतियों के साथ TV पर दिखने वाले कुछ संपन्न एवं भौतिकवादी संत-धर्माचार्य-कथावाचकों के कड़वे अनुभव भी मिले हैं। इतना पारदर्शी व अव्यावसायिक प्रकाशन अबतक हमारे संज्ञान में देश में दूसरा नहीं हैं, जिसका हमें बहुत गर्व है... -प्रसार प्रबंधक |
----------------------------------------------------
कथा हेतु सम्पर्क करें- व्यासपीठ की गरिमा एवं मर्यादा के अनुसार श्रीराम कथा, वाल्मीकि रामायण, श्रीमद भागवत कथा, शिव महापुराण या अन्य पौराणिक कथा करवाने हेतु संपर्क करें। कथा आप अपने बजट या आर्थिक क्षमता के अनुसार शहरी या ग्रामीण क्षेत्र में अथवा विदेश में करवाएं, हमारा कथा के आयोजन की योजना, मीडिया-प्रचार आदि में भी सहयोग रहेगा। -प्रसार प्रबंधक "धर्म नगरी / DN News" मो.9752404020, 8109107075-वाट्सएप ट्वीटर / Koo / इंस्टाग्राम- @DharmNagari ईमेल- dharm.nagari@gmail.com यूट्यूब- #DharmNagari_News
----------------------------------------------



Post a Comment