हरियाली अमावस्या : नक्षत्र के अनुसार लगाएं एक पौधा, करें सेवा, मनोकामना होगी पूरी !


हरियाली अमावस्या को पुनर्वसु नक्षत्र है, जिसका 
शाब्दिक अर्थ है- पुन: या दोबारा। इस तरह पुनर्वसु अर्थ हुआ दोबारा धनी, सौभाग्यशाली तथा सुरक्षित हो जाना  

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सावन को पड़ने वाला अमावस्या- हरियाली अमावस्या (28 जुलाई) को पुनर्वसु नक्षत्र, अमृत एवं सर्वार्थ-सिद्धि योग रहेगा। हरियाली अमावस्या को भगवान शिव-पार्वती पूजन के साथ तुलसी, आम, बरगद,  नीम आदि के पौधे रोपने से देव एवं पितृ दोनों प्रसन्न होते हैं। यद्यपि हरियाली अमावस्या 27 जुलाई की रात्रि 9:11 बजे लगेगी और अगले दिन रात्रि 11:24 बजे तक रहेगी, परन्तु उदयातिथि (सूर्य जिस दिन उदय हो) के अनुसार गुरुवार को ही हरियाली अमावस्या होगी। इस दिन के अधिपति भगवान विष्णु है। इसलिए इस दिन पीपल और बरगद का पौधा अवश्य लगाएं। पितृ-दोष की शांति हेतु शाम को पीपल के पेड़ के निकट दीप जलाएं। ज्योतिर्विदों के अनुसार अमावस्या पर पितरों के निमित्त तर्पण और दान-पुण्य करने से परिवार में सुख-शांति आती है। 

राशियों के अनुसार लगाए वृक्ष (हरियाली अमावस्या को)-
मेष- खैर या खेर
वृषभ- गूलर, अनार
मिथुन- अपामार्ग-नीम
कर्क- पलाश
सिंह- आक-सूरजमुखी
कन्या- अपामार्ग, पीपल

तुला- आम, गूलर
वृश्चिक- खेर, वट
धनु- आम, पीपल
मकर- जामुन, पीपल
कुंभ- जामुन, वट
मीन- पीपल
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हर नक्षत्र का संबंध एक वृक्ष से अवश्य होता है। आप जिस नक्षत्र में जन्मे हो हरियाली अमावस्या पर उसी नक्षत्र से संबंधित पौधा लगाइए। हरियाली अमावस्या पर किस-किस नक्षत्र में जन्मे लोग कौन सा वृक्ष लगा सकते हैं। श्रावण कृष्ण पक्ष की अमवस्या 28 जुलाई (गुरुवार) को पुनर्वसु नक्षत्र दोपहर 2:41 बजे तक रहेगा। 27 नक्षत्रों में से पुनर्वसु सातवां नक्षत्र है। वसुओं को उप देवताओं के समान माना जाता है और ये शुभता, उदारता, धन तथा सौभाग्य जैसी विशेषताओं के स्वामी होते है। पुनर्वसु का शाब्दिक अर्थ है पुन: यानि दोबारा। इस तरह पुनर्वसु शब्द का अर्थ हुआ दोबारा धनी, सौभाग्यशाली तथा सुरक्षित हो जाना।
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कामदा एकादशी : सावन कृष्ण की एकादशी को भगवान विष्णु की पूजा व दान से मिलता है अक्षय पुण्य- 
महाभारत, भविष्य पुराण व विष्णुधर्मोत्तर पुराण में उल्लेख है- कि सावन में भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए - कामदा एकादशी 24 जुलाई रविवार को
http://www.dharmnagari.com/2022/07/Kamda-Ekadashi-Puja-Daan-ka-akshay-phal-July-24-ko.html
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पुनर्वसु, आर्द्रा नक्षत्र के बाद आता है और आर्द्रा नक्षत्र अपने आप में धन के प्रति अनिच्छा अथवा धन की कमी, उग्र स्वभाव अर्थात उदारता की कमी आदि विशेषताओं को प्रदर्शित करता है
।इसके चलते आर्द्रा नक्षत्र के प्रभाव से धन की कमी, उदारता की कमी, सौभाग्य की कमी तथा सुरक्षा की कमी भी हो जाती है। ऐसे में इसी कमी को पूरा करने के लिए पुनर्वसु नक्षत्र का आगमन होता है जो इसके नाम के अर्थ को सार्थक करता है।

सावन महीने की अमावस्या को हरियाली अमावस्या के नाम से जाना जाता है और कई जगहों पर इसे चितलगी अमावस्या भी कहते हैं। सबसे मुख्य यह, कि इस बार हरियाली अमावस्या पर गुरू पुष्य नक्षत्र है और सिद्धि योग रहेगा। यही कारण है कि हरियाली अमावस्या अत्यंत विशेष मानी जा रही है। सावन का महीना हरियाली का द्योतक है। इस पूरे महीने चारों ओर ग्रीनरी बढ़ जाती है इसलिए इस अमावस्या का संबंध पर्यावरण से भी है।
हरियाली अमावस्या के दिन पिंडदान और तर्पण करना अच्छा मना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन पेड़-पौधा लगाना बहुत अच्छा होता है। इस दिन पेड़ पौधों को लगाने से देवी देवता प्रसन्न होते हैं और आशीर्वाद प्रदान देते हैं। शास्त्रों में लिखा है, हरियाली अमावस्या के दिन हर किसी को एक न एक पेड़ अवश्य लगाना चाहिए। किसी कारणवश अगर अमावस्या पर आप वृक्ष ना भी लगा पाएं, तो आने वाले आठ दिन तक कभी भी पौधा रोप सकते हैं। 

हरियाली अमावस्या के दिन भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा करें। शिवलिंग का पंचामृत से अभिषेक करें, सफेद फूल चढ़ाएं। देवी पार्वती को श्रृंगार चढ़ाएं। दीपक जलाएं, उन्‍हें भोग लगाएं। पूजा के दौरान ऊँ उमामहेश्वराय नम: मंत्र का जाप करें। इस अमावस्या पर अपने पूर्वजों के लिए तर्पण करें। सावन की इस अमावस्‍या पर दान अवश्य करें। 

हर नक्षत्र का संबंध एक वृक्ष से अवश्य होता है। आप जिस नक्षत्र में जन्मे हो हरियाली अमावस्या पर उसी नक्षत्र से संबंधित पौधा लगाएं। हरियाली अमावस्या पर आप अपने नक्षत्र में जन्म से संबधित वृक्ष लगा सकते हैं- 

अश्विनी- कुचला का वृक्ष लगाएं एवं इस वृक्ष की पूजा करनी चाहिए।
कृतिका- गूलर का पेड़ आज हरियाली अमावस्या पर लगाना चाहिए।
रोहिणी- जामुन के पेड़ का रोपण करना लाभप्रद रहेगा। आठ आप जामुन का पेड़ लगाएं।

मृगशीरा- इस नक्षत्र का संबंध खैर के पेड़ से है। अतः खैर का पेड़ लगाकर प्रतिदिन पानी दें।
आर्द्रा- शीशम का पौधा लगाएं, प्रतिदिन पानी दें, उसकी सेवा करें, आपके लिए लाभपद्र होगा।
पुनर्वसु- आपके के लिए बांस का पेड़ लगाना लाभदायक होगा।

पुष्य- आप पीपल का पेड़ लगाकर प्रतिदिन पीपल में पानी डालें और सेवा करें।
आश्लेषा- नागकेसर का पेड़ लगाना लाभदायक होता है। अतः इसका पौधा लगाएं।
पूर्वा फाल्गुनी- इस नक्षत्र में जन्में जातको को ढाक का पेड़ लगाना चाहिए।

उत्तरा फाल्गुनी- इस नक्षत्र में जन्मे जातको को पाकड़ का पेड़ लगाना शुभ फलदायी होगा।
चित्रा-  आपको बेल का पेड़ लगाना शुभ-फलदायी होगा। अतः आप बेल का पेड़ लगाएं।
स्वाति- स्वाति नक्षत्र में जन्में जातक को अर्जुन का वृक्ष लगाएं और उसकी सेवा भी करें।

विशाखा- इस नक्षत्र में जन्मे जातकों को विकंकत का पेड़ लगाना चाहिए।
अनुराधा- आपको मौलश्री का वृक्ष लगाना चाहिए, बहुत लाभप्रद होगा।
ज्येष्ठा- इस नक्षत्र में जन्मे जातकों को चीड़ का वृक्ष लगाना चाहिए।

मूल- मूल नक्षत्र में जन्मे लोगों को साल का वृक्ष लगाने से बहुत लाभ मिलता है।
पूर्वाषाढ़ा- इस नक्षत्र में जन्में वाले लोगों को जलवेतस का पे़ड़ लगाना चाहिए।
उत्तराषाढ़ा- आपको कटहल का पेड़ हरियाली अमावस्या के दिन लगाना चाहिए।  

श्रवण- श्रावण नक्षत्र में जन्मे लोगों को मदार का पेड़ लगाना चाहिए।
धनिष्ठा- धनिष्ठा नक्षत्र का संबंध शमी वृक्ष से है, अतः आप शमी का पेड़ लगाएं।
शतभिषा- आपको कदम्ब का पेड़ हरियाली अमावस्या के दिन रोपना चाहिए।

पूर्वा भाद्रप्रद- आपको आम का पेड़ लगाना चाहिए। इससे आपको कई शुभ फल प्राप्त होंगे।
उत्तर भाद्रप्रद- इस नक्षत्र के जातक को नीम का पेड़ लगाना लाभप्रद साबित होगा।
रेवती नक्षत्र- आपको हरियाली अमावस्या पर महुआ का पेड़ लगाना चाहिए।
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