30 लाख किसानों के बैंक खाते में आज ट्रांसफर होंगे 3200 करोड़, ये रुपये...


...प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के अंतर्गत खाते में आएंगे 
- किसानों को समय पर लाभ नहीं मिला, तो लगेगा जुर्माना
2016 में शुरु PMFBY हुई, जिसके अंतर्गत मे अब तक 1.83 लाख करोड़ रुके दावों का निपटान
- जाने PMFBY में कवर फसलें और जोखिम   

धर्म नगरी / DN News  
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प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के अंतर्गत 30 लाख किसानों को 3200 करोड़ रुपये की फसल बीमा दावा राशि आज (11 अगस्त) संबंधित किसानों के खाते में आएगी। यह राशि 
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान झुंझुनू (राजस्थान) में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान ट्रांसफर करेंगे। कार्यक्रम में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी और राज्य के कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा भी रहेंगे।  

सर्वाधिक राशि मध्य प्रदेश को 
कुल दावा राशि में मध्य प्रदेश के किसानों को सर्वाधिक राशि 1156 करोड़ रुपये हस्तांतरित (transfer) होंगे। इसके बाद राजस्थान के किसानों को 1121 करोड़ रुपये और छत्तीसगढ़ के किसानों को 150 करोड़ रुपये ट्रांसफर होंगे।  जबकि, शेष अन्य राज्यों के किसानों को 773 करोड़ रुपये भेजे जाएंगे। कृषि मंत्री ने कहा, कि केंद्र सरकार ने किसानों के हित में एक नई, आसान और सुविधाजनक दावा निपटान प्रणाली लागू की है, जिसके  अंतर्गत राज्य के प्रीमियम अंशदान का इंतजार किए बिना, केवल केंद्रीय सब्सिडी के आधार पर दावों का आनुपातिक भुगतान किया जा सकेगा।

विलंब होने पर लगेगा 12% जुर्माना !
केंद्रीय कृषि मंत्री ने एक बयान में कहा- ''खरीफ 2025 सत्र से, अगर कोई राज्य सरकार अपने सब्सिडी अंशदान में देरी करती है, तो उस पर 12 प्रतिशत का जुर्माना लगाया जाएगा और इसी तरह, अगर बीमा कंपनियां भुगतान में देरी करती हैं तो उन पर भी 12 प्रतिशत का जुर्माना लगाया जाएगा।''

आंध्र के किसानों को हुआ था नुकसान
पिछले महीने लोकसभा में पूछे गए एक प्रश्न का उत्तर देते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री चौहान 
ने बताया था, कि मोदी सरकार ने पूर्ववर्ती राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना (NAIS) को PMFBY में बदल दिया, जिसमें किसानों को हुए नुकसान के दावों का 21 दिनों के अंदर निपटान करने का आदेश दिया गया। कृषि मंत्री ने कहा- ''कुछ राज्यों ने घोषणा की थी कि वे किसान बीमा प्रीमियम का खर्च खुद उठाएंगे। लेकिन, आंध्र प्रदेश में तत्कालीन जगन सरकार लगातार 3 सालों तक प्रीमियम में अपने राज्य के हिस्से का योगदान करने में विफल रही। जिसकी वजह से आंध्र प्रदेश के किसानों को भारी नुकसान हुआ क्योंकि उन्हें उनके उचित फसल बीमा का लाभ नहीं मिला।"

2016 में आरंभ किया गया 
PMFBY 
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना या PMFBY की 2016 में शुरुआत के बाद से इसके अंतर्गत 1.83 लाख करोड़ रुपये के दावों का निपटान किया है, जबकि किसानों ने केवल 35,864 करोड़ रुपये का प्रीमियम चुकाया है।

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प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY)
PMFBY फसल के नुकसान से किसानों को होने वाली आर्थिक हानि को क्षतिपूर्ति (compensate) करने के लिए केंद्रीय कृषि मंत्रालय द्वारा लॉन्च योजना है। इसकी घोषणा 13 जनवरी 2016 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किया। इसके अंतर्गत खरीफ एवं रबी दोनों प्रकार के फसलों को कवर किया जाता है। योजना में प्राकृतिक आपदाओं जैसे सूखा, अतिवृष्टि, ओलावृष्टि, भूस्खलन के साथ-साथ कीटों एवं बीमारियों से होने वाले नुकसान को भी कवर किया गया है।
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➤ 2016 में केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में PMFBY को लांच किया गया। यह सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के लिए उपलब्ध है और राज्यों के साथ किसानों के लिए स्वैच्छिक है।

➤ राज्य/संघ राज्य क्षेत्र अपनी जोखिम धारणा और वित्तीय विचारों आदि को ध्यान में रखते हुए योजना के अंतर्गत सदस्यता लेने के लिए स्वतंत्र हैं।

➤ यह केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्य करता है, लेकिन इसका कार्यान्वयन राज्य सरकार द्वारा किया जाता है।

➤ फरवरी 2024 तक, 27 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों (UT) ने शुरुआत से लेकर अब तक एक या एक से अधिक सत्रों में इस योजना को लागू किया है।

➤ इस योजना में उपग्रह इमेजरी, ड्रोन, मानव रहित हवाई वाहन (UAV) और रिमोट सेंसिंग सहित उन्नत प्रौद्योगिकी के उपयोग की परिकल्पना की गई है।

➤ इसका उद्देश्य फसल कटाई प्रयोग (CCE) की योजना, उपज आकलन, हानि आकलन, रोकी गई बुवाई क्षेत्रों का आकलन और जिलों के समूहीकरण के लिए सुदूर संवेदन और अन्य संबंधित प्रौद्योगिकी के उपयोग को बढ़ावा देना है।

➤ PMFBY दिशानिर्देशों के प्रावधानों के अनुसार, किसान का प्रीमियम शेयर खरीफ फसलों के लिए 2%, रबी फसलों के लिए 1.5% और वाणिज्यिक/बागवानी फसलों के लिए 5% तक सीमित है।

➤ शिकायत निवारण तंत्र को और बेहतर बनाने के लिए कृषि रक्षक पोर्टल और हेल्पलाइन (KRPH) विकसित की गई है।

पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना (RWBCIS)
पूर्ववर्ती राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना (NAIS) की कमियों को दूर करने के लिए, 20 राज्यों में एक पायलट मौसम आधारित फसल बीमा योजना (WBCIS) आरंभ की गई (जैसा कि केंद्रीय बजट 2007-08 में घोषित किया गया था)।

WBCIS को रबी 2013-14 से रबी 2015-16 तक राष्ट्रीय फसल बीमा कार्यक्रम (NCIP) की एक पूर्ण घटक योजना के रूप में क्रियान्वित किया गया,

➯ इस योजना को PMFBY के अनुरूप  प्रीमियम और प्रशासनिक ढांचे के आधार पर पुनर्गठित किया गया और यह कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में पुनर्गठित WBCIS के रूप में खरीफ 2016 से देश में उपलब्ध है,

➯ इसका उद्देश्य प्रतिकूल मौसम के कारण होने वाले वित्तीय नुकसान से किसानों को बचाना है,

➯ RWBCIS, किसानों को फसल के नुकसान की भरपाई के लिए फसल की पैदावार के लिए मौसम के मापदंडों को “प्रॉक्सी” के रूप में उपयोग करता है, जबकि PMFBY, उपज जोखिम के आधार पर फसल के हानि को कवर करता है।


PMFBY में कवर फसलें 
 खाद्य फसल (खरीफ एवं रबी)
 तिलहन
 वार्षिक कमर्शियल/वार्षिक बागवानी की फसल

PMFBY के अंतर्गत कवर जोखिम  
फसल बुआई से लेकर कटाई तक का कवरेज,
 कम बारिश होने या मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण बुआई या रोपाई में बाधा आ जाए,
 सूखा, अकाल, बाढ़, सैलाब, कीट एवं रोग, भूस्खलन, प्राकृतिक आग एवं बिजली, तूफान, ओले, चक्रवात, आंधी, टेम्पेस्ट, तूफान एवं बवंडर सहित नहीं रोके जाने वाले सभी जोखिम इसके अंतर्गत कवर है।

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