मकर संक्रांति पर 85 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने संगम में लगाई डुबकी : प्रशासन


पोंगल जीवंत तमिल संस्‍कृति और प्रकृति से जुड़ाव का पर्व : PM मोदी
(धर्म नगरी / DN News) - प्रयागराज ब्यूरो
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मकर संक्रांति के दिन प्रातःकाल स्नान-दान को पद्मपुराण में उत्तम बताया गया है। स्कंद पुराण कालिका पुराण में बताया है- जो मनुष्य सूर्य के उत्तरायण होने अर्थात मकर संक्रांति के दिन निर्धनों, ब्राह्मणों को तिल व तिल से बनी वस्तुओं, वस्त्रदान, सुवर्ण दान करता है, शिव मंदिर में तिल के तेल का दीपक जलाता है, तिल से हवन करता है, उसकी इच्छाओं की पूर्ति होती है तथा पाप नष्ट होते है।

ज्योतिर्विदों के अनुसार, सूर्य के संक्रांति समय से 16 घटी पूर्व और 16 घटी बाद का समय पुण्यकाल होता है। इसी प्रकार निर्णय सिंधु के अनुसार जब सूर्यास्त के पहले ही संक्रांति होती है तो उभयमत में पूर्व ही पुण्यकाल होता है। मकर संक्रांति के बारे में धर्मग्रंथों के अनुसार, जिस दिन सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करता है, उसी दिन मकर संक्रांति होता है। भारतीय ज्योतिष कर्मकांड महासभा के अनुसार, 14 जनवरी 2026 कृष्ण पक्ष एकादशी तिथि को सर्वार्थसिद्धि योग एवं अमृतसिद्धि शुभ योग के साथ सूर्य जिसका पुण्यकाल प्रातः 8:39 बजे से विशेष मान्य होगा।

कोहरे और ठंड में स्नान, दान के साथ मकर संक्रांति 
मकर संक्रांति का पर्व आज (14 जनवरी) देशभर में हर्षोल्‍लास से मनाया जा रहा है। मकर संक्रांति सर्दियों के अंत एवं लंबे समय दिनों की शुरूआत का प्रतीक है। गंगा, नर्मदा आदि देश की पवित्र नदियों में लोगों ने स्नान कर विशेष तिथि (दिन) के महत्व के अनुसार निर्धन एवं अभावग्रस्त लोगों को दान दिए। पढ़ें संबंधित लेख- http://www.dharmnagari.com/2026/01/Makar-Sankranti-secrets-auspicious-time-remedies-Rahasya-Muhurt-Upaay.html

तीर्थराज प्रयाग में चल रहे माघ मेले के पहले प्रमुख स्नान पर्व- मकर संक्रांति पर कल्पवासियों सहित लाखों तीर्थयात्रियों ने संगम सहित गंगाजी के विभिन्न घाटों पर भोर से स्नान करना आरंभ कर दिया। पश्चिम बंगाल में मकर संक्रांति को पौष पर्व के रूप में मनाते हैं। श्रद्धालु नदियों और तालाबों में पवित्र पुण्य स्नान कर रहे हैं, वहीं घरों में चावल के आटे, नारियल, गुड़ और खीर से बनी पारंपरिक मिठाइयों की सुगंध फैली हुई है। प्रतिष्ठित गंगासागर मेले में लाखों श्रद्धालु देश के सबसे बड़े आध्यात्मिक आयोजनों में से एक में सम्मिलित होने एकत्र हो रहे हैं। 
देखें- तीर्थराज प्रयाग में चल रहे माघ मेले का दृश्य (14 जनवरी 2026)     

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मकर संक्रांति पर प्रयागराज माघ मेले का दूसरा बड़ा स्नान पर्व 15 जनवरी को निर्धारित होने के बावजूद आज (14 जनवरी) ही संगम तट पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा।  मेला प्रशासन के अनुसार, षटतिला एकादशी और मकर संक्रांति मुहूर्त के कारण 85 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने पुण्य की डुबकी लगाई। घाटों की लंबाई बढ़ाकर 3.69 किमी कर दी गई है। महाकुंभ में घाटों के किनारे ड्रेजिंग से भी एरिया में बढ़ोतरी हुई है। स्नानार्थियों की भीड़ को देखते हुए 24 स्नान घाटों, 1200 से अधिक चेंजिंग रूम सहित परिवहन व्यवस्था का विस्तार किया।

उत्तराखंड 
मकर संक्रांति के साथ उत्तराखंड में यह पर्व और मेलों का क्रम लोकसंस्कृति, आपसी मेलजोल और आस्था का उत्सव है। गंगा के तटों से लेकर पहाड़ों की चौपालों तक, यह पर्व उत्तराखंड की पहचान और उसकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को नई ऊर्जा प्रदान करता है। मकर संक्रांति के पावन अवसर पर उत्तराखंड के गंगा घाटों पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। श्रद्धा, विश्वास और भक्ति की गहराई का दृश्य हरकी पैड़ी (हरिद्वारपर दिखा, जब घने कोहरे और कड़ाके की ठंड के बीच श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान किया और सुबह की गंगा आरती में बड़ी संख्या में भाग लिया।  

उत्तरकाशी में मकर संक्रांति के साथ पौराणिक और ऐतिहासिक माघ मेले का शुभारंभ भी हो गया है। आठ-दिवसीय यह मेला धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। लोकमान्यताओं के अनुसार,  इसका संबंध महाभारत काल से जोड़ा जाता है, जबकि इतिहास में यह भारत और तिब्बत के बीच व्यापार का एक प्रमुख केंद्र रहा है। कभी यह मेला पूरे एक महीने तक चलता था, जिसमें दूर-दराज से व्यापारी और ग्रामीण बड़ी संख्या में पहुंचते थे।

कुमाऊँ अंचल में भी मकर संक्रांति और उत्तरायणी पर्व पूरे हर्षाेल्लास के साथ मनाया गया। उधमसिंह नगर के खटीमा में आयोजित उत्तरायणी कौतिक का शुभारंभ करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा- ऐसे आयोजनों के माध्यम से नई पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ती है और ये परंपराओं को जीवित रखने का सशक्त माध्यम बनते हैं।

चम्पावत जिले सहित पूरे कुमाऊँ क्षेत्र में मकर संक्रांति पर पारंपरिक घुघुतिया पर्व की धूम देखने को मिली। बच्चों ने पकवानों से बनी मालाएं गले में डालकर “काले कौवा काले, घुघुतिया माला खाले” की मधुर पुकार के साथ कौवों को बुलाया। लोक कथाओं के अनुसार यह पर्व सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के साथ मनाया जाता है और सदियों पुरानी यह परंपरा आज भी उसी उल्लास और श्रद्धा के साथ निभाई जा रही है।

गुजरात 
उत्तरायण का पर्व गुजरात में बड़े उत्साह और उमंग के साथ मनाया जा रहा है। गुजरात में पर्व को रंग-बिरंगी पतंगें उड़ाकर मनाते हैं। उत्तरायण के अवसर पर, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह अहमदाबाद के ऐतिहासिक श्री जगन्नाथ मंदिर में दर्शन किया एवं विभिन्न स्थानों पर पार्टी कार्यकर्ताओं एवं नागरिकों के साथ पतंग उत्सव में सम्मिलित हुए। "करुणा अभियान" के अंतर्गत राज्य सरकार ने मकर संक्रांति से पहले घायल पतंगों को बचाने के लिए 8,500 कर्मियों को तैनात किया है। समाचार लिखने के समय तक विश्व भर के पतंग प्रेमी राज्य के विभिन्न स्थानों पर आयोजित हो रहे अंतर्राष्ट्रीय पतंग उत्सवों में भाग लेने के लिए गुजरात आ रहे थे। 

तेलंगाना में तीन-दिवसीय मकर संक्रांति पर्व धार्मिक उत्साह और पारंपरिक उमंग के साथ मनाया जाता है। इन तीन दिनों तक राज्‍य के कस्‍बे से लेकर गांव तक उत्‍सव का उमंग दिखता है।
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प्रयागराज माघ मेला-2026 विशेषांक  
माघ मेले पर केंद्रित "धर्म नगरी माघ मेला-2026" के विशेषांक प्रकाशित हो रहे हैं, जिनका वितरण मेले में शिविरों में (सन्तों धर्माचार्यों, विभिन्न कार्यालयों, सरकारी एवं निजी प्रदर्शनियों आदि) को फ्री या "सौजन्य से..." हो रहा है। मेला क्षेत्र के प्रमुख पार्किंग, मेले में आने वाली कार, बस आदि निजी वाहनों में तीर्थयात्रियों, श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को दिया जा रहा है, जिस प्रकार प्रयागराज महाकुंभ-2025 पर "धर्म नगरी" के विशेषांकों को बांटा गया। आप भी अपने या किसी अन्य के नाम से विशेषांक बटवा सकते हैं। संपर्क करें +91 8109107075-वाट्सएप मो.  6261 868110 ईमेल- dharm.nagari@gmail.com 
(देखें ☟ पहला विशेषांक )
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Makar Sankranti, being celebrated today & tomorrow 
Festival of harvest, Makar Sankranti is being celebrated in different parts of the country today (14 January) and will be celebrated tomorrow as well. Makar Sankranti signals the end of winter and the beginning of longer days. The festival is known with different names in different parts of the country. It is celebrated as Pongal in Tamil Nadu, Uttarayan in Gujarat, Bhogali Bihu in Assam and Poush Sangkranti in West Bengal. This occasion marks the transition of the sun from the zodiac of Sagittarius to Capricorn. As this transition coincides with the sun’s movement from south to north, the festival is dedicated to the solar deity, Surya, and is observed to mark a new beginning.

In Kerala, the hill shrine of Sabarimala will celebrate Makara Vilakku festival today, coinciding with Makara Sankrama night, when devotees will witness the appearance of the Makarajyothi at Ponnambalamedu. Rituals including the procession with Thiruvabharanam, the sacred ornaments of Lord Ayyappa, will be held as part of the celebrations.
Thousands of pilgrims have already reached the area and are camping at various locations. Security has been tightened at the sannidhanam and Makarajyothi view points, with restrictions imposed on pilgrim movement during peak hours. Only 30,000 pilgrims will be allowed through virtual queue today.

तिलवत् स्निग्धं मनोऽस्तु वाण्यां गुडवन्माधुर्यम्
तिलगुडलड्डुकवत् सम्बन्धेऽस्तु सुवृत्तत्त्वम्…

मकर संक्रांति एक प्रमुख भारतीय पर्व है। यह पर्व 
सूर्य के धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करने के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। मकर संक्रांति को उत्तरायण का प्रारंभ भी माना जाता है। आज के दिन सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण की ओर गमन करते हैं। 

मान्यतानुसार, आज (मकर संक्रांति) को किए गए दान, जप और स्नान का विशेष महत्व है। आज के दिन लोग पवित्र नदियों में स्नान करते हैं और तिल, गुड़, खिचड़ी, वस्त्र आदि का दान करते हैं। मकर संक्रांति का कृषि क्षेत्र में भी अत्याधिक महत्व है क्योंकि इस समय रबी की फसल पककर तैयार होने लगती है। 

मकर संक्रांति पर्व समाज में भाईचारे का संदेश देता है। देश के अलग-अलग हिस्सों में मकर संक्रांति अलग-अलग नामों से मनाई जाती है। तमिलनाडु में इसे पोंगल, पंजाब में लोहड़ी, असम में माघ बिहू और गुजरात में उत्तरायण कहा जाता है। आज के दिन राजस्थान और गुजरात में विशेष रूप से पतंग उड़ाने की परंपरा है। इस तरह मकर संक्रांति न केवल एक धार्मिक पर्व ही है, बल्कि ये प्रकृति, कृषि और सामाजिक समरसता का प्रतीक भी है। यह त्योहार हमें दान, सद्भाव और सकारात्मकता का संदेश देता है।

प्रधानमंत्री मोदी ने 
मकर संक्रांति के अवसर पर देशवासियों को मकर संक्रांति, पोंगल, माघबिहू लोहड़ी समेत अन्‍य पर्वों की शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा- यह, एक भारत-श्रेष्ठ भारत की भावना को मजबूत करते हैं।
इस समय देश के अलग-अलग हिस्सों में लोहड़ी, मकर संक्रांति, माघ बिहू और अन्य त्योहारों की भी उमंग है। मैं भारत और दुनिया भर में रहने वाले सभी तमिल भाई-बहनों को पोंगल की और सभी पर्वों की बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं।

पोंगल जीवंत तमिल संस्‍कृति और प्रकृति से जुड़ाव का पर्व : PM मोदी
भावी पीढ़ियों के लिए मिट्टी की गुणवत्‍ता बनाए रखने, जल संरक्षण और संसाधनों के उचित उपयोग की आज आवश्यकता है। जब धरती हमें इतना कुछ देती है, तो उसका संरक्षण करना हमारा कर्तव्य है। इसी भावना से मिशन लाइफ, एक पेड़ मां के नाम और अमृत सरोवर जैसी पहल इसी भावना से प्रेरित है। ये बात प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज (14 जनवरी) नई दिल्‍ली में सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन के आवास पर आयोजित पोंगल समारोह में सभा में कही। उन्होंने कहा-

...सरकार कृषि को दीर्घकालिक और पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए प्रयासरत है। आने वाले समय में टिकाऊ कृषि पद्धतियां, जल प्रबंधन, प्राकृतिक खेती और कृषि प्रौद्योगिकी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।किसानों राष्ट्र निर्माण में सशक्त भागीदार हैं, जिनके प्रयासों से आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूती मिल रही है। केंद्र सरकार, किसानों को सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है और इसके लिए अथक प्रयास कर रही है।

...पोंगल जीवंत तमिल संस्‍कृति और प्रकृति से जुड़ाव का पर्व है, जो प्रकृति, परिवार और समाज के साथ संतुलन स्थापित करने का मार्ग प्रशस्‍त करता है। उन्‍होंने कहा कि पोंगल अब वैश्विक त्यौहार बन गया है, जो किसानों की मेहनत के सम्मान का प्रतीक है।

...पोंगल को धरती और सूर्य के प्रति आभार व्यक्त करने का अवसर है। आज देश के अन्य क्षेत्र भी पोंगल की तरह लोहड़ी, मकर संक्रांति और माघ बिहू जैसे त्यौहारों के उल्‍लास में झूम रहे हैं। यह, एक भारत-श्रेष्ठ भारत की भावना को और सुदृढ़ करता है। श्री मोदी ने कहा कि पोंगल का त्यौहार हमें प्रकृति को अपने जीवन का अभिन्न अंग बनाने के लिए प्रेरित करता है।
देखें / सुनें-

...तमिल संस्कृति विश्व की सबसे प्राचीन जीवंत सभ्यताओं में से एक है, जो सदियों को आपस में जोड़ती है, इतिहास से सीख लेती है और वर्तमान को भविष्य की ओर अग्रसर करती है। तमिल संस्कृति समूचे देश और मानवता की साझा विरासत है, जिसमें किसानों को जीवन का आधार माना जाता है। इसी से प्रेरित होकर आज का भारत अपनी जड़ों से शक्ति प्राप्त कर रहा है और नई संभावनाओं की ओर बढ़ रहा है।

मीडिया से बातचीत में डॉ. एल.मुरुगन ने पोंगल समारोह में सम्मिलित होने पर प्रधानमंत्री का आभार व्‍यक्‍त करते हुए देशवासियों को पोंगल और मकर संक्रान्ति की शुभकामनाएं दीं। 
देखें- शिवा कार्तिकेयन (दक्षिण भारतीय अभिनेता अपनी बेटी के साथ परम्परागत रूप से पोंगल बनाते हुए  
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