तीर्प्रथराज प्रयाग का संगम क्षेत्र यज्ञ भूमि है, स्वयं ब्रह्मा ने यहां किया था यज्ञ... जाने यज्ञ कुण्ड के...
- यज्ञ कुण्ड के अनुसार होते है उद्देश्य, मनोकामना की पूर्ति
यज्ञ कुण्ड मुख्यत: आठ प्रकार के होते हैं और सभी का प्रयोजन अलग-अलग होता है...
➯ अर्ध-चंद्राकार कुण्ड- इस कुण्ड का आकार अद्र्ध-चन्द्राकार रूप में होता है। इस यज्ञ कुण्ड का प्रयोग पारिवारिक जीवन से जुड़ी विभिन्न प्रकार की समस्याओं के निराकरण के लिए किया जाता है। इस यज्ञ कुण्ड में हवन करने पर साधक को सुखी जीवन का पुण्यफल प्राप्त होता है। परिवार मे सुख शांति हेतु पति-पत्नी दोनों को एक साथ आहुति देनी पड़ती हैं।
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आहुति के अनुसार हवन कुण्ड
✔ अगर अगर आपको हवन में 50 या 100 आहुति देनी हैं तो कनिष्ठा उंगली से कोहनी (1 फुट से 3 इंच) तक के माप का हवन कुण्ड तैयार करें।
✔ यदि आपको 1000 आहुति का हवन करना हैं तो इसके लिए एक हाथ लंबा (1 फुट 6 इंच ) हवन कुण्ड तैयार करें।
✔ एक लक्ष आहुति का हवन करने के लिए चार हाथ (6 फुट) का हवन कुण्ड बनाएं।
✔ दस लक्ष आहुति के लिए छ: हाथ लम्बा (9 फुट) हवन कुण्ड तैयार करें।
✔ कोटि आहुति (करोड़ में) का हवन करने के लिए 8 हाथ का (12 फुट) या 16 हाथ का हवन कुण्ड तैयार करें।
✔ यदि आप हवन कुण्ड बनवाने में असमर्थ हैं, तो आप सामान्य हवन करने के लिए चार अंगुल ऊँचा, एक अंगुल ऊँचा, या एक हाथ लम्बा-चौड़ा स्थण्डिल पीली मिट्टी या रेती का प्रयोग कर बनवा सकते हैं।
✔ इसके अतिरिक्त आप हवन कुण्ड को बनाने के लिए आप बाजार में मिलने वाले तांबे के या पीतल के बने-बनाए हवन कुण्ड का भी प्रयोग कर सकते हैं।
धर्म नगरी / DN News / प्रयागराज ब्यूरो
[न्यूज़, कवरेज कराने या अपने नाम से माघ मेला विशेषांक की कॉपियाँ बटवाने या कॉपी फ्री पाने हेतु वा.एप- 8109107075]
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यज्ञ कुण्ड मुख्यत: आठ प्रकार के होते हैं और सभी का प्रयोजन अलग-अलग होता है...
➯ योनिकुण्ड- यज्ञ के लिए प्रयोग में लाया जाने वाला यह कुण्ड योनि के आकार का होता है। इस कुण्ड कुछ पान के पत्ते के आकार का बनाया जाता है। इस यज्ञ कुण्ड का एक सिरा अद्र्ध-चन्द्राकार होता है तथा दूसरा त्रिकोणाकार होता है। इस तरह के कुण्ड का प्रयोग सुन्दर, स्वस्थ, तेजस्वी व वीर पुत्र की प्राप्ति हेतु विशेष रूप से किया जाता है।
➯ अर्ध-चंद्राकार कुण्ड- इस कुण्ड का आकार अद्र्ध-चन्द्राकार रूप में होता है। इस यज्ञ कुण्ड का प्रयोग पारिवारिक जीवन से जुड़ी विभिन्न प्रकार की समस्याओं के निराकरण के लिए किया जाता है। इस यज्ञ कुण्ड में हवन करने पर साधक को सुखी जीवन का पुण्यफल प्राप्त होता है। परिवार मे सुख शांति हेतु पति-पत्नी दोनों को एक साथ आहुति देनी पड़ती हैं।
➯ त्रिकोण कुण्ड- इस यज्ञ कुण्ड का निर्माण त्रिभुज के आकार में किया जाता है। इस यज्ञ कुण्ड का विशेष रूप से शत्रुओं पर विजय पाने और उन्हें परास्त करने के लिए किया जाता है।
➯ वृत्त कुण्ड- वृत्त कुण्ड गोल आकृति लिए हुए होता है। इस कुण्ड का विशेष रूप से जन-कल्याण, देश में सुख-शांति बनाये रखने आदि के लिए किया जाता है। इस प्रकार के यज्ञ कुंड का प्रयोग प्राचीन काल में बड़े-बड़े ऋषि-मुनि किया करते थे।
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प्रयागराज माघ मेला-2026 विशेषांक
माघ मेले पर केंद्रित "धर्म नगरी माघ मेला-2026" के विशेषांक प्रकाशित हो रहे हैं, जिनका वितरण मेले में शिविरों में (सन्तों धर्माचार्यों, विभिन्न कार्यालयों, सरकारी एवं निजी प्रदर्शनियों आदि) को फ्री या "सौजन्य से..." हो रहा है। मेला क्षेत्र के प्रमुख पार्किंग, मेले में आने वाली कार, बस आदि निजी वाहनों में तीर्थयात्रियों, श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को दिया जा रहा है, जिस प्रकार प्रयागराज महाकुंभ-2025 पर "धर्म नगरी" के विशेषांकों को बांटा गया। आप भी अपने या किसी अन्य के नाम से विशेषांक बटवा सकते हैं। संपर्क करें +91 8109107075-वाट्सएप मो. 6261 868110 ईमेल- dharm.nagari@gmail.com
(देखें ☟ पहला विशेषांक )
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➯ समाष्टास्त्र कुण्ड- इस प्रकार के अष्टाकार कुंड का प्रयोग रोगों के निदान की कामना लिए किया जाता है। सुखी, स्वस्थ्य, सुन्दर और निरोगी बने रहने के लिए ही इस यज्ञ कुण्ड में हवन करने का विधान है।
➯ समषडास्त्र कुण्ड- यह कुण्ड छ: कोण लिए हुए होता है। इस प्रकार के यज्ञ कुण्डों का प्रयोग प्राचीन काल में बहुत अधिक होता था। प्राचीन काल में राजा-महाराजा शत्रुओं में वैमनस्यता का भाव जाग्रत करने के लिए इस प्रकार के यज्ञ कुण्डों का प्रयोग करते थे।
➯ चतुष्कोणास्त्र कुण्ड- इस यज्ञ कुण्ड का प्रयोग साधक अपने अपने जीवन में अनुकूलता लाने के लिए विशेष रूप से करता है। इस यज्ञ कुण्ड में यज्ञ करने से व्यक्ति की भौतिक हो अथवा आध्यात्मिक दोनों ही प्रकार की इच्छाओं की पूर्ति होती है।
देखें-
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ध्यान दें- धर्म नगरी" पेपर एवं मैगजीन केवल फ्री या "सौजन्य से..." ही भेजी या बांटी जाती है। महाकुंभ-2025 विशेषांकों के फ्री या किसी "सौजन्य से..." कॉपियां बांटी व भेजी गई। उसके बाद (मार्च 2025 से) न तो किसी को "धर्म नगरी" का सदस्य बनाया जाता है, न ही विज्ञापन का कोई रेट है, क्योंकि प्रकाशन पूरी तरह अव्यावसायिक या बिना लाभ-हानि के होता है। "धर्म नगरी पेपर एवं मैगजीन को फ्री या किसी "सौजन्य से..." (विज्ञापन, संतों धर्माचार्यों, हिन्दुओं आदि के सहयोग से) से देशभर में भेजा या किसी अवसर (जैसे- माघ मेला) पर बाटा या दिया जाता है... माघ मेला प्रयागराज, संगम क्षेत्र में लगाए गए स्टीकर-
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➯ पद्म कुण्ड- कमल के फूल के आकार लिए यह यज्ञ कुण्ड अठारह भागों में विभक्त दिखने के कारण अत्यंत ही सुन्दर दिखाई देता है। इसका प्रयोग तीव्रतम प्रहारों व मारण प्रयोगों से बचने हेतु किया जाता है।
हवन कुण्ड की आकृति (बनावट)
हवन कुण्ड में तीन सीढिय़ाँ होती हैं, जिन्हें ‘मेखला’ कहा जाता हैं।
हवन कुण्ड की इन सीढिय़ों का रंग अलग-अलग होता हैं।
1. हवन कुण्ड की सबसे पहली सीधी का रंग सफेद होता हैं।
2. दूसरी सीढ़ी का रंग लाल होता हैं।
3. अंतिम सीढ़ी का रंग काला होता हैं।
हवन कुण्ड में तीन सीढिय़ाँ होती हैं, जिन्हें ‘मेखला’ कहा जाता हैं।
हवन कुण्ड की इन सीढिय़ों का रंग अलग-अलग होता हैं।
1. हवन कुण्ड की सबसे पहली सीधी का रंग सफेद होता हैं।
2. दूसरी सीढ़ी का रंग लाल होता हैं।
3. अंतिम सीढ़ी का रंग काला होता हैं।
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ऐसा माना जाता हैं, कि हवन कुण्ड की इन तीनों सीढ़ियों में तीन देवता निवास करते हैं-
1. हवन कुण्ड की पहली सीढ़ी में विष्णु भगवान का वास होता हैं।
2. दूसरी सीढ़ी में ब्रह्माजी का वास होता हैं।
3. तीसरी तथा अंतिम सीढ़ी में शिवजी का वास होता हैं।
1. हवन कुण्ड की पहली सीढ़ी में विष्णु भगवान का वास होता हैं।
2. दूसरी सीढ़ी में ब्रह्माजी का वास होता हैं।
3. तीसरी तथा अंतिम सीढ़ी में शिवजी का वास होता हैं।
आहुति के अनुसार हवन कुण्ड
✔ अगर अगर आपको हवन में 50 या 100 आहुति देनी हैं तो कनिष्ठा उंगली से कोहनी (1 फुट से 3 इंच) तक के माप का हवन कुण्ड तैयार करें।
✔ यदि आपको 1000 आहुति का हवन करना हैं तो इसके लिए एक हाथ लंबा (1 फुट 6 इंच ) हवन कुण्ड तैयार करें।
✔ एक लक्ष आहुति का हवन करने के लिए चार हाथ (6 फुट) का हवन कुण्ड बनाएं।
✔ दस लक्ष आहुति के लिए छ: हाथ लम्बा (9 फुट) हवन कुण्ड तैयार करें।
✔ कोटि आहुति (करोड़ में) का हवन करने के लिए 8 हाथ का (12 फुट) या 16 हाथ का हवन कुण्ड तैयार करें।
✔ यदि आप हवन कुण्ड बनवाने में असमर्थ हैं, तो आप सामान्य हवन करने के लिए चार अंगुल ऊँचा, एक अंगुल ऊँचा, या एक हाथ लम्बा-चौड़ा स्थण्डिल पीली मिट्टी या रेती का प्रयोग कर बनवा सकते हैं।
✔ इसके अतिरिक्त आप हवन कुण्ड को बनाने के लिए आप बाजार में मिलने वाले तांबे के या पीतल के बने-बनाए हवन कुण्ड का भी प्रयोग कर सकते हैं।
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