संगम नोज पर स्नान को लेकर शुरू विवाद पदवी तक पहुंचा, शिविर के सामने त्रिवेणी मार्ग पर लगातार विरोध व सभा में...

...चल रहे आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हुआ
 "मेरा निर्णय अकाट्य, सुप्रीम कोर्ट भी मानता है" शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती 
- प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट में मामला होने का हवाला देकर जारी किया नोटिस
- मेला प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से 24 घंटे में मांगा जवाब, उत्तर में स्वामीजी ने कहा- हम भी आज रात 12 बजे तक ईमेल से जवाब देते हुए 24 घंटे में प्रशासन में मांगेंगे जवाब  
"शंकराचार्य लिखने पर सुप्रीम कोर्ट से रोक नहीं" स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद (प्रशासन के नोटिस पर)
माघ मेले में शिविर के सामने "त्रिवेणी मार्ग" पर टेंट लगाकर विरोध-प्रदर्शन करते स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द #Dharm_Nagari_ 
धर्म नगरी /
DN News
(W.app- 8109107075 न्यूज / कवरेज कराने, अपने नाम से प्रयागराज माघ मेला में विशेषांक बटवायें या कॉपी फ्री पाने हेतु)
-राजेश पाठक/संगमलाल त्रिपाठी  प्रयागराज ब्यूरो

मौनी अमावस्या पर संगम नोज पर स्नान को लेकर प्रशासन और ज्योतिष्पीठ पीठाधीश्वर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के बीच शुरू हुआ विवाद अब शंकराचार्य की पदवी तक पहुंच गया है। मेला प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट के 14 अक्टूबर 2022 के एक आदेश का हवाला देते हुए नोटिस जारी कर पूछा है, कि स्वयं को शंकराचार्य कैसे घोषित कर लिया। इस पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से कहा गया, कि उनके शंकराचार्य लिखने पर सुप्रीम कोर्ट से कोई रोक नहीं है।

प्रयागराज मेला प्राधिकरण की ओर से जारी नोटिस माघ मेला त्रिवेणी मार्ग पर पर स्थित शंकराचार्य के शिविर के बाहर चस्पा किया गया है। नोटिस में कहा गया- ज्योतिष्पीठ में शंकराचार्य पद का मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। जब तक सुप्रीम कोर्ट से अपील निस्तारित नहीं कर दी जाती या पट्टाभिषेक के संबंध में कोई अग्रिम आदेश नहीं दिया जाता, तब तक कोई भी धर्माचार्य शंकराचार्य के रूप में पट्टाभिषेकित नहीं हो सकता।

नोटिस में कहा गया है कि माघ मेला में शिविर में लगाए गए बोर्ड पर आपने खुद को ज्योतिष्पीठ का शंकराचार्य घोषित किया है। आपके इस कृत्य से उच्चतम न्यायालय की अवहेलना दर्शित होती है। नोटिस में लिखा है, कि 24 घंटे के अंदर यह स्पष्ट करें, कि आप अपने नाम के आगे शंकराचार्य शब्द का उपयोग कैसे कर रहे हैं अथवा अपने को ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य रूप में कैसे प्रचारित कर रहे हैं।
सुनें- (link)
https://youtu.be/1o3I52hXhD0?si=t6M3T2Ezp6niKYdv

इस पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से कहा गया कि नाम से पहले शंकराचार्य लिखने पर सुप्रीम कोर्ट से कोई रोक नहीं है और प्रशासन जिस आदेश का हवाला दे रहा है, उससे पहले उनका पट्टाभिषेक हो चुका था । शंकराचार्य की तरफ से सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता पीएन मिश्र ने उनका पक्ष रखते हुए बताया कि कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया गया था कि अब ब्रह्मलीन हो
चुके स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के स्थान पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद शंकराचार्य होंगे।

----------------------------------------------- 
प्रयागराज माघ मेला-2026 विशेषांक  
माघ मेले पर केंद्रित "धर्म नगरी माघ मेला-2026" के विशेषांक प्रकाशित हो रहे हैं, जिनका वितरण मेले में शिविरों में फ्री या "सौजन्य से..." हो रहा है। पहले विशेषांक के बाद दूसरे विशेषांक बसंत पंचमी व माघ पूर्णिमा के मध्य निकलेगा। अंतिम विशेषांक "माघ मेला-2026 स्मृति विशेषांक" महाशिवरात्रि पर निकलेगा। सभी विशेषांकों को तीर्थयात्रियों, श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को फ्री या किसी के "सौजन्य से..." दिया जा रहा है, जिस प्रकार प्रयागराज महाकुंभ-2025 पर विशेषांकों को बांटा व दिया गया। आप भी अपने या किसी अन्य के नाम से (अपनी शुभकामना, न्यूज, कवरेज के साथ) विशेषांक बटवाने हेतु संपर्क करें +91 8109107075-वाट्सएप मो.  6261 868110 ईमेल- dharm.nagari@gmail.com 
(देखें ☟ पहला विशेषांक )
----------------------------------------------- 
 
"जब विधिवत मेरे पास मामला आएगा, तभी जवाब देंगे : पुरी शंकराचार्य बोले
गोवर्धन मठ पुरी पीठ के शंकराचार्य जगतगुरु स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने कहा है, कि उनका निर्णय अकाट्य होता है। उनके निर्णय को सुप्रीम कोर्ट भी मानता है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर जारी विवाद पर न्यूज एजेंसी के प्रश्न पर शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती ने कहा, उनके पास जब विधिवत यह मामला आएगा, तभी वह इसका जवाब देंगे। अभी उनके पास यह मामला नहीं आया है। इसलिए वह इस बारे में कुछ भी नहीं कहेंगे। इसके साथ ही उन्होंने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को लाडला बताया।

माघ मेले की त्रिवेणी मार्ग के सेक्टर-4 (त्रिवेणी मार्ग, पूर्वी पटरी) स्थित अपने शिविर में पुरी पीठ के शंकराचार्य जगद्गुरु स्वामी निश्चलानंद सरस्वती महाराज आज (20 जनवरी) को भक्तों के धर्म एवं अध्यात्म से जुड़े प्रश्नों का उत्तर दे रहे थे। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को लेकर मौनी अमावस्या पर संगम नोज पर स्नान को लेकर हुए विवाद और उनके अनशन पर पुरी शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद ने सीधे तौर पर कोई जवाब नहीं दिया। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को दिए गए नोटिस के उत्तर में पुरी शंकराचार्य ने कहा, कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। मेला प्रशासन अपना काम करे, सामने वाला उसका जवाब देगा।

शिविर के सामने रुके और किया प्रणाम
त्रिवेणी मार्ग पर पुरी पीठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती महाराज का शिविर पटरी पर है, तो स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का शिविर उत्तरी पटरी पर है, जिसके बगल में (उनके गुरु भाई एवं शंकराचार्य स्वरूपानंद के शिष्य) द्वारिका शारदापीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती का शिविर है। स्नान को लेकर प्रशासन के साथ मौनी अमावस्या को हुए विवाद के तीसरे दिन (20 जनवरी) को अविमुक्तेश्वरानंद महाराज ने अपने शिष्यों एवं समर्थकों के साथ मेले में गोरक्षा-यात्रा निकाली। उनकी यात्रा जैसे ही स्वामी निश्चलानंद सरस्वती महाराज के शिविर के सामने पहुंची, तो शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद वहां रुक गए। इसके बाद अपनी पालकी से नीचे उतरकर पुरी पीठाधीश्वर के शिविर के मुख्य गेट तक गए। गेट से ही उन्होंने सामने बैठे पुरी शंकराचार्य को प्रणाम किया और इसके बाद अपनी पालकी पर बैठकर आगे बढ़ गए। पुरी शंकराचार्य उस समय अपने भक्तों के प्रश्नों का उत्तर दे रहे थे। इस बारे में किए गए प्रश्न पर पुरी पीठाधीश्वर ने कहा, कि उनका ध्यान उस ओर नहीं गया।
---------------------------------------------------------


"जिनको आपने पकड़कर रखा है, उनको बुला दीजिए। हमको ले चलिए स्नान करा दीजिए, मामला खत्म कर दीजिए। और अगर आपको इश्यू बनाना है, तो आप बनाइये, हम तैयार। हमको इश्यू से डर नहीं लगता... और हमको गिरफ्तरी से डर नहीं है, आपकी गोली से भी डर नहीं है। हम हर चीज के लिए तैयार है। अगर आपको इश्यू बनाना है, तो आप बनाइये। जितना देर करेंगे, उतना इश्यू बनेगा" -स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, संगम मौनी अमावस्या स्नान 
-
"यहॉं पर हम सबको इसलिए इकट्ठा नहीं कर रहे हैं, क्योंकि यहाँ मेला का माहौल बिगड़ जाएगा। हमने 10-11 मार्च को दिल्ली में सब इकट्ठा होंगे। वहाँ बताएंगे कि हमारा क्या कहना है" -स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, 19 जनवरी, 2026 
---------
शिविर के ठीक सामने त्रिवेणी मार्ग (चकर प्लेट रोड पर) लगे अस्थाई टेंट में अधिवक्ता पीएन मिश्रा ने विस्तार से स्वामीजी का पक्ष रखा, मेला प्रशासन व शासन के कार्य को तर्क एवं कानून की धाराओं के माघ्यम से गलत बताते हुए कहा, कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश में कहीं नहीं लिखा है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद स्वयं को शंकराचार्य नहीं लिख सकते। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में ही उनको शंकराचार्य कहा है। मेला प्रशासन ने जो नोटिस दिया है, वह सुप्रीम कोर्ट की न्यायिक कार्यवाही में हस्तक्षेप है। इसके लिए अधिकारियों पर अवमानना की कार्यवाही की जा सकती है।

नोटिस देने गए कानूनगो को पहली बार लौटाया
मेला प्रशासन ने सोमवार देर रात को ही नोटिस जारी कर दिया था। नोटिस पर 19 जुलाई 2026 की तिथि अंकित है। सोमवार रात 12 बजे कानूनगो शंकराचार्य के शिविर में नोटिस देने पहुंचे। कानूनगो ने शंकराचार्य के शिष्यों से नोटिस लेने के लिए कहा लेकिन शिष्यों ने नोटिस लेने से मना कर दिया। मंगलवार सुबह कानूनगो ने दोबारा जाकर शिविर के बाहर नोटिस चस्पा कर दिया।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के तर्क
जब शृंगेरी और द्वारका के शंकराचार्य  (स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द के गुरु भाई) यह कह रहे हैं, कि हम शंकराचार्य हैं, तो आखिर किस प्रमाण की आवश्यकता है कि हम शंकराचार्य हैं या नहीं ? खुद सरकार (उत्तर प्रदेश) ने महाकुंभ-2025 में एक पत्रिका छापी जिसमें उन्हें शंकराचार्य बताया था।
- शंकराचार्य वह है, जिसे बाकी अन्य तीन पीठों के शंकराचार्य मान्यता देते हैं। दो पीठों द्वारका पीठ और शृंगेरी पीठ के शंकराचार्य उन्हें शंकराचार्य कहते हैं। पुरी के शंकराचार्य ने उनके बारे मैं कुछ नहीं कहा है। उन्होंने न तो यह कहा कि वह शंकराचार्य नहीं हैं और न ही यह कहा कि शंकराचार्य हैं।
- क्या मुख्यमंत्री या राष्ट्रपति तय करेंगे कि शंकराचार्य कौन है ? यह अधिकार सिर्फ शंकराचार्यों के पास है, कि शंकराचार्य कौन होगा
 

माघ में स्नान के लिए पैदल जाना ही शास्त्र सम्मत : जगदगुरु रामभद्राचार्य
प्रयागराज में माघ स्नान को लेकर हुई (स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर) कार्रवाई, मौनी अमावस्या पर स्नान के संदर्भ में जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य ने शास्त्र सम्मत आचरण के महत्व पर विशेष बल दिया है। उन्होंने (चित्रकूट में) स्पष्ट किया, कि सनातन धर्म में शास्त्रों के अनुसार चलना अनिवार्य है। उन्होंने बताया, कि माघ स्नान के लिए पैदल जाना ही शास्त्र सम्मत परंपरा है और वे स्वयं भी इसी पद्धति का पालन करते हैं। स्वामी रामभद्राचार्य ने इस पर विशेष जोर दिया, कि जो व्यक्ति शास्त्रों के विरुद्ध आचरण करता है, उसे जीवन में न तो सुख की प्राप्ति होती है और न ही शांति मिलती है।
-----------------------------------------------

"धर्म नगरी" फ्री (कॉम्प्लिमेंट्री) कॉपी पाने हेतु अपना पूरा पता व्हाट्सएप करें। नियमित रूप से पाने हेतु वर्ष में एक बार अपने किसी परिजन, प्रिय व्यक्ति के जन्मदिन की बधाई आदि या पुरखे की पुण्यतिथि पर स्मरण करते हुए अपने सामर्थ्य के अनुसार अपने नाम से "धर्म नगरी" भिजवाएं। सहयोग राशि या विज्ञापन आपके बजट पर।राशि केवल "धर्म नगरी" के चालू खाते नंबर- 325397 99922 स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया SBI IFS Code- CBIN0007932 भोपाल) अथवा 8109107075 पर online पर करें। स्क्रीन शॉट व्हाट्सएप करें, जिससे आपकी शुभकामना आदि के साथ आपके नाम से "धर्म नगरी" भेजी या बटवाई जा सकें, जिसकी जानकारी आपको दी जाएगी।    

No comments