महाशिवरात्रि : शिवलिंग एवं शिवरात्रि के रात के वैज्ञानिक रहस्यों को पढ़कर आप ऐसा करने को विवश हो सकते हैं !
- शिवलिंग की बनावट एक एलिप्सोइड है,
- शिवलिंग ऐसी आकृति है जो ब्रह्मांडीय तरंगों को सर्वाधिक अपनी ओर खींचती है - वैज्ञानिकों शोध एवं NASA का रिसर्च
धर्म नगरी / DN News
(न्यूज़, कवरेज, शुभकामना आदि देने अथवा फ्री कॉपी मंगवाने हेतु वाट्सएप- 8109107075)
आचार्य नित्यानंद गिरी*
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क्या आपने कभी सोचा है कि दुनिया की सबसे बड़ी स्पेस एजेंसी नासा आखिर भारत के शिवलिंगों पर रिसर्च क्यों कर रही है ? और क्यों इस साल 15 फरवरी की महाशिवरात्रि पर एक ऐसा दुर्लभ ब्रह्मांडीय मुहूर्त "कॉस्मिक अलाइनमेंट" बन रहा है, जो पिछले 100 सालों में कभी नहीं देखा गया। वैज्ञानिकों का मानना है, कि उस रात एक ऐसा चमत्कार होने वाला है जो सीधे आपके शरीर और आपके भाग्य को बदल सकता है। अगर आपने इस रहस्य को नहीं समझा तो आप जीवन का सबसे बड़ा अवसर खो देंगे। हम केवल श्रद्धा की बात नहीं करेंगे, बल्कि हम बात करेंगे उस डिवाइन साइंस (दैवीय विज्ञान) की, जिसने आधुनिक वैज्ञानिकों को भी आश्चर्यचकित दिया है।
एक शिवलिंग पर होने वाला कंपन सीधे ब्रह्मांड के दूसरे कोने पर प्रभाव डालता है। यह मंदिर केवल पूजा के स्थान नहीं थे, ये कम्युनिकेशन हब्स थे। हमारे पूर्वजों ने इन पत्थरों को इस तरह चार्ज किया था, कि महाशिवरात्रि जैसी रातों में, जब पृथ्वी का झुकाव तारों की तरफ एक विशेष कोण पर होता है, तब यह शिवलिंग एक डाटा ट्रांसफर का काम करते थे। यही कारण है कि उस रात किया गया संकल्प सीधे ब्रह्मांड यानी शिव तक पहुंचता है। यह कोई पौराणिक कहानी नहीं। यह फ्रीक्वेंसी और वाइब्रेशन का वो खेल है, जिसे समझने नासा आज भी दिन-रात प्रयास कर रहा है। परन्तु क्या यह सारी बातें केवल आधुनिक विज्ञान की खोज है ? बिल्कुल नहीं।
अब प्रश्न यह उठता है- यह मिलन कैसे होगा ? क्या इसके लिए कोई मंत्र है या शरीर की कोई विशेष स्थिति? शिव पुराण के एक गुप्त अध्याय में उस विधि का संकेत दिया गया है, जिसे जानकर आप अपनी ऊर्जा को एक ही रात में शून्य से शिखर तक ले जा सकते हैं। यदि आप वह विशेष व्यवस्था और उस चमत्कारी मुहूर्त के बारे में इसी वीडियो के एक खास हिस्से में बताऊंगा जहां मैं पुराणों के उस पन्ने को खोलूंगा जिसे सदियों से छुपा कर रखा गया है। क्योंकि अगर आपने वह गुप्त बात जान ली तो 15 फरवरी की वह रात आपके जीवन की आखिरी साधारण रात होगी। उसके बाद सब कुछ बदल जाएगा। अब धैर्य एवं गंभीरता से आप उस रहस्य को पढ़ें या जानें, जिसे नासा की हाल की रिपोर्ट्स और हमारे प्राचीन कैलेंडरों के मिलन से सामने आई है।
नासा के सेटेलाइट्स ने यह भी देखा है, कि महाशिवरात्रि की रात शिवलिंगों के ऊपर का आकाश अन्य रातों की तुलना में अधिक आयनीकृत होता है। यह साक्षात प्रमाण है, कि महादेव का यह पर्व केवल धार्मिक नहीं, बल्कि एक कॉस्मिक इवेंट है, जो आपके डीएनए तक को रीप्रोग्राम करने की ताकत रखता है।
नासा की सेटेलाइट्स ने भारत के प्रमुख ज्योतिर्लिंगों के ऊपर कुछ ऐसी ऊर्जा रेडियो एक्टिव एनर्जी रिकॉर्ड की है जिसका संबंध सीधे महाशिवरात्रि की रात से है और सबसे बड़ी बात इस बार महाशिवरात्रि पर ग्रहों की स्थिति कुछ ऐसी है कि एक मैग्नेटिक पोर्टल खुलने वाला है। आखिर क्या है वह रहस्य और आपको उस रात ठीक किस समय क्या करना है? चलिए इस रहस्य की गहराई में उतरते हैं। अब उस गहरे रहस्य की बात करते हैं, जिसे सुनकर बड़े-बड़े भौतिक शास्त्रियों की बुद्धि चकरा गई है।
क्या आपने कभी सोचा है, दुनिया भर में फैले प्राचीन शिव मंदिर और ज्योतिर्लिंग आसमान के तारों और नक्षत्रों के साथ एक सीधी रेखा में क्यों हैं ? नासा के वैज्ञानिकों ने जब डीप स्पेस से आने वाली आवाजों को रिकॉर्ड किया तो वे हैरान रह गए। अंतरिक्ष के सन्नाटे में एक अजीब सी हमिंग है, जो बिल्कुल ॐ की ध्वनि से मेल खाती है और सबसे बड़ा खुलासा यहां है- शिवलिंग केवल पत्थर नहीं है बल्कि यह एक यूनिवर्सल एंटीना है।
वैज्ञानिकों का एक शोध कहता है, कि शिवलिंग की बनावट एक एलिप्सोइड है। यह वो आकृति है जो ब्रह्मांडीय तरंगों को सबसे ज्यादा अपनी ओर खींचती है। आज का विज्ञान जिस टॉरस फील्ड की बात कर रहा है, यानी वो ऊर्जा जो अपने आप में ही घूमती रहती है। शिवलिंग ठीक उसी सिद्धांत पर बना है। गांव के बड़े-बूढे जब कहते थे- शिवलिंग में साक्षात शिव का वास है, तो उनका आशय था- यहां प्राण यानी एनर्जी का संघन रूप है। आज की जनरेशन जो क्वांटम एंटेंगलमेंट की बात करती है, उसे शिवलिंग के माध्यम से समझिए-
वैज्ञानिकों का एक शोध कहता है, कि शिवलिंग की बनावट एक एलिप्सोइड है। यह वो आकृति है जो ब्रह्मांडीय तरंगों को सबसे ज्यादा अपनी ओर खींचती है। आज का विज्ञान जिस टॉरस फील्ड की बात कर रहा है, यानी वो ऊर्जा जो अपने आप में ही घूमती रहती है। शिवलिंग ठीक उसी सिद्धांत पर बना है। गांव के बड़े-बूढे जब कहते थे- शिवलिंग में साक्षात शिव का वास है, तो उनका आशय था- यहां प्राण यानी एनर्जी का संघन रूप है। आज की जनरेशन जो क्वांटम एंटेंगलमेंट की बात करती है, उसे शिवलिंग के माध्यम से समझिए-
एक शिवलिंग पर होने वाला कंपन सीधे ब्रह्मांड के दूसरे कोने पर प्रभाव डालता है। यह मंदिर केवल पूजा के स्थान नहीं थे, ये कम्युनिकेशन हब्स थे। हमारे पूर्वजों ने इन पत्थरों को इस तरह चार्ज किया था, कि महाशिवरात्रि जैसी रातों में, जब पृथ्वी का झुकाव तारों की तरफ एक विशेष कोण पर होता है, तब यह शिवलिंग एक डाटा ट्रांसफर का काम करते थे। यही कारण है कि उस रात किया गया संकल्प सीधे ब्रह्मांड यानी शिव तक पहुंचता है। यह कोई पौराणिक कहानी नहीं। यह फ्रीक्वेंसी और वाइब्रेशन का वो खेल है, जिसे समझने नासा आज भी दिन-रात प्रयास कर रहा है। परन्तु क्या यह सारी बातें केवल आधुनिक विज्ञान की खोज है ? बिल्कुल नहीं।
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#महाशिवरात्रि महादेव शिव के वरयात्रा (बारात) का ऐसा वर्णन शायद आपने पहले सुना हो !
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जो बात आज नासा पहेलियों में कह रहा है, हमारे शिव पुराण ने उसे हजारों साल पहले स्पष्ट कर दिया था। शिव पुराण के कोटि रुद्र संहिता में महाशिवरात्रि का जो वर्णन मिलता है, वह केवल एक कहानी नहीं बल्कि ब्रह्मांड के मिलन की एक मैनुअल है। पुराणों में कहा गया है- महाशिवरात्रि वो समय है, जब निराकार ब्रह्म ने साकार रूप में पहली बार शिवलिंग के रूप में दर्शन दिए थे। वैज्ञानिक भाषा में कहें, तो यह सिंगुलरिटी का धमाका था, जिसे आज हम बिग बैंग कहते हैं।
शिव पुराण कहता है कि उस रात प्रकाश का एक ऐसा स्तंभ प्रकट हुआ था, जिसका ना आदि था ना अंत वही ज्योतिर्लिंग है। लेकिन यहां एक ऐसा रहस्य छुपा है जो आपकी रूह कंपा देगा। पुराणों में एक ऐसी गुप्त व्यवस्था का उल्लेख है, जिसके माध्यम से एक साधारण मनुष्य भी उस रात सीधे भगवान शिव यानी उस कॉस्मिक कॉन्शियसनेस से संपर्क कर सकता है। हमारे ऋषियों ने इसे महा मिलन की रात कहा है, जहां जीव का शिव से मिलन संभव है।
अब प्रश्न यह उठता है- यह मिलन कैसे होगा ? क्या इसके लिए कोई मंत्र है या शरीर की कोई विशेष स्थिति? शिव पुराण के एक गुप्त अध्याय में उस विधि का संकेत दिया गया है, जिसे जानकर आप अपनी ऊर्जा को एक ही रात में शून्य से शिखर तक ले जा सकते हैं। यदि आप वह विशेष व्यवस्था और उस चमत्कारी मुहूर्त के बारे में इसी वीडियो के एक खास हिस्से में बताऊंगा जहां मैं पुराणों के उस पन्ने को खोलूंगा जिसे सदियों से छुपा कर रखा गया है। क्योंकि अगर आपने वह गुप्त बात जान ली तो 15 फरवरी की वह रात आपके जीवन की आखिरी साधारण रात होगी। उसके बाद सब कुछ बदल जाएगा। अब धैर्य एवं गंभीरता से आप उस रहस्य को पढ़ें या जानें, जिसे नासा की हाल की रिपोर्ट्स और हमारे प्राचीन कैलेंडरों के मिलन से सामने आई है।
नासा के हबल टेलिस्कोप और जेम्स वेब ने अंतरिक्ष में कुछ ऐसी गामा रे बस्ट्स रिकॉर्ड की हैं, जिनका सीधा संबंध पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र अर्थात मैग्नेटिक फील्ड से जुड़ रहा है। और सबसे हैरान करने वाली बात जानते हैं क्या है ? इस 15 फरवरी 2026 की रात पृथ्वी, चंद्रमा और सौरमंडल के कुछ विशेष ग्रह एक ऐसी जीरो पॉइंट स्थिति में आ रहे हैं, जो सीधे भारत के ज्योतिर्लिंगों के ऊपर एक एनर्जी वर्टेक्स पैदा करेगा। वैज्ञानिकों का मानना है, कि उस रात पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल यानी ग्रेविटी एक विशेष तरीके से व्यवहार करेगा। अब इसे शिव पुराण की उस बात से जोड़कर देखिए, जो हजारों साल पहले लिखी गई थी।
पुराणों में कहा गया है- महाशिवरात्रि की रात ब्रह्मांड का द्वार खुलता है। आज का विज्ञान इसे "इंटरडाइमेंशनल पोर्टल" कह सकता है। नासा की रिसर्च और हमारे शास्त्रों का यह मेल एक ही बात की ओर संकेत कर रहा है, कि उस रात उत्तर गोलार्ध में उपस्थित हर जीवित कोशिका के भीतर की ऊर्जा प्राकृतिक रूप से ऊपर की ओर भागती है। यही वह समय है, जब आपकी रीढ़ की हड्डी अर्थात स्पाइन एक सुपर कंडक्टर बन जाती है। यदि आप उस रात सो गए या झुक कर बैठे, तो आप उस ब्रह्मांडीय ऊर्जा के प्रवाह को रोक देंगे, जो संभवतः आपके पूरे जीवन के कष्टों को मिटा सकती थी।
नासा के सेटेलाइट्स ने यह भी देखा है, कि महाशिवरात्रि की रात शिवलिंगों के ऊपर का आकाश अन्य रातों की तुलना में अधिक आयनीकृत होता है। यह साक्षात प्रमाण है, कि महादेव का यह पर्व केवल धार्मिक नहीं, बल्कि एक कॉस्मिक इवेंट है, जो आपके डीएनए तक को रीप्रोग्राम करने की ताकत रखता है।
अब उस रहस्य की गहराई में उतरते हैं, जिसे समझने के लिए आपको आधुनिक विज्ञान और प्राचीन गणित दोनों को एक साथ देखना होगा। इस साल अर्थात 2026 की महाशिवरात्रि कोई साधारण शिवरात्रि नहीं है। 15 फरवरी की उस रात को क्या होने वाला है और नासा ने इस पर तीन प्रमाण क्या दिए हैं ? आप भी उसे ध्यान से समझें-
पहला प्रमाण-
नासा और खगोल विज्ञान एस्ट्रोनॉमी। नासा के प्लेनेटरी अलाइनमेंट डाटा के अनुसार, उस रात सौरमंडल के सबसे शक्तिशाली ग्रह एक ऐसी कोणीय स्थिति में होंगे, जो पृथ्वी के सेंट्रीफ्यूगल फोर्स को एक नई दिशा देगा। विज्ञान कहता है- उस रात पृथ्वी का उत्तरी-गोलार्ध सूर्य और चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण के ऐसे प्रभाव में होगा, कि पृथ्वी की सतह से ऊर्जा का प्रवाह ऊपर की ओर यानी अपवर्ड फ्लो होने लगेगा। यह एक ऐसी प्राकृतिक घटना है, जो लाखों सालों से चली आ रही है, लेकिन इस बार का संरेख इसे 100 गुना अधिक शक्तिशाली बना रहा है।
दूसरा प्रमाण-
ग्रंथों का गणित और मुहूर्त। हमारे ऋषियों ने सूर्य सिद्धांत और शिव पुराण में जिस निशिता काल का वर्णन किया है, वह केवल पूजा का समय नहीं है। हमारे पंचांग के अनुसार, इस बार महाशिवरात्रि पर सर्वार्थ सिद्धि योग के साथ-साथ शिव योग का एक ऐसा दुर्लभ मिलन हो रहा है जो पिछले एक दशक में नहीं देखा गया।
पंचांग गणना कहती है- 15 फरवरी की मध्य रात्रि अर्थात निशिता काल में चंद्रमा श्रवण नक्षत्र के प्रभाव में होगा। श्रवण नक्षत्र के स्वामी विष्णुजी है और अधिपति शिव है। विज्ञान की भाषा में कहें तो उस समय चंद्रमा की किरणें पृथ्वी के वायुमंडल में मौजूद आयनों को एक विशेष फ्रीक्वेंसी पर वाइब्रेट करेंगी। यदि उस समय आप जागृत अवस्था में हैं, तो आपके शरीर का पीनियल ग्लैंड जिसे शिव की तीसरी आँख कहा जाता है, प्राकृतिक रूप से सक्रिय होने लगेगा।
तीसरा प्रमाण-
नासा का गामा रे डेटा और पुराणों का ज्योतिर्लिंग। आश्चर्य की बात यह है कि नासा की हालिया रिसर्च में पाया गया है, कि साल के इस विशेष समय में अंतरिक्ष से आने वाली कॉस्मिक न्यूट्रिनो की मात्रा बढ़ जाती है। शिव पुराण कहता है- ज्योतिर्लिंग यानी प्रकाश का वो स्तंभ इसी समय धरती पर सबसे अधिक सक्रिय होता है। मुहूर्त का असली रोमांच यहां है।
15 फरवरी की रात 11:50 से लेकर 12:40 का वो 50 का समय, जिसे महामुहूर्त कहा जा रहा है। नासा के डाटा के अनुसार उस 50 मिनट में पृथ्वी का मैग्नेटिक फील्ड सबसे पतला होगा। शास्त्रों के अनुसार यही वह समय है, जब स्वर्ग और पृथ्वी के बीच का पर्दा हट जाता है। अर्थात अगर उस 50 मिनट में आप अपनी रीड की हड्डी सीधी करके बैठते हैं और एक विशेष गुप्त मंत्र का मानसिक जप करते हैं, तो आपकी ऊर्जा सीधे उस कॉस्मिक सोर्स से जुड़ जाएगी। यह वह समय है, जब आप अपने भाग्य की रेखा बदल सकते हैं, क्योंकि उस समय किया गया एक संकल्प साधारण समय में किए गए लाखों संकल्पों के बराबर होता है। परन्तु उस महामुहूर्त में हमें करना क्या है ? वह कौन सा शब्द है जो हमारे भीतर के सोए हुए शिव को जगा सकता है ? यहां आधुनिक विज्ञान यानी नासा और हमारे प्राचीन वेदों के बीच एक ऐसा संबंध है जिसे जानकर आप दंग रह जाएंगे।
नासा की ॐ की खोज
कुछ समय पहले नासा ने सूर्य और अंतरिक्ष से आने वाली ध्वनियों को रिकॉर्ड किया था। जब उस कॉस्मिक शोर को फिल्टर किया गया तो जो ध्वनि उभर कर आई, वो बिल्कुल ॐ की फ्रीक्वेंसी से मेल खाती थी। वैज्ञानिक इसे ब्रह्मांडीय कंपन यानी कॉस्मिक वाइब्रेशन कहते हैं। महामृत्युंजय और स्केलर वेव्स। अब यहां ध्यान दें...
शिव पुराण और ऋग्वेद में जिस महामृत्युंजय मंत्र का उल्लेख है, वह केवल शब्दों का समूह नहीं है। ध्वनि विज्ञान के अनुसार, इस मंत्र के अक्षरों का संयोजन इस तरह किया गया है, कि जब इसे एक विशेष लय में बोला जाता है तो यह आपके शरीर के चारों ओर स्केलर वेव्स पैदा करता है। नासा की रिसर्च कहती है- स्केलर वेव्स में वो शक्ति होती है जो आपके शरीर के डीएनए की मरम्मत या रिपेयर कर सकती है।
इस 15 फरवरी की रात जब पृथ्वी का वातावरण अत्यधिक संवेदनशील होगा, तब इस मंत्र का उच्चारण आपके तंत्रिका तंत्र में एक विद्युत आवेश पैदा करेगा। यह वही ऊर्जा है, जिसे हमारे योगी कुंडलिनी कहते हैं।
मंत्र का बाइनरी रहस्य
जिस तरह कंप्यूटर जीरो और वन की भाषा समझता है, हमारा ब्रह्मांड फ्रीक्वेंसी और रेजोनेंस की भाषा समझता है। उस रात 11:50 से 12:40 के मध्य जब आप उस गुप्त मंत्र का मानसिक जप करते हैं, तो आपकी फ्रीक्वेंसी ब्रह्मांड की फ्रीक्वेंसी के साथ लॉक हो जाती है। इसे विज्ञान की भाषा में सिंपैथेटिक रेजोनेंस कहते हैं। परन्तु उस रात इस मंत्र को जपने की एक विशेष विधि है। केवल बोल देना काफी नहीं है। आपको अपने शरीर को एक विशेष मुद्रा में रखना होगा और अपनी सांसों की गति को एक विशेष लय या रिदम पर लाना होगा। पुराणों में इस विधि को शिव योग कहा गया है।
क्या है वह गुप्त विधि ? और उस रात आपको बिस्तर पर लेटना है या ध्यान में बैठना है और वह कौन सा एक छोटा सा बीज मंत्र है, जिसे महामृत्युंजय के साथ जोड़ने पर उसकी शक्ति अनगिनत गुना बढ़ जाती है।
अब बात करते हैं उस चमत्कारी लाभ की, जो आपको 15 फरवरी की सुबह अपनी आंखों से दिखाई देगा। विज्ञान कहता है कि जब हमारे शरीर की ऊर्जा उर्ध्वमुखी यानी ऊपर की ओर होती है, तो हमारे भीतर का इम्यून सिस्टम अपनी चरम सीमा पर होता है। हमारे बड़े-बूढें कहते थे कि शिवरात्रि का व्रत और जागरण करने वाले को साल भर कोई बीमारी नहीं छू सकती। आज नासा का फ्रीक्वेंसी रिसर्च इसी बात की पुष्टि कर रहा है, लेकिन यह लाभ तभी मिलेगा जब आप शिव विधि का पालन करेंगे। चलिए जानते हैं, उस गुप्त विधि के बारे में जिसे हमारे पुराणों ने महासाधना कहा है।
एक
आसन की शुद्धि "द पॉश्चर"
निशिता काल यानी रात 11:50 शुरू होने से पहले एक शांत जगह पर बैठे। आपकी रीड की हड्डी बिल्कुल सीधी होनी चाहिए। विज्ञान के अनुसार, जब मेरुदंड सीधा होता है, तब इलेक्ट्रोमैग्नेटिक इंडक्शन सबसे ज्यादा प्रभावी होता है। यदि आप झुक कर बैठेंगे तो ऊर्जा का प्रवाह रुक जाएगा और आप केवल थकावट का अनुभव करेंगे।
दूसरा
दूसरा चरण है प्राणायाम और रिदमम द ब्रेथ
विधि का दूसरा चरण है अपनी सांसों को ब्रह्मांड की लय से जोड़ना। मंत्र जपने से पहले 10 मिनट तक गहरी और धीमी सांस लें। इसे विज्ञान में कोहेरेंस कहते हैं। जब आपकी सांसे स्थिर होती हैं, तभी आपका मस्तिष्क उस कॉस्मिक डाटा को रिसीव करने के लिए तैयार होता है।
तीसरा
बीज मंत्र और महामृत्युंजय का योग
अब यहां आता है सबसे बड़ा रहस्य। केवल महामृत्युंजय मंत्र नहीं, बल्कि उसके साथ ॐ के नाद को कैसे जोड़ना है ? 15 फरवरी की उस रात आपको अपने हृदय पर हाथ रखकर मंत्र का मानसिक जाप करना है। नासा की ध्वनि तरंगों की रिसर्च बताती है- हृदय की धड़कन और मंत्र की ध्वनि जब एक हो जाती है, तो शरीर के भीतर पीजोइिक प्रभाव पैदा होता है। यानी आपका शरीर खुद बिजली पैदा करने लगता है।
चौथा
संकल्प की शक्ति
विधि का अंतिम और सबसे गुप्त हिस्सा है संकल्प। उस 50 मिनट के महामुहूर्त में जब आप ध्यान की अवस्था में हो तो अपने उस एक सपने को विजुअलाइज करें जिसे आप पूरा करना चाहते हैं। बड़े-बूढें कहते हैं, कि उस समय शिव का द्वार खुला होता है। आज का क्वांटम विज्ञान कहता है- उस समय ऑब्जर्वर इफेक्ट सबसे ज्यादा सक्रिय होता है। यानी जो आप देख रहे हैं उसे आप हकीकत में बदल रहे हैं। अब आप उस विशेष मंत्र के बारे जाने, जिसे उस 50 मिनट के महामुहूर्त में आपको अपने सीने पर हाथ रखकर बोलना है।
हृदय पर हाथ रखने का विज्ञान
नासा और आधुनिक हार्ट मैथ इंस्टट्यूट की रिसर्च कहती है कि हमारे हृदय का अपना एक इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड होता है, जो मस्तिष्क से भी 5000 गुना ज्यादा शक्तिशाली होता है। जब आप अपना दाया हाथ अपने हृदय के केंद्र पर रखते हैं, तो आप अपने शरीर के पूरे ऊर्जा चक्र को सर्किट की तरह पूरा कर देते हैं।
महामंत्र और विधि
उस रात (15 फरवरी) 11:50 पर अपनी आंखें बंद करें। रीड सीधी रखें और अपने दिल की धड़कन का अनुभव करते हुए इस मंत्र का मानसिक या धीमे स्वर में जप करें। मंत्र है- ॐ त्र्यंबकम यजामहे सुगंधिम पुष्टिवर्धनम उर्व रुकमिव बंधनान मृत्योर मुक्षीय मामृतात।
इसके साथ आपको एक छोटा सा बीज मंत्र जोड़ना है, जो इसकी शक्ति को अनंत गुना बढ़ा देगा। हर बार मंत्र शुरू करने से पहले मन में कहें- ह्रूं। यह ध्वनि आपके हृदय की धड़कन के साथ मिलकर एक ऐसी रेजोनेंस पैदा करेगी जो आपके डीएनए के उन हिस्सों को सक्रिय कर देगी, जिन्हें विज्ञान जंक डीएनए कहता है।
हमारे पुरखे या बड़े-बूढ़े भी कहा करते थे- यह मंत्र काल को भी जीत सकता है। आज का विज्ञान कहता है- यह मंत्र आपकी सेलुलर मेमोरी को साफ कर देता है। जैसे-जैसे आप जप करेंगे, अनुभव करें कि ब्रह्मांड की पूरी ऊर्जा आपके सिर से प्रवेश कर रही है और आपके हृदय के माध्यम से पूरे शरीर में फैल रही है। यह वो क्षण है जब आप और महादेव एक हो जाते हैं। तो स्मरण रखें 15 फरवरी की रात्रि... अपनी तैयारी पूरी रखें... अपनी रीढ़ सीधी रखें और महादेव पर अडिग विश्वास रखें। जय श्री महाकाल।
लेखक-
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