590 Kmलंबे, 6-लेन गंगा एक्सप्रेस-वे ग्रीनफील्ड हाई-स्पीड कॉरीडोर का...


...काशी विश्वनाथ मंदिर में पूजा के बाद PM करेंगे उद्घाटन 
धर्म नगरी / 
DN News
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590 किलोमीटर लंबे, छह लेन के गंगा एक्सप्रेस-वे (Ganga Expressway) ग्रीनफील्ड हाई-स्पीड कॉरीडोर का आज (29 अप्रैल) को उद्घाटन होगा। सुबह वाराणसी में श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना करने के बाद हरदोई पहुंचेंगे और गंगा एक्सप्रेस-वे का उद्घाटन करेंगे। 

यह एक्सप्रेसवे न केवल मेरठ और प्रयागराज को जोड़ेगा, बल्कि दिल्ली-एनसीआर से लेकर बिहार तक के यात्रियों के लिए समय और ईंधन की भारी बचत करेगा। गंगा एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के पश्चिमी हिस्से को पूर्वी हिस्से से जोड़ने वाली एक ऐसी जीवनरेखा है, जो विकास की गति को नई उड़ान देगी। 36,230 करोड़ रु की लागत से तैयार यह एक्सप्रेसवे वर्तमान में 6 लेन का है, जिसे भविष्य में 8 लेन तक बढ़ाया जा सकता है।

गंगा एक्सप्रेसवे न केवल यात्रा की दूरी कम करेगा, बल्कि उत्तर प्रदेश और देश की आर्थिक प्रगति में बड़ा योगदान भी देगा। इस एक्सप्रेसवे के शुरू होने से सबसे बड़ा बदलाव यात्रा के समय में आएगा। मेरठ से प्रयागराज की दूरी तय करने में पहले 12-13 घंटे लगते थे, अब मात्र 6-7 घंटे में पूरी की जा सकेगी। गंगा एक्सप्रेसवे से दिल्ली से प्रयागराज, वाराणसी और पटना जानें में लगने वाला समय- 
दिल्ली या नोएडा से प्रयागराज जाने वाले हेतु बुलंदशहर के पास से इस एक्सप्रेसवे पर चढ़ सकेंगे। दिल्ली से प्रयागराज पहुचने में केवल 7-8 घंटे लगेंगे। दिल्ली से वाराणसी और पटना जाने का समय भी बहुत कम हो जाएगा। पहले 12-14 घंटे लगते थे, वहीं गंगा एक्सप्रेसवे से यात्रा लगभग 8-9 घंटे में हो जाएगी। दिल्ली से पटना तक जाने में पहले 16-18 घंटे लेता था, अब लगभग 12-13 घंटे में पूरा होने की आशा है।

उल्लेखनीय है, अब एक्सप्रेसवे और नेशनल हाईवे केवल आने-जाने के रास्ते नहीं, बल्कि आर्थिक विकास के 'ग्रोथ इंजन' बन चुके हैं। जब भी किसी क्षेत्र से कोई नया एक्सप्रेसवे गुजरता है, वह अपने साथ चौतरफा विकास लेकर आता है। इसके किनारों पर विकसित होने वाले इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और लॉजिस्टिक हब बड़ी कंपनियों को आकर्षित करते हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के लाखों नए अवसर पैदा होते हैं।
देखें-

एक दशक में बदली देश की छवि
आधारभूत सेवा (इंफ्रास्ट्रक्चर) के मामले में पिछले एक दशक में भारत की वैश्विक स्तर पर अपनी छवि बनी है। सड़कों के बढ़ते जाल ने एक ओर से व्यापार सुगम हुआ, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों को मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था से जोड़कर देश की GDP को नई गति दी है। पिछले 10 वर्षों में भारत ने यह साबित कर दिया, कि "सड़कें अर्थव्यवस्था को नहीं बनाती, बल्कि सड़कें वो माध्यम हैं जिससे अर्थव्यवस्था स्वयं को बनाती है। 

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नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) के नेतृत्व में भारतमाला प्रोजेक्ट जैसे बड़े प्रोजेक्ट देश की ट्रैफिक को बेहतर बनाने के लिए 83,000 km से ज्यादा सड़कें बना रहे हैं। ये नए रोड नेटवर्क जगहों को जोड़ने से कहीं ज्यादा बिजनेस को बढ़ाने में सहायक हो रहे हैं। देशभर में एक्सप्रेसवे और हाईवे बनने से फैक्ट्रियों को कच्चा माल जल्दी मिल रहा है और आवश्यक सामान बाजारों तक आसानी से पहुंच रहा है।

गंगा एक्सप्रेसवे : एक दृष्टि में 
गंगा एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के पश्चिमी, मध्य और पूर्वी क्षेत्रों को एक हाई स्‍पीड कॉरिडोर के जरिए जोड़ेगा,

✔ यह उप्र का सबसे लंबा एक्सप्रेसवे होगा, जो मेरठ और प्रयागराज के बीच यात्रा के समय को लगभग 12 घंटे से घटाकर 6 घंटे कर देगा,

✔ उत्‍तर प्रदेश के 12 जिलों से होकर गुजरेगा,
जिनमें- मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज सम्मिलित हैं,

✔ एक्सप्रेसवे में शाहजहांपुर से साढे तीन किमी. लंबी एक हवाई पट्टी भी है, जो भारतीय वायु सेना के विमानों के आपातकालीन टेक ऑफ और लैंडिंग में काम आएगी,

✔ उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण द्वारा विकसित 
यह प्रोजेक्‍ट औद्योगिक विकास, व्‍यापार, कृषि और पर्यटन जैसे कई क्षेत्रों को बढ़ावा देगा और पूरे क्षेत्र में प्रत्‍यक्ष और अप्रत्‍यक्ष रोजगार के अवसर पैदा करेगा। 

यात्रा में समय, पैसा बचाने के साथ रोजगार भी देते 
आज एक्सप्रेसवे आने-जाने का समय कम करने से कहीं ज्यादा, देश के अलग-अलग हिस्सों को एक साथ आगे बढ़ने में योगदान कर रहे हैं। उदाहरण के लिए,  दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे उत्तर भारत में कनेक्टिविटी बदल रहा है, जिससे रास्ते में पड़ने वाले छोटे शहरों में टूरिज्म, व्यापार और एग्रो-इंडस्ट्री को बढ़ावा मिल रहा है। अमृतसर से जामनगर एक्सप्रेसवे एक बड़े इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के रूप में काम कर रहा है, जिससे पंजाब, राजस्थान और गुजरात में नए अवसर उत्पन्न हो रहे हैं। लुधियाना-बठिंडा-अजमेर एक्सप्रेसवे और वारंगल से खम्मम एक्सप्रेसवे जैसे सेंट्रल बेल्ट भी नए इंडस्ट्रियल एस्टेट, बेहतर ट्रांसपोर्ट सिस्टम और नौकरियां पैदा कर रहे हैं, जो छोटे शहरों को पहले कभी नहीं हुए और देश की अर्थव्यवस्था से जोड़ रहे हैं।

एक्सप्रेसवे और हाईवे से लाभ
➤ बीते तीन साल में निर्माण, ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में रोजगार में 25% की वृद्धि हुई है। पर्यटन को भी गति मिली है। वाराणसी, अयोध्या, देहरादून, मसूरी, जैसे स्थानों पर अब पहुंचना आसान हो गया है। इससे होटल, ट्रैवल, टूर गाइड जैसी सर्विसेज में रोजगार बढ़ा है।

➤ दिल्ली से मुंबई या लखनऊ से मेरठ की यात्रा में पहले जो समय लगता था, वह एक्सप्रेसवे के कारण अब आधा रह गया है। यात्रा का समय आधा होने का अर्थ है- ईंधन की कम खपत और वाहनों का कम रखरखाव।

➤ एक्सप्रेसवे ने ई-कॉमर्स को गांव-गांव तक पहुंचने में सहायक हो रहे है। अब फ्लिपकार्ट-अमेजन छोटे शहरों में भी "नेक्स्ट डे डिलीवरी" देने लगे हैं।
फूड प्रोसेसिंग और एग्री-स्टार्टअप तेजी से बढ़ रहे हैं, क्योंकि किसान अपने ताजे माल को प्रोसेसिंग यूनिट्स तक जल्दी भेज सकता है।

➤ एक्सप्रेसवे अपने साथ केवल गाड़ियां नहीं, बल्कि नौकरियों का बड़ा अवसर पैदा हुआ है। एक्सप्रेसवे के निर्माण से हजारों इंजीनियरों, श्रमिकों और ऑपरेटरों की जॉब मिल रही है। इसके बाद टोल प्लाजा, वे-साइड एमिनिटीज (ढाबे, होटल, पेट्रोल पंप) और मेंटेनेंस सेवाओं में हजारों स्थानीय लोगों को स्थायी काम मिल रहा है। 

➤ बेहतर कनेक्टिविटी के कारण जब कंपनियां अपनी फैक्ट्रियां एक्सप्रेसवे के पास लगाती हैं, जिससे युवाओं को शहर पलायन किए बिना अपने ही क्षेत्र में 'व्हाइट कॉलर' और 'ब्लू कॉलर' जॉब्स मिल रहा है।

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