"मोदी को हरा दिया" के चक्कर में क्या देश की 71 करोड़ महिलाओं से हुआ बड़ा विश्वासघात !


"मुद्दे का राजनीतिकरण" से गिरा महिला आरक्षण बिल

- अनुराधा त्रिवेदी*
धर्म नगरी / DN News
(कवरेज करवाने, फ्री कॉपी मंगवाने या अपने नाम से बटवाने हेतु- 810 910 7075 -वा.एप)

अंततः देश की सबसे पुरानी पार्टी और तमाम विपक्ष ने महिला आरक्षण बिल पारित नहीं होने दिया। एक पार्टी जिसकी सर्वेसर्वा महिला है, उस पार्टी के दूसरे क्रम में सर्वोच्च भी महिला है। साथ ही बंगाल में भी सर्वोच्च एक महिला है। उत्तर प्रदेश की विपक्षी पार्टी में भी द्वितीय क्रम में भी महिला सर्वोच्च है। इन तमाम महिला प्रमुखों के होते हुए भी महिला आरक्षण बिल पास नहीं हो पाया।

लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े बिल- "संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026" पर वोटिंग से पहले महिला आरक्षण बिल और परिसीमन बिल पर लंबी बहस चली। विपक्ष की ओर से इन बिलों का लगातार विरोध किया गया। बिल का गिरना देश की आधी आबादी की हार है, उनके कारण जिन्होंने संसद में बैठ कर अपनी अहम की वजह से महिलाओं का साथ छोड़ दिया। बिल को लेकर सरकार को विपक्ष ने साथ नहीं दिया और अब सरकार ने विपक्ष के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

सामाजिक दृष्टि से देखें, "तो नारी न सोहे नारी के रूपा" पर इसका बड़ा सीधा विकल्प है। जो पार्टियां आरक्षण के पक्ष में हैं, वो महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करके अपनी पार्टी की महिलाओं को 33 प्रतिशत सीट दे दें।
हम आज भी उन पुरुषों की दया और समर्थन के मोहताज हैं, जिनको इस धरती पर जन्म लेने के लिए हमारी जरूरत है। सोचो यदि स्त्रियां नर भ्रूण को जन्म देने से मना कर दे, तो ये धरती कैसी हो जाएगी ? पुरुष विहीन। मुझे लगता है, महिलाओं को समाज के लिए अपना सर्वोच्च योगदान देना चाहिए। समाज के लिए सेवा का ऐसा उदाहरण पेश करना चाहिए, कि सारी पार्टियां उसे अपना प्रत्याशी बनाकर खुद को धन्य समझे।

-----------------------------------------------
इसे भी पढ़ें-
लोकसभा की सीट 543 से बढ़कर 850 होगी ! संसद का तीन-दिवसीय विशेष सत्र... 
http://www.dharmnagari.com/2026/04/Three-day-special-session-of-Parliament-begin-today-focus-Amendments-to--Nari-Shakti-Vandan-Adhiniyam.html 

15 वर्षों से प्रकाशित "धर्म नगरी" का विस्तार हो रहा है, शीघ्र ही चुनिंदा ट्रेन, एयरपोर्ट, तीर्थ नगरी में स्थानीय प्रतिनिधि के माध्यम से नियमित रूप से बटवाई जाएगी। "धर्म नगरी" के विस्तार हेतु आर्थिक रूप से सम्पन्न संरक्षक चाहिए। प्रयागराज कुंभ-2013 से लगातार सभी कुंभ, अर्द्धकुंभ, वार्षिक माघ मेला में "धर्म नगरी" विशेषांकों का प्रकाशन और फ्री या किसी के "सौजन्य से..." वितरण किया जा रहा है। 2027 में भी प्रयागराज माघ मेला, हरिद्वार अर्धकुम्भ-2027, नासिक-त्रयंबकेश्वर कुम्भ-2027, सिंहस्थ उज्जैन कुम्भ-2028 में भी विशेषांकों के प्रकाशन / वितरण होंगे।   
----------------------------------------------- 


आरक्षण ने देश को वैसे भी बर्बाद कर रखा है, उस पर प्रतिनिधित्व के क्षेत्र में योग्यता, कर्मठता समाज के हित में है। शिक्षा और स्वास्थ्य समाज की आखिरी पंक्ति में खड़ी उन दीन-हीन महिलाओं कोसमाज में सशक्त प्रदर्शन करना होगा। ऐसा प्रदर्शन, कि आप (महिलाओं) की लोगों को जरूरत बन जाए, तब यही सब पार्टियां आपके पीछे हाथ जोड़कर घूमेंगी।

महिला आरक्षण बिल पारित नहीं होने का कारण "मुद्दे का राजनीतिकरण" होना है। इसमें वोट का गणित विपक्ष लगा रहा है। सत्ता पक्ष तो बिल पारित न होने पर भी महिलाओं को ये संदेश देने में सफल भी हो जाएगा, कि हम तो आपको समाज में अग्रिम पंक्ति में ला रहे थे, विपक्ष ने लाने ने नहीं दिया।
अब बिल आने के बाद की स्थितियों पर भी विचार करें। 

क्या होता जब आरक्षण लागू हो जाता ! क्या तब भी महिलाओं की राह आसान होती, बिल्कुल नहीं। जो पुरुष पूरे जोश से बरसी, इस उम्मीद से पार्टियों की सेवा कर रहे हैं, तो कभी विधायक का टिकट मिलेगा, जब उसकी सीट पर महिला प्रत्याशी होगी। तो क्या उसकी जीत आसान होती ? जो विधायक बनने की ख्वाहिश पाले बैठे है, वो क्या महिला को जीतने देते ?

मुझे हमेशा लगता है, आरक्षण में योग्यता और पब्लिक में रेपुटेशन, एजुकेशन और समाज को नेतृत्व के गुण के आधार पर महिलाओं को आगे लाया जाना चाहिए। मुझे अच्छे से मालूम है, कि बिल पारित न होने का एकमात्र कारण है, सत्ता पक्ष को बिल का लाभ न मिले। हालांकि, ये भी तय है कि बिल पारित न होने के कारणों का प्रोपेगेंडा भी सत्ता पक्ष को फायदा ही पहुंचाएगा। महिलाएं बिल्कुल निराश न हों। सितारों के आगे जहां और भी है।

मात्र 54 वोटों से महिला आरक्षण बिल गिर गया। 24 घंटे से ज्यादा चली बहस बेनतीजा रही। भाजपा जहां इस बिल को नारी सशक्तिकरण के लिए महत्वपूर्ण मान रही है। वहीं, कांग्रेस ने इसे संविधान तोड़ने के लिए असंवैधानिक तरीका बताया। बिल पेश करते वक्त सदन में 528 सांसद मौजूद थे। बिल के पक्ष में वोट पड़े 298, विपक्ष में 230 वोट। बिल पारित होने के लिए जरूरी 352 वोट होने थे। बिल 54 वोट की कमी से पारित नहीं हो पाया।

बिल पर नेता प्रतिपक्ष बहस के दौरान प्रधानमंत्री पर बेहद अपमानजनक टिप्पणी करते दिखे, जिसे लोकसभा अध्यक्ष ने कार्यवाही से अलग करने का निर्देश दिया। सांसद निशिकांत दुबे ने कांग्रेस को 17 अप्रैल का इतिहास याद दिलाया, जब स्वर्गीय राजीव गांधी पर बोफोर्स के आरोप लगे थे, जब 17 अप्रैल 1999 को कांग्रेस ने बीजेपी की सरकार गिरा दी, जब ओबीसी नेता कांग्रेस अध्यक्ष के साथ उनको बाथरूम में बंद करके सोनिया गांधी की मौजूदगी में दुर्व्यवहार किया था।

महिला सांसदों द्वारा विपक्ष के खिलाफ मकर द्वार पर तगड़ा विरोध किया गया। लब्बोलुआब ये कि महिलाओं के हित का बिल विपक्ष की राजनीति की भेंट चढ़ गया। अब विपक्ष के लगाए दो प्रमुख आरोप या तर्क, जिसकी वजह से उन्होंने बिल पास नहीं होने दिया, ऐसा कह रहा हैं-

दक्षिण भारत की सीटें कम हो जाती !
विपक्ष ने आरोप लगाया, कि नए कानून से दक्षिण भारत में सीटों की संख्या कम और उत्तर भारत में सीटें बढ़ जाएंगी। इससे उत्तर भारत वर्सेस दक्षिण भारत की लड़ाई शुरू हो जाएगी और यह दक्षिण भारतीय राज्यों के साथ नाइंसाफी है, क्योंकि उनका महत्व कम हो जाएगा। वास्तव में यह आरोप बिल्कुल झूठ है और केवल विपक्ष का अफवाह है। सरकार का कहना है, उत्तर और दक्षिण भारत की हिस्सेदारी में लोकसभा में कोई बदलाव नहीं होगा। अब उत्तर-दक्षिण की सीटों को आंकड़ों से समझें-

अभी दक्षिण भारत के पांच राज्य कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु और केरल में कुल मिलाकर 129 लोकसभा सीटें हैं, जो 543 सीटों वाली लोकसभा में 23.75% बनता है। यानी कुल मिलाकर दक्षिण भारत का जो प्रतिनिधित्व है, आज लोकसभा में 23.75% है। जब यह लोकसभा में 816 सांसद हो जाएंगे, तब दक्षिण भारत के पांच राज्यों के 195 सांसद होंगे, क्योंकि उसी अनुपात में इनकी सीटें बढ़ेंगी और तब भी दक्षिण भारत के इन पांच राज्यों की 23.89% हिस्सेदारी लोकसभा में होगी।

ओबीसी महिलाओं को आरक्षण नहीं था !
संसद में कुछ सदस्यों का कहा- सरकार जाति जनगणना नहीं करवाना चाहती, इसलिए इस बिल को पेश किया गया। जबकि सरकार कहती है, कि जाति जनगणना इस समय हो रही है। जाति के आधार पर अभी जो जनगणना है, वो 2026 में शुरू हुई है और 2027 में खत्म होगी। ओबीसी महिलाओं के लिए आरक्षण की मांग केवल राजनीति से प्रेरित है।

इस बिल में पहले से एससी और एसटी महिलाओं के लिए आरक्षण की व्यवस्था है। वैसे भी यह बिल जेंडर बेस्ड आरक्षण की बात करता है, न कि जाति आधारित आरक्षण की। अखिलेश यादव जैसे कुछ सदस्यों ने कुछ सांसदों ने मुस्लिम महिलाओं के लिए अलग से आरक्षण की मांग की। इसपर सरकार कहती है, कि हमारा संविधान धर्म के आधार पर आरक्षण की कोई अनुमति नहीं देता, तो फिर कैसे धर्म के नाम पर आरक्षण दे दें ?

जो मुद्दे उठाए गए, वो बिल से इतर के थे। सार्थक बहस के बजाय हंगामा, आरोप-प्रत्यारोप की भेंट चढ़ गया महिला आरक्षण बिल। ऐसा लग रहा है, तमाम विपक्षी नेता प्रधानमंत्री मोदी का विरोध करते-करते अब अपने देश का ही विरोध करने लगे हैं और इस बार सिर्फ मोदी को हराने के चक्कर में उन्होंने महिलाओं का भी विरोधी बनना स्वीकार कर लिया। उस मोदी को हराने के चक्कर में उन्होंने देश की महिलाओं को भी हरा दिया और इसका इन्हें कोई मलाल नहीं। 

विपक्ष "मोदी को हरा दिया" की जीत का जश्न मना रहे हैं, लेकिन वास्तव में मोदी को हराने के लिए इन्होंने देश की 71 करोड़ महिलाओं के साथ बहुत बड़ा विश्वासघात किया, जिसका एहसास अभी इन्हें नहीं है।

चलिए अभी आगे बहुत कुछ बाकी देखना है, पर ये तो पक्का है-
दुनिया की छत को थामे हुए जिन कंधों पे
इस पार आदमी है, उस पार है औरत,
देने तो पड़ेंगे, दे क्यों नहीं देते,
तमाम वो हक़, जिसकी हकदार है औरत,
नींव है बुनियाद, है मीनार है औरत,
दुनिया को संभाले, किरदार है औरत।

*वरिष्ठ पत्रकार, भोपाल
-----------------------------------------------

"संसद में इस समय नारीशक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन पर चर्चा चल रही है। कल रात भी एक बजे तक चर्चा चली है। जो भ्रम फैलाए गए, उनको दूर करने के लिए तर्कबद्ध जवाब दिया गया है। हर आशंका का समाधान किया गया है। जिन जानकारियों का अभाव था, वो जानकारियां भी हर सदस्य को दी गई हैं। किसी के मन में विरोध का जो कोई भी विषय था, उसका भी समाधान हुआ है।

महिला आरक्षण के इस विषय पर देश में चार दशक तक बहुत राजनीति कर ली गई है। अब समय है कि देश की आधी आबादी को उसके अधिकार अवश्य मिलें। आजादी के इतने दशकों बाद भी भारत की महिलाओं का निर्णय प्रक्रिया में इतना कम प्रतिनिधित्व रहे, ये ठीक नहीं।

अब कुछ ही देर लोकसभा में मतदान होने वाला है। मैं सभी राजनीतिक दलों से आग्रह करता हूं… अपील करता हूं...
कृपया करके सोच-विचार करके पूरी संवेदनशीलता से निर्णय लें, महिला आरक्षण के पक्ष में मतदान करें।

मैं देश की नारी शक्ति की तरफ से भी सभी सदस्यों से प्रार्थना करूंगा… कुछ भी ऐसा ना करें, जिनसे नारीशक्ति की भावनाएं आहत हों।
देश की करोड़ों महिलाओं की दृष्टि हम सभी पर है, हमारी नीयत पर है, हमारे निर्णय पर है। कृपया करके नारीशक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन का साथ दें... 
नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री, संसद में बोलते हुए 17 अप्रैल 2026 
 

 
-----------------------------------------------
समस्या आपकी-समाधान हमारा
यदि आप या आपके परिवार, मित्र आदि किसी प्रकार की समस्या (विवाह, नौकरी, स्वास्थ्य, संपत्ति विवाद आदि) से जूझ रहे हों और आपने बहुत प्रयास किया, लेकिन कोई सही मार्गदर्शन या रास्ता अब तक नहीं मिला... तो आप अपनी समस्या या प्रश्न अपने नाम के साथ जन्मदिन, जन्म समय एवं जन्मस्था (तीनों सही-सही) 810 910 7075 पर वाट्सअप करें।

आपके प्रश्न / प्रश्नों का उत्तर एवं समस्या का निदान हेतु मार्गदर्शन साधक ज्योतिषाचार्य द्वारा दिया जाएगा संतुष्ट होने के बाद स्वेच्छापूर्वक बिना कृपणता आपको online दक्षिणा या शुल्क 810 910 7075 पर अपने सामर्थ्य के अनुसार देना होगा, जैसे आप किसी डॉक्टर या वकील को उनकी सेवा या योग्यता हेतु देते हैं। सोशल मीडिया में खोजें #Dharm_Nagari_
अपने जिले से शहरी अथवा ग्रामीण क्षेत्र "धर्म नगरी / DN News, वेबसाइट एवं चैनल के स्थानीय प्रतिनिधि बनने, आयोजित हो रहे कथा या कथा आयोजित करवाने हेतु अपना डिटेल वा.एप करें- 810 910 7075
राष्ट्रवादी समसामयिक "धर्म नगरी" व DN News पाक्षिक एवं मैगजीन, वेबसाइट व "धर्म नगरी" के चैनल को और अधिक उपयोगी, पठनीय एवं सुनने योग्य बनाया जा रहा है। यदि आप इसमें स्थानीय प्रतिनिधि या पार्टनर चाहिए (जहां नहीं हैं) यदि आप अपने जिले में पार्ट-टाइम कुछ करना चाहते हैं, तो अपना डिटेल वाट्सएप- 810 910 7075 या dharm.nagari@gmail.com पर ईमेल अथवा संपर्क करें- 6261868110
---

#सोशल_मीडिया में प्रतिक्रिया
यदि विपक्ष एकजुट हो जाता है, तो हार निश्चित है। किसी ने मुझसे पूछा, "क्या यह काला दिन है?" सरकार इसे काला दिन कह रही है। #blackday इनके लिए इसलिए है क्योंकि उन्हें पहली बार धक्का लगा है। 

-
-
--


No comments