हनुमानजी की विशेष कृपा पाने का विशेष दिन बड़ा मंगलवार, करें उपाय...
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ज्येष्ठ माह के सभी मंगलवार को सनातन धर्म में "बड़ा मंगलवार" या "बुढ़वा मंगलवार" के नाम से जानते हैं और दो जून को पांचवां बड़ा मंगल मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बड़े मंगल के दिन संकटमोचन हनुमान जी की पूजा-अर्चना करने से जीवन के संकट दूर हो जाते हैं, अधूरी मनोकामना पूरी होती है। बड़े मंगल के दिन भगवान राम के परम भक्त हनुमानजी को प्रिय भोग अर्पित करते हैं। उनकी कृपा प्राप्ति के लिए लाल लंगोट, सिंदूर, चमेली के तेल और सिंदूर का चोला आदि चढ़ाते हैं।
- बेसन के लड्डू का भोग लगाने से हनुमान जी प्रसन्न होते हैं और काम में आ रही बार-बार रुकावटें भी दूर हो जाती हैं। लाल या पीली बूंदी या बूंदी के लड्डू का भोग हनुमान जी को लगाएं। इससे कुंडली में मंगल दोष शांत होता है और उन्नति के रास्ते खुलते हैं।
- बजरंगबली को एक मीठा पान (बीड़ा) अर्पित करें। पान में कत्था, गुलकंद, सौंफ और इलायची हो, लेकिन चूना, तंबाकू या सुपारी बिल्कुल न हो। पान का बीड़ा हनुमानजी को अर्पित करने से बड़ी से बड़ी समस्या का निदान होने लगता है।
- गेहूं के आटे, शुद्ध देसी घी और गुड़ या चीनी से बना चूरमा बजरंगबली को अत्यंत प्रिय है। चूरमे का भोग हनुमान जी को लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसका भोग लगाने से घर में कभी धन-धान्य की कमी नहीं होती।
इनका ध्यान रखें
हनुमान जी का कोई भी भोग तब तक अधूरा माना जाता है, जब तक उसमें तुलसी दल (तुलसी का पत्ता) न हो। शास्त्रानुसार, हनुमान जी तुलसी का पत्ता अर्पित करने से पूर्ण रूप से तृप्त और प्रसन्न हो जाते हैं। इसलिए हर भोग के ऊपर तुलसी का पत्ता अवश्य रखें। बड़े मंगल की प्रातः या सायंकाल पूजा के समय हनुमान जी के सम्मुख चमेली के तेल का दीपक जलाएं। भोग अर्पित करते समय 'ॐ हं हनुमते नमः' मंत्र का 108 बार जाप करें या हनुमान चालीसा का पाठ करें। ऐसा करने से आपकी सभी मनोकामनाएं शीघ्र पूरी हो जाएंगी।
रामचरितमानस के सुंदरकांड में हनुमान जी के पराक्रम का वर्णन है। प्रभु राम कर आज्ञा से माता सीता की खोज में जाते हैं। सहस्त्र योजन समुद्र को लांघकर लंका में प्रवेश कर माता सीता को प्रभु राम का संदेश देते हैं। उसके बाद लंका दहन करके रावण को चेताते भी हैं। जो भक्त बड़ा मंगलवार () को सुंदरकांड का पाठ करता है या इसका आयोजन करता है, उसे हनुमान जी का अशीर्वाद मिलता है। हनुमत कृपा से मनोकामनाएं पूरी होती हैं और नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है। हनुमान जी के आशीर्वाद से व्यक्ति के ज्ञान, बल, आत्मविश्वास, सफलता, यश, पराक्रम आदि में बढ़ोत्तरी होती है। कष्ट मिटते हैं और गृह क्लेश से मुक्ति मिलती है।
- गेहूं के आटे, शुद्ध देसी घी और गुड़ या चीनी से बना चूरमा बजरंगबली को अत्यंत प्रिय है। चूरमे का भोग हनुमान जी को लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसका भोग लगाने से घर में कभी धन-धान्य की कमी नहीं होती।
- बड़े मंगल के दिन बजरंगबली को केले का भोग लगाएं। इससे मानसिक परेशानियां दूर होने के साथ हनुमान जी अपने भक्तों को सभी संकटों से शीघ्र छुटकारा दिलाते हैं।
इनका ध्यान रखें
हनुमान जी का कोई भी भोग तब तक अधूरा माना जाता है, जब तक उसमें तुलसी दल (तुलसी का पत्ता) न हो। शास्त्रानुसार, हनुमान जी तुलसी का पत्ता अर्पित करने से पूर्ण रूप से तृप्त और प्रसन्न हो जाते हैं। इसलिए हर भोग के ऊपर तुलसी का पत्ता अवश्य रखें। बड़े मंगल की प्रातः या सायंकाल पूजा के समय हनुमान जी के सम्मुख चमेली के तेल का दीपक जलाएं। भोग अर्पित करते समय 'ॐ हं हनुमते नमः' मंत्र का 108 बार जाप करें या हनुमान चालीसा का पाठ करें। ऐसा करने से आपकी सभी मनोकामनाएं शीघ्र पूरी हो जाएंगी।
करें राम नाम का जप और पाठ
हनुमान जी प्रभु राम के संकटमोचन थे, प्रभु राम के सभी संकटों को दूर करते थे। हनुमान जी की कृपा तभी मिलती है, जब आप प्रभु राम के शरण में जाते हैं। प्रभु राम से बड़ा उनके नाम का प्रभाव है। इसको उनके परम भक्त हनुमान जी ने भी सिद्ध किया है। ऐसे में आप बड़ा मंगलवार के दिन व्रत कर प्रभु राम के नाम का जप करें। प्रभु राम के साथ हनुमान जी की कृपा होगी।
गोस्वामी तुलसीदास ने हनुमान जी के गुणों का उल्लेख हनुमान चालीसा में किया है। जो लोग मंत्र जाप आदि नहीं करना चाहते हैं, उन्हें मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए। हनुमान चालीसा का पाठ पुरुष और महिला दोनों ही कर सकते हैं। कुछ लोग कहते हैं कि महिलाओं को हनुमान चालीसा पाठ नहीं करना चाहिए। यह सही नहीं है। सभी लोग हनुमान चालीसा का पाठ कर सकते हैं। आप हनुमान चालीसा का 5 पाठ करें। बजरंगबली की कृपा से आपके काम बनेंगे और संकट मिटेंगे।
यदि आप किसी विकट परिस्थिति में फंसे हैं या आपको किसी संकट का आभास हो रहा है, तो आपको बड़ा मंगलवार के दिन बजरंग बाण का पाठ करना चाहिए। बजरंग बाण का पाठ करने से रोग, दोष आदि भी दूर होते हैं।
यदि आप के जीवन में कोई बड़ा संकट है, तो उससे मुक्ति के लिए संकटमोचन हनुमानाष्टक का पाठ करें। संकटमोचन हनुमानाष्टक हनुमान चालीसा में ही दिया गया है। बड़ा मंगलवार को आपको जब समय मिले, हनुमान जी के समक्ष बैठकर संकटमोचन हनुमानाष्टक का पाठ करें। हनुमत कृपा से आपके सभी दुख दूर होंगे।
हनुमान जी प्रभु राम के संकटमोचन थे, प्रभु राम के सभी संकटों को दूर करते थे। हनुमान जी की कृपा तभी मिलती है, जब आप प्रभु राम के शरण में जाते हैं। प्रभु राम से बड़ा उनके नाम का प्रभाव है। इसको उनके परम भक्त हनुमान जी ने भी सिद्ध किया है। ऐसे में आप बड़ा मंगलवार के दिन व्रत कर प्रभु राम के नाम का जप करें। प्रभु राम के साथ हनुमान जी की कृपा होगी।
गोस्वामी तुलसीदास ने हनुमान जी के गुणों का उल्लेख हनुमान चालीसा में किया है। जो लोग मंत्र जाप आदि नहीं करना चाहते हैं, उन्हें मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए। हनुमान चालीसा का पाठ पुरुष और महिला दोनों ही कर सकते हैं। कुछ लोग कहते हैं कि महिलाओं को हनुमान चालीसा पाठ नहीं करना चाहिए। यह सही नहीं है। सभी लोग हनुमान चालीसा का पाठ कर सकते हैं। आप हनुमान चालीसा का 5 पाठ करें। बजरंगबली की कृपा से आपके काम बनेंगे और संकट मिटेंगे।
यदि आप किसी विकट परिस्थिति में फंसे हैं या आपको किसी संकट का आभास हो रहा है, तो आपको बड़ा मंगलवार के दिन बजरंग बाण का पाठ करना चाहिए। बजरंग बाण का पाठ करने से रोग, दोष आदि भी दूर होते हैं।
यदि आप के जीवन में कोई बड़ा संकट है, तो उससे मुक्ति के लिए संकटमोचन हनुमानाष्टक का पाठ करें। संकटमोचन हनुमानाष्टक हनुमान चालीसा में ही दिया गया है। बड़ा मंगलवार को आपको जब समय मिले, हनुमान जी के समक्ष बैठकर संकटमोचन हनुमानाष्टक का पाठ करें। हनुमत कृपा से आपके सभी दुख दूर होंगे।
रामचरितमानस के सुंदरकांड में हनुमान जी के पराक्रम का वर्णन है। प्रभु राम कर आज्ञा से माता सीता की खोज में जाते हैं। सहस्त्र योजन समुद्र को लांघकर लंका में प्रवेश कर माता सीता को प्रभु राम का संदेश देते हैं। उसके बाद लंका दहन करके रावण को चेताते भी हैं। जो भक्त बड़ा मंगलवार () को सुंदरकांड का पाठ करता है या इसका आयोजन करता है, उसे हनुमान जी का अशीर्वाद मिलता है। हनुमत कृपा से मनोकामनाएं पूरी होती हैं और नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है। हनुमान जी के आशीर्वाद से व्यक्ति के ज्ञान, बल, आत्मविश्वास, सफलता, यश, पराक्रम आदि में बढ़ोत्तरी होती है। कष्ट मिटते हैं और गृह क्लेश से मुक्ति मिलती है।
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