गणेशोत्सव : कैसी और कब लाएं घर, ऑफिस में मूर्ति, गणेश चतुर्थी को करें इन...
...मंत्रों का जाप और विशेष उपाय
- जीवन में आ रही विघ्न-बाधाओं से मिल सकती है मुक्ति
ऐसी खरीदें गणपति की मूर्ति
भगवान गणेश की मूर्ति खरीदते समय ध्यान रखें कि सूंड बाईं ओर (वाममुखी) होनी चाहिए। यह सुख, समृद्धि और शांति का प्रतीक है। दाईं ओर सूंड वाली मूर्तियों के लिए नियम बहुत कठोर हैं। इसके अलावा बैठे हुए गणपति की मूर्ति घर में स्थिरता लाती है एवं सदैव शुभ मानी जाती है। खड़े हुए गणेशजी की मूर्ति शुभ नहीं मानी जाती।
गणपति के मूर्ति के रंग को लेकर भी मान्यता है। केसरिया, सफेद या पीला रंग शुभ माना जाता है। घर में काले रंग की मूर्ति नहीं लानी चाहिए। गजानन मूर्ति के साथ-साथ उसका वाहन चूहा भी साथ में होना चाहिए। इसके साथ भगवान गणेश का दाहिना दांत पूरा होना चाहिए और बायां दांत थोड़ा टूटा हुआ होना चाहिए। उनके चार हाथ होने चाहिए।
घर के लिए ऐसी लें मूर्ति
गणपति को घर में स्थापित करने वाले हैं, तो आपको शुद्ध मिट्टी, पीतल, तांबा, चांदी या सफेद संगमरमर से बनी मूर्तियां खरीदनी चाहिए। अच्छी तरह से जांच कर लें, कि मूर्ति कहीं से भी टूटी या खंडित तो नहीं है। घर में स्थित मंदिर या पूजा स्थल के अनुसार छोटे आकार की मूर्ति चुनें। बहुत बड़ी मूर्ति घर के लिए शुभ नहीं मानी जाती है। वहीं, गणेश जी की मूर्ति को सदैव घर के उत्तर-पूर्व (उत्तर-पूर्वी कोने) या पूर्व दिशा में ही रखना चाहिए।
गणेश पूजा के नियम
सुबह जल्दी स्नान करें और साफ कपड़े पहनें.
एक लकड़ी के तख्ते (चौकी) पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाएं और उसका मुख उत्तर या पूर्व दिशा की ओर रखें.
गणेश जी की मूर्ति को शुभ मुहूर्त में स्थापित करें.
एक तांबे के बर्तन में पानी, सुपारी, सिक्का और आम के पत्ते रखें और उसे पास में ही रखें.
भगवान गणेश को फल-फूल अर्पित करें.
विधिपूर्वक मोदकम या लड्डू अर्पित करें और आरती करें.
गणेश चतुर्थी उदयातिथि के अनुसार, 2026 में 14 सितंबर को मनाई जाएगी। हर वर्ष भाद्रपद माह में शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को यह पर्व मनाते हैं, क्योंकि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन पर भगवान गणेश का अवतरण हुआ था। इस शुभ दिन पर भक्त व्रत रखते हैं और विधि-विधान से बप्पा की पूजा करते हैं। पूजा के साथ इस दिन कुछ मंत्रों का जप करने से बप्पा की कृपा प्राप्त होती है, भक्तों के जीवन की विभिन्न विघ्न-बाधाएं दूर हो सकती हैं।
देखें-
गणेश चतुर्थी के दिन बप्पा की कृपा प्राप्त करने के लिए कुछ मंत्रों का जप आपको करना चाहिए। इन मंत्रों का जप करने से विघ्न-बाधाओं से आपको मुक्ति मिल सकती है।
- जीवन में आ रही विघ्न-बाधाओं से मिल सकती है मुक्ति
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गणेश चतुर्थी पर श्रद्धालु-भक्त अपने घरों में भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित करते हैं। अधिकांश लोग नौ दिनों तक विधि-विधानपूर्वक उनकी पूजा-आरती करने के बाद दसवें दिन जल में विधिवत विसर्जित करते हैं। गणेश चतुर्थी से पहले लोग गणपति की नई मूर्तियां खरीद रहे हैं। जिस प्रकार घर में भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित करने, उनकी पूजा करने के नियम हैं, उसी प्रकार उनकी मूर्ति खरीदते समय भी कई बातों का ध्यान रखना आवश्यक है। यदि आप भी इस गणेश चतुर्थी के लिए नई मूर्ति खरीद रहे हैं, तो मूर्ति खरीदते समय आप कुछ बातों का ध्यान रखें, तो इससे आपको अनुकूल व शुभ फल मिलेगा।
हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 14 सितंबर 2026 (सोमवार) प्रातः 7:06 बजे आरंभ होकर 15 सितंबर प्रातः 7:44 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार गणेश चतुर्थी का पर्व 14 सितंबर को मनाया जाएगा।
भगवान गणेश की मूर्ति खरीदते समय ध्यान रखें कि सूंड बाईं ओर (वाममुखी) होनी चाहिए। यह सुख, समृद्धि और शांति का प्रतीक है। दाईं ओर सूंड वाली मूर्तियों के लिए नियम बहुत कठोर हैं। इसके अलावा बैठे हुए गणपति की मूर्ति घर में स्थिरता लाती है एवं सदैव शुभ मानी जाती है। खड़े हुए गणेशजी की मूर्ति शुभ नहीं मानी जाती।
गणपति के मूर्ति के रंग को लेकर भी मान्यता है। केसरिया, सफेद या पीला रंग शुभ माना जाता है। घर में काले रंग की मूर्ति नहीं लानी चाहिए। गजानन मूर्ति के साथ-साथ उसका वाहन चूहा भी साथ में होना चाहिए। इसके साथ भगवान गणेश का दाहिना दांत पूरा होना चाहिए और बायां दांत थोड़ा टूटा हुआ होना चाहिए। उनके चार हाथ होने चाहिए।
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गणपति को घर में स्थापित करने वाले हैं, तो आपको शुद्ध मिट्टी, पीतल, तांबा, चांदी या सफेद संगमरमर से बनी मूर्तियां खरीदनी चाहिए। अच्छी तरह से जांच कर लें, कि मूर्ति कहीं से भी टूटी या खंडित तो नहीं है। घर में स्थित मंदिर या पूजा स्थल के अनुसार छोटे आकार की मूर्ति चुनें। बहुत बड़ी मूर्ति घर के लिए शुभ नहीं मानी जाती है। वहीं, गणेश जी की मूर्ति को सदैव घर के उत्तर-पूर्व (उत्तर-पूर्वी कोने) या पूर्व दिशा में ही रखना चाहिए।
गणेश पूजा के नियम
सुबह जल्दी स्नान करें और साफ कपड़े पहनें.
एक लकड़ी के तख्ते (चौकी) पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाएं और उसका मुख उत्तर या पूर्व दिशा की ओर रखें.
गणेश जी की मूर्ति को शुभ मुहूर्त में स्थापित करें.
एक तांबे के बर्तन में पानी, सुपारी, सिक्का और आम के पत्ते रखें और उसे पास में ही रखें.
भगवान गणेश को फल-फूल अर्पित करें.
विधिपूर्वक मोदकम या लड्डू अर्पित करें और आरती करें.
गणपति स्थापना एवं पूजा का शुभ मुहूर्त
गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की स्थापना के लिए मध्याह्न काल सर्वाधिक शुभ माना जाता है। 14 सितंबर सोमवार सुबह 11:02 बजे से दोपहर 1:31 बजे तक शुभ मुहूर्त है। अर्थात श्रद्धालु-भक्तों को गणपति प्रतिमा स्थापित करने एवं मुख्य पूजा करने के लिए लगभग ढाई घंटे का शुभ समय मिलेगा।
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गणेश चतुर्थी के दिन बप्पा की कृपा प्राप्त करने के लिए कुछ मंत्रों का जप आपको करना चाहिए। इन मंत्रों का जप करने से विघ्न-बाधाओं से आपको मुक्ति मिल सकती है।
भगवान गणेश का मूल मंत्र
ॐ गं गणपतये नमः
गणेश जी का मूल मंत्र अत्यंत सरल और चमत्कारी माना जाता है। गणेश चतुर्थी के दिन इस मंत्र का जप करने से आपके जीवन की सभी विघ्न-बाधाएं दूर हो सकती हैं और साथ ही हर कार्य में आपको सफलता मिल सकती है। इस मंत्र का जप करने से बप्पा की कृपा भी आप पर बरसती है।
लक्ष्मी-विनायक मंत्र
ॐ श्रीं गं सौम्याय गणपतये वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा।
अगर आपके जीवन में धन की समस्या है तो गणेश चतुर्थी के दिन आपको लक्ष्मी-विनायक मंत्र का जप करना चाहिए। इस मंत्र का जप करने से धन-धान्य की आपको प्राप्ति हो सकती है। इसके साथ ही माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की असीम कृपा भी आपको इस मंत्र का जप करने से प्राप्त होती है।
विघ्न नाशक मंत्र
ॐ वक्रतुण्डाय हुं
भगवान गणेश के इस मंत्र का समस्त विघ्नों को दूर करने वाला माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस मंत्र का 6 लाख बार जप करने से मुसीबतें दूर हो जाती है। हालांकि, गणेश चतुर्थी के शुभ दिन पर इस मंत्र का 108 बार जप करके भी आप शुभ फल प्राप्त कर सकते हैं।
गणेश गायत्री मंत्र
ॐ एकदंताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो दंति प्रचोदयात्।
जो लोग ज्ञान, विवेक और उच्च बौद्धिक क्षमता पाना चाहते हैं उनको गणेश जी के गायत्री मंत्र का जप करना चाहिए। इस मंत्र का जप करने से शिक्षा के क्षेत्र में उपलब्धियां मिलती हैं इसलिए विद्यार्थियों के लिए इस मंत्र को खास माना जाता है। यह मंत्र जीवन में ऐश्वर्य और समृद्धि दिलाने वाला भी है।
ऋण मुक्ति के लिए मंत्र
ॐ गणेश ऋणं छिंधि वरं हुं नमः फट्
भगवान गणेश के ऋण मक्ति या ऋणमोचन मंत्र का जप करके आप हर प्रकार के ऋण से धीरे-धीरे मुक्त होते जाएंगे, आपको कर्ज से मुक्ति का मार्ग मिलेगा। इसके साथ इस मंत्र का जप करने से आपकी आर्थिक स्थिति धीरे-धीरे सुधर सकती है।
ॐ गं गणपतये नमः
गणेश जी का मूल मंत्र अत्यंत सरल और चमत्कारी माना जाता है। गणेश चतुर्थी के दिन इस मंत्र का जप करने से आपके जीवन की सभी विघ्न-बाधाएं दूर हो सकती हैं और साथ ही हर कार्य में आपको सफलता मिल सकती है। इस मंत्र का जप करने से बप्पा की कृपा भी आप पर बरसती है।
लक्ष्मी-विनायक मंत्र
ॐ श्रीं गं सौम्याय गणपतये वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा।
अगर आपके जीवन में धन की समस्या है तो गणेश चतुर्थी के दिन आपको लक्ष्मी-विनायक मंत्र का जप करना चाहिए। इस मंत्र का जप करने से धन-धान्य की आपको प्राप्ति हो सकती है। इसके साथ ही माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की असीम कृपा भी आपको इस मंत्र का जप करने से प्राप्त होती है।
विघ्न नाशक मंत्र
ॐ वक्रतुण्डाय हुं
भगवान गणेश के इस मंत्र का समस्त विघ्नों को दूर करने वाला माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस मंत्र का 6 लाख बार जप करने से मुसीबतें दूर हो जाती है। हालांकि, गणेश चतुर्थी के शुभ दिन पर इस मंत्र का 108 बार जप करके भी आप शुभ फल प्राप्त कर सकते हैं।
गणेश गायत्री मंत्र
ॐ एकदंताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो दंति प्रचोदयात्।
जो लोग ज्ञान, विवेक और उच्च बौद्धिक क्षमता पाना चाहते हैं उनको गणेश जी के गायत्री मंत्र का जप करना चाहिए। इस मंत्र का जप करने से शिक्षा के क्षेत्र में उपलब्धियां मिलती हैं इसलिए विद्यार्थियों के लिए इस मंत्र को खास माना जाता है। यह मंत्र जीवन में ऐश्वर्य और समृद्धि दिलाने वाला भी है।
ऋण मुक्ति के लिए मंत्र
ॐ गणेश ऋणं छिंधि वरं हुं नमः फट्
भगवान गणेश के ऋण मक्ति या ऋणमोचन मंत्र का जप करके आप हर प्रकार के ऋण से धीरे-धीरे मुक्त होते जाएंगे, आपको कर्ज से मुक्ति का मार्ग मिलेगा। इसके साथ इस मंत्र का जप करने से आपकी आर्थिक स्थिति धीरे-धीरे सुधर सकती है।
विद्या के अधष्ठात्री देव गणपति : शंकराचार्य
गोस्वामी तुलसीदास जी के इष्ट देव कौन थे ? भगवान राम। लेकिन हमारे यहां गणेश जी का स्मरण पहले किया जाता है। पत्र (या कोई भी कार्य या लेखन से पहले) भी हम लोग लिखते हैं- श्री गणेशाय नमः। तुलसीदासजी ने सनातन मर्यादा का निर्वाह किया। "विनय पत्रिका" में सबसे पहले गणेशजी की उपासना की। उनका स्मरण किया- "गाइए गणपति जग वंदन...
विद्या की अधिष्ठात्री देवी सरस्वती है। विद्या के अधष्ठात्री देव गणपति है। वरु नाम संघ नाम रस नाम छंदसा कहकर तुलसीदास जी ने वा देवी वाग देवी सरस्वती का और गणपति का स्मरण किया। विनय पत्रिका में गणेश जी की वंदना प्रथम किया, लेकिन वरदान क्या मांगा ?
मांगत दास कर जोरे,
बस राम मानस मोरे।
मेरे मन में आपके अनुग्रह से भगवती सीता सहित रामचंद्र निवास करें। जिनके जो इष्ट देव हों, वे भी गणेश जी का प्रथम स्मरण करें और गणेशजी से वर मांगे, कि आपकी अनुकंपा के अनमोघक प्रभाव से मेरे इष्ट देव में मेरी रति ,हो प्रीति हो। गणेशजी इष्ट है, तो कहना ही क्या हैं ! तो हमारे यहां एक की भगवान वेदाव्यास ने 18 पुराणों, 18 उप-पुराणों की रचना किया। 18 और उप पुराणों की संरचना की, उनमें गणेश पुराण भी है। "देवी पुराण" और श्रीमद् भागवत, देवी भागवत, विष्णु पुराण, शिव पुराण, सूर्य पुराण भी। इसका अर्थ क्या होता है ? भगवान वेदव्यास जी ने पांचो देवों में एकत्व की प्रस्थापना की। जैसे एक ही हथेली पांच उंगलियों को अभिव्यक्त करने में समर्थ है। हथेली के साथ ये संलग्न है। इसी प्रकार से समझना चाहिए। उत्पत्ति स्थिति संहार निग्रह अनुग्रह इन पंच कृत्यों का निर्वाह करने के लिए सच्चिदानंद स्वरूप एक ही सर्वेश्वर पंच देवों के रूप में स्वयं कोपित करते हैं। - पुरी पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती, संरक्षक - "धर्म नगरी"
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समस्या आपकी - समाधान ज्योतिषाचार्य साधक के...
यदि आप या आपके परिवार, मित्र आदि किसी प्रकार की समस्या (विवाह, नौकरी, स्वास्थ्य, संपत्ति विवाद आदि) से जूझ रहे हों, व्यापार, राजनीति, शिक्षा आदि क्षेत्र में हैं और किसी समस्या आदि से चल रहे हैं, आपने बहुत प्रयास किया, लेकिन कोई सही मार्गदर्शन या रास्ता अब तक नहीं मिला... तो आप अपनी समस्या या प्रश्न अपने नाम के साथ जन्मदिन, जन्म समय एवं जन्मस्थान (तीनों सही-सही) 810 910 7075 पर वाट्सएप करें।
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