शरद पूर्णिमा : वर्ष में पृथ्वी के सबसे निकट रहता है चन्द्रमा, सोलह कलाओं से परिपूर्ण...
- पढ़ें शरद या रास या कुमार पूर्णिमा के दिन क्या करें, क्या नहीं ?
- शरद पूर्णिमा को माँ लक्ष्मी पृथ्वी पर विचरण करती, पूछती हैं- कौन जाग रहा है ?
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आचार्य नित्यानंद गिरी*
एक महीने में चंद्रमा जिन 27 नक्षत्रों में भ्रमण करता है, उनमें सबसे पहला आश्विन है और आश्विन नक्षत्र की पूर्णिमा (शरद पूर्णिमा) आरोग्यता देती है। सनातन धर्म में शरद पूर्णिमा की रात्रि अति विशेष रात होती है, क्योंकि इस रात्रि चंद्रमा पृथ्वी के सबसे निकट रहता है, अपनी समस्त 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है, पूर्ण रूप से चमकता या प्रकाशित होता है।
शरद पूर्णिमा के दिन इस दिन धन, सुख-समृद्धि की देवी लक्ष्मी एवं भगवान विष्णु की पूजा करने की परंपरा है। प्राचीन मान्यता है, शरद पूर्णिमा पर पूजा करने से घर में सौभाग्य एवं समृद्धि आती है। इस मान्यता के पीछे हमारे त्रिकालदर्शी ऋषियों एवं पूर्वजों के बताएं रहस्य हैं, जिसे आज वैज्ञानिक भी बताते हैं और जान गए, कि केवल शरद पूर्णिमा को ही चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से संपूर्ण होता है और पृथ्वी के सबसे ज्यादा निकट भी। चंद्रमा की किरणों से इस पूर्णिमा को अमृत बरसता है।
चंद्रमा की किरणों के प्रभाव से खीर का अमृत रस घुल जाता है। खीर को कांच, मिट्टी या चांदी के बर्तन में ही रखें। अन्य धातुओं का प्रयोग न करें। खीर देशी गाय के दूध से बनाना ही सर्वश्रेष्ठ है। खीर को महीन कपड़े से ढक कर रात में खुले आकाश (चांदनी रात) में रखते हैं, जिससे चंद्रमा के प्रकाश का विशेष प्रभाव खीर पर पड़ता है। फिर इसे अगली दिन सुबह प्रसाद स्वरुप खाने से स्वास्थ्य लाभ होता है। शारद पूर्णिमा को मंदिर के दर्शन करने से मन शांत होगा। शरद पूर्णिमा आध्यात्मिक विकास के लिए एक अच्छा अवसर है।
चंद्रमा की किरणों के प्रभाव से खीर का अमृत रस घुल जाता है। खीर को कांच, मिट्टी या चांदी के बर्तन में ही रखें। अन्य धातुओं का प्रयोग न करें। खीर देशी गाय के दूध से बनाना ही सर्वश्रेष्ठ है। खीर को महीन कपड़े से ढक कर रात में खुले आकाश (चांदनी रात) में रखते हैं, जिससे चंद्रमा के प्रकाश का विशेष प्रभाव खीर पर पड़ता है। फिर इसे अगली दिन सुबह प्रसाद स्वरुप खाने से स्वास्थ्य लाभ होता है। शारद पूर्णिमा को मंदिर के दर्शन करने से मन शांत होगा। शरद पूर्णिमा आध्यात्मिक विकास के लिए एक अच्छा अवसर है।
शरद पूर्णिमा के दिन श्रीहरि विष्णु और माँ लक्ष्मी के साथ-साथ लड्डू गोपाल की पूजा को भी विशेष माना गया है। इस पर्व (शरद पूर्णिमा) का संबंध भगवान श्रीकृष्ण की महारास लीला से भी माना जाता है। ब्रज की परंपराओं में शरद पूर्णिमा की रात को अति विशेष मानते हैं। इस दिन श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप "लड्डू गोपाल" की पूजा करने वाले भक्त भी विशेष श्रद्धा के साथ उनकी आराधना करते हैं।
शरद पूर्णिमा का एक नाम कोजागरी पूर्णिमा भी है, अर्थात लक्ष्मी जी पूछती हैं- कौन जाग रहा है ? अश्विनी महीने की पूर्णिमा को चंद्रमा अश्विनी नक्षत्र में होता है, इसलिए इस महीने का नाम अश्विनी पड़ा है। इस दिन व्रत करने से व्यक्ति को सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। कोजागरी पूर्णिमा को बंगाली लक्ष्मी पूजा के नाम से भी जाना जाता है। विशेष रूप से पश्चिम बंगाल में इस पर्व को श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस रात जागरण करके माँ लक्ष्मी की पूजा करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यतानुसार, शारदीय नवरात्रि के पश्चात पड़ने वाली पूर्णिमा- शरद पूर्णिमा की तिथि सनातन हिंदू पंचाग में अत्यंत फलदायी एवं शुभ दिन होती है। इस दिन की श्रद्धा-भक्ति से की गई पूजा का शुभ फल भक्तों को अवश्य प्राप्त है।
शरद पूर्णिमा को ये न करें
➤ नकारात्मक विचारों को अपने मन में न आने दें,
➤ इस दिन आप किसी से विवाद न करें, विवाद से बचें,
➤ इस दिन आप किसी से विवाद न करें, विवाद से बचें,
➤ शरद पूर्णिमा के के दिन झूठ नहीं बोलना चाहिए,
➤ क्रोध न करें, यदि किसी कारणवश आए, तो नियंत्रण रखें,
➤ घर में किसी भी तरह का झगड़ा या कलह न करें। इससे घर में दरिद्रता आती है।
इनका ध्यान रखें
✔ शरद पूर्णिमा के दिन भूलकर भी तामसिक (मांस आदि) भोजन न करें,
✔ इस दिन लहसुन और प्याज का सेवन भी वर्जित है,
✔ शरद पूर्णिमा को काले रंग का प्रयोग न करें, काले कपड़े भी न पहने। चमकीले वस्त्र पहनना सर्वश्रेष्ठ होगा,
✔ शरद पूर्णिमा को कुछ चीजों का दान करना शुभ होता है, परन्तु इस दिन कुछ ऐसी चीजें भी हैं, जिनका दान नहीं करना चाहिए-
✔ इस दिन भूलकर भी नमक का दान नहीं करना चाहिए। सनातन हिन्दू धर्म में नमक को नकारात्मक ऊर्जा (positive energy) का प्रतीक माना गया है। ऐसे में इस दिन नमक दान करने से समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
✔ इस दिन दही का दान भी नहीं करना चाहिए। मान्यता है, इस दिन दही दान का काम करना शुभ नहीं होता एवं इससे जीवन में निष्ठुरता (harshness) और खटास बढ़ती है
✔ शरद पूर्णिमा को चावल और गुड़ का भी दान किया जा सकता है।
शरद पूर्णिमा : महारास लीला से जुड़ा पर्व
शरद पूर्णिमा को रास पूर्णिमा कहने के पीछे श्रीकृष्ण की महारास लीला से जुड़ी धार्मिक मान्यता है। ब्रज की परंपरा के अनुसार, इसी पूर्णिमा की चांदनी रात में भगवान कृष्ण ने वृंदावन में गोपियों के साथ महारास किया था। इस लीला को भगवान और उनके भक्तों के बीच प्रेम, भक्ति और आध्यात्मिक जुड़ाव का प्रतीक माना जाता है। लड्डू गोपाल (श्रीकृष्ण का बाल स्वरूप) को भक्त अपने परिवार का हिस्सा मानते और उनकी सेवा एक छोटे बालक की तरह करते हैं। इसलिए शरद पूर्णिमा जैसे विशेष अवसर पर उनकी पूजा कर श्रद्धालु अपने घर में सुख-शांति, प्रेम और आनंद की कामना करते हैं। कृष्ण मंदिरों में भजन-कीर्तन, विशेष शृंगार और भोग जैसी धार्मिक परंपराएं भी निभाई जाती हैं।
शरद पूर्णिमा पर लड्डू गोपाल की पूजा में भी भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार खीर का भोग लगा सकते हैं। इसके अलावा माखन-मिश्री, दूध, फल और अन्य सात्विक मिठाइयां भी अर्पित की जा सकती हैं। भगवान श्रीकृष्ण को माखन प्रिय माना जाता है, इसलिए कई भक्त विशेष अवसरों पर उन्हें माखन-मिश्री का भोग लगाना पसंद करते हैं।
शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा की किरणों का महत्व
शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की पूजा और उसकी चांदनी का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस रात चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है और उसकी किरणों में अमृत के समान गुण होते हैं। इसी वजह से कई लोग रात में खीर को चांदनी में रखते हैं और अगले दिन प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। भगवान श्रीकृष्ण की महारास लीला से जुड़ी मान्यताओं के कारण भी इस रात को विशेष माना जाता है। ऐसे में कुछ श्रद्धालु चंद्रमा की पूजा के साथ भगवान कृष्ण और लड्डू गोपाल की आराधना भी करते हैं।
शरद पूर्णिमा को चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है। इस वर्ष 25 अक्टूबर को रेवती नक्षत्र, हर्षण योग और त्रिग्रही योग का संयोग रहेगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, रविवार का दिन भी इस तिथि को विशेष बना रहा है। तुला राशि में सूर्य, बुध और शुक्र की उपस्थिति से त्रिग्रही-योग का निर्माण हो रहा है। ज्योतिष शास्त्र में इन ग्रहों की स्थिति को महत्वपूर्ण माना जाता है एवं इससे इस शरद पूर्णिमा को कर्क, कन्या एवं मकर राशि के जातकों के लिए विशेष अनुकूल रहेगा-
कर्क- शरद पूर्णिमा का समय सुखद रहने के साथ मानसिक शांति व सकारात्मकता का अनुभव हो सकता है। कोई विशेष काम इस समय पूरा होगा। व्यापार-कारोबार सफल हो सकता है। आर्थिक मामलों में लाभ मिलने के योग बन रहे हैं। नौकरीपेशा को कार्यक्षेत्र में अपने प्रयासों का अच्छा परिणाम मिल सकता है। धन कमाने के नए अवसर मिल सकते हैं।
कन्या- शरद पूर्णिमा कन्या राशि वालों के लिए यह समय शुभ परिणाम लेकर आ सकता है। जीवन के कुछ क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव, सफलता प्राप्त होने एवं सामाजिक क्षेत्र में प्रतिष्ठा बढ़ने के योग बन रहे हैं। कार्यक्षेत्र में आपकी परिश्रम को पहचान प्राप्त हो सकती है। आर्थिक स्थिति में सुधार होने एवं करियर में आगे बढ़ने के अवसर मिलने के योग हैं।
मकर- भाग्य का साथ मिलने से आपके कुछ रुके काम शरद पूर्णिमा पर आगे बढ़ सकते हैं। नौकरी एवं कारोबार से जुड़े मामलों में सकारात्मक परिणाम मिलने, विवाह की बात पक्की होने एवं कोई विशेष खुशखबरी मिलने के योग हैं। अपने लक्ष्यों को पाने के योग भी शरद पूर्णिमा बन रहे हैं।
➤ घर में किसी भी तरह का झगड़ा या कलह न करें। इससे घर में दरिद्रता आती है।
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✔ शरद पूर्णिमा के दिन भूलकर भी तामसिक (मांस आदि) भोजन न करें,
✔ इस दिन लहसुन और प्याज का सेवन भी वर्जित है,
✔ शरद पूर्णिमा को काले रंग का प्रयोग न करें, काले कपड़े भी न पहने। चमकीले वस्त्र पहनना सर्वश्रेष्ठ होगा,
✔ शरद पूर्णिमा को कुछ चीजों का दान करना शुभ होता है, परन्तु इस दिन कुछ ऐसी चीजें भी हैं, जिनका दान नहीं करना चाहिए-
✔ इस दिन भूलकर भी नमक का दान नहीं करना चाहिए। सनातन हिन्दू धर्म में नमक को नकारात्मक ऊर्जा (positive energy) का प्रतीक माना गया है। ऐसे में इस दिन नमक दान करने से समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
✔ इस दिन दही का दान भी नहीं करना चाहिए। मान्यता है, इस दिन दही दान का काम करना शुभ नहीं होता एवं इससे जीवन में निष्ठुरता (harshness) और खटास बढ़ती है
✔ शरद पूर्णिमा को चावल और गुड़ का भी दान किया जा सकता है।
शरद पूर्णिमा को रास पूर्णिमा कहने के पीछे श्रीकृष्ण की महारास लीला से जुड़ी धार्मिक मान्यता है। ब्रज की परंपरा के अनुसार, इसी पूर्णिमा की चांदनी रात में भगवान कृष्ण ने वृंदावन में गोपियों के साथ महारास किया था। इस लीला को भगवान और उनके भक्तों के बीच प्रेम, भक्ति और आध्यात्मिक जुड़ाव का प्रतीक माना जाता है। लड्डू गोपाल (श्रीकृष्ण का बाल स्वरूप) को भक्त अपने परिवार का हिस्सा मानते और उनकी सेवा एक छोटे बालक की तरह करते हैं। इसलिए शरद पूर्णिमा जैसे विशेष अवसर पर उनकी पूजा कर श्रद्धालु अपने घर में सुख-शांति, प्रेम और आनंद की कामना करते हैं। कृष्ण मंदिरों में भजन-कीर्तन, विशेष शृंगार और भोग जैसी धार्मिक परंपराएं भी निभाई जाती हैं।
शरद पूर्णिमा पर लड्डू गोपाल की पूजा में भी भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार खीर का भोग लगा सकते हैं। इसके अलावा माखन-मिश्री, दूध, फल और अन्य सात्विक मिठाइयां भी अर्पित की जा सकती हैं। भगवान श्रीकृष्ण को माखन प्रिय माना जाता है, इसलिए कई भक्त विशेष अवसरों पर उन्हें माखन-मिश्री का भोग लगाना पसंद करते हैं।
शरद पूर्णिमा : पूजा और स्नान का महत्व
शरद पूर्णिमा पर पवित्र नदियों में स्नान, दान-पुण्य और पूजा-पाठ करने की परंपरा है। मान्यता है, जो भी शरद पूर्णिमा पर गंगा स्नान करता है, उसके ऊपर भगवान की विशेष कृपा रहती है। ऐसे में शरद पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी के साथ-साथ चन्द्रमा की भी पूजा अर्चना करनी चाहिए। शरद पूर्णिमा पर सुबह सूर्य और रात को चन्द्र देव की पूजा अर्चना करें, इसके साथ ही रात को माँ लक्ष्मीजी की षोडशोपचार विधि से पूजा, श्रीसूक्त का पाठ, कनकधारा स्त्रोत, विष्णुसहस्त्रनाम का पाठ अवश्य करें। इससे माँ लक्ष्मी आपके घर को धन-धान्य से भर देंगी।
शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की पूजा और उसकी चांदनी का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस रात चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है और उसकी किरणों में अमृत के समान गुण होते हैं। इसी वजह से कई लोग रात में खीर को चांदनी में रखते हैं और अगले दिन प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। भगवान श्रीकृष्ण की महारास लीला से जुड़ी मान्यताओं के कारण भी इस रात को विशेष माना जाता है। ऐसे में कुछ श्रद्धालु चंद्रमा की पूजा के साथ भगवान कृष्ण और लड्डू गोपाल की आराधना भी करते हैं।
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शरद पूर्णिमा पर लड्डू गोपाल की पूजा कैसे करें ?
शरद पूर्णिमा के दिन सुबह स्नान करने के बाद घर के मंदिर की साफ-सफाई करें। इसके बाद लड्डू गोपाल को साफ कपड़े पहनाएं और अपनी परंपरा के अनुसार उनका शृंगार करें। भगवान के सामने दीपक जलाकर फूल अर्पित करें और श्रद्धापूर्वक पूजा करें। इस दिन लड्डू गोपाल को खीर, माखन-मिश्री, फल या अन्य सात्विक मिठाइयों का भोग लगाया जा सकता है। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण के मंत्रों का जाप करें और भजन-कीर्तन करते हुए परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करें। पूजा पूरी होने के बाद भोग को प्रसाद के रूप में परिवार के सदस्यों में बांट दें।
शरद पूर्णिमा के दिन सुबह स्नान करने के बाद घर के मंदिर की साफ-सफाई करें। इसके बाद लड्डू गोपाल को साफ कपड़े पहनाएं और अपनी परंपरा के अनुसार उनका शृंगार करें। भगवान के सामने दीपक जलाकर फूल अर्पित करें और श्रद्धापूर्वक पूजा करें। इस दिन लड्डू गोपाल को खीर, माखन-मिश्री, फल या अन्य सात्विक मिठाइयों का भोग लगाया जा सकता है। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण के मंत्रों का जाप करें और भजन-कीर्तन करते हुए परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करें। पूजा पूरी होने के बाद भोग को प्रसाद के रूप में परिवार के सदस्यों में बांट दें।
शरद पूर्णिमा (कोजागरा) को विशेष मनोकामना को लेकर श्रद्धा विश्वास पूर्वक कर सकते हैं ये उपाय-
अर्पित करें कौड़ियां
शरद पूर्णिमा की रात्रि लक्ष्मी पूजा के समय 5 कौड़ियां लें। उन्हें अभिमंत्रित करके देवी माँ को चढ़ाएं। पहले एक कौड़ी हाथ में लेकर मंत्र पढ़ें- 'श्रीं ह्रीं श्रीं' फिर दूसरी कौड़ी हाथ में लें और मंत्र पढ़ें- 'श्रीं ह्रीं श्रीं'। इसी प्रकार पांचों कौड़ियां देवी को चढ़ाएं। फिर देवी माँ को पुष्प आदि अर्पित करके उनके सामने घी का दीपक जलाइए। इस प्रकार पूजा हो जाये तो उन कौड़ियों को उठाकर एक सुंदर-सी कटोरी में डालकर अपने मंदिर में रख लें और उसे रोज धूप दिखाएं। श्रद्धापूर्वक इस उपाय को करने से माँ लक्ष्मी की कृपा से आपने मान-सम्मान एवं वैभव में वृद्धि होगी।
मंत्र जाप करें, भगवान के सामने दीपक जलाएं
घर के सदस्यों एवं स्वयं के जीवन में सुख-समृद्धि बनाये रखने के लिए शरद पूर्णिमा को देवी लक्ष्मी को पुष्प अर्पित करें। अगर संभव हो तो कमल का पुष्प अर्पित करें। फिर घी का दीपक जलाएं और वहीं पर आसन बिछाकर बैठ जायें। अब माँ लक्ष्मी के मंत्र का एक माला जप करें। मंत्र है- ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः। इस मंत्र का पूरे एक माला जप श्रेष्ठ होगा। अन्यथा आप 51 बार करें अथवा 11 बार अवश्य करें।
वहीं, यदि आप मानसिक रूप से अशांत हैं या मानसिक शांति पाना चाहते हैं, तो आज आप सत्यनारायण भगवान के आगे घी का दीपक जलाकर चंदन की धूपबत्ती जलानी चाहिए। इसके अलावा भगवान को केले के फल का भोग लगाना चाहिए।
जलाएं अखंड ज्योत
किसी विशेष उद्देश्य या मनोकामना को लेकर शरद पूर्णिमा की रात्रि माँ लक्ष्मी के सामने अखंड ज्योत जलाएं। अखंड ज्योत भोर होने तक जलती रहे, इसका ध्यान रखें। रात्रि को माँ लक्ष्मी के सामने अखंड ज्योत जलाकर उसके सामने आसन बिछाकर बैठ जाएँ। अपने कार्य के शीघ्र पूर्ण होने की इच्छा करते हुए ज्योत को देखकर देवी मां के इस मंत्र का जप करें। मंत्र है- श्रीं ह्रीं श्रीं। आप इस मंत्र का 108 बार जप करें। जप हेतु आप स्फटिक, कमलगट्टे या रुद्राक्ष की माला पर जप कर सकते हैं।
शरद पूर्णिमा की रात्रि लक्ष्मी पूजा के समय 5 कौड़ियां लें। उन्हें अभिमंत्रित करके देवी माँ को चढ़ाएं। पहले एक कौड़ी हाथ में लेकर मंत्र पढ़ें- 'श्रीं ह्रीं श्रीं' फिर दूसरी कौड़ी हाथ में लें और मंत्र पढ़ें- 'श्रीं ह्रीं श्रीं'। इसी प्रकार पांचों कौड़ियां देवी को चढ़ाएं। फिर देवी माँ को पुष्प आदि अर्पित करके उनके सामने घी का दीपक जलाइए। इस प्रकार पूजा हो जाये तो उन कौड़ियों को उठाकर एक सुंदर-सी कटोरी में डालकर अपने मंदिर में रख लें और उसे रोज धूप दिखाएं। श्रद्धापूर्वक इस उपाय को करने से माँ लक्ष्मी की कृपा से आपने मान-सम्मान एवं वैभव में वृद्धि होगी।
मंत्र जाप करें, भगवान के सामने दीपक जलाएं
घर के सदस्यों एवं स्वयं के जीवन में सुख-समृद्धि बनाये रखने के लिए शरद पूर्णिमा को देवी लक्ष्मी को पुष्प अर्पित करें। अगर संभव हो तो कमल का पुष्प अर्पित करें। फिर घी का दीपक जलाएं और वहीं पर आसन बिछाकर बैठ जायें। अब माँ लक्ष्मी के मंत्र का एक माला जप करें। मंत्र है- ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः। इस मंत्र का पूरे एक माला जप श्रेष्ठ होगा। अन्यथा आप 51 बार करें अथवा 11 बार अवश्य करें।
वहीं, यदि आप मानसिक रूप से अशांत हैं या मानसिक शांति पाना चाहते हैं, तो आज आप सत्यनारायण भगवान के आगे घी का दीपक जलाकर चंदन की धूपबत्ती जलानी चाहिए। इसके अलावा भगवान को केले के फल का भोग लगाना चाहिए।
जलाएं अखंड ज्योत
किसी विशेष उद्देश्य या मनोकामना को लेकर शरद पूर्णिमा की रात्रि माँ लक्ष्मी के सामने अखंड ज्योत जलाएं। अखंड ज्योत भोर होने तक जलती रहे, इसका ध्यान रखें। रात्रि को माँ लक्ष्मी के सामने अखंड ज्योत जलाकर उसके सामने आसन बिछाकर बैठ जाएँ। अपने कार्य के शीघ्र पूर्ण होने की इच्छा करते हुए ज्योत को देखकर देवी मां के इस मंत्र का जप करें। मंत्र है- श्रीं ह्रीं श्रीं। आप इस मंत्र का 108 बार जप करें। जप हेतु आप स्फटिक, कमलगट्टे या रुद्राक्ष की माला पर जप कर सकते हैं।
करें यंत्र की स्थापना
अपने सुख-सौभाग्य में वृद्धि की कामना में कोजागरी शरद पूर्णिमा के शुभ दिन आप सौभाग्य बीसा यंत्र की स्थापना कर सकते हैं। चूँकि यह विशेष दिन (तिथि) माँ लक्ष्मी से जुड़ा है, अतः आप सौभाग्य बीसा यंत्र लेकर उसकी उचित प्रकार से प्राण-प्रतिष्ठा कर सकते हैं। उस पर माँ लक्ष्मी के मंत्र का एक लाख बार जप करें। मंत्र है- 'श्रीं ह्रीं श्रीं'। उल्लेखनीय है, किसी भी यंत्र को मंत्रों से अभिमंत्रित किया जाना अति आवश्यक होता है। जितने ज्यादा मंत्र होंगे, उस यंत्र का उतना ही लाभ आपको मिलेगा। 'न अल्पे सुखं' यानि कम से सुख प्राप्त नहीं होता। इस प्रकार मंत्र से सिद्ध कर उस यंत्र की स्थापित कर सकते हैं या यंत्र को अपने गले में भी धारण कर सकते हैं।
गुरु यंत्र की स्थापना
नौकरी को लेकर परेशान हैं, अच्छी नौकरी नहीं मिल रही अथवा लंबे समय से वेतन वृद्धि नहीं हो रही है, तो इस हेतु शरद पूर्णिमा को विशेष उपाय करें। कोजागरी लक्ष्मी पूजा के दिन अपने घर में गुरु यंत्र की स्थापना करें। ध्यान रखें, यंत्रों की स्थापना सदैव किसी शुभ तिथि, शुभ समय में करना चाहिए। हर यंत्र के लिये कुछ निश्चित शुभ तिथियां होती हैं। शरद पूर्णिमा को माँ लक्ष्मी के सामने मंत्रों से सिद्ध किया गुरु यंत्र स्थापित करके देवी की पूजा करें। गुरु यंत्र को इस मंत्र के साथ स्थापित करें। मंत्र है- ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: बृहस्पतये नम:। इस मंत्र से 51,000 बार जप करके गुरु यंत्र को सिद्ध करें। सिद्ध करने के बाद यंत्र को अपने मंदिर में रख सकते हैं या उसे ताबीज में भरवा कर अपने गले में भी पहन सकते हैं।
लगाए विशेष भोग, चढ़ाएं पान का पत्ता
शरद पूर्णिमा को धूप-दीप आदि से विधि-विधान पूर्वक माँ लक्ष्मी की पूजा करने के बाद उन्हें नारियल और खोये से बनी मिठाई का भोग लगाएं। यदि मिठाई स्वयं बनायेंगे, तो सर्वोत्तम होगा। अन्यथा आप बाजार से मिठाई लाकर भोग लगा सकते हैं। अपने जीवनसाथी या बच्चों की आर्थिक उन्नति की कामना में के दिन एक पान के पत्ते को धोकर, उस पर थोड़े-से मखाने रखकर जीवनसाथी या बच्चे के हाथ से माँ लक्ष्मी को चढवाएं। साथ ही उनकी आर्थिक उन्नति के लिये देवी माँ से प्रार्थना करें।
यदि आपका कोई अधूरा काम है, जिसे आप शीघ्र पूरा करना चाहते हैं, तो उसे पूरा करने का उपाय कर सकते हैं। स्नान आदि के बाद साफ कपड़े पहनकर लक्ष्मी-नारायण के मंदिर में जाएँ। अधूरे कार्य को शीघ्र पूर्ण होने की कामना करते हुए। भगवान को कटे हुए गोले के टुकड़े और मिश्री का प्रसाद अर्पित करें।
अपने सुख-सौभाग्य में वृद्धि की कामना में कोजागरी शरद पूर्णिमा के शुभ दिन आप सौभाग्य बीसा यंत्र की स्थापना कर सकते हैं। चूँकि यह विशेष दिन (तिथि) माँ लक्ष्मी से जुड़ा है, अतः आप सौभाग्य बीसा यंत्र लेकर उसकी उचित प्रकार से प्राण-प्रतिष्ठा कर सकते हैं। उस पर माँ लक्ष्मी के मंत्र का एक लाख बार जप करें। मंत्र है- 'श्रीं ह्रीं श्रीं'। उल्लेखनीय है, किसी भी यंत्र को मंत्रों से अभिमंत्रित किया जाना अति आवश्यक होता है। जितने ज्यादा मंत्र होंगे, उस यंत्र का उतना ही लाभ आपको मिलेगा। 'न अल्पे सुखं' यानि कम से सुख प्राप्त नहीं होता। इस प्रकार मंत्र से सिद्ध कर उस यंत्र की स्थापित कर सकते हैं या यंत्र को अपने गले में भी धारण कर सकते हैं।
गुरु यंत्र की स्थापना
नौकरी को लेकर परेशान हैं, अच्छी नौकरी नहीं मिल रही अथवा लंबे समय से वेतन वृद्धि नहीं हो रही है, तो इस हेतु शरद पूर्णिमा को विशेष उपाय करें। कोजागरी लक्ष्मी पूजा के दिन अपने घर में गुरु यंत्र की स्थापना करें। ध्यान रखें, यंत्रों की स्थापना सदैव किसी शुभ तिथि, शुभ समय में करना चाहिए। हर यंत्र के लिये कुछ निश्चित शुभ तिथियां होती हैं। शरद पूर्णिमा को माँ लक्ष्मी के सामने मंत्रों से सिद्ध किया गुरु यंत्र स्थापित करके देवी की पूजा करें। गुरु यंत्र को इस मंत्र के साथ स्थापित करें। मंत्र है- ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: बृहस्पतये नम:। इस मंत्र से 51,000 बार जप करके गुरु यंत्र को सिद्ध करें। सिद्ध करने के बाद यंत्र को अपने मंदिर में रख सकते हैं या उसे ताबीज में भरवा कर अपने गले में भी पहन सकते हैं।
लगाए विशेष भोग, चढ़ाएं पान का पत्ता
शरद पूर्णिमा को धूप-दीप आदि से विधि-विधान पूर्वक माँ लक्ष्मी की पूजा करने के बाद उन्हें नारियल और खोये से बनी मिठाई का भोग लगाएं। यदि मिठाई स्वयं बनायेंगे, तो सर्वोत्तम होगा। अन्यथा आप बाजार से मिठाई लाकर भोग लगा सकते हैं। अपने जीवनसाथी या बच्चों की आर्थिक उन्नति की कामना में के दिन एक पान के पत्ते को धोकर, उस पर थोड़े-से मखाने रखकर जीवनसाथी या बच्चे के हाथ से माँ लक्ष्मी को चढवाएं। साथ ही उनकी आर्थिक उन्नति के लिये देवी माँ से प्रार्थना करें।
यदि आपका कोई अधूरा काम है, जिसे आप शीघ्र पूरा करना चाहते हैं, तो उसे पूरा करने का उपाय कर सकते हैं। स्नान आदि के बाद साफ कपड़े पहनकर लक्ष्मी-नारायण के मंदिर में जाएँ। अधूरे कार्य को शीघ्र पूर्ण होने की कामना करते हुए। भगवान को कटे हुए गोले के टुकड़े और मिश्री का प्रसाद अर्पित करें।
तीन राशि के जातकों के लिए विशेष है शरद पूर्णिमा
कर्क- शरद पूर्णिमा का समय सुखद रहने के साथ मानसिक शांति व सकारात्मकता का अनुभव हो सकता है। कोई विशेष काम इस समय पूरा होगा। व्यापार-कारोबार सफल हो सकता है। आर्थिक मामलों में लाभ मिलने के योग बन रहे हैं। नौकरीपेशा को कार्यक्षेत्र में अपने प्रयासों का अच्छा परिणाम मिल सकता है। धन कमाने के नए अवसर मिल सकते हैं।
कन्या- शरद पूर्णिमा कन्या राशि वालों के लिए यह समय शुभ परिणाम लेकर आ सकता है। जीवन के कुछ क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव, सफलता प्राप्त होने एवं सामाजिक क्षेत्र में प्रतिष्ठा बढ़ने के योग बन रहे हैं। कार्यक्षेत्र में आपकी परिश्रम को पहचान प्राप्त हो सकती है। आर्थिक स्थिति में सुधार होने एवं करियर में आगे बढ़ने के अवसर मिलने के योग हैं।
मकर- भाग्य का साथ मिलने से आपके कुछ रुके काम शरद पूर्णिमा पर आगे बढ़ सकते हैं। नौकरी एवं कारोबार से जुड़े मामलों में सकारात्मक परिणाम मिलने, विवाह की बात पक्की होने एवं कोई विशेष खुशखबरी मिलने के योग हैं। अपने लक्ष्यों को पाने के योग भी शरद पूर्णिमा बन रहे हैं।
शरद पूर्णिमा एवं चन्द्रमा : एक दृष्टि में...
🌓 चंद्रमा को वेद-पुराणों में मन के समान माना गया है- चंद्रमा मनसो जात:। वायु पुराण में चंद्रमा को जल का कारक बताया गया है। प्राचीन ग्रंथों में चंद्रमा को औषधीय यानी औषधियों का स्वामी कहा गया है।
🌓 चंद्रमा को वेद-पुराणों में मन के समान माना गया है- चंद्रमा मनसो जात:। वायु पुराण में चंद्रमा को जल का कारक बताया गया है। प्राचीन ग्रंथों में चंद्रमा को औषधीश यानी औषधियों का स्वामी कहा गया है।
🌏 ब्रह्मपुराण के अनुसार- सोम या चंद्रमा से जो सुधामय तेज पृथ्वी पर गिरता है उसी से औषधियों की उत्पत्ति हुई और जब औषधी 16 कला संपूर्ण हो, तो अनुमान लगाइए उस दिन औषधियों को कितना बल मिलेगा।
🌏 शरद पूर्णिमा की शीतल चांदनी में रखी खीर खाने से शरीर के सभी रोग दूर होते हैं। ज्येष्ठ, आषाढ़, सावन और भाद्रपद मास में शरीर में पित्त का जो संचय हो जाता है, शरद पूर्णिमा की शीतल धवल चांदनी में रखी खीर खाने से पित्त बाहर निकलता है। परन्तु इस खीर को एक विशेष विधि से बनाया जाता है। पूरी रात चन्द्रमा के प्रकाश (चांदनी) में रखने के बाद सुबह खाली पेट यह खीर खाने से सभी रोग दूर होते हैं, शरीर निरोगी होता है।
🌏 शरद पूर्णिमा को रास पूर्णिमा भी कहते हैं। स्वयं सोलह कला संपूर्ण भगवान श्रीकृष्ण से भी जुड़ी है यह पूर्णिमा। इस रात को अपनी राधा रानी और अन्य सखियों के साथ श्रीकृष्ण महारास रचाते हैं।
🌏 कहते हैं, जब वृन्दावन में भगवान कृष्ण महारास रचा रहे थे तो चंद्रमा आसमान से सब देख रहा था और वह इतना भाव-विभोर हुआ कि उसने अपनी शीतलता के साथ पृथ्वी पर अमृत की वर्षा आरंभ कर दी।
🌓 गुजरात में शरद पूर्णिमा को लोग रास रचाते हैं और गरबा खेलते हैं। मणिपुर में श्रीकृष्ण भक्त रास रचाते हैं। पश्चिम बंगाल और ओडिशा में शरद पूर्णिमा की रात को महालक्ष्मी की विधि-विधान के साथ पूजा की जाती है। मान्यता है, इस पूर्णिमा को जो महालक्ष्मी का पूजन करते हैं और रातभर जागते हैं, उनकी सभी कामनाओं की पूर्ति होती है।
🌏 ओडिशा में शरद पूर्णिमा को कुमार पूर्णिमा के नाम से मनाया जाता है। आदिदेव महादेव और देवी पार्वती के पुत्र कार्तिकेय का जन्म इसी पूर्णिमा को हुआ था। गौर वर्ण, आकर्षक, सुंदर कार्तिकेय की पूजा कुंवारी लड़कियां उनके जैसा पति पाने के लिए करती हैं।
🌏 शरद पूर्णिमा ऐसे महीने में आती है, जब वर्षा ऋतु अंतिम समय पर होती है। शरद ऋतु अपने बाल्यकाल में होती है और हेमंत ऋतु आरंभ हो चुकी होती है और इसी पूर्णिमा से कार्तिक स्नान प्रारंभ हो जाता है।
शरद पूर्णिमा से जुडी एक मान्यता के अनुसार, माता लक्ष्मी का जन्म शरद पूर्णिमा के दिन हुआ था, इसीलिए देश के कई हिस्सों में शरद पूर्णिमा को लक्ष्मीजी का पूजन किया जाता है। ऐसी भी मान्यता है, कि शरद पूर्णिमा पर देवी लक्ष्मी भगवान विष्णु संग पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और अपने भक्तों से पूछती हैं कौन जाग रहा है। इस कारण से इसे कोजागर पूर्णिमा भी कहते हैं। ऐसे में शरद पूर्णिमा पर पूजा-पाठ करने से देवी लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं। सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं। वहीं, एक अन्य मान्यतानुसार शरद पूर्णिमा पर भगवान श्रीकृष्ण गोपियों संग वृंदावन में रात को महारास रचाया था।
लेखक-
*आचार्य नित्यानंद गिरी
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