श्रीकृष्ण जन्माष्टमी : मुहूर्त, विशेष उपाय, पूजा-विधि, क्या करें और...


भाग्योदय, संकट के मुक्ति पाने करें विशेष उपाय
- इस बार नहीं बन रहा अष्टमी-रोहिणी योग

वासुदेव सुतं   देवं  कंस  चाणूर  मर्दनम्। 
देवकी परमानन्दं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम्।।  

धर्म नगरी / DN News  
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श्रीहरि विष्णु के 8वें अवतार भगवान श्रीकृष्ण ने द्वापर युग में भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में जन्म लिया। हर साल इस पावन तिथि को भगवान कृष्ण के बाल रूप की विधि-विधान से पूजा अर्चना की जाती है। श्रद्धालु इस दिन व विशेषकर रात्रि में उत्सव मनाते है, व्रत रहते हैं। इस साल जन्माष्टमी को लेकर लोगों में थोड़ा भ्रम है।  

पंचांग के अनुसार 15 अगस्त की रात 11.49 बजे भाद्रपद माह की कृष्णी पक्ष अष्टमी तिथि लग जाएगी, जो 16 अगस्त रात 9.24 बजे तक रहेगी। जबकि रोहिणी नक्षत्र का आरंभ 17 अगस्त सुबह 4.38 बजे होगा। ऐसे में इस साल जन्माष्टमी तिथि को लेकर लोगों में तिथि को लेकर थोड़ा भ्रम हैं।  

पंचांग और धर्मशास्त्रों के अनुसार इस बार अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का संयोग नहीं बन रहा है, तथापि इस वर्ष श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 16 अगस्त को मनाई जाएगी। 

स्मार्त (गृहस्थ) और वैष्णव परंपरा के अनुसार 16 अगस्त को ही देशभर में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। इसी कड़ी में भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या में भी इस बार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को बड़े धूमधाम से मनाने की तैयारियां चल रही हैं। शास्त्रानुसार, भाद्र कृष्ण अष्टमी तिथि 15/16 अगस्त की मध्यरात्रि के बाद 12:58 मिनट पर लगेगी, जो 16 अगस्त को मध्य रात्रि के पूर्व 10:29 बजे तक रहेगी।

श्रीकृष्ण जन्म व्रत का पारन 17 अगस्त को होगा। चूँकि इस बार रोहिणी नक्षत्र का भी क्षय है (जब कोई नक्षत्र सूर्योदय के बाद प्रारंभ हो तथा दूसरे दिन सूर्योदय के पूर्व समाप्त हो जाए, उसे क्षय नक्षत्र कहा जाता है) तो रोहिणी नक्षत्र 17 अगस्त को प्रात: 6:29 बजे लग रही है, जो 18 अगस्त प्रातःकाल 4:54 बजे समाप्त हो जायेगी। इसलिए उदयकाल में रोहिणी नक्षत्र नहीं मिल रहा है। जन्माष्टमी व्रत की पारना स्मार्त व वैष्णव 17 अगस्त को करेंगे, जबकि रोहिणी मतावलंबी 18 अगस्त को करेंगे।
ज्ञातव्य है, भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्र पद कृष्ण अष्टमी, बुधवार, रोहिणी नक्षत्र में अर्ध रात्रि 12 बजे वृष राशि के चंद्रमा में हुआ था। भगवान विष्णु के दशावतारों में से सर्वप्रमुख पूर्णावतार 16 कलाओं से परिपूर्ण भगवान कृष्ण को माना जाता है, जो द्वापर युग के अंत में हुआ था।


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महामंत्र, जिसे आप सदैव जप सकते हैं- 
ॐ  कृष्णाय  वासुदेवाय  हरये  परमात्मने। 
प्रणत: क्लेश नाशाय गोविन्दाय नमो नमः॥ 
Aum Krishnaya Vasudevaya Haraye Paramatmane
Pranatah Kleshanashaya Govindaya Namo Namah
अर्थात, हे कृष्ण ! हे वासुदेव पुत्र ! आप हरि परमात्मा है, शरणागत के क्लेशों को हरने वाले हैं। हे गोविन्द ! आपको मैं बारम्बार प्रणाम करता हूं। 
ॐ (Aum)- इसे ओंकार कहते है। यह मंत्र परमात्मा के लिए कहा जाता है, ओंकार की ध्वनि सिद्धि ध्वनि है, यह सभी मंत्रों का शिरोमणि मंत्र है।
कृष्णाय (Krishnaya)- भगवान कृष्ण
वासुदेवाय (Vasudevaya)- वासुदेव भगवान जो सभी जीवों के पालनहार हैं, भगवान कृष्ण के पिता का नाम
हरये (Haraye)- दु:खों का नाश करने वाले हरि
परमात्मने (Paramatmane)- परमात्मा, परम सत्य
प्रणत: (Pranatah)- साष्टांग प्रणाम करना
क्लेशनाशाय (Kleshanashaya)-  पापों को नाश करने वाले
गोविंदाय (Govindaya)- गोविंद, भगवान कृष्ण जो गायों को पालते है
नमो नमः (Namo Namah)- बारंबार नमन करना।

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पूजा का शुभ मुहूर्त
- पूजा का शुभ मुहूर्त 16 अगस्त रात्रि 12:04 से 12:45 तक, 
- व्रत पारण का समय- 17 अगस्त के दिन सुबह 05.51 बजे तक है।
- चंद्रोदय का समय- 16 अगस्त की रात 11.32 बजे है।

ऐसे करें पूजन विधि
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की रात्रि में भगवान श्रीकृष्ण की विधि-विधानपूर्वक पूजा-अर्चना की जाती है। जन्माष्टमी पर भगवान के जन्म के समय कई वर्षों बाद इस वर्ष अष्टमी व रोहिणी नक्षत्र दोनों नहीं मिल रहा है। इस तिथि को सभी व्रत रखते हैं। व्रतियों को उपवास के पहले दिन रात्रि में अल्पाहार करना चाहिए। रात्रि में जितेन्द्रिय रहे और व्रत के दिन (16 अगस्त) प्रात: स्नानादि नित्य कर्म कर सूर्य, सोम, पवन, दिग्पति, भूमि, आकाश, यम एवं ब्रह्म आदि को प्रणाम करके उत्तरमुख बैठे और व्रत का संकल्प लें। 
घर में ऐसे सजाएं 
- घर में एक सुंदर झांकी सजाएं और उसमें बाल गोपाल को पालने में विराजमान करें,
- बाल गोपाल को दूध, दही, घी, शहद, और गंगाजल से बने पंचामृत से स्नान कराएं,
- स्नान के बाद, बाल गोपाल को नए वस्त्र पहनाएं और उनका भव्य शृंगार करें,
- भोग में माखन-मिश्री, पंजीरी, खीर और पंचामृत शामिल करें,
- विधि-विधान से पूजा करें, कान्हा के मंत्रों का जाप करें और पूजा का समापन आरती से करें,
- मध्य रात्रि में पूजा और आरती के बाद, प्रसाद से व्रत खोलें,
- इस दिन यथासंभव सामर्थ्य के अनुसार अभावग्रस्त लोगों को दान-पुण्य करें,

भगवान कृष्ण की आरती
आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥

आरती कुंजबिहारी की, 
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की। 
गले में बैजंती माला,
बजावै मुरली मधुर बाला। 
श्रवण में कुण्डल झलकाला,
नंद के आनंद नंदलाला ।
गगन सम अंग कांति काली,
राधिका चमक रही आली ।
लतन में ठाढ़े बनमाली
भ्रमर सी अलक,
कस्तूरी तिलक,
चंद्र सी झलक,
ललित छवि श्यामा प्यारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की।  
आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की।  

कनकमय मोर मुकुट बिलसै,
देवता दरसन को तरसैं ।
गगन सों सुमन रासि बरसै।
बजे मुरचंग,
मधुर मिरदंग,
ग्वालिन संग,
अतुल रति गोप कुमारी की,
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की। 
आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की। 

जहां ते प्रकट भई गंगा,
सकल मन हारिणि श्री गंगा।
स्मरन ते होत मोह भंगा
बसी शिव सीस,
जटा के बीच,
हरै अघ कीच,
चरन छवि श्रीबनवारी की,
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की। 
आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की। 

चमकती उज्ज्वल तट रेनू,
बज रही वृंदावन बेनू ।
चहुं दिसि गोपि ग्वाल धेनू
हंसत मृदु मंद,
चांदनी चंद,
कटत भव फंद,
टेर सुन दीन दुखारी की,
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की। 
आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥
आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥
आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥


बांके बिहारी मंदिर में वर्ष में एक बार मंगला आरती 
वृंदावन स्थित बांके बिहारी मंदिर में जन्माष्टमी का उत्सव अति विशेष होता है। इस दिन रात 12 बजे ठाकुर जी की मंगला आरती की जाती है, जो पूरे साल में केवल एक बार, इसी शुभ अवसर पर होती है। इस अवसर पर लड्डू गोपाल का विधिपूर्वक महाभिषेक किया जाता है और विशेष पूजन होता है। यही कारण है, कि जन्माष्टमी की रात बांके बिहारी मंदिर में एक बार होने वाली मंगला आरती पूरे वर्ष में सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस दुर्लभ दर्शन के लिए श्रद्धालु दूर-दूर से वृंदावन आते हैं।

श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के लिए अयोध्या में इस बार विशेष आयोजन होने जा रहा है। राम जन्मभूमि परिसर में पहली बार भगवान श्रीकृष्ण के प्रतीकात्मक जन्म का उत्सव मनाया जाएगा। रात 12 बजे विशेष पूजा अर्चना के साथ भगवान का प्रतीकात्मक अवतरण कराया जाएगा। इस अवसर पर डेढ़ कुंतल पंजीरी, एक कुंतल पंचामृत, फल व मिष्ठान का भोग लगाया जाएगा। जिसका प्रसाद पहले सुरक्षा बलों और ट्रस्ट सदस्यों को वितरित किया जाएगा और सुबह श्रद्धालुओं को। राम मंदिर परिसर सहित अयोध्या के अन्य मठ-मंदिरों में भी भव्य झांकियों, रंग-बिरंगी लाइटों, फूलों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ जन्मोत्सव मनाया जाएगा। लगभग एक दर्जन स्थानों पर मूर्ति स्थापना और शोभायात्रा का आयोजन भी होगा। मंदिरों में भगवान श्रीकृष्ण को विशेष व्यंजन अर्पित किए जाएंगे।

श्रीकृष्ण के जीवन से सबसे बड़ी शिक्षा (सीख) 
श्रीकृष्ण से कितना कुछ छूटा !
पहले माँ छूटी, फिर पिता छूटे !
फिर जो नंद-यशोदा मिले, वे भी छूटे !
संगी-साथी छूटे, राधा भी छूटीं !
गोकुल छूटा, फिर मथुरा छूटी !
श्रीकृष्ण से जीवन भर,
कुछ न कुछ छूटता ही रहा !
नहीं छूटा तो देवत्व,
मुस्कान और सकारात्मकता !

जन्माष्टमी से पहले घर ला सकते हैं कुछ वस्तुएं  
जन्माष्टमी से पहले कुछ विशेष वस्तुएं यदि घर लाई जाएं, तो भगवान श्रीकृष्ण प्रसन्न होते हैं एवं घर में सुख-समृद्धि व सकारात्मक ऊर्जा का भी आगमन होता है।
बाल स्वरूप मूर्ति (लड्डू गोपाल)
जन्माष्टमी से पहले लड्डू गोपाल की सुंदर मूर्ति घर लाना बहुत ही शुभ माना जाता है। इसे घर के मंदिर में स्थापित कर विधिवत पूजा करने से सुख-शांति बनी रहती है। 

बांसुरी
श्रीकृष्ण को बांसुरी सबसे अधिक प्रिय है। जन्माष्टमी से पहले एक सुंदर बांसुरी घर लाना बहुत शुभ माना जाता है। मान्यता है, इसे घर में रखने से सुख-शांति बनी रहती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। आप चांदी या पीतल की बांसुरी भी ला सकते हैं। इसे पूजा के स्थान पर रखना चाहिए।

मोर पंख
मोर पंख कान्हा के श्रृंगार का एक अभिन्न हिस्सा है। इसलिए जन्माष्टमी से पहले मोर पंख घर अवश्य लाना चाहिए। घर में मोरपंख रखने से घर के वास्तु-दोष दूर होते हैं, नकारात्मक शक्तियां दूर रहती हैं। आप इसे पूजा घर या मुख्य द्वार पर लगा सकते हैं।

गाय-बछड़े की मूर्ति
भगवान कृष्ण को गाय और बछड़ों से बहुत लगाव था। जन्माष्टमी से पहले गाय और बछड़े की मूर्ति लाना बहुत शुभ माना जाता है। मान्यता है, इसे घर में रखने से परिवार में समृद्धि आती है और संतान सुख की प्राप्ति होती है। अगर आप धातु की मूर्ति लाते हैं तो उसे पूजा स्थान पर रखें।

माखन मिश्री
माखन व मिश्री भगवान कृष्ण को अति प्रिय हैं। जन्माष्टमी पर उनका भोग माखन मिश्री से ही लगाया जाता है। इसलिए जन्माष्टमी से कुछ दिन पहले माखन-मिश्री घर में लाएं और पूजा की तैयारी करें। यह प्रेम और मिठास का प्रतीक है, इसे प्रसाद के रूप में बांटने से पुण्य प्राप्त होता है।

वैजयंती माला
वैजयंती माला को भगवान कृष्ण का श्रृंगार माना जाता है। कहते हैं, वैजयंती माला धारण करने वाले पर भगवान कृष्ण की विशेष कृपा होती है। जन्माष्टमी से पहले वैजयंती माला घर लाना और इसे कान्हा  को पहनाना बहुत शुभ होता है। इसे घर में रखने से धन-धान्य की वृद्धि होती है।

पीले वस्त्र
भगवान कृष्ण को पीला रंग अत्यंत प्रिय है। जन्माष्टमी से पहले घर में पीले वस्त्र, पर्दे या चादरें लाना शुभ माना जाता है। इससे घर में लक्ष्मी का वास होता है और आर्थिक दृष्टि से भी उन्नति होती है।

शंख
शंख ध्वनि को धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पवित्र और उर्जावान माना गया है। जन्माष्टमी से पहले शंख को घर लाकर पूजा स्थल पर रखना और नियमित रूप से उसका उपयोग करना नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है और वातावरण को शुद्ध करता है।

तुलसी का पौधा
भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण को तुलसी बहुत ही प्रिय है। जन्माष्टमी से पहले तुलसी का पौधा लगाना या पुराने पौधे की विशेष देखभाल करना पुण्यदायी होता है। तुलसी के बिना श्रीकृष्ण की पूजा अधूरी मानी जाती है।

घर में लेकर आ रहे हैं लड्डू गोपाल, तो...  
- भगवान श्रीकृष्ण का बाल स्वरूप हैं लड्डू गोपाल,
- प्रायः घरों में "नन्हें पुत्र स्वरुप में" लड्डू गोपाल की सभी दैनिक सेवा,
- लड्डू गोपाल से जुड़ी दिशा का 
ध्यान अवश्य रखें, 
लड्डू गोपाल की सेवा के दौरान भी वास्तु नियमों का ध्यान अवश्य रखना चाहिए। इससे श्रद्धालु, साधक, भक्त पर भगवान श्रीकृष्ण की विशेष कृपा बनी रहती है। 

लड्डू गोपाल का झूला   
जन्माष्टमी की रात लड्डू गोपाल के झूले को झुलाने की परंपरा भक्तों के हृदय को आनंद और भक्ति से भर देती है। वास्तु शास्त्र के अनुसार अगर झूला सही दिशा और विधि से सजाया जाए, तो उसका शुभ प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। लड्डू गोपाल का झूला उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) या पूर्व दिशा में रखना सबसे शुभ है। यह दिशाएं देवताओं के वास की मानी जाती हैं और यहां से घर में शांति, सौभाग्य और आशीर्वाद का प्रवाह होता है। झूले में विराजमान श्री कृष्ण का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए, जिससे उनका दिव्य दर्शन घर में आने वाली हर सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित कर सके।
झूले के शुभ रंग 
जन्माष्टमी के पावन अवसर पर झूले का रंग भी महत्व रखता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार-
पीला (आनंद और उन्नति का प्रतीक), 
सफेद (शांति और पवित्रता), 
हल्का नीला (आकाश और अनंतता)
सुनहरा (समृद्धि और तेज) विशेष रूप से शुभ माने जाते हैं। इन रंगों में सजा झूला न केवल सुंदर दिखता है, अपितु शुभ ऊर्जा भी फैलाता है।

कैसा झूला है सर्वोत्तम
सबसे उत्तम– लकड़ी का झूला, स्थिरता और प्राकृतिक ऊर्जा का प्रतीक है।
अन्य शुभ विकल्प– चांदी या पीतल से निर्मित झूला, जो समृद्धि और पवित्रता को बढ़ाता है।
इनसे बचें– स्टील या लोहे के झूले, क्योंकि इन्हें वास्तु में अशुभ माना गया है।
ऐसे झूले को सजाएं 
जन्माष्टमी पर झूले की सजावट एक कला है, जिसमें भक्ति का भाव और सौंदर्य का संगम होता है।
सज्जा की सामग्री- रेशमी कपड़े, मोती-मणि, मोर पंख और रंग-बिरंगी झालर, जो झूले को स्वर्गिक रूप देते हैं।
फूलों की सुगंध- तुलसी, गेंदे और गुलाब के फूलों से सजावट, जो वातावरण को पवित्र बनाते हैं।
हरे तोरण- आम के पत्तों से सजा तोरण, जो घर में शुभ ऊर्जा का प्रवेश कराता है।

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर कृष्ण भगवान की पूजा के साथ ही आपको श्रीकृष्ण चालीसा का पाठ भी अवश्य करना चाहिए। श्रीकृष्ण चालीसा का पाठ करने से आपके घर में सुख-समृद्धि आती है और आपके अटके काम बनते हैं साथ ही मनोकामनाओं भी पूरी होती हैं। सुबह पूजा के दौरान या फिर किसी मंदिर में जाकर भी आप कृष्ण चालीसा का पाठ कर सकते हैं। कृष्ण चालीसा का पाठ करते समय आपको पीले या फिर सफेद रंग के आसना पर बैठना चाहिए। नीचे संपूर्ण कृष्ण चालीसा दी गई है। 

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श्रीकृष्ण चालीसा 
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर कृष्ण भगवान की पूजा के साथ ही आपको श्रीकृष्ण चालीसा का पाठ भी अवश्य करना चाहिए। श्रीकृष्ण चालीसा का पाठ करने से आपके घर में सुख-समृद्धि आती है और आपके अटके काम बनते हैं साथ ही मनोकामनाओं भी पूरी होती हैं। सुबह पूजा के दौरान या फिर किसी मंदिर में जाकर भी आप कृष्ण चालीसा का पाठ कर सकते हैं। कृष्ण चालीसा का पाठ करते समय आपको पीले या फिर सफेद रंग के आसना पर बैठना चाहिए। नीचे संपूर्ण कृष्ण चालीसा दी गई है। 

दोहा
बंशी   शोभित  कर   मधुर, नील जलद तन श्याम।
अरुण अधर जनु बिम्बफल, नयन कमल अभिराम॥

पूर्ण इन्द्र  अरविन्द  मुख,  पीताम्बर शुभ साज।
जय मनमोहन मदन छवि, कृष्णचन्द्र महाराज॥

चौपाई 
जय यदुनन्दन जय जगवन्दन।
जय  वसुदेव  देवकी नन्दन ॥

जय यशुदा सुत नन्द दुलारे ।
जय प्रभु भक्तन के दृग तारे॥

जय नट-नागर नाग नथैया।
कृष्ण कन्हैया धेनु चरैया ॥

पुनि नख पर प्रभु गिरिवर धारो।
आओ  दीनन  कष्ट  निवारो ॥

वंशी मधुर अधर धरी तेरी।
होवे  पूर्ण  मनोरथ  मेरो ॥

आओ हरि पुनि माखन चाखो।
आज लाज भारत की राखो ॥

गोल कपोल, चिबुक अरुणारे।
मृदु  मुस्कान  मोहिनी डारे ॥

रंजित राजिव नयन विशाला।
मोर मुकुट वैजयंती माला ॥

कुण्डल श्रवण पीतपट आछे ।
कटि किंकणी काछन काछे ॥

नील  जलज  सुन्दर  तनु  सोहे ।
छवि लखि, सुर नर मुनिमन मोहे॥10॥

मस्तक तिलक, अलक घुंघराले।
आओ  कृष्ण  बांसुरी  वाले ॥

करि पय पान, पुतनहि तारयो ।
अका  बका  कागासुर मारयो॥

मधुवन जलत अग्नि जब ज्वाला।
भै शीतल, लखितहिं नन्दलाला॥

सुरपति जब ब्रज चढ़यो रिसाई।
मसूर  धार  वारि  वर्षाई ॥

लगत-लगत ब्रज चहन बहायो।
गोवर्धन   नख धारि बचायो ॥

लखि यसुदा मन भ्रम अधिकाई।
मुख महं चौदह भुवन दिखाई ॥

दुष्ट कंस अति उधम मचायो ।
कोटि कमल जब फूल मंगायो॥

नाथि कालियहिं तब तुम लीन्हें।
चरणचिन्ह दै निर्भय किन्हें ॥

करि गोपिन संग रास विलासा।
सबकी पूरण करी अभिलाषा ॥

केतिक महा असुर संहारयो ।
कंसहि केस पकड़ि दै मारयो॥20॥

मात-पिता की बन्दि छुड़ाई।
उग्रसेन कहं राज दिलाई ॥

महि से मृतक छहों सुत लायो।
मातु देवकी शोक मिटायो ॥

भौमासुर मुर दैत्य संहारी ।
लाये षट दश सहसकुमारी ॥

दै भिन्हीं तृण चीर सहारा ।
जरासिंधु राक्षस कहं मारा॥

असुर बकासुर आदिक मारयो।
भक्तन के तब कष्ट निवारियो ॥

दीन सुदामा के दुःख टारयो ।
तंदुल तीन मूंठ मुख डारयो ॥

प्रेम के साग विदुर घर मांगे।
दुर्योधन  के  मेवा   त्यागे ॥

लखि प्रेम की महिमा भारी।
ऐसे श्याम दीन हितकारी ॥

भारत  के  पारथ रथ हांके ।
लिए चक्र कर नहिं बल ताके॥

निज गीता के ज्ञान सुनाये ।
भक्तन ह्रदय सुधा वर्षाये ॥30॥

मीरा  थी  ऐसी  मतवाली ।
विष पी गई बजाकर ताली॥

राना भेजा सांप पिटारी ।
शालिग्राम बने बनवारी ॥

निज माया तुम विधिहिं दिखायो।
उर ते संशय  सकल  मिटायो ॥

तब शत निन्दा करी तत्काला।
जीवन मुक्त भयो शिशुपाला॥

जबहिं द्रौपदी टेर लगाई ।
दीनानाथ लाज अब जाई॥

तुरतहिं वसन बने ननन्दलाला।
बढ़े  चीर भै  अरि मुँह काला ॥

अस नाथ के नाथ कन्हैया ।
डूबत भंवर बचावत नैया ॥

सुन्दरदास आस उर धारी ।
दया दृष्टि  कीजै बनवारी ॥

नाथ सकल मम कुमति निवारो।
क्षमहु  बेगि  अपराध  हमारो ॥

खोलो पट अब दर्शन दीजै ।
बोलो कृष्ण कन्हैया की जै॥40॥

॥ दोहा ॥
यह  चालीसा  कृष्ण का, पाठ करै उर धारि।
अष्ट सिद्धि नवनिधि फल, लहै पदारथ चारि॥

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की शाम करें उपाय  
जन्माष्टमी की शाम को तुलसी के पास गाय के देसी घी का दीपक जलाएं। विष्णु भगवान का ध्यान करें। इसके बाद तुलसी की 7 बार परिक्रमा करें और तुलसी माता के मंत्र और आरती पढ़ें। ऐसे करने से जातक पर भगवान विष्णु और तुलसी मां की कृपा होती है।

तुलसी माता के मंत्रों का करें जप
मातस्तुलसि गोविन्द हृदयानन्द कारिणी
यह मंत्र भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने और मनचाही मुराद पूरी करने के लिए है।

ॐ श्री तुलस्यै नमः
यह तुलसी माता के नामों में से एक है और उनका स्मरण करने के लिए प्रयोग किया जाता है।

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय:
यह एक सामान्य मंत्र है जो तुलसी के पास जाप किया जा सकता है, जिससे सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

इसके साथ तुलसी जी की स्तुति पढ़ सकते हैं-
तुलसी स्तुति मंत्र
देवी त्वं निर्मिता पूर्वमर्चितासि मुनीश्वरैः
नमो नमस्ते तुलसी पापं हर हरिप्रिये।।
तुलसी श्रीर्महालक्ष्मीर्विद्याविद्या यशस्विनी।
धर्म्या धर्मानना देवी देवीदेवमन: प्रिया।।
लभते सुतरां भक्तिमन्ते विष्णुपदं लभेत्।
तुलसी भूर्महालक्ष्मी: पद्मिनी श्रीर्हरप्रिया।।

स्मरण रखें, जब कान्हा को भोग लगाएं तब  तुलसी दल का उपयोग अवश्य करें, क्योंकि तुलसी के बिना कान्हा का भोग अधूरा माना गया है।

जन्माष्टमी तीन राशि  हेतु अनुकूल 
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन पांच ग्रहों का शुभ संयोग तीन राशियों के लिए लाभकारी होगा। 
भरणी, कृतिका और रोहिणी नक्षत्र के साथ वृद्धि, सर्वार्थ-सिद्धि, अमृत-सिद्धि और ज्वालामुखी योग बनेंगे, जिससे सौभाग्य और सफलता के अवसर बढ़ेंगे। जन्माष्टमी पर बुध मार्गी होकर कर्क राशि में सूर्य के साथ युति करेंगे। शनि के वक्री होंगे। गुरु व शुक्र मीन राशि में मिल रहे हैं, जिससे अति शुभ योग का निर्माण हो रहा है। ज्योतिर्विदों के अनुसार-
बुध-सूर्य युति, कर्क राशि में शुभ परिणाम संभव,
गुरु-शुक्र मीन राशि में होने से विशेष लाभकारी संयोग,

वृषभ राशि
जन्माष्टमी पर बन रहा विशेष संयोग वृषभ राशि वाले जातकों के लिए अति शुभ होगा। उनके जीवन की सारी बाधाएं दूर होंगी, अटके काम पूरे होंगे, परिश्रम सफल होगा। अविवाहित जातकों के जीवन में खुशियां आ सकती हैं। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

मिथुन राशि
मिथुन राशि के जातकों के जीवन में गुरु और शुक्र की युति से अप्रत्याशित लाभ के प्रबल योग हैं। करियर में नई उड़ान भरेंगे। पार्टनरशिफ फलीभूत होगी। कारोबार में अच्छा धन कमाने का मौका मिलेगा, जिससे आर्थिक स्थिति में शानदार वृद्धि होगी।

सिंह राशि
जन्माष्टमी का शुभ योग सिंह राशि वालों के लिए चमत्कारिक परिवर्तन लेकर आएगा। उनको अचानक धन कमाने का योग बन रहा है। इस समय आप कोई बड़ा निर्णय ले सकते हैं, जिसका लाभ आपको मिलेगा। कारोबार में सफलता मिलने के आसार हैं। वैवाहिक जीवन शानदार रहेगा। लव लाइफ अच्छी रहेगी।

श्रीकृष्ण के 108 नामों का जाप
जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण के 108 नामों का जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इन नामों के उच्चारण से दुख दूर होते हैं और जीवन में सुख, समृद्धि और सौभाग्य बढ़ता है। श्रद्धालु ‘गोविंद’, ‘माधव’, ‘कन्हैया’, ‘गोपीनाथ’ जैसे नामों का स्मरण करते हैं। यह साधना बाल गोपाल के आशीर्वाद का मार्ग खोलती है-

कृष्ण कृष्ण
कमलनाथ
वासुदेव
सनातन
वसुदेवात्मज
पुण्य
लीलामानुष विग्रह
श्रीवत्स कौस्तुभधराय
यशोदावत्सल
हरि
चतुर्भुजात्त चक्रासिगदा
सङ्खाम्बुजा युदायुजाय
देवाकीनन्दन
श्रीशाय
नन्दगोप प्रियात्मज
यमुनावेगा संहार
बलभद्र प्रियनुज
पूतना जीवित हर
शकटासुर भञ्जन
नन्दव्रज जनानन्दिन
सच्चिदानन्दविग्रह
नवनीत विलिप्ताङ्ग
नवनीतनटन
मुचुकुन्द प्रसादक
षोडशस्त्री सहस्रेश
त्रिभङ्गी
मधुराकृत
शुकवागमृताब्दीन्दवे
गोविन्द
योगीपति
वत्सवाटि चराय
अनन्त
धेनुकासुरभञ्जनाय
तृणी-कृत-तृणावर्ताय
यमलार्जुन भञ्जन
उत्तलोत्तालभेत्रे
तमाल श्यामल कृता
गोप गोपीश्वर
योगी
कोटिसूर्य समप्रभा
इलापति
परंज्योतिष
यादवेंद्र
यदूद्वहाय
वनमालिने
पीतवससे
पारिजातापहारकाय
गोवर्थनाचलोद्धर्त्रे
गोपाल
सर्वपालकाय
अजाय
निरञ्जन
कामजनक
कञ्जलोचनाय
मधुघ्ने
मथुरानाथ
द्वारकानायक
बलि
बृन्दावनान्त सञ्चारिणे
तुलसीदाम भूषनाय
स्यमन्तकमणेर्हर्त्रे
नरनारयणात्मकाय
कुब्जा कृष्णाम्बरधराय
मायिने
परमपुरुष
मुष्टिकासुर चाणूर मल्लयुद्ध विशारदाय
संसारवैरी
कंसारिर
मुरारी
नाराकान्तक
अनादि ब्रह्मचारिक
कृष्णाव्यसन कर्शक
शिशुपालशिरश्छेत्त
दुर्यॊधनकुलान्तकृत
विदुराक्रूर वरद
विश्वरूपप्रदर्शक
सत्यवाचॆ
सत्य सङ्कल्प
सत्यभामारता
जयी
सुभद्रा पूर्वज
विष्णु
भीष्ममुक्ति प्रदायक
जगद्गुरू
जगन्नाथ
वॆणुनाद विशारद
वृषभासुर विध्वंसि
बाणासुर करान्तकृत
युधिष्ठिर प्रतिष्ठात्रे
बर्हिबर्हावतंसक
पार्थसारथी
अव्यक्त
गीतामृत महोदधी
कालीयफणिमाणिक्य रञ्जित श्रीपदाम्बुज
दामोदर
यज्ञभोक्त
दानवेन्द्र विनाशक
नारायण
परब्रह्म
पन्नगाशन वाहन
जलक्रीडा समासक्त गोपीवस्त्रापहाराक
पुण्य श्लॊक
तीर्थकरा
वेदवेद्या
दयानिधि
सर्वभूतात्मका
सर्वग्रहरुपी
परात्पराय

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गीत गोविन्द : भगवान कृष्ण का सबसे चमत्कारी भजन
12वीं सदी के प्रसिद्ध कवि जयदेव द्वारा रचित एक कृति है "गीत गोविंद।" भगवान कृष्ण जिन्हें ठाकुर जी भी कहते हैं, के अनेक लोकप्रिय भजन हैं, लेकिन इनमें "गीत गोविन्द" की बड़ी महिमा बताई गई है। अनेक कथावाचक इसे भगवान कृष्ण का सबसे चमत्कारी गीत मानते हैं। 
इसमें श्रीकृष्ण और राधा रानी के प्रेम का वर्णन किया गया है। ये गीत भगवान कृष्ण के प्रति भक्ति और प्रेम की गहरी भावना को जगाता है। 

कहते हैं, गीत गोविंद जहां भी गाया जाता है, वहां ठाकुर जी शीघ्र ही चले आते हैं। ये एक ऐसी रचना है, कि अगर कोई भी भक्त आसन बिछाकर मुक्त कंठ से "गीत गोविंद" का पाठ करे, तो ठाकुर जी इस भजन को सुनने अवश्य आते हैं। गीत गोविंद को गाने नियम क्या हैं। 

गीत गोविंद गाने के नियम
नित्य आसन पर बैठकर गीत गोविंद का पाठ करो और जब पाठ करो तो सामने खाली आसन बिछा दो। वो आसन ठाकुर जी का होना चाहिए और भाव ये हो कि ठाकुर जी आप आकर इस आसन पर बैठो हम आपको गीत गोविंद सुना रहे हैं। एक महीना, दो महीना, 6 महीना, साल भर...आप लगातार गीत गोविंद सुनाते रहें। कुछ दिनों के बाद आपको अनुभव होगा कि बाल गोपाल आपके द्वारा लगाए गए आसन पर बैठकर इस गीत को सुन रहे हैं।

भगवान कृष्ण को क्यों प्रिय है गीत गोविंद
गीत गोविन्द भगवान कृष्ण को इसलिए प्रिय है क्योंकि यह उनके और राधा के प्रेम, विरह और मिलन का सुंदर वर्णन करता है। गीत गोविन्द में राधा और कृष्ण के प्रेम को एक मानवीय प्रेम के रूप में ही नहीं बल्कि एक आध्यात्मिक और दैवीय प्रेम के रूप में भी चित्रित किया गया है। इसके अलावा इस रचना में कृष्ण के प्रति भक्तों के प्रेम और समर्पण को भी दर्शाया गया है। कुछ धर्म ग्रंथों अनुसार जहां भी गीत गोविंद गाया जाता है वहां उसे सुनने के लिए स्वयं भगवान कृष्ण आते हैं।

श्रितकमला कुच मण्डल धृतकुण्डल ए।
कलि तल लित वनमाल जय जय देव हरे॥

दिनमणिमण्डलमण्डन भवखण्डन ए।
मुनिजन मानस हंस  जय जय देव हरे॥

कालियविषधरगंजन जनरंजन ए।
यदुकुल नलिन दिनेश जय जय देव हरे॥

मधुमुरनरकविनाशन गरुडासन ए।

सुरकुलकेलिनिदान जय जय देव हरे ॥

अमलकमलदललोचन भवमोचन ए।

त्रिभुवनभवननिधान जय जय देव हरे ॥

जनकसुताकृतभूषण जितदूषण ए।

समरशमितदशकण्ठ जय जय देव हरे ॥

अभिनवजलधरसुन्दर धृतमन्दर ए।

श्रीमुखचन्द्रचकोर जय जय देव हरे ॥

तव चरणे  प्रणता  वयमिति  भावय ए।
कुरु कुशलंव प्रणतेषु जय जय देव हरे॥

श्रीजयदेवकवेरुदितमिदं कुरुते मृदम्।
मंगल  मंजुल  गीतं  जय जय देव हरे॥

राधे कृष्णा हरे गोविंद गोपाला नन्द जू को लाला ।
यशोदा दुलाला जय जय देव हरे ॥

भगवान कृष्ण ने स्वयं पूर्ण किया गीत गोविंद
एक कथा के अनुसार गीत गोविंद के कवि जयदेव एक छंद को लेकर दुविधा में थे और उन्हें समझ नहीं आ रहा था, कि वह अपनी इस रचना को कैसे पूर्ण करें ? तब भगवान कृष्ण ने उनकी अनुपस्थिति में उस छंद को पूरा किया था।
(Disclaimer- उक्त जानकारियां धार्मिक आस्था एवं लोक मान्यताओं पर आधारित हैं।)

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी (16 अगस्त) को बैंक खुलेंगे, बंद भी रहेंगे
बैंक खुले होंगे- दिल्ली, मुंबई, कर्नाटक, केरल, नागालैंड, पश्चिम बंगाल, गोवा,हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, असम, त्रिपुरा, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश में सभी प्राइवेट और सरकारी बैंक खुले रहेंगे।

बैंक बंद रहेंगे-  गुजरात, मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, सिक्किम, तेलंगाना, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, मेघालय, मिजोरम, जम्मू, श्रीनगर और चंडीगढ़ में सभी बैंकों में छुट्टियां रहेंगी।
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