कड़ाके की ठंडक में जीवंत हुई स्नानार्थियों की श्रद्धा, पहली बार बसाया...


"प्रयागवाल नगर", कल्पवासियों की संख्या में हुई वृद्धि
- ब्रह्म मुहूर्त से श्रद्धालु संगम व अन्य घाटों पर लगाने लगे पवित्र डुबकी 

(धर्म नगरी / 
DN News
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तीर्थराज प्रयाग में कड़ाके की ठंडक के मध्य स्नानार्थियों की श्रद्धा जीवंत हो गई, जब पौष पूर्णिमा के पावन पर्व हजारों श्रद्धालुओं संगम क्षेत्र में पवित्र डुबकी लगते दिखे। कड़ाके की ठंड, ठिठुराने वाली सर्द हवाका सामना करते हुए गृहस्थ आधी रात के बाद तक आते रहे। 
  
पूर्णिमा तिथि लगने के साथ ब्रह्म-मुहूर्त से लाखों श्रद्धालु गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती की त्रिवेणी में आस्था की डुबकी लगाते दिखने लगे। इसके साथ पौष पूर्णिमा (3 जनवरी) से माघ मेला-2026 का भव्य शुभारंभ हो गया। शास्त्रानुसार पुण्य पौष पूर्णिमा से माघी पूर्णिमा (1 फरवरी) तक स्नान का पुण्यकाल रहेगा। वहीं, माघ मेला 44 दिनों (15 फरवरी, महाशिवरात्रि) तक चलेगा। 

कुछ ज्योतिर्विदों के अनुसार, पूर्णिमा तिथि शुक्रवार शाम 6.12 बजे से शनिवार शाम 4.03 बजे तक रहेगी। वहीं, शनिवार की सुबह 10.03 बजे तक ब्रह्म योग रहेगा। इसके बाद ऐंद्र योग लग जाएगा। धनु राशि में सूर्य, मंगल, बुध और शुक्र के संचरण होने से चतुर्ग्रहीय योग बन रहा है। ग्रहों का यह मिलन अत्यंत पुण्यकारी है। 
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प्रयागराज माघ मेला-2026 विशेषांक   
शिविर का आयोजन एवं माघ मेले पर केंद्रित "धर्म नगरी माघ मेला-2026" के चार विशेषांक निकाले जाएंगे। इनका वितरण मेले में शिविरों में सन्तों धर्माचार्यों आदि को, मेला क्षेत्र में स्थित विभिन्न कार्यालयों, सरकारी एवं निजी प्रदर्शनियों आदि को फ्री या "सौजन्य से..." होगा। इसके साथ मेला क्षेत्र में बनने वाले 42 पार्किंग, मेले में आने वाली कार, बस आदि निजी वाहनों में तीर्थयात्रियों, श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को दिया जाएगा, जिस प्रकार प्रयागराज महाकुंभ-2025 पर "धर्म नगरी" के तीन विशेषांकों को बांटा गया।

प्रयागराज माघ मेला-2026 के विशेषांको में आप भी संगम क्षेत्र के आयोजित अपने शिविर (कैम्प) की जानकारी, शिविर में होने वाले कार्यक्रम (यदि कोई हो), सारगर्भित लेख, अपने आश्रम मठ की गतिविधियां आदि प्रकाशित करवा सकते हैं। इसके साथ अपने नाम से विशेषांक बटवा सकते हैं (देखें ऊपर बायीं कोने)। संपर्क करें +91 8109107075-वाट्सएप ईमेल- dharm.nagari@gmail.com 

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950 बीघे में पहली बार बसा "प्रयागवाल नगर" 
पौष पूर्णिमा के साथ भक्ति, साधना और संयम की त्रिधारा- कल्पवास का आरंभ हो गया। इस वर्ष कल्पवासियों की संख्या में वृद्धि हुई है। इसे देखते हुए पहली बार माघ मेला क्षेत्र में कल्पवासियों हेतु अलग से 950 बीघे में एक नगर बसाया गया है, जिसे "प्रयागवाल नगर" नाम दिया है। इसे नागवासुकी मंदिर के सामने गंगा नदी के पार इसे बसाया गया है। 

कल्पवासी एवं श्रद्धालु अब गृहस्थ संतों और तीर्थपुरोहितों के शिविर में आसरा लेते हुए माघ पूर्णिमा तक प्रतिदिन सुबह स्नान के बाद कल्पवास करेंगे। चार लाख से अधिक कल्पवासी संगम की रेती व मिट्टी पर बिछे पुवाल या फूस पर लगे अपने-अपने टेंटों में निवास करेंगे। मेला क्षेत्र में मूल रूप से कल्पवास करने वाले इन श्रद्धालुओं को गंगा के तटों के पास ही तंबुओं की व्यवस्था की गई, ताकि सुबह प्रतिदिन इन्हें गंगा स्नान के लिए दूर तक न चलना पड़े। 

मेला प्रशासन के अनुसार, माघ मेले के पहले स्नान पर्व- पौष पूर्णिमा पर आज 25 से 30 लाख श्रद्धालुओं के स्नान करने की संभावना है। पूर्णिमा से पूर्णिमा (पौष से माघ माह) तक कल्पवास का विधान है। कल्पवास करने वाले कल्पवासी श्रद्धालु कल्पवास का संकल्प लेकर संगम की रेती व गंगाजी पवित्र मिट्टी पर विधि-विधानपूर्वक कल्पवास करते हैं। एक बार कल्पवास का संकल्प लेने के पश्चात श्रद्धालु लगातार 12 वर्ष तक संगम क्षेत्र में रहते हुए नियम-संयम का पालन करते हुए निवास करते हैं। कल्पवास करते हुए कल्पवासी जीवन और मृत्यु के बंधनों से मुक्ति की कामना के साथ जप-तप और साधना करते हैं।
 
पौष पूर्णिमा का विशेष धार्मिक महत्व है। मान्यतानुसार, यह पूर्णिमा पितरों की है, जिसे कल्याण पर्व के रूप में मनाया जाता है। इस दिन श्रद्धालु स्नान-दान, व्रत और पूजा-पाठ करते हैं। अभावग्रस्त लोगों, भिक्षुओं को अन्न, वस्त्र, फल और सब्जियों का दान करने से पुण्य की प्राप्ति और घर में सुख-समृद्धि बढ़ने की मान्यता है।

माघ मेले में कुल 12 से 15 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है। मेले का कुल क्षेत्र बढ़ाकर 800 हेक्टेयर में करते हुए इसे सात सेक्टरों में बांटा गया है। मेला प्रशासन के अनुसार, श्रद्धालुओं के लिए आठ किलोमीटर लंबा स्नान घाट तैयार किया गया है। घाट के किनारे कासा बिछवाकर प्रकाश का प्रबंध किया गया। भीड़ प्रबंधन के दृष्टिगत 42 अस्थायी पार्किंग बनाई गई है। जहां 1.30 लाख वाहन खड़े हो सकेंगे।

सिंचाई विभाग द्वारा संगम में 10 हजार क्यूसेक पानी की उपलब्धता सुनिश्चित किया है। लोक निर्माण विभाग ने 160 किलोमीटर चेकर्ड प्लेट बिछाई है। वहीं, उत्तर प्रदेश जल निगम ने 242 किलोमीटर पेयजल और 85 किलोमीटर सीवर लाइन डाली है। उप्र पावर कॉरपोरेशन ने 25 अस्थायी विद्युत सब-स्टेशन स्थापित किए हैं।
 
स्वास्थ्य को लेकर हॉस्पिटल, एम्बुलेंस
श्रद्धालुओं के त्वरित इलाज के लिए 20-20 बेड के दो अस्पताल, 12 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और दो हेल्थ सेंटर बनाए गए हैं। इसके साथ एक वेक्टर कंट्रोल यूनिट, पांच आयुर्वेदिक और पांच होम्योपैथिक अस्पताल भी स्थापित किए गए हैं। मेले में 50 एंबुलेंस तैनात हैं। स्वच्छता के लिए 25 हजार शौचालय, आठ हजार डस्टबिन, 10 लाख से अधिक लाइनर बैग और 30 सक्शन मशीनें लगाई गई हैं। तीन हजार सफाईकर्मी लगातार सफाई कार्य में जुटे हैं। परिवहन व्यवस्था के तहत 3800 रोडवेज बसें लगाई गई हैं और 42 स्थानों पर पार्किंग की सुविधा दी गई है।
 
कड़ी सुरक्षा की व्यवस्था  
पूरे मेला क्षेत्र में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था गए हैं, जिसके लिए 17 थाने व 42 पुलिस चौकी, 20 अग्निशमन स्टेशन, सात अग्निशमन चौकी, 20 अग्निशमन वाच टावर, एक जल पुलिस थाना, एक जल पुलिस कंट्रोल रूम तथा चार जल पुलिस सब कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। 

स्नानार्थियों की सुरक्षा को लेकर आठ किलोमीटर डीप वाटर बैरिकेडिंग की गई है। क्राउड मैनेजमेंट के लिए सीसीटीवी और एआई युक्त 400 कैमरों से भीड़ नियंत्रण, घनत्व विश्लेषण और घटना रिपोर्टिंग की जा रही है। ड्रोन कैमरों से भी निगरानी की जा रही है। यूपी एटीएस के कमांडो भी मेले में तैनात हैं। शहर से लेकर मेला क्षेत्र तक चाक-चौबंद व्यवस्था की गई है।
 
छह स्नान पर्व
माघ मेले में कुल छह स्नान पर्व पड़ेंगे। 3 जनवरी पौष पूर्णिमा, 14-15 जनवरी मकर संक्रांति, 18 जनवरी मौनी अमावस्या, 23 जनवरी बसंत पंचमी, एक फरवरी माघी पूर्णिमा और 15 फरवरी महाशिवरात्रि।

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