1000 वर्ष पहले सोमनाथ मन्दिर पर हुआ था पहला आक्रमण, आध्यात्मिक महत्व से परे संघर्ष, बलिदान और...


...विजय गाथा को युवा पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम बनेगा 
"सोमनाथ स्‍वाभिमान पर्व" 
- 75 वर्ष पहले 1951 में पुनर्निमित मन्दिर की स्मृति में चार-दिवसीय "सोमनाथ स्‍वाभिमान पर्व" का शुभारंभ
- सभ्यतागत संकल्प ने सोमनाथ का बार-बार पुनर्निर्माण सुनिश्चित किया- PM 
धर्म नगरी  
DN News (गुजरात
 ब्यूरो)
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गुजरात के प्रभास पाटन में सोमनाथ मंदिर की शाश्‍वत भावना का उत्‍सव मनाने चार-दिवसीय सोमनाथ स्‍वाभिमान पर्व का आज (8 जनवरी) पूरे उत्‍साह और धार्मिक उल्‍लास के साथ शुभारंभ हुआ। सोमनाथ मंदिर पर जनवरी 1026 को हुए पहले आक्रमण के एक हजार वर्ष पूरे हो रहे हैं। साथ ही, इसी वर्ष पुनर्निमित मंदिर के (1951 में) पुनः खुलने की 75वीं वर्षगांठ भी मनाई जा रही है।

हर, हर भोले... जय सोमनाथ... के जयघोष, शंखनाद और डमरूओं की गूंज से प्रथम ज्‍यातिर्लिंग सोमनाथ मंदिर का प्रांगण शिवमय हो उठा। 72 घंटों के अनवरत अंखड ॐकार जाप के प्रारंभ के साथ सोमनाथ स्‍वाभिमान पर्व का विधिवत शुभारंभ हुआ। समूचे गुजरात से आए लगभग ढाई हजार ऋषि कुमार अगले 72 घंटों तक लगातार अखंड ॐकार जाप और वेद मंत्रों का पाठ करेंगे। इसके साथ देशभर के शिव मंदिरों में आज एकसाथ मंत्रोच्चार किया जा रहा है।
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अंत नहीं है जिसका,
जिसकी कोई नहीं है शुरुआत-
सृष्टि के कण-कण में बसता
वह    है   शंभू   प्राणनाथ।
समय से परे है सोमनाथ।।
#SomnathSwabhimanParv के अवसर पर भगवान सोमनाथ को समर्पित भारत की अटूट आस्था और स्वाभिमान का यह सुंदर गीत अवश्य सुनिए।
जय सोमनाथ। - भूपेंद्र पटेल, CM गुजरात 
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आज का सोमनाथ, आज की गजनी - हर्ष सांघवी, Dy CM गुजरात 
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प्रयागराज माघ मेला-2026 विशेषांक बटवायें   
शिविर का आयोजन एवं माघ मेले पर केंद्रित "धर्म नगरी माघ मेला-2026" के विशेषांक निकाले जा रहें हैं, जिनका वितरण मेले में शिविरों में (सन्तों धर्माचार्यों, विभिन्न कार्यालयों, सरकारी एवं निजी प्रदर्शनियों आदि) को फ्री या "सौजन्य से..." होगा। इसके साथ, मेला क्षेत्र में 42 पार्किंग, मेले में आने वाली कार, बस आदि निजी वाहनों में तीर्थयात्रियों, श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को दिया जाएगा (जिस प्रकार प्रयागराज महाकुंभ-2025 पर "धर्म नगरी" के विशेषांकों को बांटा गया। (देखें पहला विशेषांक )

आप भी अपने नाम से विशेषांक बटवाने हेतु कृपया 
संपर्क करें +91 8109107075-वाट्सएप मो.  6261 868110 ईमेल- dharm.nagari@gmail.com 
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श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए राज्य के चार महानगरों से सोमनाथ के लिए विशेष ट्रेनों की व्यवस्था की गई है। अगले चार दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव के बारे मे बात करते हुए गुजरात के कैबिनेट मंत्री जीतू वाघानी ने बताया कि यह आयोजन साल भर चलने वाली आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों का हिस्सा है। 11 जनवरी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भगवान सोमनाथ की पूजा-अर्चना करेंगे। इस अवसर होने वाली सभा में लगभग एक लाख लोग जुड़ेंगे।

"सभ्यतागत संकल्प ने बार-बार पुनर्निर्माण सुनिश्चित किया"
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व" के शुभारंभ पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को बधाई देते हुए सोशल मीडिया पोस्ट में कहा- स्वाभिमान पर्व भारत माता की उन अनगिनत संतानों को याद करने का अवसर है, जिन्होंने कभी अपने सिद्धांतों और मूल्यों से समझौता नहीं किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि जनवरी 1026 में सोमनाथ पर पहला हमला हुआ था। बार-बार आक्रमणों के बावजूद, भक्तों की अटूट आस्था और भारत के सभ्यतागत संकल्प ने सोमनाथ का बार-बार पुनर्निर्माण सुनिश्चित किया। यह पर्व भारतमाता की उन अनगिनत संतानों को श्रद्धांजलि है, जिन्होंने अपने सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया।

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यह मंदिर एक बार नहीं, बल्कि 17 बार तोड़ा गया… फिर भी आस्था नहीं टूटी। This temple was not destroyed once, but 17 times... yet the faith remained unbroken.
सोमनाथ सिर्फ पत्थरों की संरचना नहीं, Somnath is not just a structure of stones,
यह भारत की अडिग श्रद्धा, संस्कृति और स्वाभिमान का प्रतीक है। It is a symbol of India's unwavering devotion, culture, and pride.
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एक मंदिर, जो हजार वर्षों की कथा कहता है… A temple that narrates a tale of a thousand years…
हज़ार साल, अनगिनत आघात फिर भी सोमनाथ अडिग रहा। A thousand years, countless assaults, yet Somnath remained steadfast.
यह केवल पत्थर और प्रांगण नहीं, बल्कि भारत की सभ्यतागत साहस, अटूट आस्था और सनातन धर्म का जीवंत प्रतीक है। It is not merely stone and courtyard, but a living symbol of India's civilizational courage, unwavering faith, and eternal dharma.

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साल था 1026… आस्था को तोड़ने का प्रयास हुआ, The year was 1026… An attempt was made to break the faith, लेकिन इतिहास गवाह है, सोमनाथ झुका नहीं। but history is witness, Somnath did not bow.
केवल एक मंदिर नहीं, यह भारत की सामूहिक चेतना थी, Not just a temple, it was India's collective consciousness, जिसकी रक्षा के लिए हज़ारों श्रद्धालु खड़े हो गए। for whose protection thousands of devotees stood up.

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और यही सोमनाथ का शाश्वत सत्य है- And this is the eternal truth of Somnath- हर बार तोड़ा गया, हर बार पहले से अधिक दृढ़ होकर खड़ा हुआ। destroyed every time, but rising again each time stronger than before.
पीढ़ी दर पीढ़ी, आस्था को मिटने नहीं दिया गया, Generation after generation, faith was not allowed to be erased,
और सोमनाथ दृढ़ता, विश्वास और संकल्प का जीवंत प्रतीक बन गया। and Somnath became a living symbol of resilience, faith, and determination.


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स्वतंत्रता के बाद सोमनाथ के पुनर्निर्माण का पवित्र संकल्प मिला सरदार वल्लभभाई पटेल को। After independence, Sardar Vallabhbhai Patel received the sacred resolve for the reconstruction of Somnath.
1947 की दीपावली पर जब उन्होंने यहाँ दर्शन किए, On the Diwali of 1947, when he visited here, तो भावुक होकर कहा- he said emotionally- “सोमनाथ का पुनर्निर्माण यहीं, इसी स्थान पर होगा।” The reconstruction of Somnath will happen right here, at this very place.
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11 मई 1951 - पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर के द्वार राष्ट्र के लिए खुले। 11 May 1951 - The doors of the reconstructed Somnath Temple opened for the nation.
विरोधों के बीच भी राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद 
इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने, Amidst protests, President Dr. Rajendra Prasad became a witness to this historic moment, क्योंकि यह आयोजन आस्था नहीं, राष्ट्रीय स्वाभिमान का प्रतीक था। as this event was not a symbol of faith, but of national pride.
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तो आज भी सोमनाथ का महत्व क्यों है ? So why does Somnath still hold significance today ? 
क्योंकि, जैसा कि पीएम मोदी ने कहा-
“सत्य को असत्य पराजित नहीं कर सकता,
और आतंक आस्था को कुचल नहीं सकता।”
Because, as PM Modi said-
"Truth cannot be defeated by falsehood,
and terror cannot crush faith."
सोमनाथ इस सत्य का जीवंत प्रमाण है, कि विनाशकारी विचारधाराएँ कभी स्थायी नहीं होतीं। Somnath is living proof of this truth, that destructive ideologies are never permanent.
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पीएम इस विरासत को नई ऊर्जा और नई भव्यता के साथ आगे बढ़ा रहे हैं।PM Modi is advancing this legacy with new energy and new grandeur. सरदार पटेल के संकल्प को आधार बनाकर, Based on Sardar Patel's resolve,
सोमनाथ को आधुनिक भारत की चेतना से जोड़ा जा रहा है। Somnath is being connected to the consciousness of modern India.



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अब आस्था को विश्व-स्तरीय सुविधाओं का साथ मिला है। Now, faith has been accompanied by world-class facilities.
लाखों श्रद्धालुओं के लिए सोमनाथ केवल दर्शन का नहीं, 
For millions of devotees, Somnath has become not just a place for darshan, एक समग्र आध्यात्मिक अनुभव बन गया है- चाहे पार्वती मंदिर हो या समुद्र-मुखी प्रॉमेनेड। but a holistic spiritual experience- whether it's the Parvati Temple or the sea-facing promenade.
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भव्य दृश्य, नवीन अनुभूति। Grand view, novel experience.
अरब सागर की पृष्ठभूमि में सोमनाथ का दर्शन अब पहले से कहीं अधिक विराट और स्मरणीय हो गया है। The darshan of Somnath against the backdrop of the Arabian Sea has now become more colossal and memorable than ever before.

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2026 में, पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूर्ण करते हुए, In 2026, upon completing 75 years of reconstruction,
सोमनाथ यह सन्देश देता है, आस्था समय की सीमाओं से परे सृजन करती है। Somnath conveys this message: faith creates beyond the limitations of time.

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सोमनाथ - अखंड आस्था, स्वाभिमान और साहस की हजार वर्षों लंबी गौरवगाथा का प्रतीक। Somnath - A symbol of the thousand-year-long saga of unbroken faith, self-respect, and courage.
पहले आक्रमण के एक सहस्राब्दि बाद भी Even a millennium after the first invasion सोमनाथ आज उसी दृढ़ता और गरिमा के साथ अडिग खड़ा है। Somnath today stands unyielding with the same resolve and dignity.

Gujrat : मोदी बने श्री सोमनाथ मंदिर न्‍यास के अध्‍यक्ष, पूर्व PM मोरारजी के बाद PM मोदी बने चेयरमैन   
http://www.dharmnagari.com/2021/01/MP-Modi-becomes-Chairman-of-Sri-Somnath-Mandir-Nyas.html
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