हनुमान जयंती (जन्मोत्सव) : आर्थिक या विवाह की समस्या से शनि दोष से मुक्ति तक... करें विशेष उपाय
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-राजेश पाठक (अवै.संपादक)
भगवान शिव के 11वें रूद्र अवतार हनुमान जी के जन्म के बारे में पुराणों में उल्लेख है। अमरत्व की प्राप्ति के लिए जब देवताओं व असुरों ने मिलकर समुद्र मंथन किया को उससे निकले अमृत को असुरों ने छीन लिया और आपस में ही लड़ने लगे। तब भगवान विष्णु मोहिनी के भेष अवतरित हुए। मोहनी रूप देख देवता व असुर तो क्या स्वयं शिवजी कामातुर हो गए। इस समय भगवान शिव ने जो वीर्य त्याग किया उसे पवनदेव ने वानरराज केसरी की पत्नी अंजना के गर्भ में प्रविष्ट करा दिया। जिसके फलस्वरूप माता अंजना ने केसरी नंदन मारुती संकट मोचन रामभक्त श्री हनुमान को जन्म दिया।
अन्य कथा के अनुसार, अयोध्या नरेश राजा दशरथ ने जब पुत्रेष्टि हवन कराया, तब प्रसाद स्वरूप प्राप्त खीर को उन्होंने अपनी तीनों रानियों को दिया। मान्यता है, उस खीर का एक अंश एक कौआ लेकर उड़ गया और वहां पर पहुंचा, जहां माता अंजना शिव तपस्या में लीन थीं।
माँ अंजना को जब वह खीर प्राप्त हुई, तो उन्होंने उसे शिवजी के प्रसाद स्वरुप ग्रहण कर लिया। इस घटना में भगवान शिव और पवन देव का योगदान था। उस प्रसाद को ग्रहण करने के बाद हनुमानजी का प्राकट्य (जन्म) हुआ। हनुमान जी भगवान शिव के 11वें रुद्रवतार माने जाते हैं। माता अंजना के कारण हनुमान जी को आंजनेय, पिता वानरराज केसरी के कारण केसरीनंदन और पवन देव के सहयोग के कारण पवनपुत्र, वज्र के समान शरीर हेतु बजरंगबली, हनुमान आदि नामों से भी जाना जाता है।
ब्रह्मदेव ने हनुमान जी को वरदान दिया था- ब्रह्म के दंड हनुमान जी से सदैव दूर रहेंगे। जैसा रूप धारण हनुमान जी करना चाहेंगे, वह कर सकेंगे और इस पर हनुमान जी का अपनी इच्छा से नियंत्रण होगा।
भगवान शंकर ने हनुमानजी को आशीर्वाद देते हुए कहा था- उनपर उनके अस्त्र या शस्त्रों का भी प्रभाव नहीं होगा।
देवराज इंद्र ने हनुमान जी को अपने वज्र के असर से मुक्त रहने का आशीर्वाद दिया था।
हनुमान जी के गुरु सूर्य देव ने बजरंगबली को उनअपने तेज का 100वां भाग हनुमान जी को वरदान में दिया। हनुमानजी को सूर्यदेव से ही उन्हें शस्त्रों का ज्ञान भी मिला। हनुमान जी ने सूर्यदेव से ही शिक्षा प्राप्त की थी। सूर्य देव ने वरदान देते हुए कहा- किसी को भी शास्त्रों का ज्ञान हनुमान जी के समान नहीं होगा।
यमराज ने बजरंगबली को वरदान देते हुए कहा था- वह उनके दंड से सदैव बचे रहेंगे।
शनि देव ने उन्हें यह वचन दिया था- कि हनुमान जी की उपासना करने वालों को वह कभी कष्ट नहीं देंगे
बाल समय रवि भक्ष लियो तब, तीनहुं लोक भयो अंधियारो।
ताहि सों त्रास भयो जग को, यह संकट काहु सों जात न टारो।।
ताहि सों त्रास भयो जग को, यह संकट काहु सों जात न टारो।।
देवन आनि करी बिनती तब, छाड़ी दियो रवि कष्ट निवारो।
को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो।।
बालि की त्रास कपीस बसैं गिरि, जात महाप्रभु पंथ निहारो।
चौंकि महामुनि साप दियो तब, चाहिए कौन बिचार बिचारो।।
कैद्विज रूप लिवाय महाप्रभु, सो तुम दास के सोक निवारो।
अंगद के संग लेन गए सिय, खोज कपीस यह बैन उचारो।।
जीवत ना बचिहौ हम सो जु, बिना सुधि लाये इहाँ पगु धारो।
हेरी थके तट सिन्धु सबे तब, लाए सिया-सुधि प्राण उबारो ॥
रावण त्रास दई सिय को सब, राक्षसी सों कही सोक निवारो।
ताहि समय हनुमान महाप्रभु, जाए महा रजनीचर मरो।।
चाहत सीय असोक सों आगि सु, दै प्रभुमुद्रिका सोक निवारो।
बान लाग्यो उर लछिमन के तब, प्राण तजे सूत रावन मारो।।
लै गृह बैद्य सुषेन समेत, तबै गिरि द्रोण सु बीर उपारो।
आनि सजीवन हाथ दिए तब, लछिमन के तुम प्रान उबारो।।
रावन जुध अजान कियो तब, नाग कि फाँस सबै सिर डारो।
श्रीरघुनाथ समेत सबै दल, मोह भयो यह संकट भारो।।
आनि खगेस तबै हनुमान जु, बंधन काटि सुत्रास निवारो।
बंधु समेत जबै अहिरावन, लै रघुनाथ पताल सिधारो।।
देबिन्हीं पूजि भलि विधि सों बलि, देउ सबै मिलि मन्त्र विचारो।
जाये सहाए भयो तब ही, अहिरावन सैन्य समेत संहारो।।
काज किये बड़ देवन के तुम, बीर महाप्रभु देखि बिचारो।
कौन सो संकट मोर गरीब को, जो तुमसे नहिं जात है टारो।।
बेगि हरो हनुमान महाप्रभु, जो कछु संकट होए हमारो।
को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो।।
दोहा
लाल देह लाली लसे, अरु धरि लाल लंगूर।
वज्र देह दानव दलन, जय जय जय कपि सूर।।
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श्री हनुमान जन्मोत्सव को करें विशेष उपाय
➯ आर्थिक समस्या से ग्रसित/पीड़ित हैं तो इस दिन श्वेत कागज पर स्वास्तिक का चिन्ह बनाकर उसे हनुमान जी को अर्पित करें। फिर उसे घर की तिजोरी में रख दें। ऐसा करने से हनुमानजी की कृपा से घर धन की कमी नहीं होगी।
➯ किसी कन्या के विवाह में बार-बार बाधा आ रही हो या विवाह नहीं हो रहा है, तो हनुमान जयंती के दिन मंदिर में हनुमान जी के पैरों में सिंदूर चढ़ाए, उसके बाद उस सिंदूर का टीका अपने मांग में लगाए। फिर श्रद्धा-विश्वास के साथ हाथ जोड़कर शीघ्र विवाह की प्रार्थना करें। परिणाम शीघ्र मिलेगा।
➯ पारिवारिक कलह से बनी रहती है या घर के कलह से मुक्ति नहीं मिल रही हो, तो हनुमान जयंती को शुभ-मुहूर्त में सरसों के तेल में सिंदूर मिलाकर घर के प्रत्येक कमरे के दरवाजे पर स्वास्तिक का चिन्ह बनाए। इससे घर की नकारात्मक शक्तियां प्रवेश नहीं कर पाती और घर में शांति बनी रहती है।
➯ कष्टों से मुक्ति पाने इस दिन पारे से निर्मित हनुमान जी की पूजा करें और ”ॐ रामदूताय नमः” मंत्र का 108 बार रुद्राक्ष की माला से ही जाप करें।
➯ किसी प्रकार की पीड़ा या समस्या होने पर पीपल के 11 पत्ते लें। उन्हें साफ पानी से धोकर उनके ऊपर चंदन या कुमकुम से श्री राम का नाम लिखें और इसकी माला बनाकर हनुमानजी को पहना दें।इसका प्रभाव आपको दिखेगा।
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श्रीरामचन्द्र कृपालु भज मन...
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– यदि कुंडली में कोई दोष है, तो उसे दूर करने इस दिन हनुमान मंदिर जाकर उड़द के 11 दाने, सिंदूर, चमेली का तेल, फूल, प्रसाद आदि चढ़ाने के पश्चात हनुमान चालीसा का पाठ करें।
– हनुमानजी की कृपा पाने, उनकी कृपा हम पर बनी रहे, इसके लिए इस दिन विशेष 'पान का बीड़ा" बनवा कर हनुमानजी को अर्पित करें। उनके समक्ष एक सरसों और एक घी का दीपक जलाएं और उनके सम्मुख बैठकर हनुमानजी का ध्यान करते श्रद्धापूर्वक हुए बजरंग बाण का पाठ करें।
- आप नौकरी को लेकर संघर्षरत हैं, तो इस दिन हनुमान जी के चरणों में सिंदूर चढ़ाकर विधि-पूर्वक पूजा करें। फिर अर्पित किए (चढ़ाए) सिंदूर से सफेद कागज पर स्वास्तिक का चिन्ह बनाकर उसे अपने पास सुरक्षित रख लें। नौकरी की समस्या के समाधान का मार्ग आपको मिलेगा।
- ऋण को लेकर चिंतिंत रहते हैं, तो हनुमान जयंती के दिन चमेली के तेल में सिंदूर मिलाकर हनुमान जी की मूर्ति पर लेप करें, अपनी आयु के अनुसार पीपल के पत्ते पर राम राम लिखकर इसे हनुमान जी को चढ़ाए, ऐसा करने से शीघ्र ही ऋण (कर्ज) से मुक्ति मिल जाती है।
– अपने जीवन की विभिन्न समस्याओं, उलझनों से मुक्ति पाने हनुमान जयंती के दिन हनुमान मंदिर जाकर घी या तेल का दीपक जलाएं। वहीं बैठकर भक्तिपूर्वक 11 बार हनुमान चालीसा का पाठ करें। हनुमान जी प्रसन्न होंगे एवं आपके कृपा मिलेगी।
- अगर आपका कोई कार्य लंबे समय से अटका हुआ है तो हनुमान जयंती के दिन सुबह स्नान करके हनुमान मंदिर में सुंदरकांड का पाठ करें, और अपने मन में कार्य को पूर्ण होने की कामना हनुमान जी से करें, ऐसा करने से आपका कार्य शीघ्र ही संपन्न होगा।
हनुमान जी के आगे जलाएं दीपक-
हनुमान जयंती के दिन सायंकाल हनुमान मंदिर जाएं और हनुमानजी को केवड़े का इत्र और गुलाब की माला चढ़ाएं। इसके साथ सरसों के तेल का दीपक जलाकर 11 बार हनुमान चालीसा का पाठ करें। ऐसा करने से शनि देव से मुक्ति मिलने के साथ हनुमान जी का आशीर्वाद भी मिलेगा, ऐसा तंत्र के जानकारों का कहना हैं।
हनुमान जयंती के दिन सायंकाल हनुमान मंदिर जाएं और हनुमानजी को केवड़े का इत्र और गुलाब की माला चढ़ाएं। इसके साथ सरसों के तेल का दीपक जलाकर 11 बार हनुमान चालीसा का पाठ करें। ऐसा करने से शनि देव से मुक्ति मिलने के साथ हनुमान जी का आशीर्वाद भी मिलेगा, ऐसा तंत्र के जानकारों का कहना हैं।
श्रीराम रक्षा स्त्रोत का पाठ-
हनुमान जयंती के दिन हनुमान मंदिर में श्री राम, माता सीता और हनुमान जी की प्रतिमा के दर्शन करते हुए राम रक्षा स्तोत्र का पाठ करने से बजरंगबली की कृपा प्राप्त होती है. साथ ही शनि देव का आशीर्वाद भी मिलता है. साधक के सभी काम स्वंय बनने लगते हैं.
सिंदूर का चोला चढ़ाएं-
हनुमान जयंती के दिन हनुमान मंदिर में श्री राम, माता सीता और हनुमान जी की प्रतिमा के दर्शन करते हुए राम रक्षा स्तोत्र का पाठ करने से बजरंगबली की कृपा प्राप्त होती है. साथ ही शनि देव का आशीर्वाद भी मिलता है. साधक के सभी काम स्वंय बनने लगते हैं.
सिंदूर का चोला चढ़ाएं-
संकटों से मुक्ति पाने के लिए हनुमान जंयती के दिन हनुमानजी को सिंदूर का चोला चढ़ाएं. इससे बजरंगबली प्रसन्न होकर आरोग्य, सुख- समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं, क्योकि हनुमान जी को सिंदूर बहुत प्रिय है। जिस उपाय से शनि देव के प्रकोप में भी कमी आती है।
नारियल फोड़ें-
हनुमान जयंती के दिन नारियल लेकर हनुमान मंदिर में जाएं और उसे अपने ऊपर से सात बार वारते हुए हनुमान जी के सामने फोड़ दें। ऐसा करने से आपकी सारी बाधाएं दूर हो जाएंगी
पीपल के पत्ते से करें उपाय-
हनुमान जयंती के दिन हनुमान जी को गुलाब की माला अर्पित करें। साथ ही 11 पीपल के पत्तों पर श्रीराम का नाम लिखकर इनकी माला बनाएं और हनुमान जी को अर्पित कर दें। इससे हनुमानजी की विशेष कृपा प्राप्त होती है और शनि देव कभी परेशान नहीं करते।
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कीजे केसरी के लाल
मेरा छोटा सा ये काम
मेरी राम जी से कह देना
जय सियाराम...
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