हनुमान जन्मोत्सव : कलयुग के प्रत्यक्ष देव, महत्व पूजन-विधि, मंत्र


हनुमानजी के द्वादश नामों का 51 बार करें स्मरण  
धर्म नगरी
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संगमलाल त्रिपाठी 'आजाद'* 

कलयुग के प्रत्यक्ष देव, अष्ट-सिद्धि व नौ-निधि के दाता, भगवान श्रीराम के परम-भक्त हनुमानजी का जन्मोत्सव चैत्र पूर्णिमा तिथि को मनाया जाएगा। हनुमानजी का जन्म चैत्र शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को मंगलवार के दिन चित्रा नक्षत्र एवं मेष लग्न के योग में हुआ था। प्राचीन मान्यता है, इस दिन बजरंगबली की पूजा-अर्चना करने से सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं।

हनुमान जी सदा-सर्वदा संकट मोचन रहे हैं, मनुष्य रूप में अवतार लेने वाले देवों को भी कष्टों से मुक्ति प्रदान की है। शनिवार और मंगलवार के दिन हनुमान जी की विधि-विधान से पूजा करने से जीवन से संकट एवं कष्ट दूर होते हैं, भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इस वर्ष हनुमान जयंती शनिवार (16 अप्रैल) को पड़ने से विशेष संयोग भी बन रहा है।

कार्तिक कृष्णपक्ष चतुर्दशी को हनुमान जयंती है। हिन्‍दू धर्म में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के परम भक्‍त हनुमान को संकट मोचक माना गया है. हनुमान जी के जन्‍मोत्‍सव को देशभर में हनुमान जयंती के रूप में मनाया जाता है। मान्‍यता है, रामभक्त हनुमानजी का नाम लेते ही सारे संकट दूर हो जाते हैं और भक्‍त को किसी बात का भय नहीं सताता है। उनके नाम के स्मरण मात्र से आसुरी शक्तियां गायब हो जाती हैं। हनुमानजी के जन्‍मोत्‍सव को देश भर में हनुमान जयंती के रूप में मनाया जाता है। 

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मान्‍यता है, हनुमान जी ने शिव के 11वें अवतार के रूप में माता अंजना की कोख से जन्‍म लिया था। सनातन धर्म में हनुमान जयंती की विशेष मान्‍यता है। सनातन हिन्‍दू मान्‍यताओ में हनुमान जी को कलयुक्त के जागृत देव, परम बलशाली और मंगलकारी माना गया है।

जन्मोत्सव का महत्‍व
हनुमानजी का जन्मदिन एक सौर वर्ष में दो बार मनाया जाता है। कर्क राशि से दक्षिण के वासी इनका जन्मदिन चैत्र पूर्णिमा को मानते हैं, जबकि कर्क राशि से उत्तर के वासी हनुमान जी का जन्म कार्तिक कृष्णपक्ष चतुर्दशी को मानते हैं।

भक्‍तों के लिए हनुमान जयंती का विशेष महत्‍व है। संकटमोचन हनुमान को प्रसन्‍न करने के लिए भक्‍त पूरे दिन व्रत रखते हैं और हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं। मान्‍यता है, कि इस दिन पांच या 11 बार हनुमान चालीसा का पाठ करने से पवन पुत्र हनुमान प्रसन्‍न होकर भक्‍तों पर कृपा बरसाते हैं. इस मौके पर मंदिरों में विशेष पूजा-पाठ का आयोजन होता है।  घरों और मंदिरों में भजन-कीर्तन होते हैं। हनुमान जी को प्रसन्‍न करने के लिए सिंदूर चढ़ाया जाता है और सुंदर कांड का पाठ करने का भी प्रावधान है. सायंकाल आरती के बाद भक्‍तों में प्रसाद वितरित करते हुए सभी के लिए मंगल कामना की जाती है। हनुमान जन्मोत्सव में देशभर में अनेक स्थानों पर मेला भी लगता है।

हनुमान जन्मोत्सव को इनका विशेष ध्यान रखें

✔ हनुमान जी की पूजा में शुद्धता का बड़ा महत्‍व है। ऐसे में नहाने के बाद साफ-धुले कपड़े ही पहनें,
✔ मांस या मदिरा का कदापि सेवन न करें,
✔ अगर व्रत रख रहे हैं, तो नमक का सेवन न करें.
✔ हनुमान जी बाल ब्रह्मचारी थे और स्‍त्रियों के स्‍पर्श से दूर रहते थे. ऐसे में महिलाएं हनुमन जी के चरणों में दीपक प्रज्‍ज्‍वलित कर सकती हैं.
✔ पूजा करते समय महिलाएं हनुमानजी मूर्ति का स्‍पर्श न करें। न ही वस्‍त्र अर्पित करें।

पूजन विधि (हनुमान जन्मोत्सव)-
भगवान श्रीराम के परम भक्त व भगवान शिव के 11वें रुद्रावतार केसरी नंदन हनुमान के प्राकट्योत्सव के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठना चाहिए। घर की सफाई करते हुए गंगाजल या गौमूत्र के छिड़काव से घर को पवित्र करें, फिर नहाएं। स्नान करके हनुमान मंदिर में जाकर उनका पूजन करें। यह पूजा आप घर पर भी कर सकते हैं।

पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके लाल आसान पर बैठें। लाल धोती, ऊपर कोई वस्त्र चादर, दुपट्टा आदि डालें। अपने सामने छोटी चौकी पर लाल वस्त्र बिछा दें। तांबे की प्लेट पर लाल पुष्पों का आसन हनुमानजी की मूर्ति स्थापित करें। मूर्ति पर सिंदूर से टीका कर लाल पुष्प अर्पित करें, मूर्ति पर सिंदूर लगाने के पश्चात धूप-दीप, अक्षत, पुष्प, नैवेद्य आदि से विधि षोडशोपचार-पूजन ॐ हनुमते नमः मंत्र से करें। नैवेद्य में गुड़, भीगा चना आदि रखें। सरसों या तिल के तेल का दीपक एवं धूप जला दें।

पूजा का क्रम
➯ हनुमान जयंती के दिन प्रातः उठकर सीता-राम और हनुमानजी का स्मरण करें,
➯ स्‍नान करने के बाद ध्‍यान करें और व्रत का संकल्‍प लें,
➯ इसके बाद स्‍वच्‍छ वस्‍त्र धारण कर पूर्व दिशा में हनुमान जी की प्रतिमा को स्‍थापित करें। मान्‍यता है, हनुमानजी मूर्ति खड़ी अवस्‍था में होनी चाहिए,
➯ पूजा करते समय इस मंत्र का जाप करें- 'ॐ श्री हनुमंते नम:'
➯ इस दिन हनुमान जी को सिंदूर चढ़ाएं,
➯ हनुमान जी को पान का बीड़ा चढ़ाएं,
➯ मंगल कामना करते हुए इमरती का भोग लगाना भी शुभ माना जाता है.
➯ हनुमान जयंती के दिन श्रीरामचरित मानस के सुंदर कांड और हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए.
➯ आरती के बाद गुड़-चने का प्रसाद बांटें।

अब यथा शक्ति अनुसार मंत्रों का जाप करें। इस दिन जीवन मे अभावों, कष्टों के निवारणार्थ हनुमानजी के निम्न द्वादश नामों का स्मरण 51 बार करें- हनुमान, अंजनीसुत, वायुपुत्र, महाबल, रामेष्ट, फाल्गुन सखा, पिंगलाक्ष, अमित विक्रम, उदधिक्रमण, सीताशोक विनाशन, लक्ष्मण प्राण दाता और दशग्रीव दर्पहा

इसके पश्चात हनुमानजी को फूल, मिठाई अर्पित करने के साथ जनेऊ भी अर्पित करे, चढ़ाएं। पूजा करते समय अधिकाधिक लाल रंग की वस्तुओं का उपयोग करें। पूजा में जल और पंचामृत से देवी देवताओं को स्नान कराएं। फिर अबीर, गुलाल, चंदन, अक्षत, मौली, फूल, धूप-दीप, वस्त्र, फल, पान और अन्य चीजें चढ़ाएं। इसके बाद सुंदरकांड या हनुमान चालीसा का पाठ करें और आरती के बाद प्रसाद बांटें।

हनुमानजी के स्वरुप... देखें-

श्रीराम की पूजा
(हनुमान जनमोत्सव के दिन)-
पवन पुत्र हनुमान जी की पूजा व उपासना में सर्वाधिक महत्वपूर्ण है मूल मंत्र हैं 'राम'। ऐसे में हनुमान जी का जप-तप, पूजा-पाठ, ध्यान-धारणा, समाधि, मनन-चिंतन, पठन-पाठन कुछ भी अगर सीधे हनुमानजी के नाम से किया जाए, तो वे कभी स्वीकार नहीं करते। स्वयं हनुमान जी कहते हैं- मैं नहीं हूं, मेरे रोम-रोम में श्रीराम हैं। अत: हनुमानजी की उपासना करने वालों को चाहिए कि लक्ष्य भले ही हनुमान जी हों, सर्वप्रथम राम का मंत्र हो, चाहे राम का नाम हो। साधक-सिद्धों को इसलिए भी राम जी का भजन, पूजा-पाठ जरूरी है, इसलिए पहले राम का नाम लें फिर हनुमान जी की पूजा करें।


हनुमान जी की आरती

आरती कीजै हनुमान लला की,
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।
जाके बल से गिरिवर कांपे,
रोग दोष जाके निकट न झांके।
अंजनिपुत्र महा बलदायी,
संतन के प्रभु सदा सहाई।
दे बीरा रघुनाथ पठाये,
लंका जारि सिया सुधि लाये।
लंका-सो कोट समुद्र-सी खाई,
जात पवनसुत बार न लाई॥
लंका जारि असुर संहारे,
सियारामजी के काज संवारे॥
लक्ष्मण मूर्छित परे सकारे,
आनि संजीवन प्रान उबारे॥
पैठि पताल तोरि जम-कारे,
अहिरावन की भुजा उखारे॥
बाएं भुजा असुरदल मारे,
दहिने भुजा सन्तजन तारे॥
सुर नर मुनि आरती उतारे,
जय जय जय हनुमान उचारे॥
कंचन थार कपूर लौ छाई,
आरति करत अंजना माई॥
जो हनुमानजी की आरति गावै,
बसि बैकुण्ठ परम पद पावै॥


हनुमान जी के प्रभावी मंत्र
ॐ रूवीर्य समुद्भवाय नम:।
ॐ शान्ताय नम:।
ॐ तेजसे नम:।
ॐ प्रसन्नात्मने नम:।
ॐ शूराय नम:।

*संगमलाल त्रिपाठी "आजाद" 
निदेशक- संवाद मीडिया, नई दिल्ली 
(संपर्क- 9212093511) 

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